
सुजीत सिंह ‘प्रिंस’-
गाजीपुर। जनपद गाजीपुर के करण्डा विकासखंड में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) रविंद्र सिंह पटेल पर शिक्षकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जनपद गाजीपुर के प्रतिनिधिमंडल ने 15 मई को एक विस्तृत शिकायत पत्र उत्तर प्रदेश के महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, लखनऊ को भेजा है, जिसमें बीईओ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संयोजक डॉ दिग्विजय सिंह और जिला सह संयोजक दिवाकर सिंह समेत आधा दर्जन पदाधिकारियों ने सप्रमाण लिखित आरोप लगाया है कि रविंद्र सिंह पटेल शिक्षा विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए लगातार भ्रष्टाचार, महिला शिक्षिकाओं का मानसिक उत्पीड़न, और शिक्षकों के मौलिक अधिकारों के हनन में लिप्त हैं।

आरोपों का विस्तृत ब्योरा…
1. अवकाश के लिए रिश्वत की मांग
शिक्षकों द्वारा पोर्टल पर प्रसवकालीन, बाल्य देखभाल अथवा आकस्मिक अवकाश का आवेदन करने के बाद भी बीईओ उसे बिना रिश्वत के स्वीकृत नहीं करते। कई महिला शिक्षिकाओं ने कहा कि प्रसव के बाद भी उन्हें अपने अवकाश की स्वीकृति के लिए धनराशि देनी पड़ी।
2. महिला शिक्षिकाओं के साथ भेदभाव और उत्पीड़न
शिकायत पत्र में कहा गया है कि रविंद्र सिंह पटेल का व्यवहार महिला शिक्षिकाओं के प्रति असहनीय और मानसिक उत्पीड़न जैसा है। कई मामलों में शिक्षिकाओं की चिकित्सा संबंधी रिपोर्ट और प्रमाणपत्रों को भी दरकिनार कर दिया गया।
3. विद्यालय संचालन समय पर जबरन अनुपस्थिति दर्ज करना
शिक्षकों को परेशान करने के लिए बीईओ द्वारा विद्यालय समय पर उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित दिखा दिया जाता है। इसके पीछे उद्देश्य मानसिक दबाव बनाना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी देना बताया गया है।
4. वेतन रोकने की धमकी
यदि कोई शिक्षक स्वीकृति के बिना छुट्टी लेता है, तो उसका वेतन रोक दिया जाता है, चाहे वह अवकाश वाजिब ही क्यों न हो। यह प्रक्रिया शिक्षक हितों के विरुद्ध है।
5. सेवानिवृत्त शिक्षकों से भी धन वसूली
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और सेवा-पुस्तिकाएं बीईओ कार्यालय द्वारा तब तक लंबित रखी जाती हैं जब तक उन्हें रिश्वत नहीं दी जाती।
“साहब कहते हैं बिना कुछ दिए कोई फाइल आगे नहीं बढ़ेगी”
शिक्षकों ने बताया कि रविंद्र सिंह पटेल खुलेआम यह कहते हैं कि “बिना सहयोग के कोई काम नहीं होता।” यह कथन विभागीय नैतिकता और ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
क्या कहता है महासंघ
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा रविंद्र सिंह पटेल को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो। साथ ही, महासंघ ने मांग की है कि पीड़ित शिक्षकों की गुमनाम गवाही को भी संज्ञान में लिया जाए।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
अब तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिक्षकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा लंबे समय से रविंद्र सिंह पटेल की कार्यशैली पर आंखें मूंद ली गई हैं।
क्या होगी कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार, महानिदेशक स्तर पर शिकायत पत्र संज्ञान में लिया गया है और प्राथमिक जांच के आदेश जल्द ही जारी हो सकते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो रविंद्र सिंह पटेल के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही तय मानी जा रही है।
मैं रो पड़ी जब बीईओ ने कहा – छुट्टी चाहिए तो दाम दो!”
एक महिला शिक्षिका, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर अपनी आपबीती साझा की, ने बताया कि—
“मैंने पोर्टल पर प्रसवकालीन अवकाश के लिए आवेदन किया था। अस्पताल के प्रमाणपत्र भी लगाए थे, लेकिन बीईओ साहब रविंद्र सिंह पटेल ने फोन कर कहा – ‘सीधा बोलिए, बिना सहयोग के छुट्टी नहीं मिलेगी।’ मैं स्तब्ध रह गई। जिस समय मुझे सबसे ज्यादा आराम और सहयोग की जरूरत थी, उसी समय मुझसे पैसा मांगा जा रहा था। मैं रो पड़ी… लेकिन फिर भी छुट्टी नहीं मिली।”
इस प्रकार की घटनाएं न केवल मानवता के विरुद्ध हैं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी हत्या हैं।
उपरोक्त आरोपों को लेकर जब आरोपी खंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र सिंह पटेल से संपर्क किया गया तो पहले उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया, ह्वाट्सऐप मैसेज के ज़रिए जब पक्ष जानने की कोशिश की गई तो भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया!
बीएसए गाजीपुर से भी भड़ास ने संपर्क कर इस विवाद को लेकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने जो कुछ कहा वह इस प्रकार है-
“मुझे इस प्रकार की शिकायत अभी प्राप्त नहीं हुई है, प्राप्त होने पर जांच कर के उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”
(उपरोक्त समस्त आरोपों के प्रमाण भड़ास के पास उपलब्ध हैं)



सूर्या
May 19, 2025 at 11:23 am
खंड शिक्षा अधिकारी सोचते हैं कोई शिक्षकों की शिकायत कर दे तो मेरा जलवा हो जाए और बेसिक शिक्षा अधिकारी सोचते हैं काश कोई खंड शिक्षा अधिकारी की शिकायत कर दे खंड शिक्षा अधिकारी को निर्दोष सिद्ध करूंगा और मेरा जलवा हो जाएगा।