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भय-दहशत में जी रहा एक पत्रकार मांग रहा इंसाफ

नमस्कार

मेरा नाम राजेंद्र कुमार है। मैं गावं धुराला, डॉक्खाना संभालाखा, थाना साहा, जिला अंबाला का रहने वाला हूं। मैं एक पत्रकार हूं। मेरी उम्र पचास साल है। बतौर पत्रकार मैंने करीब सत्रह वर्ष चंडीगढ़ में वरिष्ठ पत्रकार के तौर पर विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में कार्य किया है। पच्चीस सालस से पत्रकारिता में हूं।

आज भी मैं आल इंडिया रेडिया चंडीगढ़ के लिए बतौर फ्रीलांसर कार्य कर रहा हूं। मैं पिछले आठ महीने से अपने घर में कैद हूं। मेरा परिवार अज्ञात लोगों के भय में जी रहा है। वो लोग कौन हैं इसकी जांच की मांग मैंने कुछ सुबूत देते हुए हरियाणा पुलिस से फरवरी महीने में की थी, लेकिन उस जांच का कुछ नहीं हुआ। हमारे फोन काल्स हैकिंग पर हैं या टेपिंग पर लेकिन रिकॉर्डिंग निरंतर की जा रही है। घर में और आसपास हिडन कैमरे और आडियो सर्विलेंस लगा कर पूरे परिवार को वही बोलने पर विवश कर दिया गया है जो वो लोग चाहते हैं। कुछ आडियो सर्विलांस डिवाईस मैंने ढूंढ निकालीं थी, जिसकी जानकारी सीआईएन नारायणगढ़ को फोटो समेत दे दी थी।

इसके अलावा कुछ मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियां भी दी थी। इसका पूरा रिकॉर्ड इस फाईल के साथ अटैच है। मेरा बेटा कहने को तो नौकरी पर है, अपने बिजनेस जोकि एक षडयंत्र है इसके पूरे संकेत हैं। मुझे शक है कि उसे नौकरी-बिजनेस के नाम पर बंधक के तौर पर परिवार से दूर रखा गया है, ताकि घर की महिलाएं और अन्य लोग अपना मुहं न खोलें। जब वो घर आता है तो कोई अन्य परिजन रिश्तेदारी के नाम पर चला जाता है। यानि तब वो उन लोगों का बंधक होता है।

आठ महीने हो गए हैं मेरी शिकायत पर न तो कोई सही से जांच हुई है न ही इस मामले में कोई प्रगति हुई है। पीजीआई चंडीगढ़ में ले जा कर मेरे परिवार को बंधक बना कर कई दिन रखा गया। मेरी पत्नी, बेटे, बेटी ही नहीं भाईयों को, मेरे ससुर को वहां कुछ लोगों ने गुंडों और नशेडिय़ों के साथ मिल कर प्रताडि़त किया। मेरी पत्नी अपनी बेटी और बेटे की हत्या न हो जाए इस लिए जुबान पर ताला लगाए अब तक बैठी है। हरियाणा सरकार और प्रशासन, पुलिस एक वरिष्ठ पत्रकार के परिवार के साथ हुई इस घृणित क्रूर घटना पर खामोश है।

न पीजीआई में उस वक्त मौजूद डॉक्टर व अन्य स्टाफ से किसी प्रकार की पूछताछ-छानबीन ही की गर्ई है। न ही उस वक्त वहां मरीजों के भेष में दाखिल प्रभावशाली आदमी के मरीज रूप में मौजूद गूंडों को ही पकड़ा गया, न ही पूछताछ की गई है। हम जिंदा जरूर हैं, लेकिन हम लाश बन गए हैं। एक पत्रकार के परिवार के साथ अगर ऐसा हो सकता है तो कल्पना की जा सकती है कि आम आदमी प्रदेश में कितना सुरक्षित है। हमारी फोन कॉल रिकॉर्ड हो रही हैं, हमारी ईमेल्स तक लोगों को नहीं मिल रही।

