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वे अब फिलीस्तीनी संकट पर कविता पाठ तक से डरने लगे हैं!

विष्णु नागर-

तो वे अब फिलीस्तीनी संकट पर कविता पाठ तक से डरने लगे हैं। दोस्ती फिलीस्तीनियों से भी निभाने का नाटक करते हैं मगर इस्राइल और अमेरिका से इतना डरते हैं कि दिल्ली के कला संकाय में थोड़े से छात्रों और अध्यापकों के बीच कविता पाठ की अनुमति देकर अंत में मुकर जाते हैं।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय ने फिलीस्तीन पर कविता पाठ की अनुमति मांगी थी, जो उसने दे दी। यह कविता पाठ कल आयोजित होना था मगर कहां से, किसने, कौन सी चाबी चुपचाप घुमाई कि शनिवार को इसे स्थगित कर दिया गया। इसमें अशोक वाजपेयी का व्याख्यान भी होना था।

तो मोदी राज में अकादमिक स्वतंत्रता का इतना बुरा हाल है कि एक मित्र देश के संकट पर कविता पढ़ना भी गुनाह है।

समय सब अपराध याद रखेगा दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी शिखर कर्ताधर्ताओं, तुम्हें भी माफ नहीं करेगा। यह भी याद रखा जाएगा।

यह याद रहे कि फिलीस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता देने वाला दुनिया का सबसे पहले देश भारत था लेकिन तब भारत, भारत था, हिन्दू राष्ट्र नहीं हुआ था। फिलीस्तीन के नेता यासिर अराफात भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सबसे अच्छे मित्रों में हुआ करते थे। उनका यहां दिल खोलकर स्वागत हुआ करता था। और आज इस्राइल के जासूसी उपकरण विरोधियों के मोबाइल में चुपचाप फिट किए जाते हैं।

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