कृपा शंकर सिंह और अरविंद केजरीवाल : एक ही देश में दो अलग-अलग नेताओं के लिए दो विधान क्यों?

Yashwant Singh : महाराष्ट्र में अरबों रुपये अवैध तरीके से उगाहने के आरोपी कांग्रेसी नेता कृपा शंकर सिंह के खिलाफ इसलिए मुकदमा नहीं चलता और वो कोर्ट से बरी हो जाते हैं कि उनके खिलाफ जांच कर रही एजेंसियों को आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति विधानसभा अध्यक्ष ने नहीं दी. Share on:कृपया हमें अनुसरण …

करोड़ों ‘कमाने’ वाले इस नेता पर यूं बरसी कोर्ट की ‘कृपा’!

विधानसभा अध्यक्ष ने जांच एजेंसियों को आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी इसलिए कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों से कृपा शंकर सिंह और उनके परिजनों को कर दिया बरी…. क्या आपको पता है कि मुम्बई के कांग्रेसी नेता और तत्कालीन एमएलए कृपा शंकर सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों …

दागी आईएएस सत्येंद्र सिंह पर मेहरबान योगी सरकार

यूपी की योगी सरकार दागी आईएएस सत्येंद्र सिंह पर मेहरबान है. यही कारण है कि इस भाजपा सरकार में इस घोटालेबाज अफसर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है. आईएएस सत्येंद्र सिंह एनआरएचएम घोटाले के भी आरोपी हैं. वे अब भी एक बड़े पद पर तैनात हैं.  सत्येंद्र सिंह जब एनआरएचएम में जीएम हुआ करते थे तो उन्होंने काफी खेल किए. इसी कारण उन्हें आरोपी बनाया गया. सीबीआई जांच के दौरान सत्येंद्र सरकारी गवाह बन गए. इसी कारण उनके खिलाफ चलने वाली सभी जांच ठंढे बस्ते में डाल दी गई. पर क्या सरकारी गवाह बनने से गुनाह माफ़ हो जाते हैं?

योगी राज में युवा उद्यमी के संघर्ष को मिली जीत, करप्ट अफसरों का गिरोह हारा

Ashwini Kumar Srivastava : योगी राज में देर तो है….अंधेर नहीं! क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ मेरे जीवन का अब तक का सबसे बेहतरीन तोहफा लेकर आये हैं…और वह है, सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार में फंसकर ढाई बरस की भयंकर देरी से तकरीबन दम ही तोड़ चुके हमारे आवासीय प्रोजेक्ट की मंजूरी। ईश्वर की कॄपा से अब हमारे मार्ग की हर वह बाधा दूर हो चुकी है, जिनसे घिर कर हम न जाने कितनी मुश्किलों में आन फंसे थे। हालांकि शासन को भी सुनवाई आदि प्रक्रिया में लगभग ढाई महीने का समय जरूर लगा लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के शिकायत तंत्र ने अंतत: मुझे न्याय दिलवा ही दिया। ढाई बरस से जिस फ़ाइल को सरकारी तंत्र में बैठे एक भ्रष्ट अफसर ने बिना किसी की परवाह किये रोक रखा था, उसे आखिरकार मजबूर होकर, बेमन से और बिना एक भी दमड़ी की घूस लिए ही मंजूर करके मुझे देना ही पड़ गया।

करप्शन किस कदर हमारे खून में समाया है, समझा रहे हैं आजतक के पत्रकार विकास मिश्र

Vikas Mishra : मेरे एक मित्र अभी एक शहर में एसपी सिटी हैं। एक रात जब हम मिले, चर्चा छिड़ी तो उन्होंने कहा-‘भाई मैं तो बस ईमानदारी से काम कर रहा हूं, कोई तीन-पांच नहीं।’ मुझे लगा कि शायद मोदी के प्रभाव में ईमानदार हो गए हैं। बात बढ़ी तो वो बोले-‘किसी को सताकर नहीं कमाना है भाई, बिना पैसे दिए पोस्टिंग मिली है, मैं तो बाहर का पैसा छूता नहीं हूं, बस महीने के जो ढाई-तीन लाख बंधे हुए आते हैं, उसी से काम चलाता हूं।’

यूं महाभ्रष्ट बना दी गईं नीरा यादव!

