संघ से जुड़े पत्रकार की हत्या से पसीने-पसीने हुए गाजीपुर के पुलिस कप्तान (देखें वीडियो)

गाजीपुर जनपद के करण्डा क्षेत्र में दैनिक जागरण के प्रतिनिधि राजेश मिश्रा की गोलियों से भूनकर हत्या के मामले में परिजन और इलाकाई लोग क्षुब्ध हैं. घटना के दिन पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा मौके पर पहुंचे और नाराज इलाकाई लोगों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने हत्यारों के जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया. मारे गए पत्रकार के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के कारण मामला ज्यादा गंभीर हो चुका है क्योंकि यूपी की सत्ता में संघ समर्थित भाजपा की सरकार है.

इस हत्याकांड का खुलासा गाजीपुर पुलिस के लिए चुनौती है. कप्तान सोमेन वर्मा जब पत्रकार के परिजनों और इलाकाई लोगों से बातचीत कर रहे थे तो इस दौरान बार-बार पसीना पोंछते नजर आए. जिले के समाजसेवी उमेश श्रीवास्तव ने कप्तान को इस हत्याकांड के बारे में बताया और अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर खुलासे की मांग की ताकि पता चल सके कि इस जघन्य अपराध को किन कुत्सित मानसिकता के लोगों ने अंजाम दिया. उमेश ने पुलिस कप्तान को बताया कि जिस तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया है, उससे लगता है कि अपराधी पेशेवर हैं. पुलिस कप्तान सोमेन वर्मा धैर्य से लोगों की बात सुनते रहे और जल्द से जल्द पूरा प्रकरण खोलने का आश्वासन दिया. संबंधित वीडियो देखने कि लिए नीचे क्लिक करें :

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साथी की हत्या से भड़के ग़ाज़ीपुर के पत्रकार सड़क पर उतरे (देखें वीडियो)

यूपी के गाजीपुर जिले में दैनिक जागरण के पत्रकार राजेश मिश्रा की गोली मार कर हत्या किए जाने से पूरे देश के पत्रकारों में उबाल है. देश भर में एक के बाद एक पत्रकारों की हत्याएं हो रही हैं. पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं.  गाजीपुर के पत्रकारों ने आज विरोध जुलूस निकाल कर अपने गुस्से का इजहार किया. जिले भर के पत्रकारों ने गाजीपुर कोतवाली से जुलूस निकाला और जिलाधिकारी कार्यालय तक जाकर अपना मांग पत्र सौंपा. इस दौरान गुस्साए पत्रकार लगातार नारेबाजी करते रहे और हत्यारों के शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की.

नीचे विरोध प्रदर्शन का वीडियो और जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन की प्रति है…

मूल खबर :

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अखंड गहमरी ने अमर उजाला के स्थानीय संवाददाता से दुखी होकर प्रधान संपादक को भेजा लीगल नोटिस

हमारे गहमर में एक समाचार पत्र है अमर उजाला जिसके स्‍थानीय संवाददाता को कार्यक्रम में बुलाने के लिए जो मानक है वह मानक मैं पूरा नहीं कर पाता। इस लिए वह न तो हमारे कार्यक्रम की अग्रिम सूचना छापते हैं और न तो दो दिनो तक कार्यक्रम के समाचार। तीसरे दिन न जाने उनको क्‍या मिल जाता है जो आनन फानन में मुझसे बात कर न करके अन्‍य लोगो से व्‍यक्ति विशेष के बारे में सूचना मॉंगते है और मनगढ़त खबर बना कर प्रकाशित कर देते है।

अब इस मनगढ़त समाचार पर अमर उजाला समाचार पत्र के संवाददाता, ब्‍यूरो और संपादक के खिलाफ मानहानि और पेड-न्‍यूज का मुकदमा तो बनता ही है। हमारे संवाददाता महोदय ने पूरे के पूरे कार्यक्रम को बदल दिया… देखें कैसे…

(1) कार्यक्रम गहमर के आशीर्वाद पैलसे में किया गया परन्‍तु श्रीमान जी उसका नाम भूल गये एक जगह तो उन्‍होेनें लिखा ” एक” पैलसे और दूसरी जगह चित्र के नीचे लिख दिया ” गहमर पैलेस”। कम से कम बैनर तो देख लिया होता।

(2) उन्‍होंनेे बड़ी आसानी से मेरे मेहनत पर पानी फेरते हुए कवि सम्‍मेलन को काव्‍य-गोष्‍ठी बना दिया, अब जब श्रीमान जी को काव्‍य सम्‍मेलन या काव्‍य गोष्‍ठी में फर्क नहीं मालूम है तो किसी से पूछ लेना चाहिए था।

(3) उनके अनुसार कार्यक्रम में जो सम्‍मान दिये गये थे वो काव्‍य गोष्‍ठी के बाद तय किये गये थे, जब कि श्रीमान को यह पता नहीं कि मेरे सारे सम्‍मान 9 अगस्‍त 2017 को ही तय किये जा चुके थे, जिसकी सूचना सोशलमीडिया से लेकर समाचार पत्रों को प्रेस नोट के द्वारा दे दिया गया था।

(4) श्रीमान जी को आये हुए अतिथियों के नाम नहीं मिले और जो सम्‍मान न आने के कारण मंच से निरस्‍त कर दिये गये वही नाम उन्‍होनें प्रकाशित कर दिया। जिन्‍हेें सम्‍मान मिला ही नहीं, जो सम्‍मान पाये उनका नाम हवा में।

(5) श्रीमान जी ने रविता पाठक, सुलक्षणा अहलावत, बीना श्रीवास्‍तव, डा0 चेतना उपाध्‍याय, कमला पति गौतम, डा0 ज्‍योति मिश्रा को अलग अलग सम्‍मान दिया जाना लिखा है जबकि इन सभी को साहित्‍य सरोज शिक्षा प्रेरक सम्‍मान दिया गया। यहॉं तक की आरती का सम्‍मान न आने के कारण दिया ही नहीं गया।

(6) भाई साहब ने फोटो में भी लिखा है कि बीना श्रीवास्‍तव को सम्‍मानित करते साहित्‍यकार जबकि फोटो में साफ दिख रहा है कि बीना श्रीवास्‍तव जी को मुख्‍य अतिथि कमल टावरी जी सम्‍मानित कर रहे हैं।

(7) पूरे समाचार में आप कही भी इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाली संस्‍था या आयोजक का नाम और साथ में यह कार्यक्रम कब हुआ उसका पता नहीं।

(8) जो सम्‍मान दिया जा रहा है वह शिक्षक दिवस के अवसर पर दिया गया 5 सितम्‍बर को और जो समाचार की हेडिंग बनी है वह है चार सितम्‍बर की।

(9) 4 सितम्‍बर को आयोजित ” आखिर क्‍यो कटघडे में मीडिया” परिचर्चा के अन्‍य वक्‍ताओं, सभा अध्‍यक्ष, मुख्‍यअतिथि सबके नाम गायब।

और भी बहुत कुछ है जिसकी चर्चा मैंने अपने कोर्ट नोटिस में किया है।

भाई, आपको मुझसे एलर्जी थी तो आप मत छापते मेरा समाचार. मैं आपके चरण तो पखार नहीं रहा था. और न ही आपको किसी डाक्‍टर ने मेरा समाचार छापने को कहा था। और यदि किसी मजबूरी या लालच के आधार पर छाप भी दिया तो सही सही छापना था। क्‍यों गलत सही छाप कर मेरे कार्यक्रम की तौहीन कर दिये। आपको किसने हक दिया था इसका।
अब आप सब खुद समझदार हैं। मैं अधिक बोलूगॉं तो आप सब यही कहेंगे कि मैं बेफजूल की बात कर रहा हूँ।

चलिये मैंने वीडियो रिकार्डिग और फोटो के आधार पर कोर्ट की नोटिस तो दिनांक 08 सितम्‍बर 2017 को प्रधान संपादक के नाम भेज कर कापी टू संपादक, ब्‍यूरो, कर दिया है। आगे देखते हैं क्‍या हेाता है। कुछ हो न हो पर मन को तसल्‍ली तो मिलेगी कि मैंने आवाज उठाई।

अखंड गहमरी

गहमर

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)

akhandgahmari@gmail.com

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अपराधी को हिरासत से भगाने वाली गाजीपुर पुलिस ने निर्दोष बुजुर्ग का मोबाइल फोन छीन लिया!

Yashwant Singh : ग़ज़ब है यूपी का हाल। अपराधी भाग गया हिरासत से तो खिसियानी पुलिस अब बुजुर्ग और निर्दोष को कर रही परेशान। मेरे बुजुर्ग चाचा रामजी सिंह का फोन ग़ाज़ीपुर की नन्दगंज थाने की पुलिस ने छीना। बिना कोई लिखा पढ़ी किए ले गए। अब बोल रहे फोन हिरासत में लिया है। शर्मनाम है यह सब। जो पुलिस वाले नशे में होकर अपराधी को भगाने के जिम्मेदार हैं, उनको तो अरेस्ट किया नहीं होगा, एक बुजुर्ग को ज़रूर घर से उठा ले गए और फोन छीन लिया। चाचाजी फिलहाल लौट आए हैं, लेकिन फोन पुलिस ने रख लिया। यही है मोदी-योगी राज का स्मार्ट और डिजिटल इंडिया। राह चलते आदमी का फोन पुलिस छीन ले जाए और पूछने पर कहे कि फोन हिरासत में लिया है। माने बिना लिखा पढ़ी किसी का भी फोन छीनकर हिरासत में लेने का अधिकार है पुलिस को? यूपी की पुलिस कभी न सुधरेगी।

चाचा का मोबाइल पुलिस वालों ने लौटा दिया. गाजीपुर के एसपी का फोन आया था. पर सवाल ये है कि क्या पुलिस होने का मतलब यही होता है कि आप किसी भी सीनियर सिटीजन को उठा लो और फिर उनको यहां-वहां घुमाने के बाद छोड़ते हुए फोन छीन लो. जब फोन के बारे में पूछा जाए तो कह दीजिए कि फोन हिरासत में है. बिना लिखत पढ़त आपका फोन कैसे ले सकते हैं पुलिसवाले? डिजिटल इंडिया के इन दिनों में जब फोन आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है, आपकी वर्चुवल / आनलाइन पर्सनाल्टी की तरह है मोबाइल फोन, इसमें सारे मेल, सारे पेमेंट डिटेल्स, सारे कार्ड्स, सारे सोशल मीडिया साइट्स, सारे कांटैक्ट्स, सारे आफिसियल और परसनल डिटेल्स होते हैं तो आप पुलिस वाले इन्हें यूं ही छीन कर कैसे ले जा सकते हो और और पूछने पर तपाक से कैसे कह दोगे कि फोन आपका हिरासत में लिया गया है? मने कुछ भी कर दोगे और कुछ भी कह दोगे? कोई नियम-कानून आपके लिए नहीं है? अपराधी आप पुलिस वाले खुद ही हिरासत से भगा दीजिए और इसका बदला किन्हीं दूसरे निर्दोषों से लीजिए?

गाजीपुर के पुलिस कप्तान सोमेन वर्मा को मुझे यह समझा पाने में काफी मुश्किल हुई कि आपका थानेदार किसी का फोन यूं ही कैसे छीन कर ले जा सकता है? आपको किसी आदमी पर शक है, उसकी बातचीत या उसके मैसेजेज पर शक है तो आप उसके फोन नंबर सर्विलांस पर लगवा लो, सीडीआर निकलवा लो, सारे मैसेज पता करवा लो, सारे फोन सुन लिया करो… चलो ये सब ठीक, देश हित का मामला है, अपराध खोलने का मामला है, अपराधी पकड़ने का मामला है, कर लो ये सब, चुपचाप. लेकिन आप किसी का फोन कैसे छीन लेंगे? और, पूछने पर कहेंगे, पूरी दबंगई-थेथरई से, कि हम फोन चेक कर रहे हैं? ऐसे कैसे फोन छीनकर चेक कर सकते हैं आप लोग? आपने अगर फोन छीनकर आपके लोगों ने इसी फोन से अपराधियों को फोन कर दिया, इसी फोन से अपराधियों को मैसेज कर दिया और फिर बाद में यह कह कर फोन वाले को फंसा दिया कि इस फोन से तो अपराधियों को काल किया गया है, मैसेज किया गया है तो फिर हो गया काम… इस तरह से आप लोग किसी भी निर्दोष को फंसा सकते हैं.

देश में अभी निजता की बहस चल ही रही है. किसी के फोन में देखना तक अनैतिक होता है. किसी के फोन को बिना पूछे उठाना गलत माना जाता है. आप पुलिस वाले तो किसी दूसरे का पूरा का पूरा फोन ही छीन लेते हो? ये इस लोकतंत्र में किस किस्म का निजता का अधिकार है? या फिर ये निजता का अधिकार सिर्फ बड़े शहरों के बड़े लोगों के लिए है?

ट्विटर पर यूपी पुलिस, डीजीपी, सीएम योगी आदि को टैग करते हुए जब मैंने ट्वीट किया और कई साथियों ने इस ट्वीट पर यूपी पुलिस व गाजीपुर पुलिस से जवाब मांगा तो गाजीपुर पुलिस सक्रिय हो गई. रात में ही चाचा का फोन नंदगंज थाने से शहर कोतवाली मंगवा लिया गया और मुझे इत्तला किया गया कि फोन आ चुका है, किसी को भेज कर मंगवा लें. मेरे अनुरोध करने पर शहर में रहने वाले साथी Sujeet Singh Prince और Rupendra Rinku भाई रात करीब एक बजे गाजीपुर कोतवाली जाकर चाचा का फोन ले आए.

सवाल ये भी है कि क्या हम आप अगर ट्विटर और एफबी पर सक्रिय हैं, तभी जिंदा रहेंगे, वरना पुलिस आपके साथ कोई भी सलूक कर जाएगी? ऐसा देश मत बनाइए भाइयों जहां किसी निर्दोष और किसी आम नागरिक का जीना मुहाल हो जाए. क्या फरक है सपा की अखिलेश सरकार और भाजपा की योगी सरकार में? वही पुलिस उत्पीड़न, वही अराजकता, वही जंगलराज. जिसका जो जी कर रहा है, वह उसे धड़ल्ले से कर रहा है, बिना सही गलत सोचे.

हमारे गांव का एक अपराधी गाजीपुर शहर में पुलिस हिरासत से फरार हो गया. बताया जाता है कि पुलिस वाले जमकर पीने खाने में मगन थे और उसी बीच वह भाग निकला. जो पुलिस वाले उसे पेशी पर लाए थे, उन्हें करीब दो घंटे बाद पता चला कि पंछी तो उड़ चला. मुझे नहीं मालूम गाजीपुर के पुलिस कप्तान ने इन लापरवाह, काहिल और भ्रष्ट पुलिस वालों को गिरफ्तार कराया या नहीं, जो अपराधी को भगाने के दोषी हैं. इन पुलिस वालों ने कितने पैसे लेकर अपराधी को भगाया, इसे जांच का विषय बनाया या नहीं, मुझे नहीं मालूम. पर पुलिस विभाग शातिर अपराधी के भाग जाने के बाद उसे खोजने-पकड़ने के चक्कर में अब उन निर्दोषों को परेशान करने लगा जिनका इस शख्स से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं.

