Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

छत्तीसगढ़

“जिस पत्रकार को खुजली हो सवाल पूछे” – धीरेंद्र शास्त्री को सुनिए!

तृप्ति सोनी-

प्रवचन की भाषा में ठठरी और खुजली!

जहाज के पंछी की तरह घूम-फिरकर हर महीने छत्तीसगढ़ आ जाने वाले कुछ कथावाचकों में से एक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर सरकार के दो दिन पहले के कार्यक्रम में उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ जिस अपमानजनक भाषा में गैरजरूरी बातें कही हैं, वे किसी साधारण व्यक्ति के मुंह से भी गंदी लगतीं, बागेश्वर सरकार कहे जाने वाले एक धार्मिक व्यक्ति से इन्हें सुनना वहां मौजूद पत्रकारों के लिए बहुत ही अपमान का रहा होगा। लेकिन क्या जो पत्रकार वहां मौजूद नहीं थे, और कुछ दूरी पर थे, क्या उनके लिए भी यह सम्मानजनक है, बर्दाश्त करने लायक है कि उनके तबके के बारे में क्या कहा जा रहा है?

यह पहला मौका नहीं है, इसके पहले भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कई मौकों पर मीडिया के खिलाफ बहुत ही हिकारत से बातें बोलते आए हैं। मीडिया नाम से कल्पना में जो तस्वीर उभरती है, वह पत्रकारों की रहती है, जबकि वे इस पूरे कारोबार का एक बहुत छोटा सा हिस्सा रहते हैं, और तरह-तरह के अपमान झेलना उनके लिए पेशेवर खतरा मान लिया जाता है। किस अखबार में क्या छपे, या किस चैनल में क्या दिखे, इस पर तो पत्रकारों का बस नहीं चलता, लेकिन जो पत्रकार अतिरिक्त व्यक्तिगत निष्ठा दिखाते हुए ऐसे कथावाचकों के पांव छूते हैं, सार्वजनिक रूप से उनके आशीर्वाद के आकांक्षी बने रहते हैं, जो ऐसे कथावाचकों की धमकियों को बिना किसी मजबूरी के झेलते हैं, उन्हें भी अपने बारे में सोचना चाहिए कि उनकी क्या मजबूरी है कि अपने पूरे पत्रकारिता के पेशे को वे इतना कमजोर साबित करते हैं?

मीडिया में मिली शोहरत पर समुद्री लहरों की तरह सर्फिंग करने वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शायद विवादास्पद बातें कहकर, लांछन वाली और अपमानजनक भाषा बोलकर मीडिया में बने रहने का हुनर सीख गए हैं। लेकिन धर्म और मीडिया से परे भी सार्वजनिक जीवन में इस बात पर सोचने की जरूरत है कि कितनी आपत्तिजनक भाषा को सामान्य मान लिया जाए, कितने अपमान को बर्दाश्त कर लिया जाए? ऐसे लोगों के जो भक्त रहते हैं, वे तो किसी भी हद तक बर्दाश्त कर सकते हैं, उन्हें अपमान भी आशीर्वाद लगता है, उनकी उड़ाई गई खिल्ली भी उन्हें उपलब्धि की तरह लगती है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में इस तरह की भाषा! पत्रकारों से धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री चेहरे पर नफरत लाकर यह कहते हैं कि जिन पत्रकारों को खुजली हो, वे उनसे सवाल कर सकते हैं, यह कौन सी सभ्य भाषा है? और जब धर्म की किसी गद्दी पर बैठकर ये बातें कही जाती हैं तो उस धर्म का सम्मान भी कही गई बातों के साथ जुड़ जाता है।

इस एक लाइन से परे भी इसी कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पत्रकारों की ठठरी बंधने जैसी भाषा बोलते हैं। सार्वजनिक जीवन में किसी की मृत्यु की कामना करना आम व्यक्ति के लिए भी अच्छा नहीं माना जाता, और फिर एक धर्म के नाम पर इकट्ठा भीड़ के बीच बागेश्वर सरकार बार-बार इसी तरह की भाषा बोलते हैं, लोगों को राज खोल देने की धमकी भी देते हैं। जो लोग उनके कार्यक्रमों में जुटते हैं, उन्हें भी यह सोचना चाहिए कि क्या उनकी आस्था के केंद्र की ऐसी भाषा सही है?

क्या सोचते हैं आप?


भूपेश बघेल-

हमारे छत्तीसगढ़ में बहुत से कथावाचक हैं वे लोग बहुत मुश्किल से अपना आश्रम या घर चला पा रहे हैं, भगवत भजन करते हैं और भक्ति-ज्ञान के बारे में बताते हैं.

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कथावाचक पवन दीवान जी रहे हैं, उनके आश्रम के हालात देख लीजिए.

वो मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे हैं, जिंदगी भर कथावाचन किए, उनकी स्थिति देख लो और दूसरी तरफ इन धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा की स्थिति देख लो.

सरकारी जहाज में घूम रहे हैं, बड़े-बड़े हॉस्पिटल खोल रहे हैं, मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं, करोड़ों-अरबों के मालिक बन गए हैं.

जब इनके झाड़-फूंक से, दिव्य दरबार से लोग ठीक हो रहे हैं तो मेडिकल कॉलेज, अस्पताल क्यों खोल रहे हैं?

विवादों में ये मुद्दा भी… पढ़ें

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. HINDURASHTRAPREMI

    December 28, 2025 at 10:37 pm

    SABSE PEHLE TO IS GADDAR YASHWANT KI LUNGI KHOL KE CHECK KARNA CHAHIYE KI ISKA KHATNA PAIDAISHI HAI YA 2014 KE BAAD KARAYA ….. YASHWANT JAISE LOG HI BHOOTKAAL ME KILEY KE DARWAZEY ANDAR SE KHOLTE THEY….AUR AAJ BHI WAHI KAR RAHE HAIN…. JNU KI GANDGEE SAREY DESH ME CANCER FAILATI HAI…. AUR YE BHI USI DAFLI GANG KA HISSA HAI….KISI MAULVI KE BAAREY ME CHAAP ….HAI HIMMAT….MOOT NIKALTA HAI NA UNKA NAAM SUN KAR?….CHALA NA DEEPU KE SAMARTHAN ME CAMPAIGN APNE IS GADDARI PAROSTI WEBSITE PAR….. GADDAR KAHIN KA….AB CHAAP ISKO PRAMUKHTA SE GADDAR YASHWANT…. HUM GARV SE KEHTE HAIN HUM RASHTRAPREMI RASHTRAVAADI HAI…LEKIN TERI SANTAANEIN TUJHE BHARAT KE EK GADDAR AUR SANATAN VIRODHI KE ROOP ME YAAD RAKHENGI……JAI HINDU RASHTRA BHARAT….JAI SANATAN DHARM…JAI SHRI RAM

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन