रांची। प्रभात खबर के संपादकीय नेतृत्व में आए बदलाव के बाद अखबार की कंटेंट रणनीति में साफ़ फर्क दिखने लगा है। अंकित शुक्ला के संपादकीय टीम में आने के बाद पहली बार झारखंड स्थापना दिवस पर तीन दिनों तक लगातार विशेष परिशिष्ट प्रकाशित किया गया, जिसे पाठकों ने न केवल सराहा बल्कि उसे संग्रहणीय अंक के रूप में सहेज कर रखा।
इसके साथ ही नववर्ष 2026 के मौके पर प्रभात खबर ने एक और ऐतिहासिक पहल की। पहली बार देश के सबसे पूर्वी छोर अरुणाचल प्रदेश से लेकर सबसे पश्चिमी छोर कच्छ (गुजरात) तक सूर्योदय और सूर्यास्त की ज़मीनी रिपोर्टिंग कराई गई। इस प्रयोग ने अखबार को कंटेंट और विज़न—दोनों स्तरों पर अलग पहचान दी।
वरिष्ठ संपादकों की मजबूत रिपोर्टिंग, आठ पेज का विशेषांक बना आकर्षण
इस विशेष श्रृंखला में वरिष्ठ संपादक संजय मिश्र, अजय कुमार और रणजीत की रिपोर्टिंग खास तौर पर चर्चा में रही। वहीं, आठ पेज का विशेष नववर्ष अंक पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। गहराई, ग्राउंड रिपोर्ट और विज़ुअल प्रेज़ेंटेशन के चलते प्रतियोगी अखबार इस प्रयोग के सामने फीके नज़र आए।
देश के चार कोनों से प्रभात खबर की ग्राउंड रिपोर्ट्स
- समंदर के छोर पर उम्मीदों की भोर

कन्याकुमारी (तमिलनाडु)– अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संगम पर उगते साल के पहले सूरज के साथ नई उम्मीदों का संदेश। प्रभात खबर की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट ने इस ऐतिहासिक पल को पाठकों तक जीवंत रूप में पहुँचाया।
- नमक के रेगिस्तान से उठ रहा ऊर्जा का तूफान

कच्छ का रण (गुजरात)– भारत के सबसे पश्चिमी छोर से सफेद रण पर उगते सूरज की रिपोर्टिंग। यह कहानी सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि ऊर्जा, विकास और नए भारत के आत्मविश्वास को दर्शाती है।
- सूरज का पहला उजियारा यहीं से…

डोंग और काहो (अरुणाचल प्रदेश)– साल के पहले सूर्योदय के बाद, चीन सीमा पर बसे भारत के पहले गांव काहो तक प्रभात खबर की टीम पहली बार पहुँची। दुर्गम पहाड़, सीमावर्ती हालात और रिपोर्टरों का जज़्बा—इस ग्राउंड रिपोर्ट ने पाठकों को देश के आख़िरी छोर से जोड़ दिया।
कंटेंट इनोवेशन से बढ़ी अखबार की विश्वसनीयता
स्थापना दिवस से लेकर नववर्ष तक प्रभात खबर की ये पहलें इस बात का संकेत हैं कि अखबार अब सिर्फ खबर नहीं, अनुभव और दस्तावेज़ी पत्रकारिता पर जोर दे रहा है। पाठकों के बीच यह संदेश गया कि प्रभात खबर ग्राउंड से जुड़ी, सोच-समझकर की गई पत्रकारिता की ओर लौट रहा है।