खिसियानी बिल्ली खंभो नोचे के क्रम में पुलिस वाले भागे हुए अपराधी को पकड़ने के नाम पर मेरे गांव पहुंचे और मेरे बुजुर्ग चाचा रामजी सिंह को उठा ले गए. वे उन्हें गाजीपुर शहर उनके बड़े वाले पुत्र यानि मेरे कजन के घर पर ले गए. उनका बड़ा पुत्र गांव छोड़कर गाजीपुर शहर में गांव की किचकिच / राजनीति से बचने के लिए सपरिवार किराये पर रहने लगा. वहां जब उनका बड़ा बेटा नहीं मिला तो पुलिस वाले चाचा को छोड़ तो दिए पर जाते-जाते उनका फोन ले गए. उस फोन को ले जाकर उन्होंने उसमें सेव सभी नामों पर मिस काल मारने लगे. जिसका भी पलट कर फोन आए, उससे फोन पर ही पूछताछ करने लगते.

अरे भाई गाजीपुर पुलिस! आजकल की पुलिसिंग बहुत एडवांस है. कहां बाबा आदम के जमाने के इन तौर-तरीकों / टोटकों में अटके पड़े हो और अपनी कीमती उर्जा यूं ही खर्च कर रहे हो. आजकल अव्वल तो शातिर अपराधी फोन पर बात नहीं करते. दूसरे, पुलिस के लोग अब तकनीकी रूप से काफी ट्रेंड किए जाने लगे हैं ताकि वे सारे आयाम को समझ कर अपराधी को बिना भनक लगे दबोच सकें. साइबर अपराध बढ़े हैं और इसी कारण इसको हैंडल करने के लिए ट्रेंड पुलिस वालों की भी संख्या बढ़ाई जा रही है. पर यूपी में लगता है कि पुलिस अब भी बाहुबल और बकैती को ही अपराध खोलने का सबसे बड़ा माध्यम मानती है.

भाई एडवोकेट Prateek Chaudhary की एक पोस्ट पढ़ रहा था जिसमें उन्होंने लिखा है कि अलीगढ़ में एक थाने में एक लड़की को 12 दिन तक लगातार गैर-कानूनी रूप से रखा गया. उस पर शायद अपनी भाभी की हत्या का आरोप था. जब हो-हल्ला हुआ तो उसे 12 दिन के बाद जेल भेजा गया. बताइए भला. एक लड़की को आप 12 दिन तक हवालात में रखते हो! ये कहां का नियम कानून है. आप रिमांड पर लो. पूछताछ करो. पर ये क्या कि न कोर्ट में पेश करेंगे न जेल भेजेंगे, बस हवालात में रखे रहेंगे! वो भी एक लड़की को! क्या इन्हीं हालात में (गाजीपुर में मेरे चाचाजी वाले मामले और अलीगढ़ में लड़की वाले मामले में) पुलिस वाले उगाही और बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं करते?

योगी सरकार को यूपी में पुलिसिंग दुरुस्त करने के लिए बहुत सख्त कदम उठाने की जरूरत है अन्यथा सरकार बदलने के बावजूद जनता के कष्ट कम न हो सकेंगे. अखिलेश यादव के राज में जो जंगलराज था, वही हालात आज भी जमीन पर है. खासकर छोटे और पिछड़े जिलों में तो पुलिस विभाग का बुरा हाल है. वहां पुलिस का मतलब ही होता है गरीबों को प्रताड़ित और शोषित करने वाले. निर्दोष जनता से बदतमीजी करने के आरोपी / दोषी पुलिस वालों को बिना देर किए सस्पेंड-बर्खास्त करने में कतई हिचकने-झिझकने की जरूरत नहीं. शायद तभी ये सुधर सकें.

मेरे चाचा के फोन छीने जाने वाले मामले में डॉ Avinash Singh Gautam और Avanindr Singh Aman समेत ढेरों साथियों ने ट्विटर पर तुरंत सक्रियता दिखाई, इसके लिए इन सभी का दिल से आभार.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. संपर्क : 9999330099 या yashwant@bhadas4media.com

गाजीपुर पुलिस का हाल जानने के लिए इसे भी पढ़ें…

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पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह के बयान से नाराज भाजपाइयों ने पुतला फूंका, भाजपा विधायक सुनीता सिंह ने की प्रेस कांफ्रेंस

ग़ाज़ीपुर : पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह द्वारा हिंदुस्तान अखबार गाजीपुर के पत्रकार अजीत सिंह को धमकी देने वाले आडियो में जमानियां से भाजपा विधायक सुनीता सिंह को भी काफी अपशब्द कहा गया है. साथ ही एमएलसी चंचल सिंह के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है. इससे नाराज भाजपाइयों ने सेवराईं तहसील मुख्यालय के भदौरा बस स्टैंड पर जुलूस निकाल कर ओम प्रकाश सिंह का पुतला फूंका. उधर, लखनऊ में भाजपा विधायक सुनीता सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर ओम प्रकाश सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

जमानिया विधायक सुनीता सिंह एवं एमएलसी विशाल सिंह को अपशब्द प्रयोग करने वाली ऑडियो के विरोध में भाजपा जनो में आक्रोश व्याप्त है. भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सेवराईं तहसील मुख्यालय के भदौरा बस स्टैंड पर गुरुवार को जुलूस निकाल कर नारेबाजी और प्रदर्शन के बीच पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह का पुतला फूंका गया. पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह द्वारा जमानिया विधायक सुनीता सिंह के लिए अमर्यादित जुबान व अपशब्दों का प्रयोग करने के कारण भाजपा जनो में काफी आक्रोश है. गुरुवार को भाजपा नेता ग्राम प्रधान धर्मेंद्र कुशवाहा, शिवशंकर सिंह, और भोलू खाँ के नेतृत्व में सैकड़ो महिलाओं, पुरुषों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भदौरा बस स्टैंड स्थित भाजपा कार्यालय से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए मुख्य तिराहे पर पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह का पुतला फूंका.

इससे पूर्व लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा नेता धर्मेंद्र कुशवाहा ने कहा कि तानाशाही रवैया बर्दाश्त नहीं होगा. यह देश महिलाओं के सम्मान के लिए जाना जाता है. नारी का सम्मान सबसे बड़ा सम्मान है. माताओं और बहनों के सम्मान से ही महानता मिलती है. जो इंसान महिलाओं के लिए अमर्यादित शब्दो का प्रयोग करता है, तानाशाही अपनाता है, उसे इस राज्य में तो क्या इस देश मे भी रहने का हक नहीं है. जनता इस अपमान का बदला जरूर लेगी. भाजपा जनों ने ओमप्रकाश मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए उनका पुतला फूंका. इस मौके पर अल्का सिंह, कमला सिंह, डॉ राजकुमार भारती, मोनू खाँ, अरुण जायसवाल, कुरैशा खातून,  भोलू खाँ, बेचन कुशवाहा, लवकुश, राहुल, वाजिद खाँ, टुन्नी चौहान, उमाशंकर राम, सावित्री देवी, मीरा, शिवजन्म पासवान, महेंद्र कुशवाहा, रामानुज कुशवाहा,  रिजवाना खातून, बगेदन राम आदि  कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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गाजीपुर से सुजीत कुमार सिंह ‘प्रिंस’ की रिपोर्ट. संपर्क : 9451677071 

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धिक्कार है ‘हिंदुस्तान’ अखबार और इसके संपादक विश्वेश्वर कुमार पर!

बनारस से छप कर हिंदुस्तान अखबार गाजीपुर पहुंचता है. बनारस के संपादक हैं विश्वेश्वर कुमार. बेहद विवादित शख्सियत हैं. जहां रहें, वहीं इनके खिलाफ लोगों ने विद्रोह का बिगुल फूंका. भागलपुर में तो लोगों ने इनके खिलाफ लिखकर सड़कों को पोस्टरों बैनरों से पाट दिया था. ये समाचार छापने में राग-द्वेष का इस्तेमाल करते हैं. ये ‘तेरा आदमी मेरा आदमी’ के आधार पर आफिस का कामकाज देखते हैं. ताजी हरकत इनकी ये है कि इन्होंने अपने ही अखबार के रिपोर्टर को एक पूर्व मंत्री द्वारा धमकाए जाने की खबर को अखबार में नहीं छापा.

विश्वेश्वर कुमार के लिए शर्म की बात ये है कि दूसरे अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छाप दिया है. अब या तो विश्वेश्वर कुमार को संपादक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर चुल्लू भर पानी लेकर इसमें अपनी पत्रकारिता को डुबो कर मरने के लिए छोड़ देना चाहिए. अगर विश्वेश्वर कुमार को प्रधान संपादक शशिशेखर ने खबर छापने से रोका है तो उन्हें इसका खुलासा करना चाहिए. उन्हें उन हालात के बारे में लिखना चाहिए, बताना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर, किसके कहने पर, किस विवेक से इस खबर को छापने से मना कर दिया. आखिर जब आप अपने रिपोर्टर के मुश्किल वक्त में नहीं खड़े हो सकते तो आप काहें के संपादक और कहां के मनुष्य.

हिन्दुस्तान अखबार के पीड़ित पत्रकार की खबर अमर उजाला गाजीपुर एडिशन में फर्स्ट पेज पर छपी है. दैनिक जागरण के गाजीपुर संस्करण में भी ये खबर छपी है. लेकिन हिन्दुस्तान पेपर ने अपने ही पत्रकार को धमकाने की खबर को गाजीपुर एडिशन में प्रकाशित नहीं किया. हिंदुस्तान गाजीपुर के रिपोर्टर अजीत सिंह को करप्शन से संबंधित खबर छापने के कारण एक पूर्व मंत्री द्वारा धमकाए जाने के बाद गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ने एक सुरक्षा गार्ड प्रदान किया है. साथ ही पत्रकार की तहरीर पर पूर्व मत्री ओम प्रकाश सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

हिंदुस्तान बनारस के संपादक विश्वेश्वर कुमार को बताना चाहिए कि उन्होंने पत्रकारिता के किस नियम का संज्ञान लेकर अपने ही रिपोर्टर को धमकाए जाने, उसकी तहरीर पर पूर्व मंत्री के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की खबर का प्रकाशन नहीं किया. क्या उन्हें उनके गाजीपुर कार्यालय ने इससे संबंधित कोई खबर दी ही नहीं? अगर ऐसा है तो नाकारा गाजीपुर ब्यूरो को बर्खास्त कर देना चाहिए. अगर गाजीपुर ब्यूरो ने खबर भेजी तो उसे किसने किस हैसियत में रोका और किस कारण से रोका? पत्रकारिता तो पारदर्शिता का नाम है. उम्मीद है विश्वेश्वर कुमार का जमीर जगेगा और वे इन सवालों का जवाब कम से कम सोशल मीडिया पर ही देंगे ताकि लोग उनकी विश्वसनीयता पर भरोसा कर सकें. अगर वो जवाब नहीं देते हैं तो फिर हर कोई उनके बारे में एक राय कायम करने को स्वतंत्र हैं कि वो किस श्रेणी के संपादक रह गए हैं.

गाजीपुर से सुजीत कुमार सिंह ‘प्रिंस’ की रिपोर्ट. संपर्क : 9451677071

मूल खबर…

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सपा सरकार में मंत्री रहे ओम प्रकाश सिंह का चेहरा बेनकाब, सुनें पत्रकार को धमकाने वाला आडियो

यूपी में सपा सरकार के दौरान मंत्री रहे ओमप्रकाश सिंह का एक आडियो वायरल हुआ है जिसमें वह हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार को धमका रहे हैं. साथ ही जमानियां से भाजपा की महिला विधायक को उल्टा सीधा बोल रहे हैं. यूपी में अखिलेश यादव की पिछली सरकार में ओम प्रकाश सिंह पर्यटन मंत्री हुआ करते थे. वे गाजीपुर की जमानियां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हैं.

जमानियां में पर्यटन विभाग द्वारा कराये गये कार्यों में भ्रष्‍टाचार से सम्‍बंधित समाचार हिंदुस्‍तान अखबार में छपने पर अखबार के संवाददाता अजीत सिंह को पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दे डाली. संवाददाता अजीत सिंह ने इस घटना की तहरीर पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा को लिखित रुप से दी है.

अपनी तहरीर में अजीत सिंह ने बताया कि पांच अगस्‍त को पौने सात बजे पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने मेरे मोबाइल नम्‍बर 9415357094 पर अपने मोबाइल नं. 9450549693 से फोन करके गाली-गलौज करते हुए देख लेने की धमकी दी है. फोन पर उन्‍होंने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जमानियां विधानसभा में पर्यटन विभाग से जुड़े कार्यों में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार की खबरों को प्रकाशित नहीं करने की धमकी दी. ऐसा करने पर उन्‍होंने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी.

पूर्व पर्यटन मंत्री ने सिंचाई विभाग एक्‍सईएन दिनेश सिंह के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी खबरों को भी नहीं प्रकाशित करने के लिए कहा. उन्‍होंने फोन पर जमानियां की भाजपा महिला विधायक सुनीता सिंह एवं भाजपा के विधान परिषद सदस्‍य विशाल सिंह चंचल के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया. तहरीर में अजीत सिंह ने पुलिस प्रशासन से जान-माल की रक्षा के लिए गुहार लगाई है. टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

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”आप ठहरे भड़ासी पत्रकार, कोई आम आदमी होता तो फर्जी मुकदमे लादे जाते और जेल काट कर ही बाहर आता”

पिछले दिनों भड़ास के संपादक यशवंत सिंह के साथ यूपी के गाजीपुर जिले की पुलिस ने बेहद शर्मनाक व्यवहार किया. यशवंत अपने मित्र प्रिंस सिंह के साथ रेलवे स्टेशन पान खाने गए और कुछ लोगों की संदिग्ध हरकत को देखकर एसपी को सूचना दी तो एसपी के आदेश पर आए कोतवाल ने यशवंत व उनके मित्र को ही पकड़ कर कोतवाली में डाल दिया. इस पूरे मामले पर यशवंत ने विस्तार से फेसबुक पर लिखकर सबको अवगत कराया. यशवंत की एफबी पोस्ट पर आए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा इस प्रकार हैं… मूल पोस्ट नीचे कमेंट्स खत्म होने के ठीक बाद है… 

Mamta Kalia इस घटना से पुलिस का जनता के प्रति रवैया पता चलता है। मैंने एक बार अपने घर मे हुई चोरी की रपट लिखवाई थी। पुलिस ने मुझे अलग अलग तारीखों में कोर्ट बुला कर इतना परेशान किया कि मैंने लिख कर दे दिया मुझे कोई शिकायत नहीं। केस बन्द किया जाय।

सोनाली मिश्र हम लोग बाइक चोरी होने की रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे तो वो हमें ही यह उपदेश देने लगे, चेन न पहना करें, टॉप्स न पहनें आदि आदि।

Ramji Mishra इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पुलिस से शिकायत करने से पहले खुद को आदरणीय यशवंत जी की तरह मजबूत बना लेना चाहिए, अन्यथा अंजाम उसके हांथ होगा……

Shyam Singh Rawat अपने साथ भी मुरादाबाद में कुछ ऐसा ही हुआ था 1991 में। एक पुलिस इंस्पेक्टर की सार्वजनिक हित में ऐसी ही क्लास लगाई थी। फर्क इतना कि हम अकेले थे। बड़ी मुश्किल से इंस्पेक्टर साहब की जान छूटी थी।

Braj Bhushan Dubey अजीब दास्तान है। अजीबो गरीब घटना। आमजन के साथ तो ऐसे ही होता है जिसे चाहा उठा लिया और बेइज्जत कर दिया। शहर कोतवाल जो है। जोरदार लेखनी कि पढ़ने वाला एक बार शुरू करें तो अंत करके ही रुकेगा।

Pawan Singh यशवंत गुरू एक किस्सा और मिलता है तुम्हारे किस्से से….पुख्ता तौर पर वर्ष का उल्लेख न कर सकूँगा …वाकया होगा तकरीबन सन् 1988-89 का…दैनिक नवजीवन में मैं स्ट्रिंगर हुआ करता था…एक दिन पता लगा कि प्रसिद्ध कवि व पत्रकार राजेश विद्रोही और उस दौरान नवभारत टाइम्स में कार्यरत धीरेंद्र विद्यार्थी काठमांडू में धर लिए गए हैं …घटना यूँ थी कि नेपाल में कम्युनिस्ट दबदबे वाली सरकार थी..भाई लोगों ने दवा लगाई और काठमांडू के कवि सम्मेलन मंच पर ही कम्युनिस्टों के खिलाफ ही आधा दर्जन कविताओं का फाॅयर झोंक दिया….बवाल मचा…भाई लोग धर लिए गए ….अगले दिन हम लोगों ने नेपालगंज जाकर वहां के नेपाली पत्रकारों को साधा तो अगले दिन शाम ढलने के बाद छूटे….आज राजेश भाई तो दुनियां में नहीं हैं लेकिन उनकी कुछ कविताओं की दो-दो पंक्तियां आज भी याद हैं …..

अखबार नवीस भी अजब आदमी है, खुद खबर है दूसरों की लिखता है..

..आज सारा धनी पड़ोस उस निर्धन के साथ है।
लगता है उसकी बेटी जवान है…

..भूखे को चांद भी रोटी नजर आता है….

Vijay Prakash जय हो सर पूरा झकझोर दिए। आखिर तक हार नहीं माने…

Anurag Singh थाने को भी बाद में पता चला कि हम तो असली थानेदार को ले आये, फिर कोतवाल साहब बोले होंगे हईला….मैनें ये क्या कर दिया

Vinod Bhaskar बोला ये क्या कर बैठे घोटाला हाय ये क्या कर बैठे घोटाला, ये तो है थानेदार का साला.

पत्रकार यदु सुरेश यादव सर जी आप तो ठहरे भड़ासी पत्रकार, कोई आम आदमी होता तो लूट के दो चार केस दर्ज हो जाते और कुछ दिन जेल की रोटी तोड़ने के बाद ही बाहर आता, जय हो भड़ासानंद बाबा

Kuldeep Singh Gyani योगी का बदला कोतवाल से…अभी “अर्ध कुम्भ” लगने में समय है महराज, लेकिन बढ़िया तबियत दुरुस्त किये विभाग की…सारे भक्तजन एक साथ…बोलिये, स्वामी भड़ासानन्द महराज की जै

Azmi Rizvi दादा यही होता है आम आदमी के साथ, कोई आम आदमी होता तो जेल में होता आज, और दस बीस साल लग जाते उसे बेगुनाह साबित होने में। जै हो बाबा की

Rahul Vishwakarma सही सबक सिखाया… लेकिन कोतवाल की तरह आपको भी रायता थोड़ा और फैलाना चाहिए था. जरा जल्दी मान गए…

Surendra Trivedi यार मित्र, वाकई में बड़े ही रोमांटिक हो।

Anil Gupta पैदल चलने वाला हर आदमी सामान्य नही होता … बहुत खूब सर ..

Ravi S Srivastava लगता है जानेमन जेल पढे नही है कोतवाल साहब

Gaurav Joshi ग़ज़ब दादागिरी दिखायी भाई आपने ।

Riyaz Hashmi मेरठ कांड याद दिला दिया भाई। उस कहानी का एक चरित्र सौरभ भी याद आ गया जो अब इस दुनिया में नहीं है। Take Care.

Amod Kumar Singh कभी हमारी कोतवाली पधारिये, तुलसी रजनीगन्धा के साथ कन्नौज का इत्र विदाई में अलग से दिया जायेगा।

Yashwant Singh आंय । धमका रहे हैं भाया या वाकई प्रेम भरा न्योता है?

Amod Kumar Singh पुलिस में आने से पहले पुलिस की इतनी लाठियां खायी हैं, कि किसी सभ्य व्यक्ति को धमकाने या लठियाने की कल्पना ही नहीं की जा सकती।आपका स्वागत है।

Yashwant Singh काश आप जैसे सोच समझ के लोग पुलिस विभाग में ज्यादा होते। थैंक्यू आमोद भाई। न्योता कुबूल। जल्द मुलाकात होगीं।

Journalist Yogesh Bharadwaj यशवंत भाई आप मिलिएगा आमोद जी से अच्छे व्यक्तित्व के धनी है और अच्छी सोच समझ के साथ न्याय प्रिय भी

Mishra Aradhendu आप तो बच गए पर आम जनता का क्या , जिसको ये पुलिस वाले बोलने ही नहीं देते….??

Shivam Bhardwaj ज़बरदस्त… लगा जैसे सब कुछ सजीव देख रहा हूँ 🙂

Ashutosh Dwivedi यशवंत जी क्या छापी जा सकती है ये कथा।

Yashwant Singh बिल्कुल ब्रदर।

Nishant Arya रजनीगंधा से मोह नहींऐ जाएगा। उल्टे कोतवाले से घुस लिए।।। बाह

Ajay Kumar Kosi Bihar बच गए भाई.बिहार रहता तो पोलठी भी खाते.सब पत्रकारी निकाल देता.तब फिर से आपको जाने मन जेल का भाग 2 लिखना पड़ता.

Ghanshyam Dubey तो आगे से समझ लेना — SP और CO समझदार थे! अगर न होते तो कहानी में फिर कई ट्विस्ट होते। पुलिस तो फर्जी मुकदमे कायम करने में माहिर होती है! जवान हो, भड़ासी हो तो कहानियाँ तो होती रहेंगी…

चन्द्रहाश कुमार शर्मा …तो आप भी एक नया अफसाना बना दिये?

Sachin Mishra मनमोहक और काफी रुचिकर कहानी थी गुरु। सच में वो जवानी जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो।

Kailash Paswan इसलिए पुलिस को आमलोग उप नाम से पुकारते है

Devendra Verma आपने पुलिस का जो सच सुनाया है, वह बिलकुल सच है ….जैसे मैने पढना शुरू किया वैसे वैसे कहानी का रोमांच बढता गया आनन्द आ गया…..

Md Islam बेचारा कोतवाल गलत नंबर डायल कर गया

Amit Srivastava इस पूरी घटना में मुखपात्र कोतवाल का कही नाम नहीं लिखा अगर उसका नाम भी लिख देते तो मामला समझ ने लोगो को आसानी होती।

Pandit Prakash Narayan Pandey बेशर्मी व बेहयाई की हद्द कर दी उस दारोगा ने… वे सब बहुरूपिया तो होते ही हैं… बहरहाल लताड़ना तो कत्तई नहीं छोड़ना है….
Hemant Jaiman Dabang एक वाक्य में ख़त्म करूँगा—अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे… यहां ऊंट कोतवाल (पुलिस) को कहा गया है। और पहाड़ यशवंत सिंह को। राम जी राम

Ashutosh Chaturvedi ऊर्जा का संचार कर दिया सर आपने।

DrMandhata Singh गनीमत है एनकाउंटर नहीं किया। आजकल अपनी प्रगति के लिए अनजान लोगों को बलि का बकरा बनाते हैं पुलिस वाले और बाद में होती है लीपा-पोती। अनुरोध है कि ऐसे खेल न खेलें। हम लोगों के लिए आप बहुमूल्य हैं। यह आपको याद रखना चाहिए। सबक का खेल सावधानी से खेलें।

Sunayan Chaturvedi भड़ासी माहौल के जनक यशवंत सिंह की भड़ासी अदा को प्रणाम।

Purnendu Singh आज तो तुम खुश बहुत होगे ठाकुर कोतवाल सीओ, sp से माफी मंगवा लिए। याद रखना अब तुम्हारे जैसे लोग अनशन की धमकी मत दे कर माफी मंगवा सकते हैं तो यह नेता बलात्कारी और अपराधी हत्यारों को भी छोड़ा लेते हैं फिर दोष मत देना पुलिस को क्यों कोतवाल निकम्मा था जो तुमको ऐसे ही आने दिया… कभी किसी के चक्कर में पड़ोगे तो बताया जाएगा पुलिस क्या होती है…

Yashwant Singh आपकी बात कांट्राडिक्टरी हैं। बेवजह पकड़े जाने पर निर्दोष का प्रतिरोध और रेपिस्ट मर्डरर अपराधी को पुलिस से छुड़वाए जाने की नेता की गुंडई जैसी दो विरोधाभाषी चीजों को एक तराजू में रख कर कैसे तौल सकते हैं। वैसे, धमकाने के लिए धन्यवाद।

Sandeep Chandel भाई साहाब पुलिस कोई मुहनोचवा तो है नहीं कि किसी को उठा ले जाय मामले की सही जाच कर के उठाना चहीये ताकी लोगो का विश्वास बना रहे ये सही है की हम पुलिस की दिल से इज्ज़त करते हैं और करते रहेंगे , लेकीन विश्वास तब डगमगाता हैं जब ग्यात्री प्रजापती जैसे लोगों को पकडने में एक महीने लग जाता है और आम जनता को सरेआम बदनाम किया जाता है, हमे लगता है आप हमारी बातों से सहमत होंगे ,

Syed Shahid Ali पुलिस की कार्यप्रणाली की सच्चाई सहन न कर पाने बाले भाई साहब एक पत्रकार को धमकाने के बजाय जनता में पुलिस की छवि सुधारने पर विचार कीजिए । धन्यवाद

Uvaish Choudhari पुरनेन्दू जी के रिश्तेदार तो नही थे कोतवाल साहिब?

S.K. Misra गलती करने वालों को भी विभाग के यदि लोग ऐसे ही समर्थन देंगे तो उनमें सुधार कैसे होगा, इस पुलिस बाले की कमेंट को देख कर दुःख हो रहा है ।

Manoj Tripathi आप जहाँ काण्ड वहां!!

Ram Murti Rai Jabardast.. Heropanthi

C S Singh Chandu जरा सोचिए भाई साहब अगर आपके जगह कोई आमजनता होती तो अब तो उसका उसके पूरे परिवार के साथ बड़ी ही दर्दनाक कहानी हो जाती और वर्षों पढ़ी जाती… सोचकर ही रुह काँप जा रही है… पता नहीं और क्या क्या बीतती उस आम आदमी के साथ…

Rahul Gupta Badaun भैया जी, यह कोतवाल अब सपने में भी सौ सौ बार सोचेगा, इस भड़ासी बाबा से आइंदा पाला न पड़े। वरना अभी तो बच गया आगे भगवन मालिक होंगे। अब यह जहाँ भी आपको देखेगा खुद चल कर मिलने आएगा।

Ajay Mishra खेत खाए गदहा मारा जाए जुलाहा उत्तर प्रदेश पुलिस की यही दिनचर्या है यह सुधर जाएं तो पूरा प्रदेश सुधर जाए

ChandraShekhar Hada सर, ऐसा लग रहा है जैसे आप रजनीगंधा-तुलसी की विज्ञापन फिल्म कर रहे हैं।

Nirupma Pandey ये आप ही कर सकते थे ।

Maneesh Malik Thanks for police valo ko sabak sekhane k laya Maja aa gya. Jay hind.

Syed Mazhar Husain क्या बात है भाई… ऐसी तैसी हो गयी कप्तान से लेकर कोतवाल तक… एक सेल्फी तो बनती थी कोतवाल के साथ…

Narendra M Chaturvedi जेल तो….जानेमन जेल…नाम से प्रख्यात हुई…और अब कोतवाली….यशवंत भईया वैसे आज आपके मुताबिक जेल दिवस भी है…?

S.K. Misra इस पोस्ट में डीजीपी को टैग करना चाहिये था… उन्हें भी पता चलता उनके रणबांकुरे कैसे जनता की सेवा में तत्पर हैं।

Surya Prakash कुल मिला के रजनीगन्धा तुलसी की व्यवस्था हो गई गुरु …

Rajendra Joshi घटना तो जो भी रही हो कहानी में ऐसे-ऐसे मोड़ आपने डाल दिए कि लगा न जाने अगले मोड़ पर क्या नया होगा।

Sarvesh Singh बेचारे पुलिस वालों ने इस दिन की कल्पना तक ना की होगी।

Anshuman Shukla अब सोचिये, लल्लन टाप कानून व्यवस्था है कि नहीं है उत्तर प्रदेश में।

Ashok Kumar Singh आपका रिश्वत रजनीगन्धा तुलसी ,फिर भी सस्ता ही पड़ा कोतवाल को

Vinay Shrikar बतौर समझौते की शर्त तुलसी और रजनीगंधा के साथ ही संजीवनी सुरा की डिमांड कर देना था।

Rajesh Mishra बहुत गलत किये थे कोतवाल महोदय

A.k. Roy कोतवाल के लिऐ, सेर को सवासेर मिला….

Sant Sameer क्रान्तिवीरों की जै हो।

Shrinarayan Tiwari गजब की कहानी है यशवंत जी

Anuj Sharma गुरु एक नई जानकारी मिल गई। आप ”रजनीगंधा तुलसी” मंत्र से वश में होते हो।

Umesh Srivastava Socialist संत किसी के बस में नहीं होता और सब के बस में होता है

Anuj Sharma गुरु तो क्रांतिवीर हैं।।। पत्रकारों की रीढ़ हैं।।

Anuj Sharma अब भक्त ये मंत्र याद कर लेंगे।।।

Kaushal Sharma उत्तर प्रदेश पुलिस संघटित अपराधियों का सरकारी गिरोह है।

Abhay Prakash Yashwant G Mai to aapko ni janta par itna jarur kahunga ki pulice wale itna sidhe sadhe kab se ho gai

Anand Agnihotri फोन करके कोतवाल साहब का हालचाल तो पूछ लेते। बेचारा बड़ा मायूस बैठा होगा। अब कई दिन कहीं से रंगदारी नहीं मिलेगी उसे।

प्रयाग पाण्डे आपकी जै हो। माना आपकी जगह कोई दूसरा निरपराध इंसान होता ? बना दिया गया होता न अपराधी। खैर…… .

Dinesh Dard यही जुझारूपन तो चाहिए ज़ुल्म के ख़िलाफ़। मगर हर शख़्स में इतनी ताब कहाँ होती है। बहरहाल, ज़िंदाबाद।

Vinod Bhardwaj स्वामी भड़ासानन्द जी महाराज, अब उस इंस्पेक्टर को दिल से धन्यवाद कर दो जिसने अपनी करतूत से ये रोमांचकारी भडासी मसाला लिखने – पढ़ने का मौका दे दिया ।

Madan Tiwary यह हुई मेरे मन मुताबिक़ बात। अब आंदोलन शुरू करो गुरु।

Amar Chaubey ध्यान रखा करिये आप योगी सरकार में है

Madhusudan JI अपने ही घर के दरवाजे पर अपना ही कुत्ता न पहचान पाया और गुर्रा कर अपनी औकात भी जल्दी से पहचान लिया.. बधाई हो.. धूल चटा ही दिया उसे

Manish Jaiswal सर, इन कोतवाल महापुरुष का नाम तो बता दीजिए ताकि हम लोग भी उन्हें दुआ दे सकें…

Fareed Shamsi जलवा है जलवा, मैं तो सोच रहा था, कि अब एक और नई किताब पढ़ने के लिये मिलेगी ‘जानेमन हवालात’

Amit Tiwari आज फिर से अपराध जीत गया। एक तुलसी और रजनीगंधा की रिश्वत से बड़ी गलती को माफ़ कर दिया गया । क्या गारंटी है कि इस रिश्वत से पुलिस यह ग़लती किसी भले आदमी के साथ दोबारा नही करेगी।

Dheeraj Rai Sri Amit ji / Dobara Aysa karen na karen .. Ab Yah Police Parivar ke mukhiya (SP-Gazipur) ka daitva huva. Sri Yashvant Ji ne SP KoAaina dikha Apne Daitva ka Nirvahan kar diya. Ab Ek Journalist Es se jada kuchh nhi De Sakta Police ko. Ins. Ko Nilambit athva Anya koi bhi gambhir karywahi ka Vaydhanik Adhikar to Aaina Dekhte SP ke Pas hay !! Ab SP Avm Sarkar Samjhe.
Dhanyawad Sri Yashvan Ji.

Ashwani Sharma अरे भाई कोई आम आदमी होता तो अब तक जेल में सड़ रहा होता

Dheeraj Rai Haaaaaaaa…. To kisi Patrakar se Pala para tha Police ka. hona hi tha.

Lokesh Raj Singh Aapki patrakarita ka power bhi paan masale tak mein simat aaya jai ho patrakar maharaj. Koi shaq nahi ki angreji daru par imaan bik jata hoga.

Manoj Singh Chauhan आप के साथ कहानी हुई, उस कोतवाल के साथ तो कांड हो गया…

Yatish Pant आम आदमी पर क्या गुजरती होगी क्योंकि ऐसा तो रोज होता है।

Chandra Shekhar Kargeti कोतवाल को माफ़ भी किया तो एक रजनीगन्धा और डबल जीरो में …आपकी जगह कोई दुसरे वाले पत्रकार रहे होते तो ?

Mannu Kumar Mani Yashwant भाई, कोई आम आदमी होता। तो उसकी लग गई होती।

Arvind Saxena आपने तुलसी रजनीगंधा की मांग कर अपराध को बढावा दिया

Care Naman सच में कहानी कहानी हो गई इस नई जवानी

Syed Tariq Hasan पैदल चलने वाला हर व्यक्ति सामान्य नहीं होता ! शानदार।

Devendra Kumar Nauhwar आप असाधारण हैं, आपकी समाज को जरूरत है!

Ankit Kumar Singh यशवंत भैया कोतवाल सच में पैर छूने लगा ??

Vishal Ojha ले रहे मजा मजबूर बन के जानेमन

Ashish Mishra E sare fasad ki jadd mujhe tusli aur rajnigandha lg rha h.

Gopal Ji Rai Janeman 2 likhane SE bach gaye

Sandeep Kher वाह बहुत अच्छा सबक़ दिया आपने सर पर उस ग़रीब आदमी का क्या जो ऐसे ही उठा लिए जाते है जिनका कोई सोर्स नहीं होता है अगर आप भी आम आदमी होते तो शायद अंदर होते हमारी पूलिस संवेदनहीन हो गए है जो सिर्फ़ आदेश बजाना जानती है फिर चाहे निर्दोष इंसान को ही ना उठना पड़े पूलिस को ध्यान देना चाहिए की कोई बेगुनाह आदमी क़ानून के चुंगल में ना आए

Sanjay Kumar Patrakaar पता नहीं भारत में ऐसी घटनाएं रोज कितनी होती होगी. परंतु बहुत सा मामला उजागर ही नहीं होती है . यशवंत जी आपने उजागर कर पुलिस की कार्यशैली को जनता के सामने लाने का प्रयास किया है .

Sunil Kumar Singh जय हो… पर आप जरा अंदाजा लगाए कि यह पुलिस महकमा कैसे पेश आता होगा आमजन से?

Vivek Gupta बहुत खूब भैय्या. लेकीन ये प्रशासन कब सुधरेगा.

Gandhi Mishra ‘Gagan’ काम तो कोतवाल कोई बुरा नहीं किया था भाई क्योंकि आप दोनों मित्र भी तो पहुंचने के बाद उसे जिसकी संदिग्धता की जानकारी आपने कप्तान को दी थी कोतवाल को भी देना था औऱ रजनीगंधा तुलसी पर नहीं बिकना था ।

Dharmendra Pratap Singh बाबा कहीं रहें और बवाल न हो, असंभव… जय हो !

Rinku Singh हर पैदल चलने वाला आम आदमी नहीं होता….

Amit Kumar Bajpai पूरी कहानी का सार……. रजनीगंधा की पुड़िया और पानी की बोतल में संसार बंधा है….. तर्क- वितर्क- कुतर्क धरे रह जाते हैं, गलती करने वाले पछताते हैं और गुरु गजब कर जाते हैं.. Haha

Neeraj Sharma बड़े काण्डी हो यशवंत भाई

Trilochan Prasad हाहा, डार्लिंग जेल वाले को पकड़ लिया

Anil Kumar Singh उसे मालूम नहीं था जिसे बकरा समझ रहा है वह तो शेरों का शेर है।


मूल पोस्ट ये है…

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रेलवे स्टेशन पर पान खाने गए यशवंत पहुंचा दिए गए कोतवाली!

Yashwant Singh : रात मेरे साथ कहानी हो गयी। ग़ाज़ीपुर रेलवे स्टेशन पर पान खाने गया लेकिन पहुंचा दिया गया कोतवाली। हुआ ये कि स्टेशन पर मंदिर के इर्द गिर्द कुछ संदिग्ध / आपराधिक किस्म के लोगों की हरकत दिखी तो एसपी को फोन कर डिटेल दिया। उनने कोतवाल को कहा होगा। थोड़ी ही देर में मय लाव लश्कर आए कोतवाल ने मंदिर के पास वाले संदिग्ध लोगों की तरफ तो देखा नहीं, हम दोनों (मेरे मित्र प्रिंस भाई) को तत्काल ज़रूर संदिग्ध मानकर गाड़ी में जबरन बिठा कोतवाली ले गए। मुझे तो जैसे आनंद आ गया। लाइफ में कुछ रोमांच की वापसी हुई। कोतवाल को बताते रहे कि भाया हम लोगों ने तो संदिग्ध हरकत की सूचना दी और आप मैसेंजर को ही ‘शूट’ कर रहे हो।

कोतवाली में नीम के पेड़ के नीचे चबूतरे पर मेरा आसन लगा और गायन शुरू हो गया- ना सोना साथ जाएगा, ना चांदी जाएगी…। पुलिस वालों ने मेडिकल कराया जिसमें कुछ न निकला। अंततः एक स्थानीय मित्र आए तो उनके फोन से फिर एसपी को फोन कर इस नए डेवलपमेन्ट की जानकारी दी। एसपी भौचक थे सुनकर। उन्होंने फौरन कोतवाल को हड़काया। सीओ को कोतवाली भेजा। आधे घंटे में खुद भी प्रकट हो गए।

तब तक दृश्य बदल चुका था।

शहर कोतवाल सुरेंद्र नाथ पांडेय हम लोगों के चरण छूकर माफी मांग रहा था। उनका अधीनस्थ दरोगा जनार्दन मिश्रा जो बदतमीजी पर आमादा था, कोतवाली लाए जाते वक्त, गायब हो चुका था। हम लोगों ने नीम के पेड़ के नीचे पुलिस जुल्म के खिलाफ ऐतिहासिक अनशन शुरू कर देने की घोषणा की। माफी दर माफी मांगते रुवांसे कोतवाल को हम अनशनकारियों ने आदेश दिया कि फौरन तुलसी रजनीगंधा की व्यवस्था कराओ, तब अनशन खत्म करने पर विचार किया जाएगा। कोतवाल ने अल्फा बीटा गामा चीता कुक्कुर सियार जाने किसको किसको आदेश देकर फौरन से पेशतर उच्च कोटि का पान ताम्बूल लेकर हाजिर होने का हुक्म सुनाया।

सीओ को हम लोग कम भाव दिए क्योंकि निपटना कोतवाल से था।

कप्तान आए तो मेरा पुलिस, जनता, पत्रकरिता और सरोकार पर भाषण शुरू हुआ जो अनवरत आधे घंटे तक चला। मैं रुका तो मेर साथ अनशनकारी मित्र प्रिंस का उग्र भाषण शुरू हुआ। कप्तान सोमेन वर्मा माफी मांगने लगे और कोतवाल को जमकर लताड़ने लगे। अगले घण्टे भर तक सुलहनामे की कोशिश चलती रही। मेरी एक ही शर्त थी कि अगर मेरे दोस्त प्रिंस ने माफ कर दिया तो समझो मैंने भी माफ कर दिया वरना ये कोतवाली का धरना सीएम आवास तक पहुंचेगा। एसपी ने प्रिंस भाई के सामने हाथ जोड़ा और पुलिस विभाग की तरफ से मांफी मांग कर उन्हें गले लगाया। साथ ही साथ वहां हाथ बांधे खड़े कोतवाल की जमकर क्लास लगाई- ‘तुम नहीं सुधर सकते… चीजों को ठीक नहीं कर सकते हो तो कम से कम रायता तो न फैलाया करो…’।

मैंने कहा- ‘इसके पास वसूली उगाही से फुरसत हो तब न सकारात्मक काम करे… ऐसे ही लोग विभाग के लिए धब्बा होते हैं जो राह चलते किसी शख्स से बदतमीजी से बात करते हुए उसे थाने-कोतवाली तक उठा लाते हैं, जैसा आज हुआ’।

कोतवाल बेचारे की तो घिग्घी बंधी थी। एसपी और सीओ माफी पर माफी मांग अनशन से उठने का अनुरोध करते जा रहे थे। हम लोग जेल भेजे जाने की मांग पर यह कहते हुए अड़े थे कि अरेस्टिंग और मेडिकल जैसे शुरुआती दो फेज के कार्यक्रम हो चुके हैं, तीसरे फेज यानि जेल भेजे जाने की तरफ प्रोसीड किया जाए।

इसी बीच बाइक से आए एक पुलिस मैन ने कोतवाल के हाथों में चुपके से कुछ थमाया तो कोतवाल ने हाथ जोड़ते हुए मुझे तुलसी रजनीगंधा का पैकेट दिखाया। मैं मुस्कराया, चॉकलेट को मुंह से कट मारने के बाद सारे दुख भूल जाने वाले विज्ञापन के पात्र की तरह। उधर प्रिंस भाई का भी भाषण पूरा हो चुका था और पूरा पुलिस महकमा सन्नाटे में था। अनुनय विनय की चौतरफा आवाजें तेज हो चुकी थीं। अंततः आईपीएस सोमेन वर्मा के बार बार निजी तौर पर मांफी मांगने और आइंदा से ऐसी गलती न होने की बात कही गयी तो मैंने उनसे बोतल का पानी पहले प्रिंस भाई फिर मुझे पिला कर अनशन खत्म कराने का सुझाव दिया जिसे उन्होंने फौरन लपक लिया।

आंदोलन खत्म करने का एलान करते हुए नीम के पेड़ के चबूतरे से उठ कर मैं सीधे कोतवाल की तरफ मुड़ा और उसके हाथ से तुलसी रजनीगंधा झपटते हुए कहा- ”तुम यहां आंख के सामने से निकल लो गुरु, वर्दी न पहने होते तो दो कंटाप देता, लेकिन ये तुलसी रजनीगंधा मंगा कर तुमने थोड़ा अच्छा काम किया है इसलिए जाओ माफ कर रहा हूं। बस ध्यान रखना आगे से कि पैदल चलने वाला हर व्यक्ति सामान्य ही नहीं होता इसलिए किसी आम आदमी से बदतमीजी करने से पहले सौ बार जरूर सोचना।”

कोतवाल सिर झुकाए रहा।

कप्तान ने हम लोगों का जब्त मोबाइल और लाइसेंसी रिवाल्वर वापस कराया। एक दोस्त रिंकू भाई की कार पर सवार होने से पहले कोतवाली के गेट पर बंदूक लिए खड़े संतरी से जोरदार तरीके से हाथ मिलाते हुए उन्हें इस कोतवाली का सबसे बढ़िया आदमी होने का खिताब दिया और उन्हें ‘जय हिंद’ कह कर सैल्यूट ठोंकते हुए घर वापस लौट आया।

अभी सो कर उठा तो सबसे पहले रात का पूरा वृत्तांत यहां लिखा ताकि भड़ास निकल जाए। आज रोज से ज्यादा एनर्जेटिक फील कर रहा हूं क्योंकि वो मेरा प्रिय गाना है न – ‘वो जवानी जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो’। दिक्कत ये है कि मैं पूरी जिंदगी में एक नहीं बल्कि हर रोज एक कहानी चाहता हूं और जिन-जिन दिनों रातों में कोई कहानी हो जाया करती है उन उन दिनों रातों में ज्यादा ऊर्जा से भरा जीवंत महसूस करता हूँ।

कह सकते हैं मेरे साथ हर वक्त कहानी हो जाया करती है, कभी इस बाहरी दुनिया में घटित तो कभी आंतरिक ब्रम्हांड में प्रस्फुटित।

फिर मिलते हैं एक कहानी के बाद।

जै जै

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com


उपरोक्त एफबी पोस्ट पर आए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें…

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सिर पटकते ही रुक गई कुल्हाड़ी, बच गई पीपल की जान (देखें तस्वीरें)

सामाजिक कार्यकर्ताओं का गाजीपुर के औरिहार रेलवे स्टेशन पर पीपल के वृक्ष को बचाने के लिए अनोखा पहल… विदेशों से वृक्षों के प्लांटेशन का गुण सीखे भारत सरकार… पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जाने माने समाजसेवी और राजनेता बृजभूषण दुबे एक रोज ट्रेन से लौट रहे थे तो देखा कि कुछ लोग एक पीपल के पेड़ को काटने में जुटे हैं. वो फौरन ट्रेन से उतरे और जाकर कुल्हाड़ी के नीचे अपनी गर्दन रख दी कि पहले मेरा सिर काटो फिर इस पवित्र और पर्यावरण हितैषी वृक्ष को काटना. आखिरकार उनके प्रयासों से पेड़ की जान बच सकी.

