दो अफसरों के बीच ऐसा पत्राचार सदियों में एक-दो बार ही होता है :)

दोनो पत्रों के कथ्य और आशय प्रशासनिक द्वंदों के बीच भी सहज व्यंग्यों व विनोदप्रिय उक्तियों के बेहद सटीक प्रयोग से पाठक को मुस्कुराने को बाध्य कर देते हैं…

जनता का बहुत दिनों बाद ऐसे पत्राचार से साबका हुआ है… ऐसा पत्राचार बिहार के ज्ञानवान ही कर सकते हैं…

जनता की समस्याएं हल हों या न हों, पर इन पत्रों ने थोड़े पल के लिए मुस्कराने को बाध्य जरूर कर दिया है…

इसे ही सरकार का फल समझें…

मुझे किसी ने प्रेषित किया था सोचा कि इसे भड़ास पर भी साझा करने के लिए भेजा जाए…

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