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सुख-दुख

रेलवे के भ्रष्टाचार से दुखी हैं लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय, सुनें आपबीती

दयानंद पांडेय-

अभी गोरखपुर ट्रेन से गया और लौटा। ट्रेन में बेडरोल की गंदगी से मुक्ति मिलना लगता है, असंभव बनता जा रहा है। कंबल तो बेहद गंदे होते ही हैं, दोनों चद्दर और पिलो कवर भी जैसे कभी धोए नहीं जाते। खिड़की के परदे भी। बस बांस के कागज का लिफाफा ही साफ़ सुथरा होता है। करारा और चमकता हुआ। बाक़ी सब घिनौने।

ईमानदारी का दम भरने वाली मोदी सरकार इस भ्रष्टाचार से इन 11 वर्षों में कभी छुट्टी नहीं ले सकी। मोदी सरकार को भला कौन बताए कि सिर्फ स्टेशन ही नहीं साफ़-सुथरे होने चाहिए, बेडरोल और डब्बे भी भी साफ़ सुथरे होने चाहिए। गोरखपुर जाएं, दिल्ली जाएं, भोपाल जाएं या कहीं और हर रेल यात्रा की यही कथा है।

रेल मंत्री और उन के भ्रष्ट रेल विभाग को कोई यह बात बताने वाला नहीं है। बीमारी का घर हैं, यह गंदे बेडरोल। गंदे बेडरोल के कारण ही यात्रा के लिए ट्रेन अब बेहतर विकल्प नहीं रहा। कोशिश करता हूं कि ट्रेन से न चलना पड़े। पर कभी-कभार लाचारी में ट्रेन का विकल्प चुनना पड़ता है। जी उचट जाता है, ट्रेन से यात्रा कर के। लगता है, किस कूड़ा-कचरा घर से निकल कर आया हूं। वापस आ कर लगातार नहाता रहता हूं।

बाज़ार का नियम है कि जिस सुविधा के लिए आप पैसे लें , वह सुविधा भी दें। रेल विभाग यह नियम मुसलसल भूलता गया है। तिस पर तुर्रा यह कि सीनियर सिटीजन को टिकट में मिलने वाली रियायत भी मोदी सरकार गड़प गई है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Sukesh sharma

    February 23, 2026 at 8:31 pm

    रेल मंत्रालय पिछले 11 साल कह रहा है कि 2 साल बाद मिलेगा confirm टिकट परंतु आज तक दो साल पूरे नहीं हुए l हज़ारों ट्रेन चला दी किराये बेतहाशा बढ़ा दिये सुविधा भ्रष्टचार खा गया टी टी और driver को छोड़ पूरा स्टाफ ठेके का l

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