पीपल के वृक्ष पर दना-दन चल रही आधा दर्जन कुल्हाड़ियां उस समय रुक गई जब सामाजिक कार्यकर्ता ब्रज भूषण दूबे ने अपना सिर कट रहे वृक्ष पर पटक दीया दिया। कहा पहले हमारी गर्दन पर चलाओ कुल्हाड़ी तब कटने देंगे वृक्ष। इस तरह औरिहार रेलवे स्टेशन के उत्तरी पश्चिमी सिरे पर कट रहे पीपल की जान कुछ दिनों के लिए तो बच गई किंतु  विकास के नाम पर हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई शायद ही रुकने का नाम ले।

रविवार को वाराणसी से गाजीपुर लखनऊ छपरा एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे ब्रज भूषण दुबे की नजर औरिहार रेलवे स्टेशन के उत्तरी पश्चिमी  छोर पर स्थापित एक युवा पीपल के वृक्ष पर पड़ी जिसे आधा दर्जन लकडहारे कुल्हाड़ी से काट रहे थे। श्री दुबे ने अपनी यात्रा वहीं रोक कर पीपल के पेड़ के पास पहुंच काटने से मना किया। मजदूरों के ऐसा ना करने पर उन्होंने रेलवे के ठेकेदार से अनुरोध किया किंतु उसके भी हिला हवाली करने पर उन्होंने कट रहे वृक्ष के आगे अपनी गर्दन टिका दिया। चलती कुल्हाड़ियां रुक गई।

उन्होंने वहीं से रेल मंत्री सुरेश प्रभु, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के अलावा प्रधानमंत्री आदि को ट्वीट करते हुए पीपल के वृक्ष का फोटो भेजा और कहा कि रेलवे के विकास में बाधा पहुंचा रहे वृक्षों का वह मशीनों द्वारा प्लांटेशन कराएं।  फिलहाल पीपल का कटना तो बंद हुआ किंतु यह कहना काफी मुश्किल है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां विकास के नाम पर नित्य प्रति कंक्रीट के जंगल स्थापित हो रहे हैं वहां भी कभी वृक्षों का प्लांटेशन हो पाएगा?

ब्रज भूषण दुबे ने बताया कि उनकी टीम द्वारा इस समय उत्तर प्रदेश ही नहीं देश की सड़कों पर चौड़ीकरण में बाधा पहुंचा रहे वृक्षों को न काट प्लांटेशन कराए जाने की पहल पर संघर्ष जारी है। उनके कार्यकर्ताओं ने एक माह का समय केंद्र व प्रदेश सरकार को दिया है यदि वह इस पर ठोस निर्णय नहीं लेते हैं तो अपनी जीवन लीला समाप्त करने की भी धमकी दी गई है। उक्त अवसर पर श्री दुबे के साथ सामाजिक कार्यकर्ता शिवचरण यादव भी उपस्थित थे।

संबंधित तस्वीरें देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

ब्रज भूषण दुबे
राष्ट्रीय अध्यक्ष
समग्र विकास इंडिया
शास्त्रीनगर
गाजीपुर
मोबाइल 9452455444

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गाजीपुर के पत्रकार से बदमाश ने फोन पर मांगी दस लाख रुपये की रंगदारी (देखें वीडियो)

बताइए, अब तो पत्रकारों से भी रंगदारी मांगे जाने लगी है. वो भी दस-पांच हजार रुपये नहीं बल्कि पूरे के पूरे दस लाख रुपये. मामला यूपी के गाजीपुर जिले का है. हिन्दी सांध्य दैनिक समाचार पत्र सन्मार्ग से जिले के मान्यता प्राप्त पत्रकार से 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी गयी है. न देने पर जान से हाथ धो बैठने की धमकी दी गई है.

जिस मोबाइल नंबर से रंगदारी मांगी गई है, वो 9451866800 है. जिन फोन पर बदमाश ने कॉल करके रंगदारी मांगी, वो 7394070933 है. इस नंबर पर शाम 5:15 पर फोन आया.

धमकी देने वाले बदमाश ने अपना नाम शिवा बिन्द बताया. पुलिस के रिकार्ड में शिवा बिन्द एक शातिर शूटर है. यह जिले के कई डाक्टरों से फिरौती के लिए पहले भी फोन कर चुका है. वह यूको बैंक से 25 लाख रुपये के लूटकाण्ड में पूर्वांचल का शातिर वांछित अपराधी है।

पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर अपराधी की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है. पुलिस अधीक्षक गाजीपुर सुभाष चन्द्र दुबे ने जल्द से जल्द पूरे मामले को अंजाम पर पहुंचाने का भरोसा पत्रकारों को दिया है.

नीचे जो वीडियो है उसमें पीड़ित पत्रकार अनिल उपाध्याय और गाजीपुर के पुलिस कप्तान सुभाष चंद्र दुबे अपनी अपनी बात रख रहे हैं. देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

गाजीपुर से चन्द्र कुमार तिवारी की रिपोर्ट. संपर्क : 7706052120

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जमीन खरीदारों को लूटने वाले ‘गैंग आफ गाजीपुर’ से सावधान! (पढ़ें सदस्यों के नाम)

डा. फकरे आलम, अमित सिंह, बबलू यादव, इन्दूबाला सिंह, आदित्य सिंह, सत्यबिन्दु सिंह, हरी यादव, प्रदीप जैसवाल, बिनोद कुमार तिवारी आदि हैं इस गैंग के सक्रिय सदस्य… फर्जी बैंक एकाउंट, फर्जी आईडी प्रूफ और फर्जी रजिस्ट्री के माध्यम से जमीन खरीदने वालों को ये ठगते हैं और लाखों-करोड़ों का चूना लगा देते हैं… ये लोग पुलिस और प्रशासन को मैनेज कर जांच लटकाने में भी हैं सक्षम.. पढ़िए एक पीड़ित की दास्तान जिसने यूपी के नए मुख्यमंत्री से लगाई है गुहार…..

सेवा में,

श्री योगी आदित्य नाथ जी
माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेष

महोदय,

मैं सुनील कुमार सिंह (पुत्र रमाशंकर सिंह ग्राम-बक्सुपुर पोस्ट-पीथापुर, जिला गाजीपुर) हूं. बात माह दिसम्बर 2014 की है. गाजीपुर के एक डा. फकरे आलम नामक शख्स जो नई बस्ती रजदेंपुर गाजीपुर में रहता है और मेरा पूर्व परिचित है, ने बताया कि अन्धऊ गांव में एक जमीन बिकाऊ है जिसका एग्रीमेंट अमित सिंह के नाम है, अगर आप लेना चाहते हैं तो देख लीजिए. तब मैंने उस जमीन को जाकर देखा. वह जमीन पराग डेयरी के बगल में सटी हुयी है. मुझे पसन्द आ गयी. मैं डा. फकरे आलम के माध्यम से प्रापर्टी डीलर अमित सिंह (पुत्र संकठा सिंह निवासी चन्दन नगर रौजा गाजीपुर) से मिला. इनसे जमीन से संबंधित कागज, रजिस्ट्री की नकल व खतौनी मुआयना करने के लिए मांगा. दूसरे दिन रजिस्ट्री व खतौनी की नकल अमित सिंह व डा. फकरे आलम ने दिया. मैंने मौका मुआयना कराया तो जमीन सही पाया.

मैंने अमित सिंह और डा. फकरे आलम से कहा कि हमे जमीन के मालिक से मुलाकात करा दें. तब ये लोग बोले कि पार्टी को बार-बार बुलाना सम्भव नहीं है. डाक्टर फकरे आलम ने कहा कि जमीन के मालिक हमारे रिश्तेदार हैं, चिन्ता की कोई बात नहीं है, रजिस्ट्री के दिन तो वे आयेंगे ही. अमित सिंह की मां श्रीमती इन्दूबाला सिंह ने कहा कि मैं जमीन की मालकिन श्रीमती उसमानी आसिया बानो के पति डाक्टर जुबैर अहमद के अन्डर में नौकरी कर चुकी हूं और यह जमीन श्री गोपी यादव से मेरे सामने ही इन लोगों ने रजिस्ट्री करायी थी.

अमित सिंह एवं डा. फकरे आलम ने कहा कि अगर मेरे बातों पर विश्वास नहीं है तो आप जमीन की बाउन्ड्री ऊंची करा लें एवं गेट लगवा लें. कई दिन लगकर मेरे सामने डा. फकरे आलम, अमित सिंह, बबलू यादव पूत्र श्री तेजू यादव, हरी यादव, प्रदीप जैसवाल, श्री बिनोद कुमार तिवारी आदि ने मिलकर बाउन्ड्री करायी. दिनांक 12-12-2014 को इस जमीन के लिए अमित सिंह एवं इन्दूबाला सिंह से छप्पन लाख रुपये में सौदा तय हो गया. उसी दिन अमित सिंह को दो लाख रुपये एडवान्स नगद दिया. अमित सिंह ने 10 रुपये के स्टाम्प पर एडवान्स प्राप्त करने का रसीद दिया. गवाह के तौर पर हरि यादव निवासी चन्दन नगर कालोनी एवं डा. फकरे आलम न्यू कालोनी रजदेपुर ने हस्ताक्षर किये.

दिनांक 19-12-2014 को रजिस्ट्री करने हेतु तथाकथित रजिस्ट्रीकर्ता श्रीमती उसमानी आसिया बानो (असली नाम बासमती देवी) एवं तथाकथित डा. जुबैर अहमद (असली नाम अमरनाथ) को अमित सिंह, इन्दूबाला सिंह, बबलू यादव, डा. फकरे आलम, प्रदीप जैसवाल, बिनोद कुमार तिवारीं एवं अन्य दो व्यक्ति लेकर आये और मुझसे नन्द रेजिडेन्सी होटल में मिलवाये. तथाकथित उसमानी आसिया बानो ने अपना वोटर आईडी व बैंक पासबुक दिखाया. मैंने अमित, इन्दूबाला, बबलू एवं डा. फकरे आलम के कहने पर अमित सिंह के वकील आनन्द द्विवेदी को दो लाख रुपये स्टाम्प खरीदने के लिये दिया.  चौबीस लाख रुपये का ड्राफ्ट दिया. नगद दो लाख अमित सिंह को दिया.  अट्ठारह लाख का चेक डा. फकरे आलम को दिया. बाकी पैसा दाखिल खारिज के बाद देना तय हुआ.

उसी दिन इन लोगों ने मुझे फर्जी रजिस्ट्री करा दी. अमित सिंह एवं डा. फकरे आलम बार-बार बाकी पैसे मांगने लगा. यहां तक बोले कि हमने बाउन्ड्री खड़ा होकर करा दी, रजिस्ट्री करा दी, अब क्या पूरा बिल्डिंग बन जाने पर पैसा दोगे? उनके दबाव में आकर 06-01-2015 को दो लाख रुपये अपने खाते से अमित सिंह के खाते में आरटीजीएस द्वारा स्थानान्तरित कर दिया. इस प्रकार कुल 48 लाख रुपये अमित सिह, इन्दूबाला सिंह, डा. फकरे आलम, बबलू यादव, प्रदीप जैसवाल, बिनोद कुमार तिवारी, बासमती, अमरनाथ एवं अन्य ने धोखाधड़ी करके मुझसे ले लिया. उल्लेखनीय है कि बासमति देवी और अमरनाथ ने फर्जी पती-पत्नी उसमानी आसिया बानो बेगम एवं डा0 जुबैर अहमद बनकर इनके नाम से पंजाब नेशनल बैक गाजीपुर में ज्वायंट खाता खोला हुआ है जिसका सत्यापन प्रदीप जैसवाल ने किया हुआ है.

जब मैं खारिज-दाखिल कराने 28-01-2015 को सदर तहसील गाजीपुर गया तो पता चला कि खारिज दाखिल में आपत्ति आ गयी है. तभी सी0ओ0सिटी कमल किशोर का फोन आया और मुझे कोतवाली यह कहते हुए बुलाया कि आप जिस जमीन की रजीस्ट्री कराये हैं, उसका मालिक मेरे पास बैठा है. कोतवाली पहुंचने पर सी0ओ0 ने पूछा कि रजिस्ट्री किससे करायी है तो मैंने बताया- उसमानी आसिया बानो बेगम से. उसके बाद सी0ओ0 ने कोतवाली में बैठी एक महिला को दिखाकर पूछा कि क्या यह वही महिला है? मैंने इनकार में सिर हिलाया. उन्होंने बताया कि असली मालिक यही है और इनकी जमीन की जिन लोगों ने आपको रजिस्ट्री की है वे सब धोखेबाज हैं. उनके खिलाफ महिला ने एफआईआर (सं0 54/2015) दर्ज कराया है.

मैंने भी तिथि-वार बिंदुवार विवरण देते हए प्रार्थना पत्र शहर कोतवाली गाजीपुर को प्रस्तुत किया. इसकी प्रतिलिप एसपी, एसएसपी, डीआईजी जोन वाराणसी, आईजी जोन वाराणसी एवं अन्य जगहों को प्रेषित किया. लेकिन इस पर अभी तक एफआइआर दर्ज नहीं किया गया है. अभी तक जो भी जांच की गयी है वह जमीन की वास्तविक मालकिन श्रीमती उसमानी आसिया बानो के एएआईआर संख्या 54/2015 पर की गयी है. पुलिस कह रही है कि एक केस में एक ही एफआईआर होती है.

मामले की जांच के लिए शुरू में उप निरीक्षक उदयभान सिंह को लगाया गया. उन्होंने अच्छा काम किया. दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. कुछ रूपये भी बरामद किये. उन्होंने पूरे मामले को खोल दिया. सारे साक्ष्य इकट्ठा कर लिये. अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रहे थे तभी दो दिन बाद ही उनका तबादला कर दिया गया. उप निरिक्षक राजेश त्रिपाठी को विवेचना हेतु लगाया गया. तब से जांच कार्य रुका पड़ा है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं. वे मुझे धमकिया भी दे रहे हैं.

जांच कार्य के दौरान यह भी पता चला कि अमित सिंह ने आशीष सिंह के नाम से फर्जी खाता खोल रखा है और आशीष सिंह के नाम से फर्जी पहचान पत्र बना रखा है. इसका सबूत विवेचना अधिकारी राजेश त्रिपाठी के पास है. अमित सिंह, उसकी मां इन्दूबाला सिंह पहले भी इस तरह का फर्जीवाड़ा कर चुके हैं. इन दोनों के खिलाफ मुकदमा न0 342/13 के तहत चार्जशीट सख्या 59/14 भी लग चुकी है. इन लोगों का एक गिरोह है जो फर्जी दस्तावेज वोटर आईडी, पैन कार्ड तैयार करते हैं. फिर फर्जी बैक एकाउन्ट खुलवाते हैं. बाद में किसी जमीन खरीदने को इच्छुक व्यक्ति को पकड़ कर उसे लूट लेते हैं.

