लखनऊ में श्रम विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां डिप्टी लेबर कमिश्नर (DLC) ने राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन को 27 मीडियाकर्मियों का चार महीने का बकाया वेतन चुकाने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार, कुल 36,57,336 रुपये की राशि एक महीने के भीतर कर्मचारियों को अदा करनी होगी।
यह आदेश उत्तर प्रदेश औद्योगिक शांति (मजदूरी का समय पर भुगतान) अधिनियम, 1978 के तहत पारित किया गया है। मामले की सुनवाई श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र में की गई, जिसमें वादी पक्ष की ओर से कलानिधि मिश्रा व अन्य 26 कर्मचारी शामिल थे। यह वाद यूपी न्यूज पेपर इम्प्लाइज यूनियन के माध्यम से दायर किया गया था।
क्या है मामला?
आदेश कॉपी के अनुसार, संबंधित मीडियाकर्मी सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 तक राष्ट्रीय सहारा में कार्यरत थे, लेकिन इस अवधि का वेतन उन्हें नहीं दिया गया। कर्मचारियों ने इसे लेकर श्रम विभाग का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जांच और सुनवाई के बाद यह फैसला आया।
प्रबंधन की दलील खारिज
प्रबंधन की ओर से दलील दी गई कि नया श्रम कानून लागू होने के कारण यह मामला पुराने कानून के तहत विचारणीय नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित कर्मचारी ‘वर्कमैन’ की श्रेणी में नहीं आते।
हालांकि, DLC ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर वेतन भुगतान में चूक हुई है। आदेश में कहा गया कि निर्धारित अवधि का वेतन न देना श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन है।
एक महीने की समयसीमा
DLC ने अपने आदेश में प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह एक माह के भीतर पूरा बकाया भुगतान सुनिश्चित करे। साथ ही, आदेश का अनुपालन न करने की स्थिति में आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यह फैसला सहारा समूह से जुड़े मीडियाकर्मियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है और लंबे समय से लंबित वेतन विवाद में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।
आदेश की कॉपी पढ़िए…









Kushalpal singh
April 1, 2026 at 6:28 am
Hii