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आज के अखबार : पुलवामा का आतंकी (अब) ढेर, NTA ने कहा पर्चा हमसे लीक नहीं हुआ – लीड है या चापलूसी?

अखबारों में जो खबरें हैं उनसे अलग सरकार के प्रचार को कम महत्व नहीं मिला है। इनमें नशा मुक्त जम्मू कश्मीर का विज्ञापन भी दिलचस्प है। पुलवामा का मास्टर माइंड अब मारा गया पहले पन्ने पर लेकिन मणिपुर की खबर पहले पन्ने पर नहीं होती है। आज की खबर तो सरकार की उपलब्धि है लेकिन मणिपुर के मामले में सरकार को उसकी भी जरूरत नहीं है।

संजय कुमार सिंह

आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, पुलवामा हमले के लिए विस्फोटक मुहैया कराने वाला आंतकी हमजा पीओके में ढेर हो गया। उपशीर्षक है, अज्ञात हमलावरों ने मारी गोली। नवोदय टाइम्स में यह सेकेंड लीड है और उपशीर्षक है, हमजा बुरहान को पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने मारी कई गोलियां। देशबन्धु में यह पहले पन्ने पर है, दो कॉलम की खबर है लेकिन छोटी सी है। शीर्षक है, पुलवामा का गुनहगार हमजा बुरहान ढेर। कहने की जरूरत नहीं है कि पुलवामा हमला भारत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई थी। 40 से ज्यादा सैनिक शहीद हुए थे पर उसका गुनहगार अब मारा गया। ऑपरेशन सिन्दूर में भी बच गया और आप जानते हैं कि ऑपरेशन सिन्दूर, कब, कैसे, किसलिए शुरू हुआ था और कैसे अचानक बंद हो गया। उसके बाद ट्रम्प ने युद्धविराम कराने का दावा किया। कई बार कहा और भारत सरकार ने यह नहीं बताया कि भारत के युद्ध विराम की खबर अमेरिका ने क्यों दी और प्रधानमंत्री ने उसपर कुछ कहा क्यों नहीं। बाद में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कंप्रोमाइज्ड हैं और तब भी पता नहीं चला कि पुलवामा का अपराधी पहचाना जा चुका है और ना मारा गया है और ना भारत सरकार ने पाकिस्तान से उसे सौंपने की मांग की है। आज टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर है कि अप्रैल 2022 में गृह मंत्रालय ने अर्जुमंद गुलजार दर उर्फ हमजा बुरहान को आधिकारिक तौर पर यूएपीए के तहत आतंकी घोषित किया था। इससे पहले की जांच में पुलिस ने पुलवामा हमले में इसकी सीधी भूमिका स्थापित की थी। कायदे से इसे पाकिस्तान से मांगा जाना चाहिए था यह पता किया जाना चाहिए था कि हमले की साजिश किसलिए रची गई पर वह पाकिस्तान में आपसी झगड़े में मारा गया और पुलवामा की साजिश अगर कोई हो तो खुलासे की उम्मीद खत्म हो गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर से लगता है कि हत्या के पीछे पैसों का विवाद था और उसे स्थानीय हिटमैन ने मारा। इस तरह, हत्या में भारत के लिए उपलब्धि जैसी कोई बात नहीं है। वह अभी तक जिन्दा था यही बड़ी बात है लेकिन खबर को बड़ी बनाने के लिए अमर उजाला ने लिखा है, उसकी सुरक्षा में तैनात थे आठ कमांडो। इसके बावजूद वह मारा गया, भारत सरकार ने प्रत्यर्पण की मांग नहीं की।

Poster for NASHA MUKT J&K 100 Days Mega Awareness Campaign with official logos, a man, and a deer holding a torch; highlights campaign stats and a QR code for more information (Department of Information & Public Relations, J&K).
हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित जम्मू कश्मीर का विज्ञापन

इससे पहले 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमलों (26/11) में आतंकी अजमल कसाब को जिन्दा पकड़ लिया गया था। कोई चार साल बाद में 2012 में उसे फांसी दे दी गई। इस अजमल कसाब को  बिरयानी खिलाने की कहानी चर्चित रही। मुंबई हमले के विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने बाद में स्पष्ट किया था कि कसाब को जेल में बिरयानी दिए जाने की बात एक कहानी और राजनीति थी। उन्होंने स्वीकार किया कि कसाब के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति की लहर को रोकने और मामले की गंभीरता को बनाए रखने के लिए मीडिया के सामने यह बात कही गई थी। जेल अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि कसाब को कभी बिरयानी नहीं परोसी गई थी। उज्ज्वल निकम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2024 के लोकसभा चुनावों में मुंबई उत्तर-मध्य निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। हार गए तो राज्यसभा का सदस्य बना दिया गया। दूसरी ओर, भाजपा आतंकवाद पर अपने सख्त रुख का प्रचार करती है और जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करने का दावा करती है। दिलचस्प यह है कि पहलगाम का हमला 22 अप्रैल को हुआ था और इसके तीन आरोपी फैजल जट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी—को भारतीय सुरक्षा बलों ने जुलाई में ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत श्रीनगर के बाहरी इलाके में मार गिराया था। मुझे यह समझ में नहीं आया कि पाकिस्तान से आकर हत्या करके फरार हो जाने वाले ये तीन आतंकी सुरक्षा बलों के पीछे लगे होने के बावजूद तीन महीने तक कहां खाए, कहां रहे और कैसे बच पाए। सरकार कुछ बताती नहीं है और जो बताती है वह किसी अगर-मगर या सवाल के बिना जस के तस छप जाता है। आज की खबर भी ऐसी ही है। फिर भी यह इंडियन एक्सप्रेस में (सिंगल कॉलम) पहले पन्ने पर है।

हिन्दुस्तान टाइम्स में आज ही पहलगाम हमले पर पाकिस्तान की भूमिका के बारे में बताया गया है जो एनआईए ने बताया है। हिन्दुस्तान टाइम्स में आज एक विज्ञापन भी खास है। जम्मू व कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की तस्वीर के साथ छपे इस विज्ञापन का शीर्षक है, नशा मुक्त जेएंडके। असल में वहां 100 दिन का मेगा जागरूकता अभियान चल रहा है और इसे दिल्ली के लोगों को बताना कितना जरूरी है आप समझ सकते हैं। जाहिर है, भाजपा सरकार की प्राथमिकताएं अलग हैं, कार्यशैली तो है ही। इसमें खबरों की परिभाषा बदल सी गई है। अमर उजाला की इस लीड के मुकाबले आज का सबसे बड़ा और पसंदीदा प्रचार है, मंत्रिपरिषद की बैठक। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड के अनुसार, इस बैठक में सुधार, डिलीवरी और पश्चिम एशिया फोकस में रहा। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक और बढ़िया प्रचार है। इसी बैठक की खबर का शीर्षक है, पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री ने सरकार से कहा, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का पता लगाएं। इसी बैठक का तीसरा शीर्षक और प्रचार दि एशियन एज में है, मोदी ने 2047 तक अगली पीढ़ी के सुधार, बहुमुखी विकास के प्रति जोर दिया। आज के लीड और शीर्षक में नवोदय टाइम्स का शीर्षक भी खास है। यह सरकार का प्रचार हो तो हो, नीट के पर्चे लीक होने पर एनटीए की चोरी और सीनाजोरी भी उजागर करता है। शीर्षक है, एनटीए महानिदेशक बोले, हमारे सिस्टम से नहीं लीक हुआ पेपर। इसका मतलब यही होता है परीक्षा के पर्चे एनटीए के अलावा किसी अन्य को भी मालूम होते हैं और वहां से लीक हुए होंगे। आप जानते हैं कि जो पर्चे लीक हुए वे प्रश्नपत्र की तरह नहीं थे बल्कि गेस पेपर के रूप में घूम रहे थे या बेचे खरीदे जा रहे थे। आप जानते हैं कि पिछले एनटीए प्रमुख को ईनाम मिला था और तब परीक्षा रद्द नहीं हुई थी। इस बार रद्द तो पहले ही करनी पड़ी है और यह स्थापित हो जाए कि एनटीए से लीक नहीं हुई तो इस प्रमुख को भी ईनाम मिलने की संभावना बनती है। इस लिहाज से आज यह खबर भी दिलचस्प और महत्वपूर्ण है।

अमर उजाला में यह खबर नहीं है और एक अलग खबर का शीर्षक है, नीट पेपर लीक में लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ गिरफ्तार। उपशीर्षक है, डॉ. मनोज ने बेटे के लिए खरीदे थे लीक प्रश्नपत्र। इस खबर के आलोक में एनटीए प्रमुख का जवाब कितनी बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है – आप समझ सकते हैं। अमर उजाला में कैबिनेट की बैठक वाली खबर का शीर्षक भी प्रधानमंत्री की तारीफ करने वाला है, सरकारी कामकाज में लेटलतीफी पर पीएम सख्त, मंत्रियों पर तेजी से परिणाम देने का अल्टीमेटम। जब हरदीप पुरी का इस्तीफा हुआ नहीं है, धर्मेन्द्र प्रधान देंगे – इसके कोई आसार नहीं तो लेटलतीफी पर पीएम का सख्त होना बनता है और दुनिया भर में सम्मानित हो रहे प्रधानमंत्री से ऐसी सख्ती और अल्टीमेटम की उम्मीद की ही जानी चाहिए। अखबार उसी का प्रचार कर रहे हैं। देशबन्धु की लीड टैक्सी चालकों की मांग है। उनका कहना है कि ईंधन की कीमत बढ़ने के बाद किराया भी बढ़ाया जाना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक भी अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, पीएमएलए के आरोपी को भी अधिकार है कि उसे सुना जाए। द हिन्दू की लीड इबोला संकट पर है। इसके अनुसार, भारत अफ्रीका का दिल्ली सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। द हिन्दू में पहले पन्ने पर मणिपुर की खबर भी है। खबर के अनुसार चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास पुलिस से लूटे गए हथियार बरामद हुए हैं।द टेलीग्राफ की लीड बंगाल सरकार के नए आदेश की है। घुसपैठियों के मामले में मुख्यमंत्री ने रेल पुलिस से कहा है कि जो घुसपैठिये गिरफ्तार किए जाएं उन्हें कोर्ट में पेश करने की जरूरत नहीं है सीधे सीमा पर भेज दिया जाए। दिल्ली में यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में भी है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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