भड़ास की खबर ने फिर दिखाया असर, भर्ती में भ्रष्टाचार पर घिरे राज्य सभा टीवी अफसर

भड़ास फॉर मीडिया की खबर ने एक बार फिर अपना असर दिखाया है. राज्य सभा टीवी में हुई भर्ती में भ्रष्टाचार की खबर भड़ास पर प्रसारित होने के तत्काल बाद राज्य सभा टीवी के कर्ता-धर्ता  पूरे मामले पर लीपा-पोती की कोशिश में जुट गए हैं. 

गौरतलब कि 24 मई को राज्य सभा टीवी में पत्रकारों की भर्ती में भ्रष्टाचार की  खबर भड़ास पर  प्रमुखता से प्रसारित होने के ठीक दूसरे दिन, यानी 25  मई को राज्य सभा टीवी ने परिणाम घोषित करने की औपचारिकता पूरी करते हुए, उन लोगों के नाम सार्वजनिक कर दिए जिन्हें चोरी-चोरी अपॉइंटमेंट लेटर थमाए गए थे. जिन लोगों को अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए हैं उनके नाम सार्वजनिक होने के बाद एक बार फिर पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई  है. गौरतलब है कि एक साथ चयन का विज्ञापन जारी करने के बावजूद राज्य सभा टीवी ने अभी तक  सभी पदों के परिणाम घोषित नहीं किये हैं. सूत्रों के मुताबिक़  जिन लोगों को अपॉइंटमेंट लेटर दिए जा चुके हैं, उनके परिणाम भड़ास में खबर आने के बाद  राज्य सभा की वेबसाइट पर लगा दिए  हैं. 

शेष पदों लिए  अंदरखाने  रस्साकशी और जोड़-तोड़ का खेल अभी भी जारी है. राज्य सभा टीवी के सूत्रों की माने तो इन पदों के लिए भी तगड़ी लॉबिंग चल रही है. यहां भी ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक़ जिन लोगों को अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए हैं उनमें से अधिकाँश राज्य सभा टीवी के एक आला अधिकारी के करीबी और पूर्व परिचित बताए जा रहे हैं. एंकर सहित घोषित तमाम पदों पर चयन में जिन लोगों को प्राथमिकता दी गई है, उनकी योग्यता और अनुभव पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसे कवर करने की कवायद शुरू हो गई है. मीडिया हलकों में चर्चा है कि  देश के सबसे प्रतिष्ठित संसदीय चैनल में हिन्दी  एंकर के एकमात्र पद के लिए पूर्वानुमान के मुताबिक़ भोजपुरी चैनल की एक पूर्व एंकर को बड़े न्यूज़ चैनलों के तमाम वरिष्ठ एंकरों के अनुभव पर प्राथमिकता देते हुए अपॉइंटमेंट लेटर दे दिया गया है. 

वहीं दूसरे पद पर राज्य सभा टीवी ने अपनी पूर्व एंकर को ही बहाल कर दिया है. इस तरह केवल एक ही पद पर बाहर से नियुक्ति की  गई है. और इंटरव्यू में शामिल तमाम वरिष्ठ एंकरों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है.  राज्य सभा की वेबसाइट पर घोषित ये परिणाम विश्लेषण के नज़रिये से बेहद  दिलचस्प हैं. क्योंकि राज्य सभा टीवी के इस परिणाम ने टॉप न्यूज़ चैनलों में काम कर रहे एंकरों की योग्यता पर सवालिया निशान लगा दिया है. 80 फीसदी वरिष्ठ एंकरों को इस चयन में पासिंग मार्क्स भी नहीं मिले हैं. जबकि चयनित एंकरों को लेकर चयनकर्ता पूरी तरह आश्वस्त दिखाई दिए और उन्हें  फर्स्ट क्लास यानी साठ से अधिक अंकों से उत्तीर्ण घोषित किया गया है. 

ऐसा  अन्य पदों के परिणामों में भी देखा जा सकता है. जिन्हें अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए हैं, अन्य कोई भी उम्मीदवार उनके  करीबी अंकों को छू  भी नहीं पाया है. चयनकर्ताओं को चयन में किसी तरह की कोई दुविधा पेश नहीं आई. इतना ही नहीं कुछ पदों के लिए तो चयनकर्ताओं को योग्य उम्मीदवार ही नहीं मिले, इसे भी परिणामों में दर्शाया गया है. राज्य सभा टीवी के चयनकर्ताओं ने तमाम पत्रकारों को उनके अंक तो बता दिए लकिन ये नहीं बताया कि चयन का आधार क्या था? अनुभव के लिए कितने अंक निर्धारित थे? और प्रोफाइल और पोर्टफोलियो के  लिए कितने अंक दिये गए? गौरतलब है कि टीवी पत्रकारिता में अनुभव और पोर्टफोलियो का ही सबसे ज़्यादा महत्त्व होता है. लेकिन घोषित परिणामों में इसे ज़्यादा महत्त्व नहीं दिया गया.  

ऐसे में चयन प्रक्रिया में शामिल हुए तमाम वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं. अब इंतज़ार है शेष पदों के  परिणामों की घोषणा का. जिनमें  प्रोड्यूसर और सीनियर प्रोड्यूसर जैसे वरिष्ठ पद शामिल हैं.  देखने वाली बात ये होगी कि क्या इन पदों में भी अनुभवहीन और अयोग्य उम्मीदवार जोड़-तोड़े के गणित और ऊंची पहुँच के बल पर योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों पर भारी पड़ने वाले  हैं?  

गुंजन सिन्हा से संपर्क : gunjan.sharma84@yahoo.in

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