जो कंप्यूटर तकनीक के जानकार हैं वो जानते हैं कि मैन इन दी मिडल अटैक का प्रयोग कर के किसी के भी मोबाइल और कंप्यूटर का नेटवर्क हैकर टीम अपने कंप्यूटर के माध्यम से डाइर्वट कर सकते हैं और इंटरनेट की हर गतिविधि, मोबाईल पर इंटरनेट का प्रयोग वो चाहे वाहटसएप हो, टवीटर हो या ईमेल वो देख, पढ़, सुन ही नहीं सकते बल्कि खुद को वो व्यक्ति बता आगे का कम्यूनिकेशन रोक सकते हैं, बदल सकते हैं। ऐसे में मेरे सब प्रयास और लोगों से संपर्क करने की कोशिशें वो सफल नहीं होने दे रहे हैं।

एक पत्रकार के परिवार को मारापीटा गया है वो भी पीजीआई चंडीगढ़ जैसे संस्थान में बंधक बना कर ये कोई मामलूी आदमी का काम नहीं। इसमें सरकार में बैठे कुछ लोग शामिल हैं। वो मददगार हैं। हमारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी और भाजपा सरकारर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है और एक राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत पत्रकार, एक उम्रदराज कवि के और उसके परिवार के साथ हुए अपराध की शिकायत आठ महीने तक दबी रहती है। जबकि डीजीपी हरियाणा बीएस संधु जी ने मामले की रिपोर्ट पांच दिन में मांगी थी।

मेरे गांव के कुछ लोग जिनकी हमारे से नहीं बनती उनका प्रयोग हमारे परिवार को डराने ओर हमारे परिवार पर निगरानी कराने के लिए किया जा रहा है। जो भी मुझे मिलने आता है उसे डरा दिया जाता है। जो मदद करने की कोशिश करता है उसे अनजान लोग धमका देते हैं। मुझे इसके जानकारी भी मिली। डीपीजी हरियाणा बीएस संधू जी मुझे निजी तौर पर जानते हैं, लेकिन आठ महीने बाद भी मामले में कुछ नहीं हुआ। जिन इंस्पैक्टर सीआईए-टू नरायणगढ़ श्री कुलभूषण जी को जांच सौंपी गई थी।

कुछ दिन बाद उनका तबादला अंबाला सीआईए वन अंबाला शहर में कर दिया गया। उसके बाद उनकी प्रमोशन हो गई और वो दक्षिण हरियाणा में बतौर डीएसपी लगा दिये गए। मामले की जांच को या तो किसी के कहने पर दबा दिया गया। या फिर किसी अधिकारी, नेता के इशारे पर सही जांच की दिशा में चल रहे कर्मचारियों को किनारे लगा दिया गया। मुझे आज तक नहीं मालूम की पुलिस ने क्या कार्रवाई की। किस से पूछताछ की गई। डीजीपी हरियाणा को की गई मेरी शिकायत का नंबर २४३/ ष्ठत्रक्क, ष्ठड्डह्लद्गस्र २२ रूड्डह्म्ष्द्ध २०१८ है। इसकी एक कापी साथ अटैच है।

अब मेरे घर पुलिस के एक इंस्पैक्टर दिनांक नौ अक्तूूबर को आए थे जिन्होंने अपना नाम सतनारायाण शर्मा बताया था उनके साथ एक कर्मचारी एके फोर्टी सेवन गन लिये था। दोनो ही सादा वर्दी में थे। इंस्पेक्टर जिन्होंने अपना नाम सत्यनारायाण शर्मा बताया ने नौ अक्टूबर दोपहर मेरे घर आ कर मुझ से पूछा कि क्या मुझे अब किसी से कोई खतरा है। मैंने पूछा आप कहां से आए हैं वो बोले की मैं सीआईए अंबाला छावनी से आया हूं। उन्होने कहा कि मैं अपना बयान दे दूं।

