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सुख-दुख

अनुशासन के सख्त रामोजी राव में अहंकार का नामोनिशान तक नहीं था

परमेंद्र मोहन-

रामोजी राव को भावभीनी श्रद्धांजलि। ईटीवी ने मुझ जैसे सैंकड़ों लोगों को टीवी न्यूज़ की ABCD सीखने का अवसर दिया था वरना अवसर की तलाश में उम्र निकल जाया करती है।

हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में इस सदी की शुरुवात में एक साथ एक दर्जन न्यूज़ चैनल्स की स्थापना करके जो अभिनव और साहसिक प्रयोग किया था उसी ने टीवी को गांव गांव और घर घर तक पहुंचा दिया वरना दूरदर्शन ही हुआ करता था क्यूंकि तब होने वाले ज़ी और फिर आजतक जैसे नेशनल चैनल्स के लिए तो मेट्रो ही भारत होते थे गांव कस्बे तो डाउन मार्केट कंटेंट हुआ करते थे। उन्होंने ये प्रयोग अपने प्रिंट मीडिया ईनाडु की सफलता के बाद आजमाया था।

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आज जो अखबारों के अलग अलग प्रादेशिक या नगरीय संस्करण हम देखते हैं वो सबसे पहले अविभाजित आंध्र में उन्होंने ही किया था। हमेशा श्वेत वस्त्र में दिखने वाले रामोजी राव अनुशासन में सख्त थे लेकिन अहंकार का नामोनिशान नहीं नजर आता था। नमन। श्रद्धांजलि।

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