Dayanand Pandey : कभी थीं नीरा यादव भी ईमानदार जब वह नीरा त्यागी हुआ करती थीं। उन की ईमानदारी के नाम पर चनाजोर गरम बिका करता था। उन दिनों जौनपुर में डी एम थीं। उन के पति त्यागी जी सेना में थे। 1971 के युद्ध में खबर आई कि वह वीरगति को प्राप्त हुए। नीरा यादव ने महेंद्र सिंह यादव से विवाह कर लिया। तब यादव जी डी आई जी थे। लेकिन बाद में त्यागी जी के वीरगति प्राप्त करने की खबर झूठी निकली। पता चला वह युद्ध बंदी थे। बाद के दिनों में वह शिमला समझौते के तहत छूट कर पाकिस्तान से भारत आ गए। नीरा यादव से मिलने गए तो वह उन से मिली ही नहीं। उन्हें पति मानने से भी इंकार कर दिया। त्यागी जी भी हार मानने वालों में से नहीं थे। डी एम आवास के सामने धरना दे दिया। कहां तो नीरा यादव के नाम से ईमानदारी का चनाजोर गरम बिकता था, अब उन के छिनरपन के किस्से आम हो गए। खबरें छपने लगीं। किसी तरह समझा बुझा कर त्यागी जी को धरने से उठाया गया। जाने अब वह त्यागी जी कहां हैं, कोई नहीं जानता।

मेधावी छात्रों का हक लूटने वाला भ्रष्टाचारी अनिल यादव अब अपने कुकर्मों की सजा भुगतेगा : शलभ

सक्रिय पत्रकारिता में रहते हुए यूं तो कई यादगार खबरें की, इन खबरों से तमाम पीड़ितों को इंसाफ भी मिला और गुनाहगारों को सजा भी. यकीन मानिए जब ऐसी खबरें अपने मुकाम तक पहुंचती है तो एक पत्रकार को भी वैसे ही सुख की अनुभूति होती है जैसे एक पीड़ित को इंसाफ मिलने पर. ऐसी ही थी यूपी लोकसेवा आयोग के भ्रष्टाचार की खबर. खुद भी प्रतियोगी छात्र रहा हूं. सिविल की तैयारियां की है. इसीलिए एक सामान्य परिवार के बेरोजगार का दर्द जानता हूं. उसकी आंखों में पलने वाले सपनों और माता-पिता, रिश्तेदारों की उम्मीदों का बोझ महसूस कर सकता हूं.

एक सामान्य इंजीनियर यूपी में कैसे बन गया अरबपति… जानिए महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्र की कहानी

भ्रष्ट अफसरों की पोषक उत्तर-प्रदेश की कोख से उत्पन्न एक मुख्य अभियन्ता अपने पद का दुरुपयोग कर अरबों की परियोजनाओं से करोड़ों की हेरा-फेरी कर अपना घर भरता रहा। काली करतूतों से कमाई गयी दौलत से चन्द वर्षों में ही यूपी और दिल्ली जैसे शहरों में अनगिनत जमीन-जायदाद का मालिक भी बन गया। आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से जांच हुई तो भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। लगभग छह माह तक जेल की सलाखों के पीछे रहे फिर भी तत्कालीन अखिलेश सरकार की आंख का तारा बने रहे। उपहार स्वरूप दोबारा उसी जगह पर तैनाती भी दे दी गयी। स्थिति यह है कि यह अभियन्ता अब खुलेआम भ्रष्टाचार के नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है और योगी सरकार भी कमोवेश मूकदर्शक बनी हुई है।

ये हैं भ्रष्टाचार के पितामह उर्फ अरुण मिश्रा

मीडिया ने बसपा और मायावती जैसी कद्दावर ताकत को चुनावी लड़ाई से बाहर कर दिया!

Ashwini Kumar Srivastava : अद्भुत है मीडिया और उसमें काम कर रहे तथाकथित पत्रकार। वरना बसपा और मायावती जैसी कद्दावर ताकत को ही इस बार के चुनाव में लड़ाई से बाहर कैसे कर देता! वैसे मुझे तो इसका कोई आश्चर्य नहीं है। क्योंकि एक दशक से भी ज्यादा वक्त तक दिल्ली और लखनऊ में देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में बतौर पत्रकार नौकरी करने के बाद मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि ख़बरें और सर्वे कैसे बनाये-बिगाड़े जाते हैं। इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण भी मैं अपने ही निजी अनुभव से आगे बताऊंगा। लेकिन सबसे पहले बात बसपा और मायावती की करते हैं।

मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शरद पवार को पद्मविभूषण से सम्मानित किया!

