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प्रियदर्शन की आनंद प्रधान के साथ सेल्फी और लार्ड कार्नवालिस का मक़बरा!

प्रियदर्शन-

दो दिन से ग़ाज़ीपुर में हूं। मंथर बहती गंगा देखी, उसका चौड़ा पाट देखा, अंग्रेज़ों के ज़माने में बने अफ़ीम कारखाने की कांटेदार बाड़ लगी पिछली दीवार देखी, दीवार के पार उगा झाड़-झंखाड़ देखा, तंग गलियों टूटी सड़कों के बीच हिचकोले खाते ई रिक्शे देखे और लॉर्ड कार्नवालिस का मक़बरा भी देखा।

यह कार्नवालिस अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने से लेकर आयरलैंड में भी सैन्य कार्रवाई करने वालों में शामिल था। अमेरिका में उसे सरेंडर करना पड़ा था। भारत आकर अंग्रेजपरस्त जमींदारी लागू करने का काम भी इसी ने किया। भारत में खेती की बदहाली और अकाल का सिलसिला यहीं से शुरू माना जाता है।

इसने मराठों और हैदराबाद के निज़ाम की फ़ौजों की मदद से टीपू सुल्तान को श्रीरंगपट्टनम में घेर कर उसके बेटों को बंधक रखते हुए समझौता करने को मजबूर किया था। टीपू वह सुल्तान था जिससे अंग्रेज़ सबसे ज़्यादा घबराते थे। सात साल बाद अपने क़िले को बचाते हुए टीपू शहीद हुआ था।

इसके छह साल बाद 1805 में यह कार्नवालिस कलकत्ता से दिल्ली लौट रहा था कि ग़ाज़ीपुर के पास बीमारी से उसकी मौत हो गई और उसका मक़बरा बन गया।

इसके 220 साल बाद लॉर्ड आनंद प्रधान के साथ आज मैं यह मक़बरा देखने पहुंचा था। आनंद जानी दोस्त हैं और बरसों बाद मिले। दिलों पर राज करते हैं। दिल्ली से ग़ाज़ीपुर और ढेंकनाल तक यह हुकूमत चलती है।

सेल्फ़ी भी ली। (जो लेनी नहीं आती है।)

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