धर्मेन्द्र यादव उर्फ बबलू यादव (पुत्र श्री तेजू यादव ग्राम देवकठिया गाजीपुर) मुख्य साजिशकर्ता है. इसने तीन लाख रुपये वापस भी किये. इसकी सूचना पुलिस को दी. लेकिन इस धर्मेंद्र यादव उर्फ बबलू यादव को पुलिस गिरफ्तार करना तो दूर, पूछताछ तक नहीं कर रही. विवेचना अधिकारी ने डा. फकरे आलम को छुआ तक नहीं जिसके माध्यम से मैंने जमीन खरीदा और उसे 18 लाख रुपये का चेक दिया. एग्रीमेंट पर डा. फकरे आलम के बतौर गवाह हस्ताक्षर भी हैं. उसे गिरफ्तार करना तो दूर, उनका बयान भी अभी तक पुलिस ने लेना उचित नहीं समझा।

श्रीमती इन्दूबाला सिंह जो जमीन को दिखाते वक्त अमित सिंह के साथ थीं और कह रही थी कि जिसकी जमीन है उसके पति डा. जुबैर के अन्डर में मैंने कार्य किया हुआ है और मेरे साथ विश्वास घात किया, से भी पुलिस ने पूछताछ तक नहीं किया।

अमित सिंह का भाई आदित्य सिंह फर्जीवाड़े मे लूटे गये पैसे को खपा रहा है. उसने लूट के पैसे से सफारी गाड़ी खरीदी. उसने मुझे एक लाख रुपये यह कहते हुए वापस किया कि मामले की पैरवी न करो, बाकी पैसा बाद में दे दिए जाएंगे. ये सारी बातें विवेचना अधिकारी एवं अन्य के संज्ञान मे लाया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई. सत्यबिन्दू के खिलाफ बैंक से ठगी का पैसा निकालने के पर्याप्त सबूत हैं. उससे भी पुलिस ने पूछताछ नहीं की.

अतः यह प्रतीत होता है कि बबलू यादव, डा. फकरे आलम,इन्दूबाला सिंह,आदित्य सिंह, सत्यबिन्दू सिंह आदि को किसी दबाव में या किसी अन्य वजह से पुलिस प्रशासन द्वारा बचाया जा रहा है. यह न्यायसंगत नहीं है. महोदय से प्रार्थना है कि जल्द जांच पूरी कराएं और प्रार्थी को न्याय दिलाएं.  दो साल से ज्यादा समय व्यतीत होने और सारे सबूत दस्तावेज के रूप मे मौजूद होने के बावजूद जांच कार्य पूर्ण न होना गंभीर बात है. इस मामले में गैंगस्टर लगना चाहिये लेकिन सभी अपराधी आजाद होकर घूम रहे हैं और मुझ पीड़ित को ही धमका रहे हैं.

प्रार्थी
सुनील कुमार सिंह 
पुत्र श्री रामाशंकर सिंह
निवासी- ग्राम बक्सूपुर पोस्ट पीथापुर
जिला- गाजीपुर 233001 उत्तर प्रदेश।                                                                                     

प्रतिलिपि- सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित है-
1-डीजीपी उत्तर प्रदेश
2-आईजी जोन वाराणसी
3-डीआईजी जोन वाराणसी
4-वरिष्ठ पूलिस अधिक्षक गाजीपुर
5-एसपी सीटी गाजीपुर।
6-सीओ सीटी गाजीपुर।
7-कोतवाल सदर गाजीपुर।

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अखिलेश राज में मंत्री रहे विजय मिश्र ने धमकाया तो पत्रकार ने दिया खाने भर जवाब (सुनें टेप)

गाजीपुर जिले से सपा राज में एक मंत्री हुआ करते थे, धर्मार्थ कार्य मंत्री, विजय मिश्रा. जब अखिलेश यादव ने इनका टिकट काट दिया तो ये बसपा में भाग खड़े हुए लेकिन वहां भी टिकट नहीं मिला और न ही अपनी सीट से बसपा के प्रत्याशी को जिता पाए. एक रोज आधी रात को ये पूर्व मंत्री विजय मिश्रा ने पूरे मूड में आकर गाजीपुर जिले के एक पत्रकार को फोन लगा दिया. ये पत्रकार कभी विजय मिश्र को चुनाव जिताने में जोरशोर से आगे थे. बाद में चुनाव जीतने और मंत्री बनने के बाद विजय मिश्र ने अपने हर उस गैर-ब्राह्मण कार्यकर्ता / करीबी के साथ जो किया, वही सुनील सिंह उर्फ सुनील कुशवाहा के साथ भी किया यानि अपमानित कर किनारे कर दिया.

सुनील ठीकठाक बैकग्राउंड वाले हैं. अच्छी खासी जमीन है और शहर के पॉश इलाके में बढ़िया मकान है. खुद के पास लाइसेंसी रिवाल्वर भी है. सो, उन्होंने अपने आनलाइन पोर्टल के जरिए विजय मिश्र के कारनामों की पोल खोलनी शुरू कर दी. बताया जाता है कि ये जो फोन विजय मिश्र ने किया, वह किसी तरह चाहते थे कि सुनील स्वीकार कर लें कि उन्होंने ही उनके खिलाफ इशारों इशारों में फेसबुक पर काफी कुछ लिखा है. पर सुनील ने कुबूल नहीं किया और न ही उत्तेजित होकर कुछ ऐसा कहा जिससे विजय मिश्र को उनके खिलाफ रिपोर्ट लिखाने का मौका मिल जाता.

हालांकि कहा जा रहा है कि विजय मिश्र ने फोन करने से कुछ रोज पहले सारे स्क्रीनशाट और सारा लेखन इकट्ठा करते हुए पुलिस में सुनील के खिलाफ तहरीर दे दी थी लेकिन पूरे लेखन से यह नहीं साबित हो रहा था कि यह सब विजय मिश्र के खिलाफ ही लिखा गया है. इस कारण उन्हें फोन करके और उकसा करके सुनील से ही यह कुबूल कराना उचित लगा कि उसी ने लिखा है ताकि सुनील के खिलाफ केस मजबूत हो सके और पुलिस कार्रवाई करा सकें. पर सुनील ने कबूलना तो दूर, करीब 40 मिनट की बातचीत में ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे उनके खिलाफ कोई मसाला मिल सके. उल्टे पूरी बातचीत से पूर्व मंत्री विजय मिश्र बहुत सारे मामलों में जरूर एक्सपोज हो गए. पूरा टेप सुनते हुए एक तरफ आपको सुनील की हाजिरजवाबी से कहीं कहीं हंसी आएगी तो मंत्री के व्यवहार बात रवैये से सत्ता-सिस्टम से जुड़े रहे लोगों के चरित्र के पीछे का स्याह सच समझ आएगा.

पत्रकार सुनील ने मंत्री जो को खाने भर जवाब दिया है, ये तो सच है. पत्रकार सुनील की हाजिरजवाबी का आप भी लोहा मान जाएंगे, साथ ही बहादुरी का भी. करीब पौन घंटे के इस आडियो को सुनते हुए आप बोर कतई नहीं होंगे. बीच-बीच में लगेगा जैसे आप कपिल शर्मा का कामेडी शो देख रहे हों. सुनील गाजीपुर लाइव नामक न्यूज पोर्टल के संपादक हैं. सुनील को बाद में यह आडियो वायरल न करने के लिए धमकाया गया. पत्रकार सुनील ने पूर्व मंत्री और उनके इशारे पर धमकाने वालों के खिलाफ लिखित शिकायत पुलिस को दे दी है.

आडियो सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें…. आडियो सुनते हुए स्क्रीन पर जो तस्वीर आप देख रहे होंगे, वही हैं माननीय पूर्व मंत्री विजय मिश्र…

ज्ञात हो विजय मिश्र वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के भतीचे हैं और कहा जाता है कि अच्युता जी ने ही मुलायम सिंह यादव से अपने करीबी रिश्ते के चलते विजय मिश्र को टिकट दिलवाया था. विजय मिश्र गाजीपुर से चंद सैकड़ा वोटों से जीते और मंत्री बन गए. लेकिन वह अपने पूरे कार्यकाल में परफार्म बिलकुल नहीं कर पाए. गाजीपुर में उन्होंने अपने उन कार्यकर्ताओं को काफी परेशान किया जो चुनाव जिताने में तो खुलकर तन मन धन से साथ थे लेकिन इनके मंत्री बनने के बाद इनकी उपेक्षा के शिकार होकर अलग-थलग हो गए. बताया जाता है कि विजय मिश्र ने मंत्री रहते हुए अपने कई कार्यकर्ताओं के यहां छापे मरवाए या उन्हें जेल में डलवाया या फर्जी केसों में फंसवाया. उनकी कोशिश थी कि उनके जो भी कार्यकर्ता उनसे नाराज होकर कुछ कह कर रहे हैं, उन्हें इतना आतंकित पीड़ित प्रताड़ित कर दो कि वह शांत होकर बैठ जाए या उनके चरणों में समर्पण कर दे. फिलहाल तो आप लोग इस टेप का आनंद लीजिए और देखिए कि हमारे देश के हंसते-मुस्कराते नेताओं का आधी रात के बाद चाल-चरित्र बोली-बानी अंदाज इरादों का क्या हाल होता है….

गाजीपुर से सुजीत कुमार सिंह उर्फ प्रिंस की रिपोर्ट.

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यूपी में जंगलराज : जिला अस्पताल में डाक्टर को पीटा, आरोपियों को बचा रहे सत्ताधारी (देखें वीडियो)

Yashwant Singh :  ये वीडियो देखिए। यूपी में जंगलराज का नमूना। एक डॉक्टर की पिटाई। पीटने वाले यूपी सरकार के मंत्री जी और सपा नेताओं के करीबी हैं इसलिए पुलिस इनका कुछ नहीं बिगाड़ पायी। उलटे डॉक्टर साब का खून और पेशाब टेस्ट हो गया क्योंकि पीटने वालों ने आरोप लगा दिया कि डॉक्टर नशे में था, इसलिए पीटना पड़ा। जांच रिपोर्ट नार्मल आई यानि डॉक्टर नशे में नहीं था। उधर डॉक्टर cctv फुटेज दिखा कर कह रहा है कि पहले इन अपराधियों को तो पकड़ो। लेकिन पूरा पुलिस प्रशासन डॉक्टर का खून मल मूत्र निकालने में जुटा रहा।

पीटने की वजह यह कि ”बाकी मरीजों को मरने दो, पहले मेरे मरीज को भर्ती करो। बाइक से गिर कर सामान्य चोट खाए मेरे मरीज का मरहम पट्टी से ही काम नहीं चलने वाला, इसे भर्ती भी कर लो”। भीड़ से घिरा डॉक्टर काम करता दिख रहा है। भीड़ से मुखातिब हो बात भी कर रहा। लेकिन मनबढ़ों को अपने मरीज को बिना वजह भर्ती कराने की इतनी जल्दी थी कि लाइट ऑफ करके डॉक्टर को ही पीटने में जुट गए। जिस शख्स ने सबसे पहले हाथ छोड़ा वह सभासद रह चुका है। बताते हैं कि इस पर और इसके अन्य मनबढ़ साथियों पर सरकार में मंत्री और जिले के बड़े सपा नेताओं का भरपूर हाथ है।

अपराधी अब तक पकड़े क्यों नहीं गए, इस सवाल पर पुलिस कप्तान बोल रहा है – ‘आरोपी भागे हुए हैं, दबिश जारी है’। सबको पता है कि पुलिस क्यों किंकर्तव्यविमूढ़ है। यूपी में समाजवादी राज जो है। जबरा मारे और रोवे भी न दे।

समाजवादी जंगल राज के शिकार ग़ाज़ीपुर जिला अस्पताल के डॉक्टर पीपी उपाध्याय को न्याय तब भी नहीं मिल पा रहा जब पीटने वाले गुंडों की करतूत cctv कैमरे में कैद है। उलटे डॉक्टर पर ही नशे में होने का आरोप लगाकर उन्हें ब्लड यूरिन टेस्ट के लिए प्रताड़ित किया गया। इनके पीटने वाले इसलिए गिरफ्तार नहीं हो रहे क्योंकि उन्हें समाजवादी सरकार के मंत्रियों नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। अब इस वीडियो का क्या करें जो चीख चीख के कह रहा है कि ये डॉक्टर पीपी उपाध्याय आप हो सकते हैं, आपका भाई हो सकता है, आपके घर का सदस्य हो सकता है, क्या ये ऐसे ही बिना वजह पीटे जाते रहेंगे और हम हाथ पर हाथ धरे चुपचाप बैठे देखते रहेंगे?

दोस्तों इस वीडियो को देखिए और शेयर करिए ताकि आरोपी सलाखों के पीछे जा सकें। ध्यान रहे, ये वही जिला ग़ाज़ीपुर है जहाँ के महान माफिया मोख्तार अंसारी की राजनीतिक पार्टी का संपूर्ण विलय समाजवादी पार्टी में कल ही हो चुका है। यानि एक तो करैला और ऊपर से नीम चढ़ा। ये बड़ी बात नहीं कि डॉक्टर को पीटने वाले आधा दर्जन लोगों में कुछ एक मोख्तार अंसारी गैंग के ख़ास आदमी निकल आएं। सूत्र ऐसा बताते भी हैं। सोचिए, जिस वक़्त लखनऊ में जंगलराज संचालित करने वाली पार्टी सपा में ग़ाज़ीपुर के माफियाओं द्वारा सृजित पार्टी कौएद का विलय हो रहा था उसी वक़्त ग़ाज़ीपुर में इस ‘संगम’ से उपजे संयुक्त कार्यकर्ताओं द्वारा जिला अस्पताल में सरेआम एक डॉक्टर पीटा जा रहा था। पूरा तंत्र आरोपियों के साथ खड़ा है। डॉक्टर अकेला और उपेक्षित है। गेंद अब हमारे आपके पाले में है। मौन रहिये या फिर मुखर होइए।

गुंडों द्वारा डाक्टर को पीटे जाने वाला वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=PuyQYup1pJU&app

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के एफबी वॉल से.

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गलत खबर छपने से नाराज गाजीपुर के वकीलों ने दैनिक जागरण अखबार फूंका (देखें तस्वीरें)

गाजीपुर : जिले में आज सुबह से वकीलों ने दैनिक जागरण अखबार के खिलाफ भांति भांति तरीके से गुस्सा निकाला. कल 26 अप्रैल को पेशी पर आये एक अपराधी के उपर गोली मारने की घटना के बाद अधिवक्ताओं ने गोली मारने वाले अपराधियों को पकड़ने की कोशिश की. वहां मौजूद पुलिस कर्मियों की निष्क्रियता पर पुलिस व अधिवक्ताओं में झड़प भी हो गयी. कहा जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम और खबर को निष्पक्षता से न प्रकाशित कर दैनिक जागरण ने एकतरफा ट्रीटमेंट दिया. दैनिक जागरण की खबर में कहा गया है कि अधिवक्ताओं ने अपराधी को पकड़ने की कोई कोशिश नहीं बल्कि अपराधियों को भागने में मदद किया.

एकतरफा अधिवक्ताओं के खिलाफ खबर छापने पर आज आक्रोधित अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय जाकर दैनिक जागरण अखबार की पत्रकारिता पर आक्रोश प्रकट किया. वकीलों ने दैनिक जागरण गाजीपुर के खिलाफ मानहानि का नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है. पूरे मामले से संबंधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के अनुपस्थिति में अपर जिलाधिकारी आनंद मिश्रा को सौंपा और तीन दिन के अन्दर जवाब न देने पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का ऐलान किया. बाद में वकीलों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय गाजीपुर के सामने दैनिक जागरण की प्रतियां फूंक कर अपना आक्रोश प्रकट किया.

