
भारत ने पहलगाम मामले की न्यूट्रल जांच कराने की पाकिस्तान की मांग को ठुकरा दिया है और पहलगाम हिंसा से कई दिन पहले पर्यटकों पर हमले की खुफिया सूचना के बावजूद किसी पर्यटक को सरकार ने बचाया ऐसी खबर नहीं है।
संजय कुमार सिंह
आज इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार पहलगाम हमले की पूर्व खुफिया सूचना थी, इसे छोड़कर सरकार जो कर रही है उसका भरपूर प्रचार है। कोई यह नहीं बता रहा है कि खुफिया सूचना उपलब्ध होने के बावजूद की वारदात कैसे हो गई सुरक्षा व्यवस्था कहां करनी है और कहां नहीं, इसका फैसला किस आधार पर हुआ, किसने किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर यह है कि भारत ने पहलगाम मामले की न्यूट्रल जांच कराने की पाकिस्तान की मांग को ठुकरा दिया है। बेशक सरकार के अपने तर्क हैं लेकिन दोनों खबरें मिलकर इस मामले को बहुत संदिग्ध बनाती हैं। इसका कारण यही दो खबरें नहीं हैं। दूसरी ओर, इसके बावजूद मीडिया का बड़ा हिस्सा सरकार का प्रचार कर रहा है और सच हो सकने वाली खबरों की उसकी जानकारी पूरी नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने यह खबर सर्वोच्च अधिकारी के हवाले से छापी है। खबर के अनुसार इस सूचना के मद्देनजर डल लेक और जबरवान रेंज में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। तथ्य यह है कि जहां हिन्सा हुई वहां हमलावर नाम पूछकर हत्या करते रहे, पैंट उतरवाकर धर्म जांचते रहे पर सुरक्षा बलों को पता भी नहीं चला। सुरक्षा में एक गोली नहीं चली। सुरक्षा में इस चूक की खबर देने और इसके मद्देनजर रिपोर्टिंग और फॉलोअप करने की बजाय अखबार यह बताने में लगे हैं कि सरकार क्या कर रही है या करेगी। आज भी इसी का प्रचार है। इस बीच 13 दिन गुजर चुके हैं। प्रधानमंत्री खुश हैं और बता भी रहे हैं कि केरल में अदाणी के बंदरगाह के उद्घाटन के समय मंच पर उनके साथ मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर थे तो विपक्षी गठबंधन की नीन्द हराम हो जायेगी। इसमें पाकिस्तान का नीन्द हराम करने, पानी के लिए तरसाने की घोषणाओं का वही हुआ जो पुलवामा के बाद की घोषणाओं का हुआ था।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री, सरकार, भाजपा का इको सिस्टम और मीडिया यह प्रचार करने में लगा है कि पाकिस्तान को बर्बाद कर देंगे। फिलहाल तो ऐसा कुछ होना नहीं है और हो जायेगा तो खबर छपेगी ही उसके लिए आज की खबर नहीं छप रही है कि खुफिया जानकारी होने के बावजूद पर्यटकों को तो नहीं ही बचाया जा सका उन्हें हिन्दू मुसलमान करने की भी छूट दी गई जो आम तौर पर कौन करता है, सबको पता है। इसके साथ यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि भारत ने पहलगाम मामले की न्यूट्रल जांच कराने की पाकिस्तान की मांग को ठुकरा दिया है। सरकार जो एकतरफा कार्रवाई कर रही है उसमें व्यापार बंद करने, जहाज रोकने आदि की खबरें हैं और इनके साथ तमिलनाडु के 24 मछुआरों के साथ मार-पीट की खबर है। ये घटनाएं समुद्र में पांच अलग जगह हुई हैं और संभव है इसका संबद्ध भारत सरकार की कार्रवाई से हो। अगर ऐसा है तो भारत को अपनी कार्रवाई पर विचार करना होगा या मछुआरों की सुरक्षा के उपाय करने होंगे। अखबारों का काम है कि इस बारे में बतायें और साफ लिखें कि इसका संबंध सरकारी कार्रवाई से है या नहीं और है तो कैसे, नहीं है तो क्यों?
कल मैंने यहां लिखा था, युद्ध से किसी का फायदा नहीं है और नुकसान उसका नहीं होता है जिसके कारण या जिसके लिये युद्ध होता है। जहां तक भारत पाकिस्तान का मामला है, हम उसे युद्ध में हरा चुके हैं, बांग्लादेश आजाद करा चुके हैं और संभव है वह इसका बदला लेना चाहता हो। मुझे नहीं लगता कि इसका जवाब युद्ध और निर्दोष नागरिकों को मौत के मुंह में ढकेलना है। संभव है, चुनावी राजनीति में लगी भाजपा और निस्वार्थ समाज सेवा करने वाले परिवार को यह सब समझ नहीं आता हो या इसमें उनका स्वार्थ हो। पर मीडिया कैसे ऐसी सरकार की इस रणनीति का समर्थन कर सकता है? तथ्य यह है कि आज की खबरें भी पाकिस्तान को सबक सिखाने वाली हैं पर उससे ज्यादा जरूरी है कि अपनी सुरक्षा मजबूत की जाये। उसपर क्या हो रहा है इस बारे में कोई सूचना नहीं है।
सूचना के बावजूद पर्यटकों को बचाया नहीं जा सका यह अलग गंभीर खबर है और इसमें यह जांच का विषय है कि आतंकी हमले में (अगर वह यही था) हमलावरों ने नाम पूछकर और धर्म जांच कर क्यों मारा। ऐसा पहले कभी कहीं नहीं हुआ है और इसकी जरूरत भी नहीं थी। फिर भी हुआ तो खास बात यही थी और जांच की शुरुआत इस से होनी चाहिये थी कि नाम क्यों पूछा गया और उन्हें इसके लिये समय मिलना किसी साजिश के कारण तो नहीं था। इस सरकार में यह दिलचस्प है कि रेल दुर्घटना में तो साजिश तलाशने के लिए सीबीआई से जांच कराई जाती है और जहां साजिश लगती है उसकी चर्चा ही नहीं होती है। 13 दिन से अखबार यही बता रहे हैं कि सरकार क्या करेगी या किया है। उससे पाकिस्तान को क्या परेशानी हुई यहां जानने के लिए हमारे पास सरकारी साधन ही हैं चाहें हमारे हों या पाकिस्तान के क्योंकि हमारी सरकार ने पाकिस्तानी यू ट्यूब चैनल बंद करा दिये हैं। अगर हमारी सरकार पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है तो पाकिस्तानी यू ट्यूबर ऐसा क्या दिखायेंगे कि उनपर प्रतिबंध लगाना पड़ा। दूसरी ओर हमारे अखबार बता नहीं रहे हैं कि आतंकी यहां पहुंच कैसे पाये और सुफिया सूचना थी तो बचाव के उपाय क्यों नहीं किये गये सरकार कुछ कह नहीं रही है और अखबार प्रचार किये जा रहे हैं।
आइये, आज के अखबारों की लीड देख लें। द टेलीग्राफ में लीड पहलगाम हमला और उसपर सरकार की कार्रवाई से संबंधित नहीं है। उसे छोड़कर इंडियन एक्सप्रेस से शुरुआत करता हूं। शीर्षक है, पाकिस्तान का स्क्रू कसा गया : पानी के प्रवाह पर बगलीहर के जरिये रोक; पानी के जहाज, नौकाओं के साथ व्यापार के खिलाफ कार्रवाई। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, “व्यापार, बंदरगाह, डाक : भारत ने पाकिस्तान को पूरी तरह घेर कर अलग किया”। दि एशियन एज का शीर्षक है, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लेख किया, पाकिस्तान से आयात पर प्रतिबंध लगाया। दि हिन्दू का भी यही शीर्षक है, “भारत ने पाकिस्तान से व्यापार, डाक, बंदरगाह के संपर्क काटे”। नवोदय टाइम्स में दो कॉलम का शीर्षक वही है, पाकिस्तान से व्यापार, जहाज, डाक सब बंद। अमर उजाला में यही शीर्षक सात कॉलम में है, पाकिस्तान से किसी भी तरह के आयात पर रोक। कहने की जरूरत नहीं है कि पाकिस्तान की जो हालत हुई होगा उसे कोई भी देखना चाहेगा। इस रोक का मतलब तभी है जब असर देखने को मिले। अगर उसपर कोई असर नहीं हो रहा है तो हमें कुछ और सख्त करना पड़ेगा और असर हो भी रहा हो तो क्या