संजय कुमार सिंह
आज मेरे नौ में से छह अखबारों में राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस और मुख्य चुनाव आयुक्त पर वोट चोरों को बचाने का उनका आरोप लीड है। दो अखबारों – हिन्दुस्तान टाइम्स और नवोदय टाइम्स में यह सेकेंड लीड है। अकेले टाइम्स ऑफ इंडिया अपवाद है। दि एशियन एज में यह चार कॉलम की लीड है। भाजपा की प्रतिक्रिया सिंगल कॉलम में है लेकिन थोड़ी लंबी। मुख्य शीर्षक है, राहुल गांधी ने फिर वोट चोरी का दावा किया, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को निशाना बनाया। द टेलीग्राफ में यह तीन कॉलम की लीड है। मुख्य शीर्षक है, मतदाताओं के नाम हटाने के ‘संदिग्ध’ आवेदन। राहुल गांधी ने कहा, चुनाव आयोग ने सीआईडी को आवश्यक सूचना नहीं दी। आप जानते हैं कि राहुल गांधी को अखबारों के पहले पन्ने पर जगह मुश्किल से मिलती है। तमाम मौकों पर ज्यादातर अखबारों ने उन्हें पहले पन्ने पर जगह नहीं दी है और उनपर आरोप या उनके खिलाफ कुछ हो तो उसे तुरंत प्रमुखता दी जाती है। आज केंचुआ की गर्दन दबी तो सांप के छटपटाने जैसी स्थिति है और ऐसे में आज राहुल गांधी की खबर पहले पन्ने पर आ गई है। प्रचारकों ने भाजपा के आरोप या पलटवार के बहाने उसका असर कम करने की कोशिश की है। फिर भी, हाइड्रोजन बम से पहले ही राहुल गांधी के आरोप का पहले पन्ने पर होना असाधारण है। खासकर तब जब प्रधानमंत्री के जन्म दिन और जीएसटी कम किये जाने के प्रचार के लिए न सिर्फ केंद्र और राज्य सरकारें बल्कि देश भर के धन्ना सेठ तिजोरी खोले बैठे है। नरेन्द्र मोदी के प्रचार के लिए विज्ञापनों पर पैसे लुटाने की प्रतियोगिता चल रही लगती है।
आज अगर राहुल गांधी पहले पन्ने पर हैं तो इसका कारण यह भी हो सकता है कि कल एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “… यह मेरा काम नहीं है। मेरा काम डेमोक्रेटिक सिस्टम को बचाना नहीं है। देश में इसके लिए संस्थाएं हैं। लेकिन वो अपना काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए मुझे करना पड़ रहा है। देश की संस्थाएं संविधान की रक्षा नहीं कर रही हैं।” यह आरोप पर्याप्त गंभीर है और पूरी तरह सही है। राहुल गांधी ने देश की जिन संस्थाओं की ओर इशारा किया है उनमें एक मीडिया भी है और आज उनकी खबर को पहले पन्ने पर होना उनकी इस बात को रेखांकित करता है। मेरे नौ अखबारों में अकेले टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को इतने लचर ढंग से छापा है। यहां यह पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर बीच में दो कॉलम की खबर है। पूरे पन्ने के विज्ञापन के पीछे के एक पन्ने पर लीड भाजपा का तथाकथित जवाब है। आरोप चुनाव आयोग पर था लेकिन भाजपा की ओर से अनुराग ठाकुर ने इसे मजाक कहा और टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे राष्ट्रीय खबरों के पन्ने पर चार कॉलम का लीड बनाया है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, ‘क्या मजाक है!’ भाजपा ने राहुल के ‘वोट चोरी’ के आरोप को खारिज किया। इस खबर का इंट्रो है, बांग्लादेश और नेपाल जैसी स्थिति बनाने की कोशिश। कहने की जरूरत नहीं है कि नेपाल और बांग्लादेश में कोई राहुल गांधी नहीं था। दोनों देशों में जो पीएम बने उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया था। दूसरी ओर, हमारे देश या प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश की सत्ता से विस्थापित शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी थी। जो भी हो, मैं अखबारों और खबरों की बात कर रहा था। टाइम्स ऑफ इंडिया पहले कह चुका है कि वह खबरों के नहीं विज्ञापनों के धंधे में है और आज उसका अधपन्ना भी कई पहले पन्ने के विज्ञापनों के बाद है और एक पाठक के रूप में मैं जानता, समझता हूं कि भाजपा की यह खबर या अनुराग ठाकुर की तस्वीर राहुल गांधी के आरोपों से पहले दिखेगी और जो पढ़ना चाहेंगे, पढ़ेंगे भी।
यहां यह भी याद दिलाया जाना चाहिये कि वंशवाद के विरोधी और वर्षों राहुल गांधी का तरह-तरह से मजाक उड़ाने वाले नरेन्द्र मोदी ने वोट चोरी के राहुल गांधी के खुलासों का जवाब देने के लिए अनुराग ठाकुर को चुना है। अनुराग ठाकुर के पिता प्रेम कुमार धूमल हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में हैं। भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष से लेकर हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष तक रहे हैं। इनके बेटे और अब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पिछली बार राहुल गांधी के खुलासे के बाद यह आरोप लगाया था कि रायबरेली, वायनाड, डायमंड हार्बर, कन्नौज आदि में भी “वोट चोरी” हुई है या कई ऐसे मतदाता हैं जो “शक के घेरे” में हैं। इस तरह इन्होंने राहुल गांधी के आरोपों की पुष्टि करते हुए भी उनका विरोध करने का ढंग किया (पार्टी ने करवाया) था। तब अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा था कि विपक्ष (कांग्रेस आदि) चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसपर कांग्रेस ने कहा था कि अनुराग ठाकुर के दावों से इस बात की पुष्टि होती है कि 2024 के लोकसभा चुनाव “फर्जी वोटर सूची” के आधार पर हुए थे। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ठाकुर ने रायबरेली, अमेठी, वायनाड जैसे इलाकों में “शक के मतदाताओं” की बात कही है तो यह साबित करता है कि राहुल गांधी के “वोट चोरी” के आरोप सही थे।
कांग्रेस ने मांग की थी कि अनुराग ठाकुर ने जो आंकड़े / डेटा पेश किये थे उन्हें सार्वजनिक करें और कांग्रेस को भी वह डेटा मिलना चाहिए। विशेष रूप से, कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया था कि ठाकुर को इतनी जल्दी आंकड़े कैसे मिल गए, जबकि कांग्रेस को एक विधानसभा क्षेत्र महादेवपुरा के आंकड़े इकट्ठा करने में महीनों लग गए थे। दिलचस्प यह भी था कि चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की शिकायतों के लिए तो शपथ पत्र दायर करने के लिए कहा और यह भी कहा कि बिना शपथपत्र आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी माफी मांगे। लेकिन चुनाव आयोग ने अनुराग ठाकुर के वैसे ही आरोपों से न तो राहुल गांधी के आरोपों को सच माना न ही अनुराग ठाकुर से शपथपत्र मांगा या माफी मांगने के लिए कहा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में अनुराग ठाकुर के आरोपों की चर्चा भी नहीं की। कांग्रेस ने यह भी कहा था कि अनुराग ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली और कन्नौज की तो बात बात की लेकिन वाराणसी की बात नहीं की जहां से प्रधानमंत्री जीते थे। पवन खेड़ा ने दावा किया कि वाराणसी की इलेक्ट्रॉनिक वोटर सूची