गिरीश मालवीय-
समझ में नहीं आता कि देश का मीडिया ख़बर दिखाते वक्त सही विश्लेषण प्रस्तुत क्यों नहीं कर रहा है!….
आज का ही उदाहरण लीजिए आज देश भर में खासतौर पर उत्तरी ओर मध्यभारत के शहरों में पेट्रोल पंप पर टू व्हीलर ओर फोर व्हीलर की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं यह खबर दिखाते वक्त हर रिपोर्टर और एंकर बार-बार जोर देकर बस यही बता रहा है कि लोग पैनिक बाइंग कर रहे है अफवाह उड़ी है इसलिए सब व्हीकल ऑनर पेट्रोल डीजल भरवा रहे हैं. कुछ हद तक यह बात सच है लेकिन यह पूरा सच नहीं है
हुआ यह है कि 17 मार्च 2026 से, देश की प्रमुख तीन सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने पेट्रोल पंपों के लिए क्रेडिट (उधार) नीति स्थगित कर दी है, उसके बजाए अब “पहले पैसा, फिर तेल” (Advance Payment) का नियम अनिवार्य कर दिया गया है।
तेल कंपनियों ने अभी तक पेट्रोल पंप के लिए शॉर्ट टर्म क्रेडिट पॉलिसी लागू कर रखी थी जहां मालिकों को तेल पहले मिलता था और पैसा बाद में भुगतान करना पड़ता था. जैसे उदाहरण के तौर पर इंडियन ऑयल अपने डीलर्स को 5 दिन की क्रेडिट देता था कि आप हमारे यहां से आज टैंकर अपने पंप में खाली करा लो, आप पेमेंट पांच दिन बाद दे देना।
लेकिन पेट्रोल पंप के मालिकों को 17 मार्च को साफ कह दिया गया कि 21 मार्च से पूरा अग्रिम भुगतान किए बिना सप्लाई नहीं की जाएगी। अब इसका असर कल से ही दिखना क्यों शुरू हुआ वो भी समझ लीजिए!…..
दरअसल 21 मार्च को शनिवार था और 22 को संडे और 23 को सोमवार…. इसलिए छोटे शहरों गाँव कस्बों और इन जगहों से निकलने वाले हाइवे पर मौजूद इन पेट्रोल पंप मालिकों/ डीलरों के पास जो तीन चार दिन का स्टॉक था वो खत्म हो गया तो उन्होंने अपने यहां कतार में लगे वाहन मालिकों के सामने हाथ ऊंचे कर दिए कि अब हम नया टैंकर नहीं मंगवा पाएंगे, नतीजतन ये लोग अपने इलाके के बड़े पंपों पर पहुंच गए और वहां फिर और भी भीड़ बढ़ने लगी।
जाहिर है कि इससे अफवाहों का बाज़ार ओर गर्म हो गया और इस चैन रिएक्शन से प्रभावित लोग घबरा कर पैनिक बाइंग करने लगे।
पेट्रोल पंप के अलावा तेल कंपनियों ने एग्रीकल्चर सेक्टर के थोक खरीदारों, ट्रांसपोर्ट और उद्योगों को भी क्रेडिट पर तेल उपलब्ध कराना बंद कर दिया है और यह बात भी इस मौजूदा संकट के लिए जिम्मेदार है।
यह है असली सच्चाई
पेट्रोल पम्प पर बढ़ती भीड़ के संदर्भ में जब यह बात आपको एंकर्स रिपोर्टर द्वारा बतलाई जाएगी तो लोग ऐसे आड़े समय में ऐसे निर्णय लेने के लिए मौजूदा मोदी सरकार की आलोचना ही करेंगे और गुलाम तथा बिका हुआ मीडिया ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहता।
कुछ टिप्पणियां भी पढ़िए…
अरविंद वर्मा-
आपने सब सही लिखा है बिल्कुल, मैं ख़ुद पम्प चलाता हूँ, इसमें एक बात और जोड़ लीजिए, पम्प डीलर को लोड देने से पहले 10 सवाल पूछे जा रहे हैं, 20 % स्टॉक रहने पर ही नया लोड मिल रहा है इससे पहले नहीं, तीसरे अगर आप 20 केएल ऑर्डर करोगे तो 12 केएल ही मिलेगा, चौथे नेक्स्ट डे लोड नहीं मिलेगा, डे आफ्टर नेक्स्ट डे लोड मिलेगा।
जय एस-
लेकिन समझ में नहीं आ रहा है की तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल-डिजल की राशनिंग तो ठीक है, पर पंप मालिकों का क्रेडिट क्यूं बंद कर दिया? और क्रेडिट बंद भी किया, तो वो सिर्फ 5 दिन का ही था। ऐसे में पंप मालिक भी बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होने चाहिए। क्यूंकी उनकी पूरी बिक्री तो ग्राहकों से नगद पैसे लेकर ही होती है। और उनके पास अगली खरीद के लिए पैसा तो हमेशा रहता है।
सिर्फ एक ही वजह दिखती है की युद्ध के नाम पर जो अफरा-तफरी मची है और हर कोई इसमें अपने भाव बढ़ाकर मुनाफा कमाना चाहता है, वैसे ही तेल कंपनियां पांच दिन का क्रेडिट खत्म करके उस पैसे का पांच दिन का ब्याज कमाना चाहती है।
दूसरा यह भी हो सकता है की (पेट्रोलियम मंत्रालय/सरकार के इशारे पर) तेल कंपनियां ऐसा पंप मालिकों के जरिए करके करोड़ों ग्राहकों को पेट्रोल-डिजल की कमी होने का डर दिखाकर आने वाले दिनों में दाम बढ़ाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहती है।
ऐसे में जो प्रभावित नहीं है वो भी युद्ध के नाम पर दाम बढ़ाने और जमाखोरी करने लगा है। इसमें मरेगा तो बस अंतिम ग्राहक (end user), जिसपर सारा बोझ डाल दिया जाएगा।
पैनिक तो इन्होंने भी फैलाया हैं। -विक्रम प्रताप

सिद्दीक़ी साहब-
असल में बावले ने संसद में कोरोना जैसा हाल बता कर देश की जनता को पैनिक बटन दबा कर जनता को टेंशन दे दिया है। जनता जानती है कि इससे पेड़ पर इस डाल से उस डाल तक उछलने के सिवा कुछ न होगा अपनी सुरक्षा व्यवस्था खुद करें। तो बस जनता बाइक स्कूटर कार लेकर आत्मनिर्भर बनने निकल पड़ी वैसे भी जनता को पिछले 12 साल से लाइन में लगने की हैबिट पड़ चुकी है।
राज मिश्रा-
देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफायनरी कहाँ है?
उत्तर- जामनगर, गुजरात.
प्रश्न- सोशल मीडिया पर डीजल पेट्रोल को लेकर हाहाकार या लम्बी लंबी लाइनों वाली वीडियो किस प्रदेश से आ रही है?
उत्तर- गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, जामनगर
दया, ये माजरा समझ में नहीं आ रहा है.


