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उत्तर प्रदेश

लखनऊ में पत्रकार के दोनों हाथ तोड़ दिए, पुलिसवाले पर पिटाई का आरोप, 7 दिन बाद भी FIR नहीं!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां मामूली कहासुनी के बाद एक वर्दीधारी शख्स पर 50 वर्षीय पत्रकार के साथ बर्बर मारपीट करने का आरोप है। पीड़ित पत्रकार शमीम अख्तर का दावा है कि हमले में उनके दोनों हाथ फ्रैक्चर हो गए, लेकिन घटना के सात दिन बाद भी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की।

क्या है पूरा मामला?

घटना 15 मार्च की शाम करीब 4:45 बजे इंदिरा नगर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। शमीम अख्तर अपनी कार से नानी होटल के पास चंदन रोड की ओर मुड़ रहे थे, तभी सामने से आ रही एक कार से हल्की टक्कर हो गई। अख्तर का कहना है कि उन्हें इस टक्कर का एहसास भी नहीं हुआ था।

उनके मुताबिक, इसके तुरंत बाद वर्दी पहने एक व्यक्ति पीछे से आया, गालियां देने लगा और फिर अचानक हमला कर दिया। सीसीटीवी और डैशकैम फुटेज में कथित तौर पर आरोपी पत्रकार की गाड़ी का दरवाजा खोलकर उन्हें लात मारते और उनके हाथ मोड़ते हुए दिख रहा है।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

न्यूज़लॉन्ड्री में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद अख्तर ने 112 नंबर पर कॉल कर मदद मांगी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपी फरार हो चुका था। पीड़ित का आरोप है कि इंदिरा नगर थाना के कई चक्कर लगाने के बावजूद उनकी FIR दर्ज नहीं की गई और न ही पुलिस ने उनका मेडिकल कराया।

आखिरकार, उन्होंने खुद जाकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिकल कराया, जहां दोनों हाथों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।

शिकायतें और दबाव के आरोप

न्याय न मिलने पर अख्तर ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल, मानवाधिकार आयोग, पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) और पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दी है। उनका आरोप है कि उन पर समझौते का दबाव भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साझा की हैं, जिनमें कथित तौर पर उन्हें मामला रफा-दफा करने के लिए कहा जा रहा है।

पुलिस का क्या कहना है?

थाना स्तर पर मामले में भ्रम की स्थिति नजर आई। एसएचओ अजय नारायण सिंह ने कहा कि वे छुट्टी पर थे, जबकि एसआई ब्रजेश ने भी उसी अवधि में छुट्टी पर होने की बात कही।

वहीं क्षेत्रीय एसीपी अनिंद्य विक्रम सिंह के अनुसार, पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने में जुटी है। उन्होंने यह भी कहा कि “शनि” नाम का कोई पुलिसकर्मी इंदिरा नगर थाने में तैनात नहीं है। FIR दर्ज करने के सवाल पर उन्होंने जांच पूरी होने और डॉक्टर से राय लेने के बाद कार्रवाई की बात कही।

इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है और यह भी सवाल उठाया कि संबंधित व्यक्ति पत्रकार हैं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं है।

पीड़ित का पक्ष

शमीम अख्तर का कहना है कि वे पहले The Lucknow Observer नाम से मैगजीन निकालते थे और The Lucknow Post नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी चलाते थे। फिलहाल वे फ्रीलांस पत्रकार के रूप में काम कर रहे हैं और अपनी मैगजीन को दोबारा लॉन्च करने की तैयारी में हैं।

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