हमारी-आपकी चुप्पियों के बीच एक वरिष्ठ पत्रकार का यूं अचानक चले जाना (देखें वीडियो)

वरिष्ठ पत्रकार पुनीत कुमार पचास की उमर में चल बसे… वो सहारा समय में नेशनल हेड रह चुके हैं. काफी समये से वो फ्री लांस जर्नलिज्म कर रहे थे. आईआईएमसी से पासआउट और कई चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रहे पुनीत की मृत्यु कुछ दिन पहले हुई लेकिन चर्चा बस पुनीत की एफबी वॉल तक सीमित है. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत ने पुनीत को यूं याद कर दी श्रद्धांजलि…  देखें वीडियो…

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  • 50 की उम्र जाने वाली नहीं होती. लेकिन पुनीत कुमार चले गए. पत्रकार थे. इसलिए जाने की चर्चा केवल पुनीत की एफबी वॉल तक सीमित है. आरआईपी के ठीक नीचे हैप्पी बर्थडे लिखा दिखता है. कामन फ्रेंड्स की एक लिस्ट साइड में लटकी है. टाइमलाइन कहती है, पुनीत नोएडा से मुंबई मूव कर चुके थे. वैसे, उनकी मौत नोएडा में हुई. गाजीपुर श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ. पुनीत की तस्वीरें शेष हैं. साथ ही खुद को सांत्वाना देने वाले उनके परिचितों के संदेश. ये भी सच है कि रंगमंच की कठपुतलियां आजकल बहुत व्यस्त हैं. वक्त कहां किसी के पास. फिर भी किसी ने पुनीत की एफबी वॉल पर सूचनार्थ डाल दिया है- पहली नवंबर नोएडा सेक्टर 55 कम्युनिटी सेंटर में शांति पाठ और प्रसाद पगड़ी है. आईआईएमसी से पढ़े, बीआईटीवी समेत ढेर सारे चैनलों में काम कर चुके और सहारा समय चैनल के नेशनल हेड रह चुके पुनीत के बारे में तरह-तरह की बातें आ रही हैं. सिगरेट बहुत पीते थे. बेरोजगार थे. सेंसटिव थे. हंसमुख थे. कम बोलते थे. प्रोग्रामिंग और नए कांसेप्ट पर जबरदस्त पकड़ थी. लिखते अच्छा थे. डिप्रेशन में थे. अकेले हो गए थे. इन तमाम बातों में एक बात तो सच है. वो आदमी बहुत अच्छा था, इसलिए तनहा था. वो सच्चा पत्रकार था, इसलिए अकेला था. श्रद्धांजलि पुनीत. यशवंत, भड़ास4मीडिया से.

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