टेलीग्राफ अखबार ने इलाहाबाद की चुनावी लड़ाई को क्या खूब समझाया है, आप भी पढ़ें और आंखें खोलें!

Nitin Thakur

लोकसभा चुनाव बीजेपी के लिए नाक की लड़ाई बन चुका है. खास तौर पर यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए पिछली बार हासिल की गई बढ़त को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है. इस अहम जंग का एक मोर्चा प्रयागराज में खुला हुआ है जिसका नाम इलाहाबाद हुआ करता था. यहां बीजेपी ने कभी कांग्रेस की कद्दावर रहीं रीता बहुगुणा जोशी को टिकट थमाया है.

अंग्रेज़ी अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट की मानें तो जोशी की नैया पार लगाने के लिए बीजेपी जेल में बंद हत्या आरोपी अतीक अहमद तक की मदद ले रही है. अखबार की रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता का हवाला दिया गया है जिसने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि संगम में आयोजित अर्धकुंभ का प्रचार भी बीजेपी की सहायता नहीं कर सका इसलिए अब जेल में बंद अतीक अहमद मदद की मदद ली जा रही है. माफिया डॉन के समर्थक उसे इलाहाबाद का मुगले आज़म और आदित्यनाथ का लाड़ला कहते हैं क्योंकि रीता बहुगुणा जोशी की जीत के लिए जिस मुस्लिम आधार की ज़रूरत है उसे पाने के लिए अतीक अहमद के साथ शहर के राजा जैसा व्यवहार किया जा रहा है.

अतीक बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या और एक स्थानीय कॉलेज के स्टाफ की हत्या के प्रयासों के आरोप में कैद है. अप्रैल 2017 में उसे नैनी से देवरिया की जेल में ट्रांसफर किया गया था ताकि वो अपने गृहज़िले से दूर रहे. अतीक पर काबू पाने के सारे प्रयास तब विफल होते दिखे जब दिसंबर 2018 में उस पर लखनऊ के एक व्यापारी को किडनैप करने के सनसनीखेज़ आरोप लगे. व्यापारी को ना सिर्फ अगवा करके देवरिया जेल के अंदर लाया गया बल्कि पीड़ित ने बताया कि उसके साथ मारपीट करके संपत्ति के कागज़ात पर जबरन दस्तखत करा लिए गए. मीडिया में खबर फैली तो नाराज़ मुख्यमंत्री ने अतीक को बरेली जेल भिजवाने के आदेश दिए. अप्रैल महीना आते-आते सौ गंभीर आरोप झेल रहे अतीक अहमद को एक बार फिर उसके गृहज़िले की नैनी सेंट्रल जेल में ही भिजवा दिया गया.

द टेलीग्राफ से आरएसएस के सदस्य ने बताया कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि चुनाव में अतीक की मदद ली जा सके. उसने अपना दर्द कुछ यूं ज़ाहिर किया- हमारी स्थिति दयनीय है. हम 1998 में यहां से मुरली मनोहर जोशी के दूसरे चुनाव में काम नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्होंने हमारा अपमान किया था मगर नागपुर से हम पर दबाव बनाया गया. हमने 1999 और 2004 में अपना काम किया लेकिन जब वो हारे तो राहत की सांस ली. इस बार भी स्थिति वही है जब हमारी कंडीशनिंग जेल में बंद माफिया डॉन का सहयोग करने की इजाजत नहीं दे रही पर हमें ऐसा करना पड़ रहा है.

सूत्रों के मुताबिक अतीक के समर्थक और उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन पुराने इलाहाबाद के इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं से बीजेपी का साथ देन की अपील कर रहे हैं.

इलाहाबाद के निवासी राजेश कुमार शुक्ला के मुताबिक जिस तरह अतीक को बरेली से नैनी जेल शिफ्ट किया गया उससे बीजेपी और आदित्यनाथ के माफिया डॉन के साथ बदलते समीकरण समझे जा सकते हैं. अगर बीजेपी प्रत्याशी यूपी में हारे तो ज़ाहिर है योगी के नेतृत्व पर सवाल ज़रूर खड़े होंगे. ऐसे में वो अपनी कुर्सी बटाने की हर कोशिश करेंगे.

दरअसल रीता बहुगुणा जोशी योगी आदित्यनाथ की ही तरह उत्तराखंड से संबंध रखती हैं. वो जिस ब्राह्मण समाज से आती हैं उसकी बड़ी संख्या स्थानीय ब्राह्मण नेता और कांग्रेस उम्मीदवार योगेश शुक्ला को पसंद करती है. यही बात बीजेपी को परेशान कर रही है. वैसे शुक्ला 2009 में बीजेपी के ही प्रत्याशी रह चुके हैं.अब कहा जा रहा है कि वोटों की कमी को पूरा करने के लिए मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति बनाई गई है जिसके लिए अतीक अहमद से सहायता ली जा रही है.

वैसे खुद अतीक अहमद ने भी जेल से ही लोकसभा चुनाव प्रत्याशी के तौर पर वाराणसी से पर्चा भरा है. इस लोकसभा क्षेत्र से पीएम मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. चुनाव विश्लेषकों में से कई कयास लगा रहे हैं कि ऐसा अतीक ने मुस्लिम वोटों को बांट कर मोदी को फायदा पहुंचाने के लिए किया है.

द टेलीग्राफ से बात करते हुए एक बीजेपी नेता ने कहा है कि यूपी सरकार में मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और नंद गोपाल नंदी भी रीता के चुनाव में खास रुचि नहीं दिखा रहे. जहां सिद्धार्थनाथ अपने लिए टिकट मांग रहे थे वहीं नंदी अपनी पत्नी और इलाहाबाद की मेयर अभिलाषा गुप्ता के लिए टिकट मांग रहे थे. दोनों ही शहर की राजनीति के नए शक्ति केंद्र के तौर पर उभर रहे हैं और रीता ने उनसे टिकट का मौका छीन कर दो विरोधी बना लिए हैं.

सोशल मीडिया के चर्चित लेखक और पत्रकार नितिन ठाकुर की एफबी वॉल से.

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