वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का एक वीडियो क्लिप वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शेयर कर भाजपाई, संघी और दिलीप मंडल जैसे लोग भड़क रहे हैं। इसी आधार पर राजदीप ने दैनिक भास्कर में एक लेख (ऊपर) भी लिखा था। पहले जानिए वायरल वीडियो में राजदीप ने कहा क्या है?…
“दुर्भाग्यवश, अब हिंदू-बहुल क्षेत्र में किसी मुसलमान का जीतना नामुमकिन हो गया है।” “दुर्भाग्यवश भारत बदल गया है। यह वह देश नहीं है जहाँ मैं पला-बढ़ा हूँ।” “आज हम अपनी पहचान के आधार पर वोट करते हैं – पहले जाति के आधार पर, अब धर्म के आधार पर। यह अफ़सोस की बात है।”
दिलीप मंडल-
“अब भी पहले की तरह मुसलमानों के लिए अलग इलेक्टोरेट ही चाहिए तो पाकिस्तान चले जाओ.” – सरदार पटेल, संविधान सभा में.
ये बात सरदार पटेल ने 28 अगस्त, 1947 को संविधान सभा में मुस्लिम लीग के सदस्य अहमद इब्राहिम साहिब और पोकिर साहब के संशोधन के जवाब में दिया था, जिसमें वे आजाद भारत में मुसलमानों के लिए सैपरेट इलेक्टोरेट मांग रहे थे, ताकि वे अच्छी संख्या में चुनकर आ सकें.
पटेल ने कहा कि “आप लोगों ने यही करके विभाजन करा दिया. अलग देश बना लिया, लेकिन आप जो अब यहां रह गए , वही बीज फिर बो रहे हो.” “कुछ नहीं देंगे.”
संविधान सभा ने पटेल की साथ दिया. मांग खारिज हो गई. (मुस्लिम लीग के टिकट पर चुने गए 28 मेंबर पाकिस्तान बनाने के बाद पाकिस्तान जाना भूल गए और भारत में ही रह गए, क्योंकि यहां उनकी जायदाद थी)
धार्मिक आधार पर रिप्रेजेंटेशन में विभाजन के बीज है. पूरे राष्ट्र को एक स्वर में इसे खारिज करना चाहिए.
स्रोत- CONSTITUENT ASSEMBLY DEBATES, OFFICIAL REPORT, REPRINTED BY LOK SABHA SECRETARIAT, NEW DELHI
राजदीप सरदेसाई का बयान खतरनाक है. उनको माफी मांगनी चाहिए.
पवन त्यागी-
भारत में एक और पाकिस्तान बनाने की तैयारी में विपक्ष… ये राजदीप सरदेसाई है इसकी पत्नि TMC सांसद है ये कह रहा है “बदले हुए भारत में मुस्लिम उम्मीदवार हिंदू बाहुल्य सीटों पर जीत नहीं पाते इसलिए उनको उनकी आबादी के अनुपात में संसद में सीटें आबंटित की जायें”
राजदीप सरदेसाई मुसलमानों के लिये संसद में सीटों का कोटा निर्धारित करना चाह रहे हैं
मुस्लिम लीग ने भी पहले मुसलमानों के लिये अलग सीटें हासिल की थीं और उसी के आधार पर पाकिस्तान बनाया था
राजदीप पूरे देश में एक मुस्लिम बाहुल्य सीट बतायें जहां हिंदू उम्मीदवार किसी मुस्लिम कैंडिडेट के मुक़ाबले जीत सकता हो जब तक कि वो सीट नगीना की तरह अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित न हो
राजदीप, रवीश जैसे लोग बहुत सावधानी से अपना एजेंडा चलाते हैं, ये आपको कभी किसी ऐसे व्यक्ति से बहस करते नज़र नहीं आयेंगे जो इनके दोगले पन की परतें उतार सके।


