अकबर पर बलात्कार के नए आरोप से मीटू अभियान हिन्दी अखबारों में भी कवर होने लगा!

पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, भाजपा नेता और राज्य सभा सदस्य, वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और कई पत्र-पत्रिकाओं में रह चुके एमजे अकबर पर नया आरोप बलात्कार का लगा है। खास बात यह है कि अकबर ने इसे सहमति से संबंध बनाना या विवाहेत्तर मामला कहा है और पहली बार अकबर की पत्नी बचाव में सामने आई हैं और आरोपों को झूठ कहा है। अकबर को कई अखबार और पत्रिकाएं शुरू करने तथा उन्हें शिकर पर पहुंचाने का श्रेय है। अब उनकी पूर्व सहयोगी और महिला सहकर्मी उनपर यौन शोषण का आरोप लगा रही हैं। इनमें से एक पर अकबर ने मानहानि का दावा कर रखा है। ऐसे में बलात्कार का नया आरोप गंभीर है।

इस मामले में विवाद होने पर अकबर ने राज्यमंत्री पद से तो इस्तीफा दिया पर राज्यसभा के सदस्य हैं और भाजपा के भी सदस्य बने हुए हैं। ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि अकबर का मामला राज्य सभा की एथिक्स कमेटी में भी उठ सकता है। इंडियन एक्सप्रेस ने बलात्कार के आरोप और अकबर के जवाब की खबर को पहले पेज पर छापा है। शीर्षक है, “अमेरिकी पत्रकार ने कहा, एमजे अकबर ने मेरा बलात्कार किया; अकबर ने कहा सहमति से था”। खबर के मुताबिक, आरोप बलात्कार, बार-बार यौन उत्पीड़न और हिसंक व्यवहार का है।

हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पेज पर नहीं है। टाइ्म्स ऑफ इंडिया में यह खबर पहले पेज से पहले के अधपन्ने पर है, लेकिन है। इसके साथ अकबर का सहमति से संबंध का दावा तो है ही, “आरोप लगाने वाली झूठ बोल रही हैं : अकबर की पत्नी” शीर्षक से भी खबर है, जो अंदर के पेज पर जारी है। टेलीग्राफ ने इसे पेज चार पर छापा है। अकबर के दूसरे अखबार दि एशियन एज ने इस खबर को पहले पेज पर चार कॉलम में छापा है।

मीटू के तहत आरोप लगने शुरू हुए थे तो हिन्दी अखबारों ने अकबर को खास किस्म की छूट दे रखी है। लेकिन बलात्कार के आरोप पर ऐसा नहीं है। ज्यादातर अखबारों ने इस आरोप को प्रमुखता से छापा है। दैनिक हिन्दुस्तान में यह खबर खबरों के पहले पेज पर तीन कॉलम में है। शीर्षक है, रेप पर अकबर बोले, सहमति से संबंध रहे। यह खबर नहीं छाप कर खंडन छापने जैसे मामला है। हालांकि इसी खबर के साथ दो कॉलम के बॉक्स में खबर या आरोप है। उसका शार्षक है, कई वर्षों तक यौन शोषण का आरोप। कुल मिलाकर आरोप कम और जवाब ज्यादा छपा है। फिर भी पहले पेज पर है।

नवोदय टाइम्स में पहले पेज पर विज्ञापन है। अखबार ने इस खबर को दूसरे पेज पर टॉप पर छापा है। शीर्षक है, अमरीकी पत्रकार ने अकबर पर लगाया रेप का आरोप। उपशीर्षक है, अकबर ने कहा, सहमति से बने थे संबंध और बीच में बड़े अक्षरों में छपा है, अकबर की पत्नी ने भी आरोपों को झूठा बताया।

नवभारत टाइम्स में यह खबर खबरों के पहले पेज पर चार कॉलम में टॉप पर है। शीर्षक है, अकबर पर अब रेप का आरोप, पत्रकार ने कहा, यह 23 साल पुराना वाकया। इसके साथ सिंगल कॉलम में, “अकबर, पत्नी ने बताया अफेयर” भी छपा है। बीच में अब तक 17 ने कहा #MeToo भी छपा है। दैनिक जागरण ने भी इस खबर को प्रमुखता से छापा है। शीर्षक है, अब अमेरिकी पत्रकार ने अकबर पर लगाया दुष्कर्म का आरोप। उपशीर्षक है, कहा – 23 साल पहले अपने पद का लाभ उठाकर बनाया था शिकार। अखबार ने इस मुख्य खबर के साथ विवाद शीर्षक से तीन बिन्दु और सिंगल कॉलम में तीन छोटी-छोटी सूचनाएं प्रकाशित की हैं। पहली का शीर्षक है,” देर रात तक दोनों फोन पर करते थे बात” (यह अकबर की पत्नी का बयान है)। दूसरी सूचना का शीर्षक है, (अकबर ने) एक महिला के खिलाफ मानहानि का मामला दायर कर रखा है। तीसरी सूचना का शीर्षक है, एडिटर्स गिल्ड ने कहा, गहरी चिन्ता का विषय है नया आरोप।

दैनिक भास्कर ने भी इस खबर और अकबर के दावे को प्रमुखता से छापा है। भास्कर ने दर्दभरी यादें विषय के तहत पत्रकार की आपबीती या आरोप के अंश भी प्रकाशित किए हैं। खबर की शुरुआत से पहले लिखा है, अकबर की पत्नी भी बचाव में उतरी, कहा – इस महिला की वजह से हमारा घर टूटने वाला था। अमर उजाला में यह खबर मुझे नहीं दिखी। राजस्थान पत्रिका में भी यह खबर पहले पेज पर है। शीर्षक है, जयपुर में बलात्कार का आरोप, अकबर ने कहा, सब सहमति से। अखबार ने यह भी बताया है कि भारतवंशी पत्रकार ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखी आपबीती और अकबर के बचाव में उतरी पत्नी मल्लिका। अखबार ने इसके साथ यह भी लिखा है एडिटर्स गिल्ड से हटाने की मांग तेज और इसके साथ पीड़िता के आरोप का अंश कि उन्हें 22 साल में नौकरी का मौका मिला और 23 साल में संपादकीय पन्ने का प्रभारी बनाया गया भी छापा है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक, संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : anuvaad@hotmail.com

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One comment on “अकबर पर बलात्कार के नए आरोप से मीटू अभियान हिन्दी अखबारों में भी कवर होने लगा!”

  • https://pixelmedia1984.wordpress.com/2018/10/20/तो-क्या-मीडिया-मीटू-का-अड्/?fbclid=IwAR0l6jxDENzQEx0g0ee1FIoEgabcw_wW8_bUjswjgxsBHrm6miNRKDwYzCI

    …तो क्या मीडिया मीटू का अड्डा बन गया है?

    हॉलीवुड से शुरू हुआ मीटू कैंपेन भारत में इतना बड़ा रूप ले लेगा शायद किसी को इस बात का अंदाजा था? तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर लगाए यौन शोषण के आरोप के बाद इसमें कई बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए। हर दिन नए नाम के खुलासे से पूरा देश हैरान है, और शर्मशार हो रहा है। जमीनीं पत्रकार से लेकर स्वतंत्र स्तंभाकार तक इसकी चपेट में आ गये है। टाइम्स आॅफ इंडिया से अपनी कैरियर की शुरूआर करने वाले एम. जे. अकबर के खिलाफ मीटू कैपेंन के खिलाफ 20 महिलाओं ने कोर्ट में गवाही देने की बात कहीं। वहीं दूसरी ओर एक और वरिष्ठ पत्रकार विनोद दूआ पर एक महिला फिल्ममेकर नितीषा जैन ने भी 30 पहले किये गये यौन दुराचार का आरोप लगाया है।
    मीडिया गत में ऐसी घटनाएं एक बांनगी भर है— लोग किसी भी क्षेत्र में काम कर रहे हो, किसी भी पेशा से जुड़े हो, ऐसी घटनाएं देखने को मिल जाती है।चाहे वो खेत में काम करने पुरूष—महिला कामकागार हो, फैक्टरी में मजदूरी करनेवाला पुरूष—महिला मजदूर हो या एमएनसी कम्पनी में काम करने वाला पुरूष—महिला कर्मचारी हो।ऐसी घटनाएं राजनीति के क्षेत्र में भी देखने को मिली हैं।
    मेरा सवाल ये है… यदि किसी महिला के साथ किसी भी प्रकार का दूराचार या यौन उत्तपीड़न का मामला होता है तो उसकी प्रतिक्रिया उसी समय सामने क्यों नहीं आती? महिला किसी स्थानीय थाना में महिला स्वयंसेवी संस्था में जा कर शिकायत क्यों नहीं दर्ज करवाती है? वर्षो बाद ही पीड़ित महिला को घटना की याद क्यों आ जाती है? इन सवालों का जबाव शायद उसी महिला को मालूम है जिसके साथ इस प्रकार की घटनाएं घटित होती है।
    कह सकते है कि, पद, पैसा, प्रतिष्ठा, सामाजिक रूतुबा की चाह में महिलाएं अपनी जुंबा ख़ामोश रखती है। लेकिन, जैसे ही उनकी ये सारी इच्छाएं पुरी हो जाती है, तब बदनामी के किचड़ उछाला शुरू करती हैं। कहते है ना…बदनाम होगें तो नाम ना होगा…।

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