Abhiranjan Kumar : एक तरफ़ कांग्रेसी थे, जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल इत्यादि को भी भारत रत्न दिये जाने लायक नहीं समझा, दूसरी तरफ़ भाजपाई हैं, जो कांग्रेस-कुल के भ्रष्ट लोगों का भी तुष्टीकरण करने में जुट गए। एक दिन वे उन्हें भ्रष्ट कहते हैं, दूसरे दिन पद्मविभूषण घोषित कर देते हैं। याद कीजिए, हालिया महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी के तमाम नेताओं ने किस तरह से एनसीपी को भ्रष्टाचार का पर्यायवाची बताया था।

आत्महत्या पर उतारू है BSNL

वैशाली, गाजियाबाद में मेरे पास बीएसएनएल के तीन लैंडलाइन नंबर थे। वैशाली में एयरटेल आने के बाद बीएसएनएल पर निर्भरता कम होती गई और बिल का भुगतान नहीं हुआ। टेलीफोन कटा रहा और कटा ही रह गया। कोई हिसाब नहीं, कोई सूचना नहीं, कोई कार्रवाई नहीं। मैंने मान लिया कि जमा की गई सुरक्षा राशि बीएसएनएल ने रख लिया। सरकारी कंपनी खा गई। मैंने भी छोड़ दिया। वास्तविकता चाहे जो हो।

‘दृष्टांत’ मैग्जीन में प्रकाशित हुई मुलायम खानदान की अकूत संपत्ति पर कवर स्टोरी

लखनऊ से अनूप गुप्ता के संपादकत्व में निकलने वाली चर्चित मैग्जीन दृष्टांत में जो कवर स्टोरी है, वह पठनीय तो है ही, आंख खोल देने वाली भी है. जिस अखिलेश यादव के ढेर सारे लोग प्रशंसक हैं और उनमें जाने कौन कौन से गुण देखते हैं, उसी के शासनकाल में जो लूटराज अबाध निर्बाध गति से चला है, वह हैरतअंगेज है. अब जबकि चुनाव में चार दिन शेष रह गए हैं तो सब के सब पवित्र और पुण्यात्मा बन सत्ता व संगठन के लिए मार कर रहे हैं ताकि जनता मूल मुद्दों से भटक कर इनमें उनमें नायकत्व तलाशे. नीचे पूरी कवर स्टोरी है ताकि आप सबकी समझदानी में लगा झाला खत्म हो सके.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

खबर से भड़के डीएम ने जारी किया आदेश : ‘हिंदुस्तान’ अखबार के इस उगाहीबाज रिपोर्टर को आफिस में घुसने न दें!

Dinesh Singh : मैं नहीं जानता कि बाका के जिलाधिकारी के दावे में कितनी सच्चाई है। बिहार में हिन्दुस्तान की स्थापना के समय से जुड़े होने के चलते मैंने देखा है कि रिमोट एरिया में ईमानदारी के साथ काम करने वाले पत्रकार भी भ्रष्ट अधिकारियों के किस तरह भेंट चढ़ जाते हैं। मैं यह नहीं कहता कि सारे पत्रकार ईमानदार हैं मगर मैं यह भी कदापि मानने के लिए तैयार नहीं हूं कि सारे पत्रकार चोर और ब्लैकमेलर ही होते हैं।

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में पीएचडी और एमफिल प्रवेश परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली!

संपादक
भड़ास4मीडिया

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में इन दिनों भ्रष्टाचार, धाधली, जातिवाद, क्षेत्रवाद का बोल बाला जोरों पर है. अकादमिक, प्रशासनिक और आर्थिक भ्रष्टाचार का भंडा फोड़ होना ही चाहिए, इसके लिए आपका सक्रिय पत्रकारीय सहयोग अपेक्षित है.