इस पूरे मामले को लेकर शहर में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है. दैनिक जागरण ग़ाज़ीपुर द्वारा गलत न्यूज़ देने के कारण वकीलों की तरफ से स्पष्टीकरण हेतु जागरण को तीन दिन का टाइम दिए जाने के बाद माना जा रहा है कि जागरण प्रबंधन एक स्पष्टीकरण प्रकाशित कर पूरे मामले को रफा दफा करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है क्योंकि किसी भी जिले में कोई भी अखबार वकीलों से पंगा लेकर लंबे समय तक नहीं टिक सकता. एसपी और डीएम को ज्ञापन देकर दैनिक जागरण अख़बार का पुतला फूंकने की खबर को वकीलों ने सोशल मीडिया और ह्वाट्सएप के जरिए अपने अपने परिचितों को भेजा ताकि पूरे मामले में जागरण पर दबाव बनाया जा सके. एडवोकेट अयाज अहमद ने कहा कि जागरण का कृत्य निंदनीय है. हम सभी ऐसी पत्रकारिता की भर्त्सना करते हैं जो सिर्फ एकतरफा है.

वकीलों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित वीडियो और अन्य तस्वीरें देखने के लिए अगले पेज पर जाने हेतु नीचे क्लिक करें…

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नई ट्रेन के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर तलवारें खिंचीं, राजा सुहेल देव राजपूत थे या राजभर या पासी?

Anand Kumar : आने वाली 13 अप्रैल को गाजीपुर से दिल्ली के लिए एक नयी ट्रेन शुरू हो रही है, “राजा सुहेल देव राजभर एक्सप्रेस” (ट्रेन सं० 22419). तीन दिन ये शाम 5.30 पर गाज़ीपुर से रवाना होकर सुबह 8.30 आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी. वहां से बुधवार, शुक्र और रविवार को ट्रेन सं 22420 शाम 6.45 बजे चलकर सुबह 9.05 गाजीपुर पहुचेगी. अब ये ट्रेन का नाम बड़ा अनोखा है. आपको वामपंथी इतिहास में पढ़ाया ही नहीं गया होगा कि राजा सुहेल देव राजभर कौन थे. तो फिर ये थे कौन जिनके नाम पर ट्रेन चलाई गई है?

राजा सुहेल देव राजभर ने इस्लामिक हमलावर महमूद गज़नी के भांजे को मारा था. गज़नी के हमले के कुछ साल बाद महमूद का भांजा भारत पर हमला करने अपने कुछ चाचा, मामा और अन्य धर्म परिवर्तन करवाने वालों के साथ आया था. तो राजा सुहेल देव को राजाओं की संयुक्त सेना का मुखिया बनाया गया. बनारस पे हमला करने पहुंची गाज़ी की फौज को बुरी तरह हराया गया. सुहेल देव राजभर बाकी बेवक़ूफ़ हिन्दू राजाओं की तरह यहीं नहीं रुके थे. इस्लामिक हमलावर गाज़ी सलार मसूद की फौज को उन्होंने खदेड़ खदेड़ के काटा था. पचास हज़ार इस्लामिक हमलावरों में से सौ पचास भी मुश्किल से वापिस भाग पाए थे.

बाद में अंग्रेजों ने राजभरों को क्रिमिनल कास्ट घोषित कर दिया था. इस क्रिमिनल कास्ट एक्ट का नाम आपको दल हित चिंतकों ने नहीं बताया होगा. कई लोगों को इसके जरिये अंग्रेजों ने जन्म के कारण ही अपराधी घोषित कर दिया. ये एक्ट आजादी के बाद नहीं, संविधान बनने और लागू होने के भी कुछ साल बाद ख़त्म हुआ था. इस एक्ट के ख़त्म होने पर क्रिमिनल कास्ट को Denotified Caste घोषित किया गया.  मीना जैसी कई जो कभी राजा थे, वो सब Criminal Caste से OBC या फिर Sceduled Caste/Tribe घोषित हुए. बाकी कई (राजभर जैसे) Denotified Caste हो गए. वो अभी भी Denotified ही हैं. बाकि ये बस याद दिलाने के लिए था कि भारत में एक Denotified Caste भी है. फॉर्म में भरे जाने वाले SC / ST / OBC / General तो आप पहले ही जानते हैं. जानते हैं ना?

आनंद कुमार के एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Akash Gaurav पहली बार इनके बारे में मुझे संघ के प्रथम वर्ग के दौरान मिली थी। दुसाध समुदाय के लोग इनके जन्मदिन के दिन इनकी पूजा करते है और सूअर की बलि चढाते हैं। कहते है कि मुल्लों को काटने के बाद राज सुहलदेव ने ही सूअर का बलि देने की प्रथा शुरू की थी।

Sushant Jha सुहेलदेव के बारे में कहीं पढ़ा था पासी थे. क्या पासी और राजभर एक ही हैं?

Anand Kumar शादी जैसे संबंधों के लिहाज से पासी और राजभर वैसे ही अलग हो जाते हैं जैसे ब्राह्मण और भूमिहार| तय करने में थोड़ी दिक्कत होगी, दोनों बहुत सी मान्यताओं में एक होंगे, मगर बहुत छोटी छोटी सी चीज़ों में अलग| जैसे सूअर का मांस खाना दोनों के लिए परंपरागत हो सकता है, ताड़ी परंपरागत हो सकती है| लेकिन जब बात सूअर पालने की आएगी तो दोनों अलग होंगे| ताड़ी के पेड़ से ताड़ी उतारने की बात होगी तो अलग होंगे|

Singh Yogendra राजभर ओबीसी में आते हैं और पासी अनुसूचित में. दोनों बिलकुल अलग जातियां हैं और हिन्दू क्षत्रिय राजाओं, अन्य सभी हिन्दुओं के साथ मिलकर मुसलमानों से लड़ती आई हैं.

Sunil Pandey हमारे बलिया में कुछ राजभरों को ‘जय सुहेल देव’ कहते सुना था.

Brijesh Rai बांसडीह विधानसभा और फेफना में अच्छी खासी आबादी है इनकी और ये जय सुहेल देव का नारा ही लगाते हैँ. आप ने सही कहा.

Vinod Mishra गाज़ी पीर के कारण अभी इतिहास मालूम हुआ. क्रिमिनल कास्ट के बारे में अनुमान था, यहा भी एक C.T.S. की आबादी है.

Singh Yogendra सुहेलदेव बैस राजपूत थे. उन्होंने 21 राजाओं का संघ बनाकर मसूद गाजी का सामना किया था. इनके साथ भर और पासी भी कन्धे से कन्धा मिलाकर लड़े थे. ब्रिटिश गजेटियर में इन्हें राजपूत ही लिखा है. पर इनका साथ भर और पासियों द्वारा दिए जाने पर संदेह में कुछ अंग्रेज इतिहासकारों द्वारा इन्हें भर अनुमानित कर लिया जो कि गलत है. ये त्रिलोकचंद प्रथम के पुत्र बिदारदेव के वंशज थे. भालों से लड़ने के कारण इनकी बैस वंशी शाखा भाले सुल्तान कहलाती है. वोट बैंक की गन्दी राजनीति के चलते संघ परिवार इन्हें कहीं भर तो दूसरे इलाके में पासी प्रचारित करता है. हिन्दू एकता होनी चाहिए पर अपने पुरखों का इतिहास लुटाकर कैसी एकता? क्षत्रिय इतिहास को पहले वामपंथियो अंग्रेजों कांग्रेसियों ने बिगाड़ा, अब वही काम संघी क्यों कर रहे हैं? अवध के इलाके में जहाँ पासी ज्यादा हैं वहां सुहेलदेव को पासी बताकर वोट लिए जाते हैं और पूर्वांचल में इन्हें भर जाति से जोड़कर वोट की फसल काटी जाती है. वोट बैंक के लिए भाजपा और संघ कितना नीचे गिर सकते हैं और क्षत्रिय इतिहास और संस्कृति का कितना अपमान कर सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं. क्षत्रियों के इतिहास से छेड़छाड़ और अपमानित करने की कड़ी में एक और अध्याय भाजपा जोड़ने जा रही है. सलार मसूद गाजी को हराने वाले बैस राजपूत राजा सुहेलदेव बैस को दलित जाति पासी का बताकर उत्तर प्रदेश में कई कार्यक्रम आयोजित करेगी जिससे पासी जाति के वोट उसे मिल सके. इससे पहले अहिरों के वोट के लिए उन्हें यदुवंशी, काछियों के वोट के लिए सम्राट अशोक को बिना किसी कारण के काछी बताने का षड्यंत्र भाजपा कर चुकी है. यहा तक की दलितों को असली राजपूत और राजपूतों को डरपोक और नाकारा बताने का कृत्य संघ प्रमुख भागवत भरी सभा में कर चुके हैं. गौरतलब है कि ये वही भाजपा है जिसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोजाना आरक्षण को हमेशा के लिए जारी रखने की बात करते हैं. ये कैसा दोगलापन है? अगर इनकी नजर में दलित राजा महाराजा रहे हैं तो फिर उन्हें किस बात का आरक्षण? फिर क्षत्रियों को किस कारण आरक्षण से वंचित रखा गया है? भाजपा और संघ अपने फायदे के लिए क्षत्रिय राजपूतों के इतिहास और स्वाभिमान को ही निशाना क्यों बनाते है? क्षत्रिय राजपूतों के स्वाभिमान को इतना हलके में क्यों लिया जाता है?

Anand Kumar एक छोटा सा सवाल था Singh Yogendra जी, अभी तो राजभर denotified ही हैं ना? ये denotified हटने के बाद वो कहाँ गिनेंगे खुद को? आरक्षण का लाभ लेना चाहेंगे या आरक्षण छोड़कर जनरल में आना चाहेंगे? आप खुद भी राजभर हैं या राजनैतिक हैं और बसपा समर्थक हैं?

Singh Yogendra हम हिंदुत्व के प्रबल समर्थक हैं पर इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे पुरखों को कोई अपना बताकर पेश करे. आश्चर्य है कि जिसे सदियों से पिछली सदी के मध्य तक क्षत्रिय राजा के रूप में जाना जाता रहा, उसे अचानक से बिना सबूत के भर या पासी राजा बना दिया गया.

Anand Kumar ये गंभीर परिणाम वगैरा रहने दीजिये भाई. आप राजभर हैं? आपके परिवार में राजभरों से शादी होती है?

Singh Yogendra राजभर किसे बोल रहे हो आप? हम राजपूत हैं कोई राजभर भर नहीं और आपकी मिथ्या पोस्ट का प्रतिकार किया है. राजा सुहेलदेव बैस 11वीं सदी में वर्तमान उत्तर प्रदेश में भारत नेपाल सीमा पर स्थित श्रावस्ती के राजा थे जिसे सहेत महेत भी कहा जाता है. सुहेलदेव महाराजा त्रिलोकचंद बैस के द्वित्य पुत्र विडारदेव के वंशज थे. इनके वंशज भाला चलाने में बहुत निपुण थे जिस कारण बाद में ये भाले सुल्तान के नाम से प्रसिद्ध हुए। सुल्तानपुर की स्थापना इसी वंश ने की थी। सुहेलदेव राजा मोरध्वज के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका राज्य पश्चिम में सीतापुर से लेकर पूर्व में गोरखपुर तक फैला हुआ था। उन्हें सुहेलदेव के अलावा सुखदेव, सकरदेव, सुधीरध्वज, सुहरिददेव, सहरदेव आदि अनेको नामो से जाना जाता है। माना जाता है की वो एक प्रतापी और प्रजावत्सल राजा थे। उनकी जनता खुशहाल थी और वो जनता के बीच लोकप्रिय थे। उन्होंने बहराइच के सूर्य मन्दिर और देवी पाटन मन्दिर का भी पुनरोद्धार करवाया। साथ ही राजा सुहेलदेव बहुत बड़े गौभक्त भी थे।

Pushpendra Rana भर अभी पिछड़ा वर्ग में आते हैं और कई अन्य जातियों के साथ इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल करने का मामला अभी भी चल रहा है.

Singh Yogendra हमे किसी समाज से दिक्कत नहीं. हिंदुत्व के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं. पर पुरखों को कोई दूसरी जाति का बताए, ये स्वीकार नहीं है.

Pushpendra Rana सुहेलदेव बैस को राजभर बताने के लिए आपके पास क्या प्रमाण है?

Anand Kumar 1950 के दशक तक कोई राजभर नाम लेने वाला नहीं था, उसे क्रिमिनल कास्ट बनाया हुआ था| आज भी राजपूतों की शादियाँ होती हों राजभरों में या बैंस में तो बताइये कि हां होती है| शर्मा क्यों रहे हैं इतना? पूर्वज चाहिए, अभी वाले को नहीं अपनाएंगे? थोड़ी हिम्मत दिखाइए… ले आइये किसी राजपूत को जिसने बैंस या राजभर परिवार में शादी की हो… उसे आप क्षत्रिय मानते हों तो ठीक… नहीं मानते तो फिर जबरन मुहर्रम क्यों मना रहे हैं?

Pushpendra Rana इसके लिए नए नए साहित्य लिखे गए सेठ बिहारी लाल की तर्ज पर. सुहेलदेव बैस के वंशज पयागपुर के राजाजी ने ही सुहेलदेव बैस का स्मारक अपनी जगह पर बनवाया और उनके मेले की शुरुआत की लेकिन बाद में वोट बैंक वालो के द्वारा उसे हाईजैक कर लिया गया

Singh Yogendra महामूर्ख न बनो यार, फेसबुकिया ही बने रहो उचित रहेगा। सुहेलदेव बैस को जबरदस्ती सुहेलदेव राजभर बना दिया और तुम मूर्खतापूर्ण सवाल पूछ रहे हो? कमीनो में ब्याह तेरे जैसे करते होंगे हम नहीं.

Prashant Singh Bains बैंसो के कोई वैवाहिक सम्बन्ध नहीं रहे हैं भर जाति में। भर जाति आदि सिर्फ़ जंगलों में रह कर गुज़र बसर करने वाली छोटी जातियाँ थी। इस्लामिक आक्रमणकारियों के विरुद्ध सिर्फ़ इन जातों ने राजा सहेलदेव का साथ दिया था. 

Pushpendra Rana बैस असली क्षत्रिय वंश है और उनमे सभी क्षत्रिय वंशो की शादी होती है. भर एक अलग जाति है जिनका क्षत्रियों से कोई सम्बन्ध नहीं. कुछ क्षत्रिय गिर कर भरों में जरूर शामिल हुए हो सकते हैं. जातियों और जाति व्यवस्था के बारे में कुछ पढ़ कर आइये, फिर ये बातें करिए. और हां denotified ट्राइब का मतलब पता है? denotified में जितनी भी जाती आती थी वो bc, sc, st में बटी हुई है. अब denotified की बात कर के यहा क्या बनना चाहते हो?

Sajan Soni जब तक क्रिमिनल कास्ट बताया जाता रहा तब तक किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दिखाई, denotified caste पर भी न अब तक कोई पोस्ट मिला न किसी ने कोई जानकारी दी । आज सरकार के एक सराहनीय कदम पर किसी ने ऐतिहासिक तथ्यों को रखने की कोसिस की तो अपने ज्ञान की शेखी बघारने धमक गए। उनकी उपलब्धियों का विश्लेषण छोर जातिगत विश्लेषण पे मुद्दे को अटका दिया और हवाला इतिहास से छेर चार का!! मज़ारों पे मत्था टेकेंगे और खुद को हिंदुत्व का समर्थक बताएंएगे पर जब उपलब्धियों की बात होगी तो ये तेरा बाप ये मेरा बाप करेंगे।

Pushpendra Rana आश्चर्य है की जिसे सदियों से पिछली सदी के मध्य तक क्षत्रिय राजा के रूप में जाना जाता रहा उसे अचानक से बिना सबूत के भर या पासी राजा बना दिया गया.

