150 की कोविशील्ड वैक्सीन 600 रुपए में बूस्टर डोज के रूप में अदार पूनावाला से लगवाना होगा!

गिरीश मालवीय-

150 रु की कोविशील्ड वैक्सीन 600 रुपए में बूस्टर डोज के रूप में लगवाइए और अदार पूनावाला को देश का पहले नंबर का अमीर बनने में मदद कीजिए, यही है न्यू इंडिया…

जी हां ! बधाई हो आपको, जैसा कि आपको पहले ही बताया था कि बूस्टर डोज भी लगवानी होगी तो वही हुआ है कल मोदी सरकार ने 18 साल से अधिक उम्र के सभी व्यस्कों को बूस्टर खुराक (Booster Dose) ठोकने का फरमान जारी किया है.

लेकिन इस बार यह डोज मुफ्त में नही लगाई जाएगी इसके लिए आपको अपनी जेब से पैसे देने होंगे, देश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी को कोविशील्ड ही लगी है इसके बूस्टर डोज की कीमत 600 रुपये + टैक्स रखी गई है जबकि पिछले साल यही कोविशील्ड वैक्सीन की एक डोज केंद्र सरकार ने सिर्फ 150 रुपये की दर से खरीदी थी.

बूस्टर डोज में भी वही कंटेंट है जो पहली और दूसरी डोज में था, कुछ भी अलग नही हैं, चाहें तो मोदी सरकार पिछली बार जेसे बल्क डील में 150 की वैक्सीन खरीद कर बहुत से बहुत 200 रु मे स्वयं बेच सकती हैं, लेकिन ऐसा न करके वह सीरम इंस्टिट्यूट को देश की जनता से चार गुना कीमत दिलवाकर लूट की खुली छूट दे रही है.

एक बात और समझ लीजिए…….कहने को सरकार कह रही है कि बूस्टर लगाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन आप भी जानते हैं पहली दोनो डोज भी कौन सी अनिवार्य थी, फिर भी हम सबको लगवाना ही पड़ी. तो ये भी लगवाना ही होगी. कल अदार पूनावाला ने अपने ट्वीट में कहा है कि “भविष्य में सुरक्षा और यात्रा प्रतिबंधों के संदर्भ में, बूस्टर डोज उपयोगी साबित होंगे.’

यानि खेल पूरी तरह से सेट है, नया वेरिएंट भी आने को ही है. सीधे से कहे तो डर का धंधा है, बाकि हम तो हैं ही कांस्पीरेंसी थ्योरी वाले.

मुकुंद हरि-

क्या आप जानते हैं कि फ़ाइजर और मॉडर्ना जैसी वैक्सीन की औसत उत्पादन लागत करीब 75/- रुपये है।

ख़ैर, आज हमारे देश में अब कोविशील्ड और कोवैक्सीन ने कोरोना बूस्टर डोज की कीमत घटाकर 225 रुपये की है।

18 साल से अधिक उम्र वाले लोग 10 अप्रैल से कोरोना की बूस्टर डोज़ लगवा सकते हैं और अब कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों ने ही कोरोना बूस्टर डोज़ की कीमत को कम करने का ऐलान कर दिया है।

दोनों ही कंपनियों के वैक्सीन की कीमत 225 रुपये होगी।

कोविशील्ड ने अपनी कीमत 600 रुपये से घटाकर 225 रुपये की है। वहीं, कोवैक्सीन की क़ीमत 1200 रुपये से घटाकर 225 रुपये की गई है।

  • आख़िरकर, जब ये हो सकता था तब इसके पहले इतनी अधिक कीमतें किस आधार पर तय की गई थीं? क्योंकि जब लोग चुप रहेंगे तो ऐसी चोट्टी और लुटेरी सरकार में सब कुछ मुमकिन है।

इसलिए, कहते हैं कि –
“कौन कहता है कि आसमाँ में सुराख़ नहीं होता,
इक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।”



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