भास्कर का संपादक निकला 100 करोड़ के फर्जी नक्शे का मास्टरमाइंड, एफआईआर दर्ज

जांच के बाद इंदौर के थाना एमजीरोड़ में दर्ज हुई 420 की एफआईआर, इंदौर यूनिट के बड़े पदों पर बैठे लोग बचाने में लगे

लगातार कई सालों से इंदौर दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में कार्यरत मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ का संपादक मनोज बिनवाल इंदौर के 100 करोड़ रुपए के तुलसी नगर प्लाट घोटाले का मास्टर माइंड निकला। यह वही शख्स है जिसकी इस मामले में करीब आठ माह पहले मैनेजमेंट को शिकायत हुई और जांच बैठी। मगर खास बात यह है सारे सबूत होने के बाद भी इंदौर में बैठे इसके आकाओं (कल्पेश याग्निक और हेमंत शर्मा) ने तमाम प्रयास कर इसे बचा लिया। बचाने के लिए मैनेजमेंट को गलत जानकारी दी गई, क्योंकि कई मामलों में तीनों की पार्टनशिप जगजाहिर है।

एक भूतपूर्व सांसद व प्रसिद्व पत्रकार ने विजय माल्या के लिए दलाली करते हुए उनके साथ उत्तराखंड में नेताओं की बैठकें करवाई…

मालामाल माल्या की कंगाली कथा

-निरंजन परिहार-

अब आप इसे ख्याति कहें या कुख्याति, कि संसार में शराब के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक भारत में कभी अमीरों की जमात के सरदार रहे विजय माल्या कंगाली की कगार पर देश छोड़ कर फुर्र हो गए हैं। यह जगविख्यात तत्य है कि है कि ज्ञान, चरित्र और एकता का दुनिया को पाठ पढ़ाने वाले संघ परिवार की दत्तक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने ही संसार में शराब के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक माल्या को कर्नाटक से राज्यसभा में फिर से पहुंचाया था। और माल्या कभी देश की जिस संसद में बैठकर भारत के भाग्य विधाता बने हुए थे, वह संसद भी सन्न है। क्योंकि लुकआउट नोटिस के बावजूद वे गायब हो गए। पर, इस बात का क्या किया जाए कि जिस लाल रंग से माल्या को बहुत प्यार है, सरकार उस लाल रंग की झंडी किंगफिशर के कंगाल को दिखाए, उससे पहले ही विजय माल्या बचा – खुचा माल बटोरकर सर्र से सरक गए।

जेलों के भीतर किस किस्म का भ्रष्टाचार होता है, जानिए इस पत्र से

Dear Mr. Director general Ajeet Singh ji

Rajasthan prisons

jaipur

Subject : input media reports about various irregularities and corruption at Bikaner central jail

Dear sir

We have strong media inputs and reports with evidences etc concerning with below mentioned points. .. ..

३ मार्च को आप (डीजी जेल) वहां बीकानेर पहुंचे ..जेल देखा भी होगा… वहां की वस्तुस्थिति आप की जानकारी के लिये कुछ इस तरह से है… गौर फरमाया जाये व जांच कराई जावे…

कुछ रुपयों के लिए इतना नीचे गिर कर पत्रकारिता न ही करें तो अच्छा

बस्ती। कुछ पत्रकार साथी कुछ रुपए के लिए अपना ईमान बेचने से पीछे नहीं हटते हैं। मैं मानता हूँ कि कोई भी मीडिया संस्थान इतना रुपया नहीं देता कि पेट्रोल तक का खर्च निकल सके। पैसा लेना गलत नहीं है। आज कल बिना पैसे का कुछ नहीं होने वाला है। लेकिन कुछ रुपयों के लिए इतना नीचे गिर जाना शोभनीय नहीं है, कुछ पत्रकार साथी तो ऐसे है की 100 रु भी मांग लेते है, क्या करे वो भी मज़बूरी है परिवार और बाल – बच्चे का खर्च भी इसी पत्रकारिता से चलाना पड़ता होगा।

पैसे मांग कर इस न्यूज चैनल ने युवा पत्रकार का दिल तोड़ दिया (सुनें टेप)

सभी भाइयों को मेरा नमस्कार,

मैं एक छोटा सा पत्रकार (journalist) हूँ और 4 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूँ। इस बदलते दौर में मुझे नहीं लगता कि मैं कभी अच्छा पत्रकार बन पाउँगा। मेरा सपना था कि मैं भी एक सच्चा पत्रकार बनूँगा पर अब तो पत्रकारिता का मतलब ही बदल चुका है। पहले पत्रकारिता एक मिशन था परन्तु अब ये करप्ट व कारपोरेट बन चुकी है। सभी जानते हैं कि मीडिया में काम करने के लिए अच्छी पहचान या बहुत पैसा होना चाहिए। आज पत्रकार बनना बहुत ही आसान हो गया है क्योंकि पत्रकार बनने के लिये चैनल को आप के तजुर्बे और आपकी योग्यता की जरूरत नहीं है। उन्हें तो जरूरत है आप से मिलने वाले मोटे पैसे की।

