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अब कर्नाटक में बाहर आया फोन टेप का जिन्न! सीबीआई जांच कराएंगे सीएम येदियुरप्पा

देश में अक्सर सरकारों पर आरोप लगते रहते हैं कि वे विपक्षियों, पत्रकारों के फ़ोन टेप करा रहे हैं और इसे लेकर हंगामा भी होता रहा है। अब फोन टेप का जिन्न कर्नाटक में बाहर आया है और इससे राज्य की राजनीति में हंगामा मच गया है। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी पर मुख्यमंत्री रहते हुए कर्नाटक के करीब 300 नेताओं के फोन टैप कराने के आरोप लगे हैं। रविवार को मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की बात कही है।

पिछली सरकार में जेडीएस की सहयोगी रही कांग्रेस ने फोन टैपिंग को लेकर जांच की मांग की थी। येदियुरप्पा ने कहा कि फोन टैपिंग का मुद्दा कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भी उठाया था। वे इस मामले में सच्चाई जानना चाहते हैं। इसलिए भाजपा सरकार सोमवार को सीबीआई जांच के आदेश देगी। कर्नाटक की जनता दोषियों को कड़ी सजा मिलते देखना चाहती है।

पिछले हफ्ते ही जेडीएस के बर्खास्त विधायक एएच विश्वनाथ ने खुलासा किया था कि कुमारस्वामी सरकार में करीब 300 नेताओं के फोन टैप कर उनकी जासूसी कराई गई। इसके बाद कांग्रेस नेता सिद्धारमैया, मल्लिकार्जुन खड़गे और गठबंधन सरकार में गृहमंत्री एमबी पाटिल ने कुमारस्वामी पर लगे आरोपों की जांच की मांग की। हालांकि, पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार ने जासूसी के आरोपों को नकारते हुए कुमारस्वामी का साथ दिया।

विश्वनाथ का आरोप है कि नेताओं की जासूसी बिना मुख्यमंत्री की जानकारी के नहीं हो सकती, क्योंकि इंटेलिजेंस विंग उनके ही नियंत्रण में था। भाजपा नेता जगदीश शेट्टर ने इस मामले में सीधे कुमारस्वामी पर आरोप लगाए। कुमारस्वामी ने ट्वीट कर इस मामले में सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए मुझे फोन टैप कराने की जरूरत नहीं थी। कुछ लोगों द्वारा लगाए गए आरोप सच से कोसों दूर हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने उस मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसमें नेताओं ने टेलीफोन टैपिंग स्कैंडल की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी।बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि मैं फोन टैपिंग केस में सीबीआई जांच कराने का आदेश दूंगा। मैंने सीबीआई को इस मामले को सौंपने का फैसला कर लिया है। कांग्रेस के सिद्धारमैया ने भी कहा था कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने हिदायत भी दी कि जैसा कि विगत में बीजेपी सीबीआई का इस्तेमाल कठपुतली के रूप में करती थी, वैसा न करे।

गौरतलब है कि हाल ही में एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें फराज अहमद नाम का एक शख्स कथित तौर पर बेंगलुरू पुलिस कमिश्नर भास्कर राव से बात कर रहा था। इस बातचीत में कमिश्नर के पद की पैरवी की गई थी। मीडिया में यह बातचीत लीक हो गई थी।

भारतीय जनता पार्टी के नेता एस प्रकाश ने एचडी कुमारस्वामी की पिछली सरकार पर फोन टैपिंग कराने का आरोप लगाया था और कहा था कि हमारी पार्टी के कई शीर्ष नेता भी इस मामले की जांच की मांग कर रहे हैं। प्रकाश ने कहा था कि कहा कि कुमारस्वामी ने अवैध फोन टैपिंग करवाया था जो बताता है कि वह कितना असुरक्षित महसूस कर रहे थे। ज्वाइंट कमिश्नर भी इसकी पुष्टि कर चुके हैं कि करीब 1000 फोन टैप किए गए थे। यहां तक की कांग्रेस के नेताओं के भी फोन टैप किए गए। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री की जानकारी के बगैर फोन टैपिंग नहीं कराई जा सकती। आरोप है कि यह फ़ोन टैप नवंबर 2018 में हुए थे जब कांग्रेस और जेडीएस की सरकार पर बाग़ी विधायकों की वजह से संकट मंडरा रहा था।

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