गर्मियों में छह माह के लिए पहाड़ में बस जाते हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ! इस दौरान खाने खिलाने मिलने जुलने का कार्यक्रम चलता रहता है। नैनीताल के रामगढ़ में कई पत्रकार भी बसते हैं जिसमें से एक हैं संजय वोहरा। पढ़िए प्रदीप जी की उनके बारे में एक लेटेस्ट एफबी पोस्ट-
प्रदीप सौरभ-
मिलाई और विदाई का सिलसिला रामगढ़ में जारी है। दिल्ली के पुराने साथी वरिष्ठ पत्रकार, खतरों के खिलाड़ी, पर्यावरण के प्रति जागरूक संजय वोहरा, अपनी जीवन संगनी नीता के साथ बुलेट से घर आए। संजय भाई बीते एक साल से नैनीताल के एक छोटे से गांव नाथुआ खान में रहते हैं।
रामगढ़ से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। अब वे दिल दिमाग से पूरे उत्तराखंडी हो गए हैं। उन्होंने देश के शीर्ष अखबारों और चैनलों में उच्च पदों पर काम किया है। वैसे वे कश्मीर में भी बसने गए थे, लेकिन किन्हीं परिस्थितियों के चलते उन्हें द्रास छोड़ना पड़ा था।
इसे यों भी कहा जा सकता है कि उन्हें वहां से जबरिया खदेड़ा गया। वे स्वभाव से दुस्साहसी हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने को ढाल लेते हैं। अब उनका इरादा उत्तराखंड में ही बसने का है। नाथुआ खान के बच्चों के साथ वे सक्रिय हैं। पर्यावरण को ले लेकर उनको जागरूक कर रहे हैं।
पहाड़, नदी, झरने वनस्पतियों से उनको बेइंतहा मोहब्बत है। उनके पास किस्से कहानियों की खान है। एक से एक रोचक किस्से। रिश्ते नाते बहुत जल्द ही बना लेते हैं। किसी को भी चुटकी बजाते ही अपना बनाना उनके दाएं हाथ का खेल है।
यही खासियत उनकी पत्नी नीता की भी है। नीता सुन और बोल नहीं सकती हैं। लेकिन बातूनी बहुत हैं। अपने अंदाज में सब अभिव्यक्त कर देती हैं औऱ समझ भी लेती हैं। मेरी अम्मा से घंटों बतियाती है। कुक और मेहमाननवाज भी शानदार है। अम्मा के लिए बेहतरीन केक बना कर लाई।


संजय और नीता को राजमा चावल बहुत पसंद है। इसीलिये मैंने उनके लिए राजमा चावल बनाया। राजमा में मैंने एक ट्विस्ट दिया। रानीखेत से पहाड़ी लाल लोबिया और मुनस्यारी के छोटे वाले राजमा लाया था। दोनों को बराबर की मात्रा में मिलाकर प्याज, टमाटर, खड़े मसाले आदि डालकर बनाया। निराला स्वाद पैदा हुआ।
दोनों को मेरा ये ट्विस्ट पसंद आया। दो तीन घंटे कब बीते सचमुच पता ही नहीं चला। आने के लिए दोनों का शुक्रिया।
प्रदीप सौरभ और संजय वोहरा की ये जुगलबंदी देखिए-


