Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

इस पितृसत्तात्मक खबर पर राजस्थान पत्रिका ‘संस्कारों का ठेकेदार’ क्यों बन रहा है?

चंदन पांडेय-

राजस्थान पत्रिका का हाल… यह एक अखबार की भाषा है। अपराधियों की तरह लिखा है। जिसने भी लिखा है, प्रकाशित किया है, सम्पादित किया है, वे आपराधिक और अत्यंत घटिया मानसिकता के लोग हैं। इन्हें पत्रकार और संपादक कहना इन पदों का घोर अपमान होगा।

इनके माँ बाप, घर, आँगन और इनके स्कूलों ने जो सिखाया है उसके अनुसार बालिग युवती का अपनी समझदारी से विवाह के लेना कुल की मर्यादा तोड़ना है। पैदा करना जैसा अपराध करने के बाद थोड़ा पढ़ा लिखा देना पिता का त्याग है! पिता की दुनिया और अलगाव फिर भी एक पल को समझा जा सकता है लेकिन मीडिया का काम सही कायदों के अनुसार खबर बनाना है न कि भीड़ को खुश करने के लिए ख़बर लिखना। ऐसी ख़बरों को पढ़ने वाले लोग हमेशा यही सोचेंगे कि अपनी समझ से जीवनसाथी चुनना अपराध है और पिछड़ी पिछली पीढ़ी के दहेज चक्करों में पड़कर शादी करना अच्छी बात है।

नादिन लबाकी की फ़िल्म है कैपरनॉम। उसमें एक बच्चा अपने माँ बाप पर मुक़दमा करता है कि इस घटिया दुनिया में उसे पैदा ही क्यों किया? ये अखबार यही चाहते हैं कि यह सब सच में शुरू हो जाये।


पितृसत्ता किस हद तक गिर सकती है और उसका समर्थक मीडिया किस हद तक उसके पतन को उत्थान की तरह उसका महिमा गान कर सकता है, इसका बेजोड़ नमूना। -दिगंबर

राहुल देव-

कुल की मर्यादा के लिए बेटी का जीते जी श्राद्ध कर दिया। ऐसे पिता की पिछड़ी सोच पर तरस आता है और इस निम्न सोच को बढ़ावा देने के लिए इस अखबार पर गुस्सा और हँसी एक साथ। ऐसी जबरदस्ती की खबर का कोई औचित्य नहीं बनता। फालतू में समाज के नैतिक ठेकेदार बनने का कुत्सित प्रयास है बस।

सत्यम वर्मा-

पहली बात तो ये कि यह किसी भी तरह से ख़बर कैसे है? दो लोग अपनी मरज़ी से संबंध तोड़ें या रखें इसमें अख़बार और उसके पाठकों के नाक घुसाने का क्या काम? बाक़ी तो आपने लिखा ही है। माँ-बाप की तानाशाही से तंग आकर कोई लड़की अगर घर छोड़ दे, तो ये कभी नहीं कहेंगे कि आहत बेटी ने बाप को त्यागा। मानवीय गरिमा को रौंदने का प्रतिरोध कर आज़ादी के लिए उठाया क़दम!

इसकी शुरुआत की लाइनें ही बहुत गलत संदेश देती हैं – ‘एक पिता के लिए बेटी ही उसका संसार होती है’, यानि ख़बर के बजाए अख़बार ‘नैतिकता’ (?) पर अपन निर्णय दे रहा है। -प्रताप दीक्षित

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. GOPALLALVAISHNAV

    March 25, 2026 at 7:13 pm

    यही समाचार समाज को सही निर्णय लेने में मदद करता है। समाज शिक्षा की दौड़ में बच्चे बच्चियों को आगे बढ़ाने के लिए अंधा हो पैसा खर्च कर रहा है। नैतिक सामाजिक मूल्यों की शिक्षा प्रदान करावे। ऐसे तो समाज व्यवस्था खराब हो जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन