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न्यूयॉर्क टाइम्स ने RSS के बारे में जो पब्लिश किया उसे छापने की हिम्मत भारत के किसी अखबार में नहीं है!

नई दिल्ली | दुनिया के प्रतिष्ठित अख़बार The New York Times ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक विस्तृत और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कभी परछाइयों में काम करने वाला हिंदू राष्ट्रवादी संगठन आरएसएस अब भारत की सत्ता और संस्थागत ढांचे के केंद्र में प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट “From Shadows to Power: How Hindu Right Reshaped India” में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्थान के साथ आरएसएस का प्रभाव सरकार, राजनीति, शिक्षा, पुलिस, न्यायपालिका और सिविल सोसाइटी तक गहराई से फैल चुका है। अख़बार के अनुसार, आरएसएस ने दशकों की रणनीति के तहत खुद को एक कैडर आधारित संगठन के रूप में मजबूत किया और अब वह भारत के सबसे ताकतवर वैचारिक नेटवर्क में बदल चुका है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरएसएस ने युवा वर्ग को संगठित कर हिंदू राष्ट्रवाद के विचार को जमीनी स्तर तक पहुंचाया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी मशीनरी को वैचारिक ऊर्जा दी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, आरएसएस सिर्फ एक सांस्कृतिक संगठन नहीं रहा, बल्कि वह नीतिगत फैसलों और सत्ता संरचना को प्रभावित करने वाली ताकत बन चुका है।

अख़बार ने यह भी लिखा है कि जहां समर्थक आरएसएस को राष्ट्रनिर्माण से जुड़ा संगठन मानते हैं, वहीं आलोचक उस पर अल्पसंख्यकों को हाशिए पर धकेलने और भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को कमजोर करने के आरोप लगाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार के कार्यकाल में आरएसएस से जुड़े संगठनों की सार्वजनिक उपस्थिति और राजनीतिक स्वीकार्यता पहले से कहीं अधिक बढ़ी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की राजनीति और आरएसएस की भूमिका को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रही है, जिसमें संगठन के बढ़ते प्रभाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उसके असर को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।


वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया सलाहकार पीयूष बबेले इस मामले में लिखते हैं-

न्यूयॉर्क टाइम्स ने RSS के बारे में जो आज छापा है, पंडित नेहरू उसकी भविष्यवाणी 75 साल पहले कर गए थे…

हमारे पास इस बात के ढेरों सबूत हैं, जिससे यह पता चलता है कि आरएसएस अपने स्वभाव से निजी सेनाओं के जैसा संगठन है, जो नीति और संगठन के मामले में साफ़ तौर पर नाज़ियों का अनुसरण कर रहा है….

मुझे जर्मनी में शुरू हुए नाज़ी आंदोलन की कुछ जानकारी है. इसने अपने ऊपरी दिखावे और सख्त अनुशासन से लोगों को आकर्षित किया. इसमें बड़ी संख्या में लोअर मिडिल क्लास के नौजवान पुरुष और महिलाएं शामिल थे. यह लोग सामान्य तौर पर बहुत ज़्यादा योग्य नहीं थे और न ही इनके लिए जीवन में बहुत सारी संभावनाएं थीं.

इसलिए ये लोग नाज़ी पार्टी की ओर मुड़ गए, क्योंकि इसकी नीति और प्रोग्राम बहुत सरल थे. वह नेगेटिव थे और उनमें दिमाग़ के सक्रिय इस्तेमाल की कोई ज़रूरत नहीं थी.

नाज़ी पार्टी ने जर्मनी को तबाह कर दिया और मुझे बिल्कुल संदेह नहीं है कि अगर यह प्रवृत्तियां इसी तरह भारत में बढ़ती रहीं, तो वह भी भारत को बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचाएंगी. इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत फिर भी रहेगा, लेकिन उसे बहुत गहरा घाव लग जाएगा और इससे उबरने में लंबा वक़्त लगेगा.’


वरिष्ठ पत्रकार राजीव तिवारी बाबा लिखते हैं-

RSS की राजनीति, सोच, बहुसंख्यक वर्चस्व की लालसा की कहानी ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के पहले पन्ने पर छपी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और हिंदू राष्ट्र के सपनों की घोषणा के लिए 2025 निर्णायक रहा। विकास का ‘सपना’ हिंदुओं को ‘जगाने’ के लिए महीन कारीगरी के साथ बुना गया था।

इसमें RSS के ‘मोदी-समय’ में शक्तिशाली, ‘वैधानिक’ बनने की पटकथा पर विस्तृत टिप्पणी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त 2025 को दिए गए भाषण की संदर्भ सहित व्याख्या है।

मैं बार-बार से दोहराता हूँ; ‘RSS बीजेपी की आत्मा है।शरीर बदलता रहता है। दोनों एक हैं।’ संघ प्रमुख मोहन भागवत आए दिन इसका खंडन करते हैं । आप खंडन सुन लेते हैं, मेरी बात नहीं सुनते ! क्योंकि मुझे उस ‘गति’ से बोलना नहीं आता। मेरे पास गति नहीं है, हाँ RSS के स्वेटर की बुनाई पूरी जानता हूँ।

भारत के किसी अख़बार के लिए यह ख़बर छापना संभव नहीं। संभव के लिए साहस ज़रूरी है। भारतीय पत्रकारिता ने साहस रज़ाई के साथ तह करके रख दिया है। इसलिए, आपको इसे पढ़ना चाहिए। यह अंग्रेज़ी में होकर भी सरल है। भारत के अख़बारों की अंग्रेज़ी इसके मुक़ाबले कहीं कठिन है।

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