दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने पर ‘प्रभात किरण’ के मुद्रक, प्रकाशक, संपादक व पत्रकार के खिलाफ मुकदमा

13 फरवरी 2016 को प्रकाशित की थी खबर, 16 फरवरी 2016 को अदालत की शरण ली, लगभग 33 माह बाद अदालत ने दर्ज किया प्रकरण….

इंदौर 24 दिसंबर। मध्यप्रदेश के इंदौर की एक अदालत ने आज एक सांध्य दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर में एक दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में पीड़िता के द्वारा दायर निजी परिवाद पर आज अखबार के मुद्रक-प्रकाशक, संपादक और एक पत्रकार के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया हैं।

श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) श्रीमती साक्षी मलिक की अदालत ने प्रकरण दर्ज करते हुये आरोपियो को आगामी 1 जनवरी को अदालत के समक्ष पेश करने के आदेश संबंधित थाना पुलिस को दिये हैं। अदालत ने आरोपियों की हाजरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तीनो के विरूद्ध जमानती वारंट भी जारी किया हैं।

पीड़िता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे के अनुसार 13 फरवरी 2016 को आरोपों से घिरे अख़बार ने पीड़िता के साथ हुये यौनाचार के संबंध में एक खबर प्रकाशित की थी। जिसमे पीड़िता की पहचान उजागर दी गयी थी। जिससे पीड़िता की नौकरी चली गयी। उसकी सामाजिक और मानसिक प्रतिष्ठा धूमिल हुयी।

पीड़िता पहुंची अदालत

अधिवक्ता कुन्हारे ने बताया खबर प्रकाशित किये जाने के बाद पीड़िता की नौकरी चली गयी जिससे व्यथित होकर उसने 6 फरवरी 2016 को अदालत की शरण ली। अदालत द्वारा प्रस्तुत परिवाद पर संबंधितों के बयान और साक्ष्यों के बाद प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर आज प्रकरण दर्ज किया गया हैं।

आईपीसी की धारा 228 क में दर्ज हुआ प्रकरण

श्री कुन्हारे के अनुसार अदालत ने अख़बार के मुद्रक और प्रकाशक सुनील सोजतिया संपादक प्रकाश पुरहित और खबर लिखने वाले (तत्कालीन अख़बार में कार्यरत पत्रकार) अंकुर जायसवाल के खिलाफ भारतीय दंड सहिता की धारा 228 क के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया हैं। मामले में तीनो आरोपियों पर अपराध सिद्ध होने पर इन्हे अधिकतम दो वर्ष का कारावास और अर्थदंड की सजा से दण्डित किया जा सकता हैं।



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