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सुख-दुख

रघु राय अपनी तस्वीरों में धूल, धुआं, बादल, आग की मिस्ट्री को खूब यूज़ करते थे!

गिरिजेश वशिष्ठ-

रघु राय की फोटोग्राफी को 360 डिग्री में बांधना मुमकिन नहीं. उनकी रेंज बहुत बड़ी है. हर फोटो में कंट्रास्ट है. एक तरफ ब्लैक तो दूसरी तरफ व्हाइट. किसी फोटो में आप मिडिल टोन का कमाल देखते हैं. धूल, धुआं, बादल आग की मिस्ट्री को वो खूब इस्तेमाल करते थे.

सबसे बड़ी उनकी आर्ट थी स्टोरी टेलिंग उनके फोटो में शायद ही कभी एक कहानी मिलती हो. एक कैनवास पर कई कई कथाएं घटती नजर आती थीं. हर आब्जेक्ट की अलग कहानी. इतनी घटनाओं को एक कैनवास में सोचना और क्लिक करना. वो भी रियल टाइम.

शादी में वरमाला के समय दूल्हा दुल्हन को लोग ठहरने को बोल देते हैं. छह मुद्राएं बनवाते हैं और दूसरी तरफ वो कैप्चर करना जो सिर्फ एक सैकेन्ड बाद नहीं होगा. एक सैकेन्ड पहले भी नहीं था. फोटोग्राफी जितनी बड़ी ऑार्ट है उतनी बड़ी तपस्या भी. पूर्वानुमान प्रतीक्षा और परिश्रम. इससे भी ज्यादा दष्टि आंखों से वो देखना जो कैमरा देखेगा.

मैं दुनिया के बहुत से नामी फोटोग्राफर को फॉलो करता हूं. सबका काम देखता हूं. ज्यादातर लोगों को पास टैक्निक है और टैक्नीक से ही उनकी शैली बन गई है. वो उसी में जीते हैं. जैसे डेविड यारो वन्यजीवों के फोटो नजदीक से लेने के एक्सपर्ट हैं. उसके जुगाड़ उनके पास हैं.

कंट्रास्ट से खेलना उनका शौक है पर जो एडिटोरियल विसडम रघु राय के पास था वो दुर्लभ है. कुछ ट्रेवल फोटोग्राफर्स ने प्रभावित किया. मिचेल कनशकेविच तकनीक से ज्यादा कैमरे से भी ज्यादा आर्ट पर फोकस करते हैं. बाकी मोमेन्ट को पकड़ने की कला रघुराय जैसी कहीं नहीं दिखी. रघुराय गये नहीं हैं वो अपने हस्ताक्षर करने आए थे. गहरा असर छोड़ गए हैं. ये असर जब तक रहेगा… रघुराय रहेंगे.

रघु राय के कैमरे से निकली कुछ तस्वीरें…

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