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आज के अखबार : औद्योगिक डीजल और पेट्रोल की कीमत बढ़ने की ‘खबर’ का स्टेटस क्या है, जानिये!

इंडियन ऑयल और भारतीय जनता पार्टी की पोस्ट। इंडियन ऑयल ने लिखा है ऑटोमोटिव फुएल की कीमत नहीं बढ़ी। भाजपा ने लिखा है सामान्य डीजल की कीमत नहीं बढ़ी। वैसे भी मामला 23 फरवरी से 16 मार्च का है। इसलिए तकनीकी तौर पर कुछ गलत नहीं है लेकिन भ्रम तो फैला ही रहे हैं। झूठे दावे कर ही रहे हैं।

संजय कुमार सिंह

अमर उजाला की आज की लीड का शीर्षक है, युद्ध का असर : प्रीमियम पेट्रोल दो रुपए और औद्योगिक डीजल 22 रुपए लीटर महंगा हुआ। वैसे तो यह सामान्य खबर है लेकिन इसमें ‘युद्ध का असर’ और ‘औद्योगिक डीजल’ खास बातें हैं। आप जानते हैं कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका यानी  फ्रैंड डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल ने मिलकर की है। यह उम्मीद रही होगी कि ईरान को आसानी से निपटा दिया जाएगा और वेनेजुएला के तरह ईरान भी कुछ नहीं कर पाएगा। पर ईरान अड़ गया, भिड़ गया और लड़ रहा है। दूसरी ओर, एप्सटीन फाइल के रहस्योद्घाटनों, कंप्रोमाइज्ड होने के आरोपों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोई खास कारण या मकसद बताए बगैर इजराइल गए और लौटते ही युद्ध छिड़ गया। प्रधानमंत्री ने अभी तक नहीं बताया है कि युद्ध के इरादे की जानकारी उन्हें कब मिली। इसलिए और तमाम अन्य कारणों से माना जा रहा है कि युद्ध में भारत की सरकार अमेरिका और इजराइल के साथ है। इसलिए भारत पर युद्ध का प्रभाव पड़ रहा है तो वह सरकार या प्रधानमंत्री के कारण। इससे बचने के लिए सरकार ने पूरी कोशिश की कि एलपीजी का संकट खबर न बने और जब उसे रोका नहीं जा सका तब भी उसने यही जताने की कोशिश की है कि एलपीजी का संकट नहीं है। तमाम कहानियां और खबरें हैं लेकिन अभी वह सब मुद्दा नहीं है। अभी मुद्दा है, अमर उजाला का यह लिखना की कीमतों में वृद्धि युद्ध का असर है। इससे पहले रजत शर्मा ने 11 मार्च को एक्स पर लिखा था, आम जनता के लिए इस बात का मतलब है कि उसे एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति मिलती रहनी चाहिए तथा पेट्रोल और डीजल की कीमत स्थिर रहे। खासकर इसलिए कि कल खबर थी, मोदी ने पांच राष्ट्राध्यक्षों से बात की, ऊर्जा के बुनियादी ढांचों पर हमले की कड़ी निन्दा। आज नवोदय टाइम्स में चार कॉलम की खबर का शीर्षक है, पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति चिन्ताजनक : मोदी। कहने की जरूरत नहीं है कि यह स्थिति युद्ध के कारण बनी है और शुरुआत अमेरिका व इजराइल ने की है। अब अगर ईरान अपने नुकसान का बदला ले रहा है तो स्थिति चिन्ताजनक बताई जा रही है। तथ्य यही है कि ईरान पर हमले के कारण यह स्थिति बनी है और ट्रम्प अगर दुनिया भर की ताकत के सहयोग से होर्मुज स्ट्रेट का मामला निपटा लेने की कोशिश कर रहे थे तो निराश हुए हैं और नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, नाटो को ‘कायर’ कहा है। ट्रम्प अभी भी युद्ध खत्म करने, समझौता करने या हार मानने के मूड में नहीं लगते हैं और जाहिर है उनका साथ देना भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। भले कारण कोई और हो। 

आज जब अखबारों में पेट्रोल और डीजल कीमत बढ़ने की खबर है तो भारतीय जनता पार्टी के हैंडल से यह दावा किया गया है कि (युद्ध के कारण) दुनिया भर में डीजल महंगा हुआ लेकिन भारत में ‘सामान्य’ डीजल की कीमतें नहीं बढ़ीं। इंडियन ऑयल ने भी मिलता जुलता दावा किया। इंडियन ऑयल ने एक्स पर लिखा है, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच, घरेलू स्थिरता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों के बावजूद, इंडियन ऑयल ने भारत में ‘सामान्य’ ऑटो मोबाइल ईंधन की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। केवल प्रीमियम पेट्रोल XP-95 की कीमतों में मामूली संशोधन किया गया है, जिसका कुल खपत पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। यह कुल बिक्री का करीब 5 प्रतिशत है। अमर उजाला और देशबन्धु की लीड से पता चला कि औद्योगिक डीजल की कीमत में करीब 22 रुपए लीटर की वृद्धि की गई है और यह 25 प्रतिशत के बराबर है। इसके बावजूद इंडियन ऑयल ने यह दावा किया है कि, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद, हमारा मुख्य लक्ष्य स्पष्ट है: निरंतर आपूर्ति, उचित मूल्य निर्धारण और भरोसेमंद सेवा। जाहिर है, यह दावा भ्रामक है और ऐसी तमाम खबरें हैं जिन्हें पीआईबी से भ्रामक कहलवाया जाता रहा है लेकिन अपनी खबरें छप रही हैं। यही नहीं, सरकार के खिलाफ खबरें बड़े पैमाने पर हटवाई जा रही हैं और सोशल मीडिया पर उदाहरण भरा पड़ा है। 