सार्वजनिक होनी चाहिए ताकि यह जांच हो सके कि जीत का अंतर बढ़ाया तो नहीं गया। कांग्रेस ने कहा कि अनुराग ठाकुर द्वारा प्रस्तुत आंकड़े और डेटा जो फर्जी मतदाताओं की सूची कहे जा रहे हैं, वे गंभीर हैं और “अपराधिक साक्ष्य” हो सकते हैं। इसलिए डेटा सार्वजनिक होने चाहिए और यदि साक्ष्य सही हैं, तो कार्रवाई होनी चाहिए। चुनाव आयोग ने क्या किया या कुछ किया कि नहीं, पता नहीं है। आज उसी अनुराग ठाकुर के नये आरोपों को टाइम्स ऑफ इंडिया ने अंदर के पन्ने पर ही सही, राहुल गांधी के नये आरोपों से ज्यादा जगह दी है और इस बार राहुल गांधी का आरोप है कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त वोट चोरों की सहायता कर रहे हैं।
राहुल गांधी का मुख्य आरोप है कि मतदाता सूची से नाम कटवाने की कोशिश के आरोप की जांच एक जगह पहुंच कर रुक गई है क्योंकि चुनाव आयोग आवश्यक जानकारी साझा नहीं कर रहा है। कर्नाटक के इस मामले की जांच राज्य सीआईडी कर रही है और केंद्रीय चुनाव आयोग ने इस संबंध में भेजे गये 18 पत्रों का जवाब नहीं दिया है। चुनाव आयोग इस ठोस और मूल आरोप का जवाब देने की बजाय बहाने बना रहा है, फैक्ट चेक कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह भी छापा है कि राहुल गांधी जो जवाब मांग रहे हैं वह दो साल पहले ही दिया जा चुका है जबकि राहुल गांधी ने कहा कि जो जवाब दिया गया है उसमें मांगी गई जानकारी नहीं है। इस तरह राहुल गांधी के गंभीर आरोपों को भले इस बार पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर जगह दी गई है लेकिन चुनाव आयोग के झूठ और भाजपा नेता अनुराग ठाकुर के बकवास को ज्यादा जगह दी गई है। राहुल गांधी की मूल खबर का शीर्षक भले दो कॉलम में है खबर एक ही कॉलम में है। उसमें भी राहुल गांधी की आधे कॉलम की फोटो है। चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया कर्नाटक सीट के लिए दो साल पहले की गई कार्रवाई का उल्लेख किया।
हिन्दुस्तान टाइम्स में यह सेकेंड लीड है। चुनाव आयोग या भाजपा का जवाब पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन राहुल गांधी की फोटो दो कॉलम में है। शीर्षक तीन कॉलम का है और हिन्दी में कुछ इस तरह होता, राहुल ने चुनाव आयोग पर हमला तेज किया; भाजपा का पलटवार। हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की लीड का शीर्षक है, पाकिस्तान और सउदी अरब में आपसी रक्षा करार। राहुल गांधी की खबर आज हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ नवोदय टाइम्स में भी सेकेंड लीड है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, टैरिफ पर राहत जल्द। राहुल गांधी की खबर का शीर्षक है, राहुल गांधी ने फोड़ा एक और बम चुनाव आयोग ने कहा – फुस्स। एक उपशीर्षक राहुल गांधी का आरोप है तो दूसरा चुनाव आयोग का जवाब। ठीक है कि आज राहुल गांधी की खबर लंबे समय बाद इतने अखबारों में एक साथ पहले पन्ने पर है लेकिन ज्यादातर ने आयोग के जवाब और भाजपा के पलटवार से उसके महत्व को कम करने की कोशिश की है। ऐसे में आज के अखबारों के पहले पन्ने की एक खासियत यह भी है कि देशबन्धु के बॉटम का शीर्षक है, भाजपा अध्यक्ष पद के लिए संघ ने फंसाया पेंच और मुख्य शीर्षक है, संजय जोशी के नाम पर अड़ने से मोदी शाह परेशान। यह इस जोड़ी की परेशानी बताने वाली आज की दूसरी खबर है। देशबन्धु में लीड राहुल गांधी की खबर है। पांच कॉलम की लीड का शीर्षक है, वोट चोरों को बचा रहे ज्ञानेश कुमार। फ्लैग शीर्षक है, राहुल गांधी का मुख्य चुनाव आयुक्त पर बड़ा आरोप। उप शीर्षक है, चुनाव से पहले कांग्रेस समर्थकों के वोट हटाए जा रहे हैं।
