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इण्डियन एक्सप्रेस ने उत्तराखंड CM धामी पर उठाए सवाल, दागी अफसर की मलाईदार तैनाती पर बवाल

त्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने ही वन मंत्री और मुख्य सचिव के अनुरोध को खारिज करते हुए एक ऐसे अधिकारी की नियुक्ति को मंजूरी दे दी जो दागी था. अब इसी दागदार अफसर को फिर से राजाजी टाइगर रिजर्व का चार्ज सौंप दिया गया है.

बताते चलें कि दो साल पहले पेड़ों अवैध कटाई और वहां निर्माण करने के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद कॉर्बेट रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) राहुल को पद से हटा दिया गया था. इसके बाद सीएम धामी ने 8 अगस्त को एक हस्तलिखित फाइल नोटिंग के माध्यम से राहुल को राजाजी रिजर्व का निदेशक बना दिया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इसे लेकर खुलासा किया तो पूरे उत्तराखंड में हंगामा मचा हुआ है.

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कॉर्बेट में पेड़ों की अवैध कटाई और निर्माण के मामले में सीबीआई की एफआईआर में राहुल का नाम नहीं है.

इनपुट है कि कॉर्बेट से हटाए जाने के बाद राहुल को देहरादून में नॉन-फील्ड पोस्टिंग मिली. रिकॉर्ड्स से पता तलता है कि उन्हें टाइगर रिजर्व का प्रभार वापस दिलाने की दिशा में पहला कदम 18 जुलाई को उठाया गया था. तब वन मंत्री ने मुख्यमंत्री की मंजूरी के साथ राजाजी रिजर्व के तत्कालीन निदेशक सहित 12 आईएफओएस की प्रस्तावित स्थानांतरण सूची को संशोधित किया था. संसोधित लिस्ट में राहुल का नाम भी जोड़ा गया था.

हालांकि राज्य के प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव और वन मंत्री के माध्यम से एक नोट भेजकर एक सप्ताह के भीतर राहुल के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही, सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामले को देखते हुए नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी.

24 जुलाई को वन मंत्री ने वन संरक्षक (भागीरथी सर्कल) को राजाजी का अतिरिक्त प्रभार देने वाला संशोधित प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेज दिया,लेकिन मुख्यमंत्री धामी ने अपने इस हस्तलिखित नोट के साथ राहुल की नियुक्ति की पुछ्टी की. उन्होंने लिखा कि राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक के पद पर सीसीएफ राहुल की नियुक्ति प्रस्तावित थी और उसे मंजूरी दे दी गई है. इसका आदेश जारी करें. एक दिन के भीतर ही सरकार ने नियुक्ति आदेश जारी कर दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस ने दिसंबर 2021को बताया कि कैसे राज्य सरकार ने केंद्र से मंजूरी मिलने से पहले ही कॉर्बेट में बाघ सफारी पर काम शुरू कर दिया था. रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे राज्य ने कानूनी, प्रशासनिक या वित्तीय मंजूरी के बिना 157 करोड़ रुपये का निर्माण कार्य शुरू किया.

जनवरी 2022 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अवैध गतिविधियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया. अप्रैल 2022 में राज्य ने दो वन अदिकारियों को निलंबित कर दिया और राहुल को कॉर्बेट के निदेशक पद से हटा दिया गया था. राहुल देहरादून में प्रधान मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय से संबद्ध थे.

2023 में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इस साल मार्च में शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड सरकार को कड़ी फटकार लगाई और आदेश दिया कि पारिस्थितिक क्षति की मरम्मत के तरीके सुझाने के लिए एक समिति गठित की जाए.

वहीं, राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि मीडिया में ऐसी खबरें आईं की सीएम ने राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक की नियुक्ति के लिए मंत्री, मुख्य सचिव और बाकी सभी को दरकिनार कर दिया है. यह बिल्कुल गलत है. यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है. जहां तक मीडिया में सीबीआई जांच की रिपोर्ट का सवाल है तो कई मामलों में कई लोगों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है. विभाग के सभी लोगों को दोषी नहीं माना जा सकता है.

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