नोएडा में हालिया श्रमिक बवाल के बाद अब इसकी मीडिया कवरेज को लेकर भी बहस तेज हो गई है। एक तरफ Hindustan Times में प्रकाशित रिपोर्ट में मजदूरी और श्रमिक असंतोष के कारणों को विस्तार से सामने लाया गया है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य मीडिया संस्थानों की कवरेज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स में पत्रकार प्रांशु मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन संशोधन लंबे समय से लंबित था। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी करीब एक दशक से ठीक से नहीं हुई, जिससे श्रमिकों में असंतोष लगातार बढ़ता रहा। ट्रेड यूनियनों का भी कहना है कि घोषित वेतन वृद्धि वास्तविक जरूरतों के मुकाबले काफी कम है और महंगाई के हिसाब से मजदूरी अपर्याप्त है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई श्रमिक 10-12 घंटे काम करने के बावजूद 10 से 15 हजार रुपये के बीच ही कमा पा रहे हैं, जो वर्तमान जीवन-यापन की लागत के मुकाबले बेहद कम है। यही वजह है कि वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ और बाद में कई जगहों पर यह हिंसक भी हो गया।
इधर, कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि Dainik Jagran समेत कुछ मीडिया संस्थानों ने इस मुद्दे की जमीनी वजहों की बजाय प्रशासनिक और अन्य एंगल्स पर ज्यादा फोकस किया, जिससे मूल श्रमिक समस्याएं पीछे छूटती नजर आईं।
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े श्रमिक आंदोलन को समझने के लिए उसके सामाजिक-आर्थिक कारणों को सामने लाना जरूरी होता है। नोएडा का यह मामला भी केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मजदूरी, महंगाई और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।
हैरान करने वाला ख़ुलासा।
इस प्रदेश में 2014 के बाद से कर्मचारियों की मज़दूरी का कोई रिवीज़न ही नहीं हुआ।
आख़िरी रिवीज़न अखिलेश यादव की सरकार में हुआ था।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने कलई खोल दी। नोएडा मामले में योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस भयावह सच्चाई को छिपाने की ख़ातिर, ‘ग्रोथ स्टोरी बनाम बाहरी तत्व’ के नाम से हेडलाइन मैनेजमेंट कर रही थी, उसे सिरे से नंगा कर दिया।
पैर के मोजे से लेकर सर की टोपी तक, सब उतार दिया।
हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक प्रांशु मिश्रा ने ख़ुद ये बाइलाइन स्टोरी लिखी है। उन्हें बहुत साधुवाद।
कर्मचारियों के सहज आक्रोश को “बाहरी तत्वों ने बिगाड़ा माहौल” लिखने वाले दैनिक जागरण को चाहिए, कि वो प्रांशु मिश्रा से पत्रकारिता का ट्यूशन ले ले।
प्रांशु मिश्रा इस ट्यूशन की कोई फ़ीस चार्ज नहीं करेंगे, ये गारंटी उनसे बात किए बग़ैर ही मैं दे रहा हूँ!! -अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार




