कोलकाता। सहारा घोटाले के आरोपी और संस्थान में नंबर दो की पोजीशन पर रह चुके ओपी श्रीवास्तव पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद जहां वे जमानत की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर जन आंदोलन मोर्चा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने घोषणा की है कि 10 दिसंबर को कोलकाता की ईडी कोर्ट में बड़ी संख्या में निवेशक और कार्यकर्ता पहुंचकर श्रीवास्तव की जमानत का विरोध दर्ज कराएंगे।
जन आंदोलन मोर्चा की इस घोषणा के कुछ घंटों बाद ही ओपी श्रीवास्तव की ओर से कोर्ट में एक आवेदन दाखिल किया गया, जिसमें दावा किया गया है कि वे कैंसर से पीड़ित हैं, बेहद कमजोर हैं और कोर्ट में पेश होने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उन्हें अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने की अनुमति दी जाए।
कोर्ट ने चाल समझी, मेडिकल रिपोर्ट मांगी
कोलकाता की सिटी सेशन कोर्ट ने श्रीवास्तव की इस अर्जी पर संदेह जताते हुए आदेश दिया कि शहर के वरिष्ठ डॉक्टरों की एक टीम उनका स्वास्थ्य परीक्षण करेगी और 10 दिसंबर की सुनवाई से पहले मेडिकल रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर श्रीवास्तव वास्तव में बीमार हैं तो मानवीय आधार पर इलाज सुनिश्चित कराया जाएगा, लेकिन यदि बीमारी का दावा कोर्ट को गुमराह करने के उद्देश्य से किया गया है तो इसे भी रिकॉर्ड में लिया जाएगा।
जन आंदोलन मोर्चा का आरोप

संयुक्त ऑल इंडिया जन आंदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय देव शुक्ल ने श्रीवास्तव के कैंसर के दावे को “जनता के आक्रोश से बचने की कोशिश” बताया। उनका कहना है:
“जन आंदोलन मोर्चा ने जैसे ही कोलकाता ईडी कोर्ट पहुंचकर उनकी जमानत का विरोध करने की घोषणा की, ओपी श्रीवास्तव जनता से सामना करने से डर गए। यदि कोर्ट सजा नहीं देगा तो ईश्वर उनके कर्मों का दंड अवश्य देगा। कैंसर होना ईश्वर का न्याय भी हो सकता है।”
हजारों की संख्या में पहुंचेंगे निवेशक
मोर्चा का दावा है कि देश भर से हजारों निवेशक और कार्यकर्ता 10 दिसंबर को कोलकाता पहुंच रहे हैं। संगठन कोर्ट के बाहर भी प्रदर्शन करेगा और कानूनी रूप से कोर्ट के भीतर भी जमानत का विरोध दर्ज कराएगा।
इस बीच, सहारा के करोड़ों रुपये फंसे निवेशकों की निगाहें भी इस सुनवाई पर टिकी हैं।
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