जेटली जी, डीएवीपी के बेईमान अधिकारियों के खिलाफ कब होगी कार्रवाई

हमारे केन्द्रीय मंत्री अरून जेटली जी खुद को बार बार पाक साफ व भ्रष्टाचार विरोधी शासक बताते हैं। आये दिन चैनलों में बयान देते नजर आते हैं कि मैं और मेरी सरकार भ्रष्टाचार विरोधी सरकार है। देश में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को कभी बख्शा नही जाएगा। किंतु आज आपको ये जानकर सबसे अधिक हैरानी होगी कि जेटलीजी के ही विभाग में सबसे बडे़ बागड़बिल्ले और बेईमान अधिकारी सेवारत हैं। 

कैंसर हो गया तो ये रुपया ही काम आएगा, कोई सगा संबंधी नहीं, इसलिए खूब भ्रष्टाचार करो, रुपया कमाओ!

Kanwal Bharti : अभी बरेली से मेरे एक मित्र ने बताया कि उनकी पत्नी को कैन्सर है और दिल्ली में राजीव नाम के एक अस्पताल में वे इलाज करा रहे हैं। अब तक 11 लाख रूपये खर्च हो चुके हैं और इलाज अभी जारी है। मुझे याद आया कि ओमप्रकाश वाल्मीकि के इलाज में कोई 22 लाख रूपये खर्चे में आये थे। फिर भी वे बच नहीं सके थे। मेरे मित्र ने बताया कि 70-70 हजार रूपये के इंजेक्शन लगते हैं, क्योंकि यहां सरकार को लकवा मार गया है। उन्होंने यह भी बताया कि करीबी लोगों ने भी मुंह मोड़ लिया है, ताकि हम उनसे पैसा न मांग लें। अब तक वे 6 लाख रूपये के कर्जदार हो चुके हैं।

‘दृष्टांत’ मैग्जीन ने यूपी सरकार के माननीय महबूब अली को क्यों बताया भ्रष्ट, पढ़ें पूरा विवरण

जिसे सलाखों के पीछे होना चाहिए था वह अपनी आपराधिक छवि के चलते यूपी विधानसभा की गरिमा को चोट पहुंचा रहा है। जिसके खिलाफ हत्या का प्रयास, डकैती, अपहरण, मारपीट, गाली-गलौच, जान से मारने की धमकी, दंगे करवाना, मकान-जमीनों पर अवैध तरीके से कब्जा करवाना और धोखाधड़ी से सम्बन्धित दर्जनों की संख्या में आपराधिक मुकदमें दर्ज हों, उसे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे रखा है। जिसकी शिक्षा महज 12वीं तक है, वह माध्यमिक शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बना बैठा है। यहां बात हो रही है माध्यमिक शिक्षा कैबिनेट मंत्री महबूब अली की।

यादवगेट में फंस रहे कुछ बड़े टीवी चैनल और पत्रकार, पीएमओ को रिपोर्ट भेजी गई

दलाली करते थे नोयडा-लखनऊ के कई मीडियाकर्मी

नई दिल्ली:  नोयडा के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने ठेकेदारी में कमीशनखोरी और कालेधन को सफेद करने के लिए कागज़ी कंपनियों का संजाल बिछाकर उसमें मीडिया को भी शामिल कर लिया था। इस राज का पर्दाफाश कर रही है, यादव सिंह से बरामद डायरी। यादव सिंह से तीन चैनलों के नाम सीधे जुड़ रहे हैं। एक में तो उनकी पत्नी निदेशक भी है। डायरी में मिले सफेदपोशों, नौकरशाहों और पत्रकारों के नामों को लेकर सीबीआई काफी संजीदा है और उसकी रिपोर्ट सीधे पीएमओ को भेजी जा रही है। इस सिलसिले में यादव सिंह और उसके परिवार से कई परिवार से कई बार पूछताछ हो चुकी है। समाज को सच का आईना दिखाने का दम भरने वाले ये पत्रकार अपने लिए मकान-दुकान लेने के अलावा ठेका दिलाने को भी काम करते थे और उसके लिए मोटी करम वसूलते थे।

राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर ने चारागाह की जमीन को पत्नी के नाम आवंटित करा लिया

अजमेर (राजस्थान) : जिले के सावर क्षेत्र में राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर सत्यनारायण कहार पर लाखों रूपयों की बेशकीमती चारागाह भूमि को अपने नाम आवंटित करवाने का आरोप लगा है। सत्यनारायण पूर्व में ग्राम पंचायत सदारा का उपसरपंच रह चुका है। तब भी यह पत्रिका का ही रिपोर्टर था।

