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चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल महंगा होने संबंधी अपनी रिपोर्ट का CNBC बचाव करेगा या PIB फेक न्यूज़ का ठप्पा लगाएगी?

CNBC TV18 ने ब्रोकरेज फर्म Kotak Institutional Equities के अनुसार एक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर पब्लिश की है। शीर्ष कपूर द्वारा प्रकाशित की गई इस खबर में बताया गया है कि चुनाव निपटने के बाद देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाएंगे। कंपनियां इसकी तैयारी में जुट गई हैं। वहीं, दूसरी तरफ सरकार ने ऐसी किसी भी खबर को फेक न्यूज करार दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सीएनबीसी अपनी रिपोर्ट पर कायम रहेगा या फिर पीआईबी इस पर भ्रामक न्यूज का ठप्पा लगाएगा?


पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चर्चा तेज कर दी है। ब्रोकरेज फर्म Kotak Institutional Equities के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव में चुनाव के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि कीमतों में ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।

हालांकि, सरकार ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने कहा, “पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें भ्रामक हैं, इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं है।”

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

कोटक की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे रिफाइनिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। फिजिकल मार्केट और फ्यूचर्स के बीच बढ़ता अंतर सप्लाई संकट का संकेत दे रहा है और निकट भविष्य में राहत की संभावना कम है।

वैश्विक वजहें

पश्चिम एशिया में तनाव और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ईरान द्वारा अस्थायी तौर पर ट्रांजिट की अनुमति देने के बावजूद हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे सप्लाई टाइट बनी हुई है।

भारत पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत का आयात बिल काफी बढ़ा है। मार्च और अप्रैल में भारतीय क्रूड बास्केट में तेज उछाल देखने को मिला। दिलचस्प बात यह है कि आयात मात्रा में 13-15% की कमी के बावजूद कुल आयात बिल में रोजाना करीब 190 से 210 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।

रिफाइनर्स पर दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतें स्थिर रहने के कारण तेल कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। इसका अतिरिक्त असर करीब ₹270 अरब प्रति माह तक पहुंच सकता है। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती और विंडफॉल टैक्स जैसे कदमों से कुछ राहत मिली है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं मानी जा रही।

कब बढ़ सकते हैं दाम?

रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमत बढ़ाने का आधार मजबूत है, लेकिन इसका समय राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। 29 अप्रैल को मतदान के अंतिम चरण के बाद कीमतों में संशोधन संभव बताया गया है। हालांकि, यह बढ़ोतरी एक बार में न होकर चरणबद्ध तरीके से भी की जा सकती है।


क्या यह रिपोर्ट अब हटा ली जाएगी? पेट्रोलियम मंत्रालय ने पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ने की ख़बरों को फेक न्यूज़ कहा है। कहा है कि सरकार के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। कोटक बैंक प्रतिष्ठित बैंक है। उससे जुड़ी संस्था की रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में वैसे यह नहीं लिखा है कि चुनाव खत्म होते ही दाम बढ़ जाएंगे। बल्कि यही लिखा है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में बढ़ सकते हैं। CNBC अपनी रिपोर्ट का बचाव करेगा या PIB फेक न्यूज़ का ठप्पा लगाएगी। -रवीश कुमार


रॉयटर्स और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़
तेल मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि भारत में तेल के फुटकर विक्रेताओं को डीज़ल की स्थानीय बिक्री पर 100 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर का राजस्व घाटा हो रहा है क्योंकि वे दोनों तेल मार्केट रेट से कम पर बेच रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक़ अधिकारियों ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को भार से बचाने के लिए अभी फ़्यूल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है।पिछले 4 सालों में कीमतें नहीं बढ़ाई गईं।
अधिकारियों ने कहा कि भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट, जो पिछले साल एवरेज $70 प्रति बैरल था, इस महीने औसतन $113 प्रति बैरल से ज़्यादा हो गया।
मतलब माहौल बन रहा है। -उमाशंकर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार

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