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एसीपी अजय कुमार की गुंडई के शिकार पत्रकार की कथा टेलीग्राफ में लीड खबर बनी, देखें

-संजय कुमार सिंह-

आज टेलीग्राफ ने कारवां पत्रकार की पिटाई की खबर को लीड बनाया है, “देश बदल गया – यह रहा सबूत”। इसके साथ भूख सूचकांक वाली खबर है।

ज्ञात हो कि 16 अक्टूबर के दिन कारवां के 24 वर्षीय पत्रकार अहान पेनकर के साथ दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन के एसीपी अजय कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों ने मारपीट की. पेनकर के साथ मारपीट उस वक्त हुई जब वह उत्तरी दिल्ली में एक दलित युवती के साथ कथित तौर पर हुए बलात्कार और बाद में हत्या के विरोध में आयोजित प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे थे. इस बारे में पेनकर ने दिल्ली कमिश्नर के समक्ष लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है.

पीड़ित पत्रकार कहना है- “मैं अपने मोबाइल फोन से घटना का वीडियो बनाने लगा और मेरे एक हाथ में मेरा प्रेस कार्ड था जिसे मैं पुलिस वालों को दिखा रहा था. पुलिस वाले चार अन्य लोगों के साथ मुझे एक कमरे के अंदर ले गए. मेरा फोन छीन लिया और मुझे पुलिस स्टेशन के बाहर घसीटा. पुलिस पूरे वक्त हमें गालियां देती और धमकाती रही. थोड़ी देर में एसीपी अजय कुमार कमरे में आए. उनके पास स्टील की एक रॉड थी. वह हमें उससे मारने और डराने लगे. एसीपी अजय कुमार ने पहले मेरे चेहरे पर लात मारी और मैं जमीन पर गिर गया. फिर अजय कुमार ने मेरे पीठ और कंधे पर लात मारी. जब मैं उठ कर बैठा, तो एसीपी ने मेरा सिर जमीन में दबा दिया और फिर मेरी पीठ पर मारने लगे.”

पीड़ित पत्रकार पेनकर ने हमले की दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव के समक्ष शिकायत में मांग की है कि अजय कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 342 और 506 (2) के तहत कार्रवाई करने की मांग की है. ये धाराएं जानबूझकर शारीरिक क्षति पहुंचाने, गलत तरीके से बंधक रखने और आपराधिक धमकी से संबंधित हैं.

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