मैंने उन्हें बताया कि मेरा बयान सीआईए टू नारायणगढ़ से आया हुआ कर्मचारी जोकि ले गया था और वो बयान और मेरी शिकायत की कापी मेरा बयान है, तो उन्होंने कहा कि आप किसी का नाम लो, मैंने कहा कि मैंने कुछ फोन नंबर, गाड़ी के नंबर, अपने परिवार की लोकशन जब जब वो घर से गायब रहे सीआईए नरायाणगढ़ के हैड कांस्टेबल रामकरण को इंस्पैक्टर कुलभूषण के भेजने पर दी थी, तो वो बोले उसकी तो जांच कर ली गई होगी।

मैंने पूछा कि जांच में क्या निकला वे बोले ये तो वहीं जाने जिन्होंने जांच की। मैंने कहा कि आप तब के इंजार्च रहे मेरे मामले के जांच अधिकारी कुलभूषण जी से पूछ लो तो अगर वो कहते हैं कि कुछ भी नहीं है तो मैं अपनी दरखास्त वापिस ले लूंगा। शिकायत के बाद जांच में क्या निकला, किस से पूछताछ हुई इस पर कोई नहीं बोलता। अब मुझे शिकायत वापिस के लिए कहा जा रहा है। हम डर के दहशत के साये में जी रहे हैं। मेरे परिवार को पीजीआई चंडीगढ़ में ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ में और हो सकता है कहीं और भी बंधक बना कर रखा गया हो। ये सब जांच में सामने आ सकता था।

मुझे पक्का यकीन है कि मेरा बेटा आज भी अपरोक्ष तौर पर किसी का बंधक है। वो कहने भर को नौकरी कर रहा है। नौकरी के नाम पर उसे बंधक बना कर परिवार से दूर रखा जा रहा है, ताकि उसकी मां और बहन मुहं न खोलें। उसे छोड़ा जाएगा तो परिवार के किसी दूसरे सदस्य को बंधक बना कर कहीं रख लेंगे। मेरे ससुर को, साले को, ताकि मेरी पत्नी, बेटी या कोई मुहं न खोले। मेरे परिवार को प्रताडि़त करने की इस साजिश का पता मेरे गांव के अधिकांश लोगों को मालूम है, लेकिन सब चुप्पी साधे हैं। शायद गांव के कुछ लोगों ने बाहरी लोगों के साथ मिल कर उन्हें धमकाया हो। हमारा परिवार गांव में अपने कुनबे की पीढ़ी का अकेला परिवार है। कोई पैसा और पहुंच या रसूख जैसी को ताकत हमारे पास नहीं है।

सिर्फ पत्रकारिता, गुजर बसर के लिए नौकरी ही हमारी पुंजी है। जबकि अन्य लोगों के साथ ऐसा नहीं है। कुछ पत्रकारों को भी है। उनके बर्ताव से ये साफ दिखाई देता है। इसका सीधा सीधा मतलब ये है कि वो जो भी है वो या तो सरकार में बैठा है या फिर उसकी पहुंच सरकार में इतनी गहरी है कि वो प्रशासन और पुलिस या एजेंसी को किसी परिवार के पीछे लगा सके। उनको प्रताड़ित कर सके। शिकायत के बाद जांच को दबा सके। कहीं कोई एजेंसी ही तो ये सब हमारे साथ नहीं कर रही है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर जांच की क्यों नहीं जा रही? हमें इंसाफ चाहिए। आदरणीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल जी से, देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी से आज एक पत्रकार और उसका परिवार अपने साथ हुए जल्म का इंसाफ मांगता है। आपके रामराज्य में एक पत्रकार और उसके परिवार के साथ क्या हो रहा है, उस पर नजर डालें और इस खौफनाक प्रताडि़त करने वाले मामले की सही और समयबद्ध जांच और मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा करें। आज हम अपने ही घर में कैद हो कर रह गए हैं।

प्रार्थी

राजेंद्र कुमार राज

पत्रकार, गांव धुराला

खंड साहा, हलका मुलाना

अंबाला, हरियाणा

९८९६४६०६३६, ९४९९३०६४९३

[email protected]

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