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एडिटर्स गिल्ड को नए आपराधिक कानूनों का पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल की आशंका

डिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने नए आपराधिक कानूनों को पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई है. संगठन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पिछले महीने लागू किए गए कानूनों की समीक्षा करने की मांग की है.

गिल्ड ने अपने पत्र में लिखा है, बीते वर्षों और अलग-अलग सरकारों के दौरान आपराधिक कानूनों के कई प्रावधान का उन पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए खुले आम उपयोग किया है जिनकी रिपोर्टिंग में सरकार की आलोचना होती है. पत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 153बी, 295ए, 298, 502 और 505 का पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया है.

संगठन ने अपने पत्र में किसी पत्रकार के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने से पहले अतिरिक्त स्तर की समीक्षा का सुझाव दिया है. गिल्ड ने कहा कि, हमें लगता है कि प्रेस/मीडियाकर्मियों के कामकाज के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियोजन को विनियमित करने के लिए गहन परामर्श और कुछ दिशानिर्देश तैयार करने की आवश्यकता है.

गिल्ड ने कहा कि किसी पत्रकार के खिलाफ शिकायत की समीक्षा एक उच्चस्तरीय पुलिस अदिकारी द्वारा की जानी चाहिए और इसे भारतीय प्रेस परिषद के ध्यान में लाया जा सकता है. नए आपराधिक कानूनों से कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की शक्तियां बढ़ी हैं, जो अधिक चिंता का विषय हैं.

भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, गिल्ड ने कहा है, “अब भारतीय दंड संहिता, 1860 एवं दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह क्रमश: भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की अधिसूचना जारी होने के बाद हमें लगता है कि चिंताएं और बढ़ गई हैं.”

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