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सियासत

रैनबक्सी के पूर्व प्रमोटर भाइयों में नई कानूनी जंग!

नई दिल्ली। एक समय देश की दवा इंडस्ट्री की बड़ी पहचान रहे रैनबक्सी के पूर्व प्रमोटर भाई—शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह—एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार विवाद की जड़ बनी है करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति और सालाना लगभग 30 करोड़ रुपये की कमाई वाली एक चैरिटेबल सोसायटी। मामले में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी दस्तावेजों और धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, जिसकी जांच अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है।

मामला फोर्टिस राजन ढल अस्पताल से जुड़ी चैरिटेबल सोसायटी का है, जिसे 1 अक्टूबर 2013 को फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड से ट्रांसफर किया गया था। इस अस्पताल में हर साल करीब 15 फीसदी रेवेन्यू मिलता है और आरोप है कि इस आय को निजी खातों में डायवर्ट किया गया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मालविंदर सिंह की पत्नी जपना सिंह ने आरोप लगाया है कि शिविंदर सिंह और उनकी पत्नी अदिति ने साजिश के तहत उन्हें और उनके परिवार को सोसायटी से बाहर कर दिया। आरोप है कि इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और रिकॉर्ड्स में हेरफेर की गई।

FIR दर्ज, EOW जांच में जुटी

जपना सिंह की शिकायत पर 22 अक्टूबर 2025 को EOW में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि मार्च 2025 में सोसायटी की एक मीटिंग दिखाकर जपना सिंह और अन्य सदस्यों को ग़लत तरीके से हटा दिया गया और उनकी जगह नए ट्रस्टी जोड़ दिए गए। शिकायत में कहा गया है कि यह सब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति और सालाना 30 करोड़ रुपये की कमाई पर नियंत्रण पाने के लिए किया गया।

फॉरेंसिक ऑडिट में चौंकाने वाले खुलासे

सोसायटी की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट 10 जुलाई 2025 को तैयार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में सोसायटी की कई बैठकों के रिकॉर्ड गायब हैं। AGM नोटिस में भी अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि सभी सदस्यों की सहमति के बिना नियमों में बदलाव किया गया और बैंक खातों के संचालन में भी गड़बड़ी सामने आई है।

EOW ने इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

पहले से जेल में हैं शिविंदर सिंह

गौरतलब है कि रिलायंस फिनकैप और उसकी पैरेंट कंपनी रिलायंस इंटरप्राइजेज में 2397 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में शिविंदर सिंह अक्टूबर 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कथित रूप से सुखेश चंद्रशेखर ने जून 2020 में तिहाड़ जेल से अदिति को कॉल कर मदद की पेशकश की थी। आरोप है कि शिविंदर को जमानत दिलाने के नाम पर कई किस्तों में करीब 200 करोड़ रुपये वसूले गए।

इसी क्रम में मालविंदर सिंह की पत्नी जपना सिंह से भी वर्ष 2021 तक करीब 3.5 करोड़ रुपये लिए जाने का आरोप है। इससे पहले भी अदिति शिकायत दर्ज करा चुकी हैं। 12 अगस्त 2021 को सुखेश चंद्रशेखर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

भाइयों की जंग फिर सुर्खियों में

रैनबक्सी, फोर्टिस और रिलायंस समूह से जुड़े विवादों के बाद अब यह चैरिटेबल सोसायटी विवाद दोनों भाइयों के बीच टकराव का नया अध्याय बन गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।


हुए नामवर बेनिशां कैसे कैसे…
दवा बनाने वाली रैनबैक्सी कंपनी को कौन नहीं जानता? सत्यम कम्प्यूटर को कौन नहीं जानता? सहारा इंडिया को कौन नहीं जानता? कैफे काफी डे को कौन नहीं जानता?
यह कम्पनियां हम लोगों के सामने देखते देखते जमींदोज हो गई, जो शीर्ष पर हुआ करती थीं, इनके मालिकों ने जेल की हवा खाई, सुसाइड कर लिया.. मर खप गए.
ये छोटी मोटी कम्पनियां नहीं थी. पचास हजार करोड़, एक लाख करोड़ रुपये की कम्पनियां… अपने क्षेत्र की शीर्ष कम्पनियां… अपने दम पर इनके मालिकों ने इन्हे बनाया था.
छोटे मोटे लोगों को तो बनते मिटते इस कदर देखा है कि उनकी संख्या गिनाना मुश्किल है.
जब मैं किसी से कहता हूँ कि धन और पद वगैरा कोई मायने नहीं रखता तो प्रतिक्रिया होती है कि आप नहीं कमा पाए इसलिए मन बहलाने के लिए ऐसा कह रहे हैं… ऐसा नहीं है. सचमुच मेरी हृदय से कभी इच्छा नहीं होती कि मेरा कोई आर्थिक साम्राज्य हो… बहुत धन हो.
बस इतनी ही इच्छा होती है कि किसी से कुछ खुद मांगने की स्थिति न आये, जीवन चलता रहे. कोई कुछ अपेक्षा करे तो उसे पूरी कर सकूँ.
ऐसा नहीं कि धन से कोई नफरत है. धन को अगर मेरे पास आने की इच्छा हो तो वह आये… खूब आए… लेकिन मैं उसके पीछे भागकर पागल नहीं बनना चाहता… इसलिए कि मैंने अपनी जिंदगी में बहुत धन वाले देखे हैं. मनुष्य क्या, एक मच्छर उनको इतना लाचार कर देता है कि अपने प्रिय जनों अपनी जिंदगी को गंवा देते हैं.
अब मेरा सपना नदी, पहाड़, झरने खुले आसमान, किताबों, 2 वक्त के भोजन तक सिमट गया है. पहाड़ तो इतने लुभाते हैं कि जैसे अपना नार वहीं गाड़ दिया गया हो और बार बार उसे खोजने जाना चाहता हूँ. अपने सपनों का आश्रम बनाना मेरा एक दशक से ज्यादा का सपना है, जहाँ प्रेम ही प्रेम हो, कोई क्रोध, कोई झुझलाहट न हो… वहाँ अपने प्रिय पचीस पचास लोग हों. वह सपना बार बार आता है. -सत्येंद्र पी सिंह

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