कल पूरे दिन एनडीटीवी की मैनेजिंग एडीटर पद्मजा जोशी इंटरनेट पर वायरल रहीं। अपने कार्यक्रम में जेफ्री एपस्टाइन के बारे में अपनी टिप्पणी पर सोशल मीडिया में मचे बवाल और उनकी, उनके संस्थान की तीखी आलोचना के बाद अब खेद प्रकट किया है। लेकिन लोग कह रहे हैं कि पद्मजा ने रुबिका, चित्रा, अंजना, स्मिता और चौधरी गुल्लू इत्यादि को भी पीछे छोड़ दिया है- नीचे पढ़ें…
भारत में ‘नौकरी’ करने वालों की अब यही पत्रकारिता है! NDTV ‘ख़रीदने’ के लक्ष्य पूरे हो रहे हैं। Epstein को भारत का महान मित्र घोषित करते हुए उसके नाम पर किसी भी दिन अवार्ड समारोह शुरू किए जा सकते हैं। -दयाशंकर मिश्रा, पत्रकार
आवेश तिवारी-
जरूरी नहीं कि पुरुष ही उल्लू का पट्ठा हो। यह पद्मजा जोशी हैं टाइम्स नाऊ की एंकर। एकदम अपने पिता स्वर्गीय अरुण जोशी पर गई हैं। इनके पिताजी भी फुल संघी थे। वो सारी नैतिकताएं ताक पर रखकर जर्नलिज्म करते थे यह भी कर रही हैं बेशर्मी के साथ जैफरी Epstein को क्लीन चिट दे रही हैं। शर्म तो इनको आती नहीं।
तुम तो अंजना, रुबिका, चित्रा सबको फेल कर गई पद्मजा Padmaja Joshi.. दलाली और गदहपचीसी तब तक ठीक होती है जब तक उसके असर से किसी और का सम्मान चोटिल न हो। लेकिन तुम जिस सुपर क्रिमिनल को पावर ब्रोकर कह रही थी, वह 9 से 12 साल की मासूम, बेबस लड़कियों का सौदागर, सीरियल रेपिस्ट , नंबरी फ्राड और ब्लैकमेलर था।
न जाने मुझे क्या हो गया है कि जब तुम्हारा वीडियो देख रहा हूं जैफरी एपस्टिन का कुरूप चेहरा नजर आ रहा है। यह कौन सी पत्रकारिता तुम कर रही हो? वैसे मुझे पता है कि तुम तो केवल ग्रेजुएट हो अच्छे नाक नक्श की वजह से एंकरिंग का काम मिल गया और गजब यह कि तुमने खुद को ब्रह्मा समझ लिया।
गलतफहमी में मत रहो। निर्भया के साथ घटी घटना पर इसी हिंदुस्तान की प्रतिक्रिया क्या थी वह पूरे देश ने देखा, हाथरस पर क्या थी वह देश ने देखा। वह जो पुरजोर विरोध था तुम्हारे स्वामी और उसके भक्तों ने नहीं किया उस जनता ने किया था जो तुम्हारे इस चेहरे को देखकर थू थू कर रही है। कहीं से चुल्लू भर पानी ढूंढो,जल्दी ढूंढों और दुनिया भर की लड़कियों से माफी मांगो। तुम अब मीडिया के पतन का जीता जागता उदाहरण हो।
NDTV दुनिया का इकलौता मीडिया चैनल बन गया है जिसने जेफ्री एपस्टीन के समर्थन में पूरा का पूरा कार्यक्रम चलाया। इस ‘शानदार उपलब्धि’ के लिए पद्मजा जोशी और gautam adani को बधाई। -रोशन राय, पत्रकार
पवन खेड़ा-
यह एनडीटीवी की पद्मजा जोशी है।
वह एक पेडोफाइल, एक सीरियल बलात्कारी, एक सेक्स ट्रैफिकर और एक हत्यारे का बचाव करती है, जैसे वह मोदी का बचाव करती है।
उसे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है।
वह कभी पत्रकार हुआ करती थी। अब वह एपस्टीन की प्रवक्ता है।
डॉ ओम सुधा-
इसने पत्रकारिता के तमाम कीर्तिमान तोड़ डाले। निजी ज़िंदगी में कोई हत्या, बलात्कार करे और पेशेवर ज़िन्दगी में दलाली करे तो वह जायज़ है।
अब सरकारी हड्डी चबाकर गोदी मीडिया के कुकुर हरदीप पुरी , अनिल अंबानी और ना जाने किसके कुकर्मों को जस्टिफाई कर रहे हैं।
दलाली बहुत कुत्ती चीज़ है। नाम है पद्मजा ‘जोशी। “
सनातन काल से मनुवादी हमेशा सत्ता के कुकर्मों को ऐसे ही जस्टिफाई करते आ रहे हैं। यही इनका हिंदुत्व है।
अपनी सफाई में पद्मजा जोशी ने लिखा है-
मैं शुरुआत में बिल्कुल साफ़ तौर पर कहना चाहती हूँ: जेफ़्री एपस्टीन एक पेडोफाइल था, बच्चों का बलात्कारी था और सबसे घिनौने किस्म का यौन अपराधी था। मैं यह पहले भी कह चुकी हूँ और आज भी कह रही हूँ। उसके पीड़ितों को उनके साथ हुई यातनाओं के लिए न्याय की पूरी सख़्ती मिलनी चाहिए।
मेरे शो के कुछ क्लिप्स को चुनिंदा तरीके से एडिट करके यह दिखाने की कोशिश की गई कि मैं कुछ और कहना चाह रही थी, जिससे लोगों में नाराज़गी और पीड़ा हुई। यह पूरी तरह गलत है और टीवी डिबेट के पूरे संदर्भ में मैं ऐसा कुछ भी नहीं कह रही थी। लेकिन मैं समझ सकती हूँ कि उन क्लिप्स से बहुत से लोग आहत हुए हैं। इसके लिए किसी भी तरह की गलतफहमी पर मुझे सच में खेद है।
एक महिला के रूप में, जो यौन अपराधों पर बिल्कुल स्पष्ट और कठोर राय रखती है, मैं पूरी मजबूती से पीड़ितों के साथ खड़ी हूँ।

एनडीटीवी के ही पूर्व पत्रकार शरद शर्मा ने पद्मजा का ट्वीट रिट्वीट कर जवाब दिया है-
आप अपनी सोच और शब्दों के लिए Regret भी कर रही हैं और क्लिप को एडिटेड भी बता रही हैं। अगर क्लिप एडिट एडिट है तो Regret कैसा?
और Regret है तो फिर क्लिप एडिट कैसा? इसका मतलब आपकी सोच और शब्द तो वही हैं लेकिन बस ट्रोलिंग से परेशान होकर एक बीच का रास्ता निकालने के तहत ये पोस्ट कर दिया है।


