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मोदी सरकार को पैरा मिलिट्री विरोधी सरकार क्यों कहा जा रहा है, एक्स पर क्यों हो रहा ट्रेंड, जानें पूरी स्टोरी

उपरोक्त स्क्रीनशॉट में जो “पैरामिलिट्री विरोधी सरकार” और “विरोधी सरकार” ट्रेंड दिख रहा है, वह हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चल रही एक बहस से जुड़ा है। इसका संबंध नागपुर में हुए एक कार्यक्रम TheIndianCarnivalInNagpur से जोड़कर भी किया जा रहा है।

इस ट्रेंड के पीछे का मुद्दा और माँग समझिए

सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र और संगठन आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार अर्धसैनिक बलों यानी CAPF (Central Armed Police Forces) के साथ भेदभाव करती है। CAPF में मुख्य रूप से CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB जैसी फोर्स शामिल होती हैं।

इन बलों के जवानों और पूर्व सैनिकों की लंबे समय से कुछ माँगें हैं। कई बार इन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन और अभियान भी चल चुके हैं।

सोशल मीडिया पर जो ट्रेंड चल रहा है, उसमें आम तौर पर ये माँगें उठाई जा रही हैं:

  1. वन रैंक वन पेंशन (OROP)
    सेना की तरह अर्धसैनिक बलों को भी OROP दिया जाए।
  2. “शहीद” का दर्जा
    ड्यूटी के दौरान मारे जाने वाले CAPF जवानों को भी सेना की तरह “शहीद” का आधिकारिक दर्जा और समान सम्मान मिले।
  3. बेहतर सेवा शर्तें
    ड्यूटी घंटे, छुट्टी, प्रमोशन और सुविधाओं में सुधार की माँग।
  4. सेना के बराबर सुविधाएँ
    कई पूर्व जवानों का कहना है कि वे भी सीमा, आतंकवाद और नक्सल इलाकों में तैनात रहते हैं, इसलिए उन्हें भी सेना जैसी सुविधाएँ मिलनी चाहिए।

ट्रेंड में “पैरामिलिट्री विरोधी सरकार” क्यों लिखा जा रहा?

ट्रेंड चलाने वाले लोगों का आरोप है कि सरकार इन माँगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही, इसलिए उन्होंने “पैरामिलिट्री विरोधी सरकार” जैसे हैशटैग चलाए हैं। हालाँकि सरकार की तरफ से यह कहा जाता रहा है कि CAPF के लिए अलग सेवा नियम और संरचना है।

यह ट्रेंड मुख्यतः अर्धसैनिक बलों के अधिकार, पेंशन और सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ नाराजगी दिखाने के लिए इस तरह के हैशटैग इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

नागपुर के ‘इंडियन कार्निवल’ से उठा विवाद, सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ “पैरामिलिट्री विरोधी सरकार”

नागपुर में आयोजित “इंडियन कार्निवल” कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। इस कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में सुरक्षा बलों और अर्धसैनिक बलों को लेकर आपत्तिजनक या अपमानजनक टिप्पणी की गई। इसी के बाद एक्स (ट्विटर) पर “पैरामिलिट्री विरोधी सरकार” और “विरोधी सरकार” जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे।

वायरल वीडियो और पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि अर्धसैनिक बलों यानी CAPF के जवानों के मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी नाराजगी को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया। कई यूज़र्स ने यह भी कहा कि सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने के बावजूद अर्धसैनिक बलों को सेना के बराबर सुविधाएँ और सम्मान नहीं मिलता।

ट्रेंड में शामिल कई लोगों ने मुख्य रूप से तीन माँगें उठाईं। पहली माँग यह कि अर्धसैनिक बलों को भी सेना की तरह “वन रैंक वन पेंशन” की सुविधा दी जाए। दूसरी माँग यह कि ड्यूटी के दौरान मारे जाने वाले CAPF जवानों को आधिकारिक तौर पर “शहीद” का दर्जा मिले। तीसरी माँग सेवा शर्तों, प्रमोशन और सुविधाओं में सुधार की है।

हालाँकि सरकार और सुरक्षा विशेषज्ञों का तर्क रहा है कि सेना और अर्धसैनिक बलों की संरचना और सेवा नियम अलग होते हैं, इसलिए दोनों के नियम पूरी तरह एक जैसे नहीं हो सकते। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा समय-समय पर जोर पकड़ता रहा है।

नागपुर के कार्यक्रम से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह बहस फिर तेज हो गई और कई हैशटैग ट्रेंड में आ गए। फिलहाल यह विवाद मुख्यतः सोशल मीडिया पर चल रही बहस और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, जबकि आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम को लेकर कोई बड़ा सरकारी बयान सामने नहीं आया है।

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