भड़ास की खबर ने फिर दिखाया असर, भर्ती में भ्रष्टाचार पर घिरे राज्य सभा टीवी अफसर

भड़ास फॉर मीडिया की खबर ने एक बार फिर अपना असर दिखाया है. राज्य सभा टीवी में हुई भर्ती में भ्रष्टाचार की खबर भड़ास पर प्रसारित होने के तत्काल बाद राज्य सभा टीवी के कर्ता-धर्ता  पूरे मामले पर लीपा-पोती की कोशिश में जुट गए हैं. 

भ्रष्ट प्रधान के सपोर्ट में जागरण ने छापी उल्टी खबर, पीड़ित ने दी चेतावनी

गोंडा (उ.प्र.) : सेमराजमालखानी तरबगंज निवासी कौशल पाण्डेय ने मीडिया को लिखे पत्र में अवगत कराया है कि उनकी पत्नी प्रतिभा पाण्डेय सेमरा जमालखानी की ग्राम रोजगार सेवक हैं। उनके गांव के प्रधान लादूराम हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर घोटाले किये हैं। उन्होंने इसकी शिकायत सीडीओ औा डीपीआरओ से कर रखी है। इसकी जांच लम्बित है, जिससे बचने के लिए प्रधान लादूराम ने दैनिक जागरण में स्वयं को जिले का बड़ा पत्रकार बताने वाले वरुण यादव से सांठगांठ कर प्रतिभा पाण्डेय के विरुद्ध खबर छपवाई है।

यूपी के दो परम भ्रष्टाचारियों यादव और प्रजापति को गुस्सा क्यों आता है?

Amitabh Thakur : मेरी पत्नी नूतन ठाकुर ने पिछले दिनों कई गलत काम किये हैं लेकिन उनमे सबसे गलत काम निश्चित रूप से नॉएडा के भले शेर अभियंता और देश के पूर्व युवराज के जिले के खनन बाबा के खिलाफ शिकायतें हैं. ये दोनों ऐसे लोग हैं जिनके सम्बन्ध में बच्चा-बच्चा यह मानता है कि उन पर साक्षात् लक्ष्मी की कृपा है, साथ ही यह भी मान्यता है कि इन दोनों ने तंत्र का मन्त्र पूरी तरह समझ लिया है और ऊपर से नीचे तक सभी जगह इनके पत्ते फिट हैं, और जो व्यवस्था में फिट है, जाहिर है वह हिट है. इसीलिए यादव प्रजापति बंधू पूरी तरह और बुरी तरह हिट हैं, सुपरहिट. इस तरह हिट कि इनके लिए स्वयं व्यवस्था खड़ी हो जाती है यह कहते हुए कि ये भोले हैं और भले भी.

हाई कोर्ट में यादव सिंह कहिन- कभी भ्रष्टाचार नहीं किया, मीडिया की बनाई सनसनी है सब कुछ

Yadav Singh to HC : Never involved in corruption, media scandalized issue

Suspended Noida engineer Yadav Singh says that he has never been involved in any corruption whatsoever and has performed his official duty with utmost honesty and dedication. He said this in his counter-affidavit presented before Allahabad High Court in reply to the PIL filed by social activist Dr Nutan Thakur. As per the reply, he has no association with any of the company alleged in the PIL. He said he got his promotions as per rules and regulations. He said the previous FIR against him was filed by Noida engineer R P Singh due to his personal grudge against Ramendra which CBCID closed as being incorrect.

पलटीमार मोदी सरकार : करप्शन घपले घोटाले की गुमनाम शिकायतों की जांच नहीं की जाएगी

ये लीजिए…. मोदी सरकार की एक और पलटी. दरअसल, पलटी तो महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मारी है, लेकिन अगर तकनीकी तौर पर मुखिया यानी मुख्यमंत्री को साइड कर दें तो सरकार एक तरह से मोदी की ही है और उन्हीं के नाम पर चुन कर आई है. उन्हीं का चेहरा देखकर राज्य के लोगों ने भाजपा को वोट दिया था. इसलिए इस पलटी को मोदी की पलटी कहना गलत नहीं होगा. मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान चीख-चीख कर कहा था कि उनकी सरकार आई, तो भ्रष्टाचार की गुमनाम शिकायतों पर भी कार्रवाई की जाएगी.