ऐसे में अमर उजाला ने भी छापा है, “सरकार का दावा : आम आदमी पर असर नहीं। युद्ध से जुड़ी आज की दूसरी खबरें  हैं  – कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच, एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति घटने का खतरा, कुवैत की रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला, आग लगी।, रुपया पहली बार 93 से पार पहुंचा। देशबन्धु में लीड का शीर्षक है, महंगाई का प्रीमियमझटका। लीड के बराबर में छपी खबर का शीर्षक है, गैस सप्लाई की स्थिति भी चिन्ताजनक, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे हैं। नवोदय टाइम्स की लीड है, ईरान ने एफ-35 गिराया इजराइल ने दो जनरल मारे। खबर के अनुसार, किसी भी रडार की पकड़ में न आने वाले आसमान के भूत को निशाना बनाकर दुनिया को चौंकाया। एक अन्य खबर के अनुसार, अमेरिका अभी तक अपने 16 विमान गंवा चुका है और होर्मुज पर असहाय हुए ट्रम्प ने नाटो को कायर कहा है। आप समझ सकते हैं कि युद्ध खत्म होने के आसार नहीं है और अभी लंबा चले तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए। लेकिन भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए क्या कर रहा है उससे संबंधित कोई खबर नहीं है। अभी तक एलपीजी संकट नहीं मानने वाली सरकार ने अब कहा है, आपूर्ति चिन्ताजनक लेकिन भंडार पर्याप्त है। इसी के साथ खबर है कि रसोई गैस के लिए एलपीजी छोड़कर पीएनजी लेने की सरकार की अपील के बाद देश के 15 बड़े क्षेत्रों में 13 हजार 700 से अधिक पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं। 7500 उपभोक्ताओं ने एलपीजी छोड़कर पीएनजी लिया है। आप जानते हैं कि सरकार आत्म निर्भर और स्वदेशी होने का बात लंबे समय से करती रही है लेकिन असर अब हो रहा है।

इन खबरों के अलावा आज युद्ध से जुड़ी एक और गंभीर खबर है। द टेलीग्राफ के साथ हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी इसे लीड बनाया है। खबर के अनुसार, ईरान ने अब विश्व पर्यटन स्थलों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, यह चेतावनी दुनिया भर के खास पर्यटन स्थलों के लिए है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है, और नेताओं के मारे जाने पर ईरान ने चेतावनी दी। दूसरी ओर, भारत या भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है, पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति चिन्ताजनक। यह स्थिति तब है जब ईरान के राष्ट्रपति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय पोत को निकलने देने की प्रधानमंत्री की अपील पर कहा था कि उसकी नीति स्पष्ट है। अमेरिका और इजराइल के सहयोगी, खासकर हाल के विश्वासघात के बाद भारत को अनुमति नहीं दी जाएगी। मुझे लगता है कि खबरों में ये तथ्य दिखने चाहिए, इनका उल्लेख किया जाना चाहिए लेकिन कीमत बढ़ने की पूरी खबर सिर्फ अमर उजाला में लीड है। नवोदय टाइम्स में सेकेंड लीड है, देशबन्धु में लीड है तो औद्योगिक डीजल की कीमत को अलग रखने और दिखाने की सरकारी चाल चल गई दिखती है। सरकारी चाल और सरकार की सेवा आज भी टाइम्स ऑफ इंडिया में सबसे बेहतर दिख रही है। डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने और उसकी कीमत गिरने पर जब सोशल मीडिया पर नरेन्द्र मोदी के पुराने भाषण याद दिलाए जा रहे हैं तब टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड कहती है, ईरान में भीषण हिंसा से रुपया एक ही बार में 108 पैसे गिरा, पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट। जाहिर है, 2014 से पहले जब डॉलर के मुकाबले रुपए के कीमत 60 के करीब होती थी तब नरेन्द्र मोदी तरह-तरह के दावे करते थे, आरोप लगाते थे। अब 90 पार है और 100 के करीब तो नरेन्द्र मोदी की पुरानी बातें याद करने की बजाय इसका कारण युद्ध को बताना नरेन्द्र मोदी की सेवा तो है ही और चाहे जो हो या नहीं हो। द हिन्दू की लीड भी वही है जो दूसरे अखबारों की खबर है लेकिन इंडियन एक्सप्रेस सबसे अलग है। यह इजराइल और अमेरिका का पक्ष बता रहा है जबकि खबर यह है कि ईरान के प्रमुख नेताओं की मौत के बाद ईरान ने हमले तेज करने की चेतावनी दी है और विश्व पर्यटन स्थलों को भी निशाना बनाना तय किया है। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है – नेतन्याहू ने कहा, ईरान अब यूरेनियम को समृद्ध नहीं कर सकता है; अमेरिका खर्ग को नियंत्रित करने के इंतजार में। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, ईरान ने इजराइल, खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों पर हमले बढ़ाए। 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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