ऐसा होगा कि आतकी हमले रुक जायें। अगर हमले रुकने की गारंटी नहीं है, पाकिस्तान को परेशानी दिखाई नहीं दे रही है तो अपने अखबार में आप कुछ भी छपवा सकते हैं और सूत्रों के हवाले से बहुत कुछ छपता भी रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड ऐसी ही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज लीड और सेकेंड लीड दोनों सरकार हैं और दोनों दिलचस्प। सेकेंड लीड का शीर्षक है, आतंकियों के खिलाफ मजबूत और निर्णायक कार्रवाई करेंगे मोदी। याद दिलाना जरूरी है कि नोटबंदी को भी ऐसी ही कार्रवाई कहा गया था और पुलवामा के बाद यह सब क्यों नहीं हुआ। सवाल उनसे पूछे नहीं जायेंगे, जवाब उन्हें देना नहीं है तो जो बोलें वह लीड सेकेंड लीड बनकर छपता रहे। यही हो रहा है और इसमें ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में लंबी छुट्टी रदद कर दी गई है – जैसी खबर लीड बन रही है। और यह खबर सूत्रों के हवाले से है। 12 ऑर्डिनेंस फैकट्री के समूह म्युनिशंस इंडिया लिमिटेड सभी प्लांट में कर्मचारियों की लंबी छुट्टी रद्द कर दी है। खबर के अनुसार इन कारखानों में अगले दो महीने तक दो दिन से ज्यादा छुट्टी नहीं मिलेगी। खबर के इंट्रो में कहा गया है कि अधिकारियों ने इसका संबंध पहलगाम से होने से इनकार किया जो भी हो, शीर्षक का और इस समय इसका छपना सरकार की ‘तैयारी’ ही बता रहा है और खबर ही कह रही है कि वह सूत्रों के हवाले से है और उसका पहलगाम से संबंध नहीं है। अगर ऐसा ही है तो देश भर में फैली 12 कंपनियों का समूह किसी भी कारण से लंबी छुट्टी न देने का फैसला करे। उसे बाकयदा घोषित भी करे तो वह टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड नहीं बनेगी पर यह खबर बनी है तो क्यों है और क्या है, समझना मुश्किल नहीं है।
आज एक और दिलचस्प खबर है, भारत ने आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) बोर्ड के अपने प्रतिनिधि को अचानक हटाया। यह उनका कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इसका कारण यह है कि आईएमएफ बोर्ड की बैठक होनी है जिसमें पाकिस्तान को 1.3 बिलियन डॉलर का कर्ज देने पर विचार किया जाना है। सरकार ने भिन्न एजेंसियों पर दबाव बढ़ा दिया है और चाहती है कि पाकिस्तान को वित्तीय प्रवाह रोक दिया जाये। कहने की जरूरत नहीं है कि यह इतना आसान नहीं है और दबाव ऐसे नहीं बनने वाला। बनता भी हो तो यह उचित तरीका नहीं है। दिलचस्प यह कि जिन्हें हटाया गया है उन्होंने लिखित संदेश का जवाब नहीं दिया। सरकार से पूछने और बताने का रिवाज अब है नहीं। ऐसे में सरकार के खिलाफ खबरें छपती नहीं हैं और भ्रम हो या अपुष्ट खबर वही छपती है जिससे सरकार 56 ईंची वाली लगे, ना कोई घुसा है ना घुसा हुआ है के बावजूद। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार इसका कारण अधिकृत तौर पर नहीं बताया गया है। खबर के अनुसार मुद्दा उनकी किताब है और किताब लिखने के बारे में नियम स्पष्ट हैं। फिर कोई उल्लंघन क्यों करेगा और उल्लंघन के कारण हटाया जायेगा तो कारण बताने में क्या दिक्कत होगी। किताब के नाम से लगता है कि सरकारी प्रचार वाली किताब है और खबर से लगता है कि आईएमएफ के नियमों के उल्लंघन के कारण हटाया गया है। तो मामला यह हो सकता है कि अधिकारी ने सरकार के प्रचार के लिए कोई किताब लिखी, समझा होगा कि अफसर खुश होंगे, शाबाशी मिलेगी पर नाराज आईएमएफ हो गया जिसके बारे में सोचा भी नहीं गया। जाहिर है, खबर पूरी बात नहीं बता रही है और मैं यही बताना चाहता हूं कि मौका मिला और प्रचार हो गया। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सरकार, वित्त मंत्रालय और संबंधित अधिकारी ने सवालों के जवाब नहीं दिया। वैसे, खबरें प्लांट करने का तरीका यही है और इसमें खबर उतनी ही होनी चाहिये थी जितनी टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी है। अखबार ने हटाये गये अफसर की जगह लेने वाले अफसर के संबंध में अटकल भी छापी है। इसपर याद आया कि पहले इस तरह की खबरें एक पत्रकार के कॉलम, सत्ता के गलियारे में फुसफुसाहट के नाम से खूब छपती और पढ़ी जाती थीं।
इंडियन एक्सप्रेस ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की कार्रवाई से संबंधित एक और खबर पहले पन्ने पर छापी है। इसके अनुसार पाकिस्तानी जहाज को बंदरगाहों पर प्रतिबंधित कर दिया गया है और भारतीय पोत पर भी कटौती लागू हुई है। यह दूसरे अखबारों की लीड है। यहां लीड स्क्रू कसने वाली खबर है। वारदात के 13वें दिन। दिलचस्प यह है कि इस बीच पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल का परीक्षण किया है और अमर उजाला के अनुसार भारत ने इसे उकसाने वाला कदम कहा है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने 450 किमी मारक क्षमता वाली मिसाइल का परीक्षण किया है। भारत व पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर रक्षा मंत्री का रूस दौरा भी निरस्त किये जाने की खबर अमर उजाला व दूसरे अखबारों में है। इससे आप समझ सकते हैं कि सरकार को करना क्या चाहिये, कर क्या रही है और प्रचार क्या हो रहा है। इसमें जो खबर है वह कहीं दब छिप जा रही है और सिर्फ प्रचार ही छाया हुआ है। वरना आईएमएफ में भारत के प्रतिनिधि का कार्यकाल खत्म होन से पहले हटा दिये जाने का कारण भी नहीं बताना दुनिया भर में लोकतंत्र की स्थिति के बारे में क्या संदेश देगा। भारत में सरकार को उससे चाहे फर्क न पड़े पर बदनामी तो देश की हो रही है।
आतंकवाद से निपटने के मामले में सरकार की कार्रवाई वैसी है नहीं जैसी छवि बनाई गई है। दि एशियन एज की सेंकेड लीड का शीर्षक है, आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा, निर्णायक कार्रवाई करूंगा। मुद्दा यह है कि पुलवमा के छह साल हो गये, पहलगाम के 13 दिन हो गये। प्रधानमंत्री को पता कब चला और कार्रवाई कब करेंगे। और जो भी करें उससे पाकिस्तान नष्ट हो जाये उसकी पूरी आबादी बर्बाद हो जाये तो भी क्या इस बात की गारंटी हो सकती है कि फिर वारदात नहीं होगी। और जाहिर है कि ऐसा सुनिश्चित करने के लिए अपनी सुरक्षा मजबूत करनी प़ड़ेगी और उसपर सरकार या मोदी ने कुछ नहीं कहा है। अखबारों को तो पता ही है पर पूछेंगे नहीं, बतायेंगे भी नहीं। ऐसे में आज गोवा के एक मंदिर में भगदड़ मचने से छह लोगों की मौत की खबर है। मंदिर बनाने के लिये सत्ता में आई सरकार से यह पूछने की जरूरत तो है ही कि सभी मंदिर, पूजा स्थल या भीड़ वाली जगह पर में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती है कि भगदड़ न मचे और मौतें न हों। इसे रोकने के लिये पहले भीड़ बढ़ना रोकना होगा और यह सब योजनाबद्ध तरीके से ही हो सकता है पर यह सरकार तो योजना बनाकर कम करती हुई कहीं या कभी दिखती ही नहीं है।