अमर उजाला में भी राहुल गांधी के आरोप लीड हैं लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाते हुए। दिलचस्प यह है कि चुनाव आयुक्त का पक्ष तो आयोग की तरफ से है लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की फोटो आयोग के पक्ष के साथ है जबकि आरोप के साथ भी हो सकती थी। अमर उजाला ने राहुल के आरोप और चुनाव आयोग के जवाब को क्रम से पांच और दो कॉलम में छापा है। दोनों का फ्लैग शीर्षक एक है, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर वोट चोरी के नए आरोप के बाद दोनों फिर आमने-सामने। राहुल गांधी के आरोपों का मुख्य शीर्षक बहुत कमजोर है और इस प्रकार है, “सॉफ्टवेयर से काटे गये वोट, जेन-जी बचाए लोकतंत्र व संविधान : राहुल”। इस खबर के साथ अनुराग ठाकुर की फोटो और उनके आरोप भी हैं। लेकिन चुनाव आयोग का जवाब अलग से एक खबर की तरह है। इसका शीर्षक है, सरासर झूठ…ऑनलाइन नाम नहीं हटाया जा सकता : आयोग। अलंद सीट पर चुनाव आयोग ने ही दर्ज कराया था केस। अमर उजाला ने प्रमुखता से नहीं लिखा है पर चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि अलंद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई। इस तरह कुछ अनपढ़ों और बुद्धिहीनों को यह कहने का मौका मिल गया कि जहां कांग्रेस जीती है वहां वोट चोरी कैसे हो सकती है या ऐसा आरोप कैसे सही हो सकता है। सच्चाई यह है कि राहुल गांधी ने नहीं कहा था कि उनका उम्मीदवार हार गया। दूसरे वोट चोरी हुई नहीं है करने की कोशिश हुई। पकड़ी गई। उसकी जांच चल रही है और चुनाव आयोग सहयोग नहीं कर रहा है इसलिये जांच किसी नतीजे पर पहुंचे बगैर रुक गई है। इस तरह मामला है कुछ, बनाने की कोशिश कुछ और की जा रही है।

अमर उजाला ने एक और खबर छापी है, सीआईडी को 2023 में ही चुनाव अधिकारी दे चुके हैं पूरी जानकारी। राहुल गांधी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने कर्नाटक सीआईडी की 18 चिट्ठियों का जवाब नहीं दिया। इसका कारण बताने या इसे स्वीकार करने की बजाय चुनाव आयोग कह रहा है कि 2023 में ही जवाब दे चुका है जबकि राहुल गांधी ने कहा है कि चुनाव आयोग ने एक जवाब दिया है लेकिन उसमें काम की कोई जानकारी नहीं है। यही बात द वायर ने अपनी खबर में लिखी है। इसका शीर्षक हिन्दी में इस प्रकार होगा, राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप के जवाब में कर्नाटक के सीईओ का नोट इसे और मज़बूत बनाता है। इसमें एक जगह लिखा है, द वायर ने जो दस्तावेज़ देखे उनसे पता चलता है कि कर्नाटक पुलिस को चुनाव आयोग से आईपी लॉग तो मिले थे, लेकिन इस साल जनवरी तक इनमें न तो गंतव्य आईपी एड्रेस और न ही गंतव्य पोर्ट का विवरण था। यही नहीं, सोशल मीडिया पर कल ही कर्नाटक के सीईओ के नाम सीआईडी की एक चिट्ठी घूम रही थी जिसमें जानकारी देने की मांग की गई है। यह इसी 9 सितंबर की चिट्ठी है और चुनाव आयोग ने यह नहीं कहा है कि उसे यह चिट्ठी नहीं मिली है। उसने कहा है कि उसने जानकारी दे दी है। आप अन्तर समझ सकते हैं। हालांकि आपराधिक कार्रवाई से मुक्ति है तो वे यह भी कह सकते थे, संभव है भविष्य में कह दें पर फिलहाल मामला ऐसा नहीं है और आपको लगता है कि संपादकों, रिपोर्टर्स को मामला समझ में नहीं आया होगा तो मैं इसकी संभावना से इनकार नहीं कर सकता हूं।
अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस की लीड पांच कॉलम में है। फ्लैग शीर्षक के अनुसार राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक सीआईडी ने 18 महीने में चुनाव आयोग को 18 पत्र भेजे। मुख्य शीर्षक है, मुख्य चुनाव आयुक्त वोट चोरों की रक्षा कर रहे हैं, कर्नाटक सीट पर कांग्रेस के मतदाताओं को निशाना बनाया गया। इस खबर के साथ तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, “भाजपा का पलटवार : राहुल घुसपैठियों की रक्षा करने और लोकतंत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं”। कहने की जरूरत नहीं है कि यह एआई का जवाब तो हो सकता है, संभव है पहले से रिकार्ड किया संदेश हो तो ये वाला बजने लगे। लेकिन कांग्रेस के मतदाताओं को हटाने की कोशिश और उसकी जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप के जवाब में इसका क्या मतलब हो सकता है। वैसे भी,घुसपैठिये अगर कर्नाटक तक पहुंच गये तो भाजपा सरकार कर क्या रही है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार तो अब बनी है। पहले वहां भी भाजपा की सरकार रही है। इसके बावजूद अगर कांग्रेस पर आरोप लगाया जा रहा है तो कार्रवाई कौन करेगा। ऐसे आरोप का क्या मतलब? और भी खबरें हैं लेकिन वही सब जिनकी चर्चा मैं ऊपर कर चुका। राहुल गांधी के आरोप तो पहले पन्ने पर लेने की मजबूरी समझी जा सकती है लेकिन उसे कमजोर करने के हर संभव उपाय किये गये हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी के साथ दुनिया समझ रही है कि दबाव इसी से बनता है और कितना दबाव है।
द हिन्दू में पांच कॉलम का शीर्षक है, राहुल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतंत्र को नष्ट करने वालों की रक्षा कर रहे हैं। इसके साथ सिंगल कॉलम की दो खबरें हैं। एक कर्नाटक के मुख्य चुनाव आयुक्त का यह कहना कि सारे डाटा पुलिस को दिये जा चुके हैं। दूसरा भाजपा का यह कहना कि कांग्रेस नेताओं को लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। कहा जा सकता है कि राहुल गांधी के आरोप के मुकाबले कथित पलटवार को उतनी ही जगह मिली है जिस काबिल है। हालांकि, पहले एक रिवाज यह भी होता था कि मूल खबर के बीच एक दो-चार लाइन की पट्टी होती थी जिसमें लिखा होता था, प्रतिक्रियाएं पेज 10 पर या ऐसे ही कुछ और। हालांकि वह घोषित इमरजेंसी और लोकतंत्र का जमाना था। अब यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने अपने समय में वही सब किया होता जो भाजपा अब कर रही है तो भाजपा का जन्म ही नहीं हुआ होता या भ्रूण हत्या हो गई होती। हालांकि वह अलग मुद्दा है। अखबार का उपशीर्षक है, कांग्रेस नेता ने कर्नाटक में मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का उल्लेख किया और वोट चोरी की जांच के लिए आवश्यक विवरण साझा करने के लिए सात दिन की समय-सीमा घोषित की। उन्होंने कहा है कि असहयोग का मतलब होगा कि चुनाव आयोग संविधान की हत्या में शामिल है। चुनाव आयोग ने कहा है कि आरोप निराधार हैं।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


