
गोरखपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) पीडब्ल्यूडी में ठेकेदारों द्वारा बेहद कम दरों पर टेंडर डालने का मामला सामने आया है। पीडब्ल्यूडी खंड-दो में कोइराजा ब्लॉक के कोठा घाट स्थित पंटून पुल के मेंटेनेंस और मरम्मत कार्य के लिए जारी टेंडर में एक ठेकेदार ने करीब 75.31 प्रतिशत कम दर पर बोली लगाकर सभी को चौंका दिया है।
बताया जा रहा है कि इस कार्य के लिए अनुमानित लागत 18 लाख 98 हजार 748 रुपये तय की गई थी, लेकिन एक फर्म ने यह काम महज 4 लाख 68 हजार 990 रुपये 76 पैसे में करने की पेशकश की है। इतनी कम दर पर टेंडर डाले जाने के बाद विभाग के इंजीनियर भी हैरान हैं और अंदरखाने इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पंटून पुल के मेंटेनेंस और रिपेयर का यह काम पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-दो के अंतर्गत आता है। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किया गया था, जिसमें कुल पांच फर्मों ने हिस्सा लिया। मंगलवार को जब टेंडर खोला गया तो सबसे कम दर सामने आने पर अधिकारी भी चौंक गए।
जानकारी के मुताबिक सबसे कम बोली मैसर्स मां शारदा निर्माण द्वारा डाली गई, जिसने 75.30 प्रतिशत कम दर पर टेंडर भरा। अन्य फर्मों की ओर से भी भारी कट के साथ टेंडर डाले गए हैं।
टेंडर में शामिल फर्मों की स्थिति
फर्म का नाम | कोट किया रेट (रुपये में) | कट प्रतिशत
मैसर्स चंद्रमोहन उपाध्याय | 18,96,849.25 | 10%
मैसर्स ओंकार नाथ द्विवेदी | 6,09,687.98 | 67.89%
दयाशंकर त्रिपाठी कॉन्ट्रैक्टर | 5,69,814.27 | 69.99%
मैसर्स गिरिराज कुमार मिश्र | 18,89,254.26 | 50%
मैसर्स मां शारदा निर्माण | 4,68,990.76 | 75.30%
नोट: कार्य की अनुमानित लागत – 18,98,748 रुपये।
आपसी मिलीभगत की आशंका
इतने अधिक कट पर टेंडर डाले जाने को लेकर विभागीय स्तर पर आपसी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई बार ठेकेदार बेहद कम दर पर टेंडर तो ले लेते हैं, लेकिन बाद में या तो काम शुरू नहीं करते या बीच में ही अधूरा छोड़कर भाग जाते हैं। ऐसे मामलों में विभाग को दोबारा टेंडर प्रक्रिया करनी पड़ती है, जिससे सरकारी समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होती है।
अधिकारी बयान देने से बचते नजर आए
जब इस पूरे मामले को लेकर निर्माण खंड-दो के अधिशासी अभियंता अरविंद सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया और कहा कि वह इस विषय में बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
वहीं पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता राकेश वर्मा के मोबाइल नंबर 9454275527 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। बाद में पूछे गए सवालों पर भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सवालों के घेरे में टेंडर प्रक्रिया
75 प्रतिशत से अधिक कट पर टेंडर मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी कम राशि में क्या वास्तव में गुणवत्तापूर्ण काम संभव है? या फिर यह टेंडर प्रक्रिया भी पहले की तरह कागज़ों में ही सिमटकर रह जाएगी?
स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है और विभागीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
यूपी के PWD विभाग में ये क्या चल रहा है? ये कहानी गोरखपुर की है। पुल का एस्टीमेट 18.98 लाख रुपये और ठेकेदार सिर्फ 4.68 लाख रुपए में काम करने को तैयार!! यानि 75 फ़ीसदी बिलो पर!! अखबार साफ़ लिख रहा है कि इतने कम में काम लेने के बाद ठेकेदार काम ही नहीं कर रहे!!
काम अधूरा छोड़कर चल दे रहे हैं। गुणवत्ता की तो बात ही छोड़ दीजिए।
जब गोरखपुर में ये चल रहा है तो प्रदेश की दूसरी जगहों का तो भगवान ही मालिक है!!
इस ख़बर को पढ़िए और कथित ईमानदारी के दावों को प्याज के छिलकों की तरह तब तक छीलते जाइए, जब तक कि ज़ीरो टॉलरेंस के बैंगन भर्तें में गले तक उस प्याज की ख़ुशबू न घुल जाए!! -अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार

यूपी का PWD भ्रष्टाचार का ताजमहल बन चुका है। दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट को पढ़िए। कंडम पड़ी गाड़ियों तक को नहीं छोड़ा गया है। उनके नाम पर भी नोट छापे जा रहे हैं। ताजमहल इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि ये भ्रष्टाचार का सौंदर्य है। ये वाकई अजूबा है। न पहले कभी ऐसा था। न आगे कभी ऐसा हो सकेगा!! –-अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार


