वरिष्ठ मीडिया हस्ती डॉ. प्रणय रॉय एक बार फिर अपने काम करने के अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। एनडीटीवी से अलग होने के बाद उन्होंने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म “डिकोडर” के जरिए नई शुरुआत की है और आज भी उसी जुनून के साथ मैदान में सक्रिय हैं।
पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में घूमकर खुद मोबाइल से इंटरव्यू रिकॉर्ड करते नजर आ रहे डॉ. रॉय नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक मजबूत संदेश दे रहे हैं—पत्रकारिता सिर्फ स्टूडियो या बड़े सेटअप तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत तक पहुंचना ही इसकी असली ताकत है।
70 की उम्र पार करने के बावजूद उनका यह जज़्बा यह साबित करता है कि सच्चा पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता। वे न तो थके हैं और न ही पीछे हटे हैं, बल्कि बदलते दौर के साथ खुद को ढालते हुए डिजिटल पत्रकारिता में भी उतनी ही मजबूती से सक्रिय हैं।
डॉ. प्रणय रॉय का यह अंदाज़ उन्हें आज भी खास और प्रासंगिक बनाता है—एक ऐसे पत्रकार के रूप में, जो हर दौर में अपने काम और सोच से नई मिसाल कायम करता है।
ये सीनियर जर्नलिस्ट प्रणय रॉय हैं। कभी NDTV के मालिक हुआ करते थे। फिर वक्त बदला और व्यवस्था के खेल में चैनल इनके हाथ से छीन लिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई अब देखिए इनके एक हाथ में माइक, दूसरे में मोबाइल। न कोई बड़ा स्टूडियो, न भारी-भरकम सेटअप फिर भी ज़मीन पर डटे हुए हैं। सवाल ये है कि आखिर इसकी ज़रूरत क्या है? आराम से घर बैठ सकते थे लेकिन शायद यही फर्क होता है नौकरी और पत्रकारिता में। व्यवस्था चाहे जितनी बदल जाए सच्चा पत्रकार रास्ता खुद बना लेता है। -तनसीम हैदर
उन्हें पैसों की जरूरत नहीं है। 76 साल की उम्र में भी भारतीय न्यूज़ मीडिया के दिग्गज प्रणय रॉय को आगे बढ़ाने वाली चीज़ कुछ और ही है—पत्रकारिता के काम के प्रति उनका शुद्ध जुनून। -संजय किशोर
Salute to Dr Pranaya Ray after NDTV he has his Digital Platform Dekoder and moving around West Bengal in the same spirit having Mobile to record his own interview.A msg for the new age journalists from the the man in his 7o’s .He is nt a looser but iconic in his approach as usual. -मनोरंजन मिश्रा
बृजेश झा-

गौर से देखिए इस इंसान को। देश के प्रख्यात पत्रकारों में शुमार और कभी एनडीटीवी के मालिक रहे प्रणव राय जी को। इन्होंने ने ही Ravish Kumar Manoranjan Bharati Kadambini Sharma Sikta Deo Parimmal K Sinha जैसे सैकड़ों पत्रकारों को सींचा, मौका दिया जो पत्रकारिता जगत के आइकॉन हैं।
आज समय देखिए 70 साल के हो चले प्रणव राय जी अपने डिजिटल पत्रकारिता करते हुए बंगाल चुनाव कवर करने पहुंचे हैं। एक आलीशान जिंदगी जीने वाले इंसान का समय कैसे गुलाटी मारता है इनसे सबक लेना चाहिए। समय किसी का नहीं।


