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उत्तर प्रदेश

नोएडा बवाल (पार्ट 2): मदरसन जैसी कंपनी में कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा अक्सर टीवी अखबारों में जगह क्यों नहीं पाता?

नोएडा: उत्तर प्रदेश के Noida में सोमवार को उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब मदरसन ग्रुप के कर्मचारियों का सैलरी बढ़ाने को लेकर चल रहा प्रदर्शन हिंसक हो गया। तीन दिनों से जारी विरोध के बाद गुस्साए कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर जमकर हंगामा किया।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने पथराव किया, कई गाड़ियों और बसों में आग लगा दी, यहां तक कि पुलिस की एक गाड़ी को पलट दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा।

बताया जा रहा है कि कर्मचारी लंबे समय से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। आरोप है कि 10-12 घंटे की शिफ्ट के बावजूद उन्हें महज 9 से 13 हजार रुपये तक की सैलरी दी जा रही है, जिससे नाराजगी लगातार बढ़ रही थी।

इस घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और श्रमिक हालात पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर उस वक्त, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath दूसरे राज्यों में कानून-व्यवस्था को लेकर बयान दे रहे हैं।

फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति को काबू में बताया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की बुनियादी मांगों को समय रहते सुना जा रहा है या उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।


नोएडा में कर्मचारियों का यह आक्रोश कोई अचानक फूटा गुस्सा नहीं है, बल्कि लंबे समय से झेली जा रही उपेक्षा और अन्याय का परिणाम है। जब लोगों से 10-10 घंटे काम करवाकर मात्र 9 से 13 हजार रुपये दिए जाते हैं, तो यह सिर्फ कम वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और गरिमा के साथ समझौता है।
दुख की बात यह है कि ऐसे गंभीर श्रम मुद्दे अक्सर मीडिया की प्राथमिकता नहीं बनते। दिन-रात हिंदू-मुस्लिम बहसों में उलझा मीडिया उन असली समस्याओं से मुंह मोड़ लेता है, जो आम लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। -नरेंद्र नाथ मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार


राजेश साहू-

देश में न्यूनतम मजदूरी 18 हजार के ऊपर होनी ही चाहिए। कई कंपनियों में तो है, लेकिन जहां ठेकेदार वाला सिस्टम है वहां ये लोग खेल कर जाते हैं। दूर-दूर से मजदूर लाते हैं और उन्हें जानवर समझ लेते हैं। उनके आत्मसम्मान की कोई फिक्र ही नहीं होती।

सरकार इस चीज को बहुत आसानी से मैनेज कर सकती है, लेकिन तमाम ऐसे लोग जो सरकार में हैं, कंपनियां भी उनकी है। कई कंपनियां उनके मित्रों की है। बस इसीलिए मजदूरों की सैलरी का ख्याल ही नहीं आता।

10-12 हजार रुपए में किसी व्यक्ति का घर चल ही नहीं सकता। जो चला रहे हैं, उनके दिमाग में दिनभर सिर्फ यह चलता है कि कैसे 2 रुपए कम खर्च हो। न ढंग का खा पा रहे हैं, न इलाज करवा पा रहे और न बच्चों को पढ़ा पा रहे।

नोएडा में आज मजदूर सैलरी बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

मूल खबर…

सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर नोएडा में मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन, पथराव और आगजनी से हालात बिगड़े, देखें वीडियो

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