Singh Yogendra राजा सुहेलदेव बैस के विषय में मिथ्या प्रचार. इस युद्ध में राजपूतो के साथ भर और थारू जनजाति के वीर भी बड़ी संख्या में शहीद हुए,राजपूतों के साथ इस संयुक्त मौर्चा में भर और थारू सैनिको के होने के कारण भ्रमवश कुछ इतिहासकारों ने सुहेलदेव को भर या थारू जनजाति का बता दिया जो सत्य से कोसो दूर है क्योकि स्थानीय राजपुतो की वंशावलीयो में भी उनके बैस वंश के राजपूत होने के प्रमाण है। सभी किवदन्तियो में भी उनहे राजा त्रिलोकचंद प्रथम का वंशज माना जाता है और ये सर्वविदित है की राजा त्रिलोकचंद( प्रथम)बैस राजपूत थे। पिछले कई दशको से कुछ राजनितिक संगठन अपने राजनितिक फायदे के लिये राजा सुहेलदेव बैस को राजपूत की जगह पासी जाती का बताने का प्रयत्न कर रहे है जिससे इन्हें इन जातियों में पैठ बनाने का मौका मिल सके। दुःख की बात ये है की ये काम वो संगठन कर रहे है जिनकी राजनीती राजपूतो के समर्थन के दम पर ही हो पाती है। इसी विषय में ही नही, इन संगठनो ने अपने राजनितिक फायदे के लिये राजपूत इतिहास को हमेशा से ही विकृत करने का प्रयास किया है और ये इस काम में सफल भी रहे है। राजपूत राजाओ को नाकारा बताकर इनके राजनितिक हित सधते हैं। पर हम अपना गौरवशाली इतिहास मिटने नहीं देंगे। वीर योद्धा, महान संगठक महाराजा सुहेलदेव बैस को शत शत नमन.

Pushpendra Rana ऐसे तो इस युद्ध में ब्राह्मण आदि और अन्य जातियों के लोग भी काम आए थे लेकिन इससे सुहेलदेव बैस ब्राह्मण नहीं हो जाते.

Anjni Kumar Sarswat किसी भी जाति के क्यों न हो वह एक वीर हिंदू थे यही पर्याप्त है गर्व करने के लिए। जय महाराजाधिराज राजराजेश्वर हिंदवी गौरव श्री सुहेलदेव

Anand Kumar राजाओं के खानदान से थे क्षत्रिय तो… बनाइये अपना एक ट्रस्ट पैसे इकठ्ठा कीजिये किसी इतिहासकार को तथ्य निकालने कहिये… देखें कब तक राजभर और बैंस में राजपूतों की शादियाँ होती रही हैं. ऐसे तो नहीं चलेगा भाई.. आपने छोड़ दिया सदियों डूबने के लिए आज कुम्भ के बिछड़े भाई हो गए हैं आपके? और कुछ नहीं मिलता तो प्रयाग और गया के पंडितों के पास करीब 800 साल का तो रिकॉर्ड मिल जायेगा शादियों का… निकालिए उसमें से देखें… जिस अँगरेज़ ने हर विरोध करने वाले को क्रिमिनल कास्ट बना दिया था उसके लिखे पर भी भरोसा नहीं करना… दल हित चिन्तक तो चलिए पहले ही चर्च के पैसे पर पलते हैं.. उनकी भी नहीं सुनते… शादी के रिकॉर्ड तो होते हैं पंडितों के पास… उस से निकाल लीजिये देखते हैं कब तक राजभर कौन सी जाति में थे.. अभी तो पिछड़े हैं ये तो मानियेगा ??

Singh Yogendra भर पिछड़े हों या दलित हों हमे कोई लेना देना नही. हमे उनसे कोई शिकवा नही. पर तुम सुहेलदेव बैस को सुहेलदेव भर लिख रहे हो इससे आपत्ति है. सुहेलदेव बैस का स्मारक खुद उनके वंशज पयागपुर के राजपूत राजा ने अपनी 500 बीघा जमीन दान में देकर बनवाया था.

Rajpal Singh Champawat Sarechan आनन्द जी आप की पोस्ट ग़लत है.. कोई लाँजिक नही..

Singh Yogendra बैस तो उच्चकुल के राजपूत हैं उनमें तो शादी होगी ही पर भरों में शादी ब्याह तुम्हारी हो सकता है हुई हो या उन्ही की पैदाइश हो तुम? सुहेलदेव बैस का स्मारक खुद उनके वंशज पयागपुर के राजपूत राजा ने अपनी 500 बीघा जमीन दान में देकर बनवाया था.

Anand Kumar आ गए जातिवादी रंगत में. बस थोड़ा सा उकसाना पड़ता है. नीच कुल का ही जब मानते हो उन्हें तो काहे उन्हें अपना पूर्वज घोषित करने पर तुले थे Singh Yogendra जी.  मान लो कि जातिवादी हो… एकता की बातें तुमसे ना हो पाएंगी… जाने दो…

Singh Yogendra अरे मुर्ख नीच कुल का सुहेलदेव बैस को नही कहा. वो बैस क्षत्रिय राजपूत कुल के थे जिसे तुम जैसे मुर्ख जबरदस्ती भर या पासी बना रहे हो. हिंदुत्व का पाठ सीखने की जरूरत तुम जैसे कायरो से नही है. जब हमारे पुरखे तुर्को अफगानो से लडकर सर कटवा रहे थे तो उस समय तुम्हारे पुरखे किसी बिल में दुबके हुए बैठे होंगे. आज भी हिन्दू हो तो हमारे पुरखो के बलिदान की वजह से. हिंदुत्व का पाठ तुम जैसे घोंचूओ से सीखने की जरूरत नहीं है.

Banti Kharayat ओ आनंद कुमार…..तुम लोग कभी नहीं सुधरोगे….ये फर्जी इतिहास रचने से तुम लोग राजपूत नहीं बन सकते रहोगे वही ही….जैसे वो तुम्हारा मसीहा जिस ने अपने ब्राह्मण शिक्षक(जिसने उसे अपने खर्चे पर पढ़ाया) की कास्ट अपने नाम के आगे जोड़ ली परन्तु हीन भावना से ग्रषित होने के कारण पूर्वाग्रह नहीं त्याग पाया जिनका सरनेम चुरा लिया उनके लिये….. दूसरे के बाप को बाप कहने से वो तुम्हारा बाप नही हो जायेगा…

Anand Kumar कुल के हिसाब से आल्हा उदल का कुल भी नीच होता था इसलिए उनकी लड़ाइयाँ होती रहती थी ना? अपनी मूर्खताओं का नतीजा इतने सालों में भी नहीं दिखा? smile emoticon गजब के अंधे होते हो भाई…

Singh Yogendra अरे अक्ल के अन्धो कौन तुम्हे सूतियापन्ति का इतिहास पढ़ा रहा है? आल्हा उदल बनाफर राजपूत वंश के थे. तुम्हे किस चूतिये ने कह दिया उनका कुल निचा होता था? बनाफर राजपूत आज भी बुन्देलखण्ड में मिलते हैं.

Anand Kumar पहले आपस में निपट लीजिये जातिवादी Singh Yogendra जी. एक बता रहा है बानफर राजपूत… एक किस्सा कहता है… थे की नहीं आल्हा उदल?

Prashant Singh Bains भर भर ही लिखते है, गोत्र नहीं। Anand जी, आल्हा कहानी नहीं है। वो वीर रस। तुम भर सोच वाले क्या जान सकते हो वीर रस क्या होता है।

Rajarsh Singh Bais खून को किसी सम्बोधन या प्रमाण की जरुरत नहीं, नाम के आगे हम सिंह इस लिये लिखते है की हम आपस में न लड़े। पर फिर भी हम आपस में लड़ते है । अगर राजपूत एक दुसरे के परस्पर विरोधी न हो तो तुम 1000 साल और आरक्षण लो तब भी हमारा कुछ नही बिगड़ेगा। भर में जा कर बैंस खोजोगे तो कहा मिलेगा हाँ अगर भरो में बैसो की नाजायज़ औलाद ढूँढो तो मैं sure हु मिल जाएगी।।।

Anand Kumar आहा एक और जातिवादी सूरमा आये. नाईट शिफ्ट है आज की. हा हा हा

Singh Yogendra जातिवादी सडांध तुम्हारे अंदर भरी हुई है. अगर मुल्ला होते तो अब तक ओकात बता दिए होते Anand Kumar जी. संघी हो इसलिए संयम है क्योंकि वोटर हम भी बीजेपी के ही हैं पर अपने इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नही होगी. यहाँ दुष्ट वामपंथी नही बल्कि हमारे प्रिय संघी ही फर्जी इतिहास रच रहे हैं. अंग्रेजो ने गजेटियर में लिखा है कि कुछ लोग सुहेलदेव को थारु कुछ भर, कुछ बैस राजपूत तो कुछ कलहंस राजपूत बताते हैं. उनकी पूरी वंशावली आज के बैस राजपूतो में मिलती है फिर भी विवाद मान लिया जाए तो सरकार और आप उन्हें एकतरफा भर कैसे लिख सकते हो?

Prashant Singh Bains डे नाइट खेलने वाले है यहाँ।।।,, बेस नाजायज़ खेलने में माहिर है।।। ये तो ग़नीमत हो गई कि तुम्हारे सविधान ने १९५२ ऐक्ट ला दिया वरना जाने कितने ओर नाजायज़ etc … बैंसो के गुणगान कर रहे होते।… ओर ज़्यादा ठाकुरई पर बोलो तो आ जाऊँ अवध वाली।। तो मुँह छुपाते नहीं मिलेगा।।। इस इतिहास को अपनी में घुसा लो ओर हर बार जब झाड़े फिरने निकालोगे तो इसको बाँचना

Anand Kumar चलिए जातिवादी थोडा तो ऊपर आये… कम से कम चंदेल, तोमर, बैंस, राजभर से आगे उच्च कुल, नीच कुल छोड़कर अब पोलिटिकल संघी कम्युनिस्ट तक स्वागत है… ऐसे ही छूटेगी ये जातिवाद की आपकी बीमारी वैसे रानी झाँसी को क्या मानते हैं आप लोग ? आल्हा तो चलिए आपने कहानी घोषित कर दिया… रानी झाँसी क्या थी ? दलित, ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य कुछ होगी ना ??

Singh Yogendra तू क्या है पहले ये बता? रानी झांसी शूरवीर यौद्धा थी जन्मना ब्राह्मण थी. जातिवाद तुम फैला रहे हो सुहेलदेव को भर लिखकर.

Rajarsh Singh Bais हमे जातिवाद की जरूरत ही नही । वो कमजोरो का हथियार है

Anand Kumar अरे रे तू तड़ाक पर उतर आये जातिवादी Singh Yogendra जी को नाईट शिफ्ट की नौकरी में भी गुस्सा आया smile emoticon वाह वाह smile emoticon तलवार तो नहीं खींच ली grin emoticon घर में है भी की नहीं.

Singh Yogendra तुम जैसे tatpunjiyo के लिए तलवार की क्या जरूरत?

Anand Kumar वो किताब का लिंक ऊपर जो एक सूर्यवंशी क्षत्रिय को राजा बता रहे हैं किसी इलाके का उनके लिए है… सुहेलदेव वैसे क्या थे? चंद्रवंशी की सूर्यवंशी? नाग वंश वाले सूर्यवंशी होते हैं? शायद आपको पता होगा जातिवादी Singh Yogendra जी?

Singh Yogendra बिलकुल नागवंश खुद सूर्यवंश की शाखा है. http://rajputworld.blogspot.in/2013/07/blog-post_10.html?m=1

अत्रि अन्तर्वेदी मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष, सुहेलदेव को भर बतलाकर रेल चलायेंगे…. चुनावों में रेल सी देखते रह जायेंगे।

Avinash Sharma भैया Anand Kumar, ये नही मानेंगे ये तो वही बात के पक्ष धर है जहां मीठा -२गप्पऔर कड़वा कड़वा थू. वाल्मीकी, व्यास, जाबाल ऋषि बन गय् तो वो ब्राह्मण हो गये, सुहेलदेव, आल्हा ने पराक्रम कर दिया तो वो क्षत्रिय हो गये. इनसे पूछो कि गोधरा मे जो जलाये थे मिंयों ने हिंदू वो जात देख कर जलाये थे क्या. उऩका बदला लेने वाला बामन ठाकुर नही बल्की इनकी नजरो मे छोटी जात का तेली था.

शुभम शर्मा आर्य discussion गलत दिशा में चला गया। कुछ लोगो को “जातिगत superiority” का मीठा सायनाइड चूसने में अब भी मजा आता ह।

Pushpendra Rana अबे चूतिये अगर इन सब से हारते तो तू आज हिन्दू हिन्दू ना कर रहा होता. और ये आर्य समाजी बकवास अपने पास रख. २३०० साल पहले खुद megasthenes लिख गया है की जाती कभी नही बदली जा सकती थी. शुंग और kanva ब्राह्मणों से क्षत्रिय हो गए क्या? सातवाहन क्षत्रिय हो गए? विश्वामित्र ब्राह्मण हो गए? और क्षत्रिय कभी किसी गैर क्षत्रिय को क्षत्रिय नही मानता दूसरी जातियों की तरह नही तो आज दो तिहाई जनता क्षत्रिय होती

Brijesh Rai इस नाम से ट्रेंन चलाकर .भासपा (भारतीय समाज पर्टी )के साथ 2017 के चुनाव मे गठबंधन को भी हरी झंडी दे दी हैँ ..इस पार्टी के मुखिया ओमंप्रकाश राजभर के साथ भाजपा नेताओ का मेल जोल काफी चरचा मे रहा था..2012 के चुनाव मे शुहेल देव वाली पार्टी ने बनारस और आजम गढ मडल की 16 सीटो पर दमदारी के साथ चुनाव लडा था और भाजपा के उम्मिदवारो से भी ज्यदा वोट मिले थे इनको ..फागु चौहान .अम्बिका चौधरी .अब्दुल समद अंसारी जैसे नेताओं को हारना पडा था इस पार्टी की वजह से ..बनारस के दो विधानसभा मे ये बसपा से ज्यदा वोट पाये थे ….राजभर बिरादरी शुहेलदेव के नाम पर ही राजनिती करती हैँ …

Madan Tiwary जब मानसिंह अकबर से शादी का रिश्ता हो सकता है और स्वीकार्य भी था राजपूत समाज को फिर राजभर से क्यों नहीं ? वैसे उस समय रजवाड़े किसी जाति के हों उनकी आपस में शादिया होती थी क्योकि शादी का मकसद राज्य विस्तार था ।

Rajpal Singh Champawat Sarechan Abet cutiye pehle itihas pad … Wo dasi thi jiske sath akbar ki Shadi hui… Aur apwad Har jagah hotey hai …

Sonu Anil हे प्रभु ये ठकुरई कब जाऐगी

Singh Yogendra ठकुराई न होती तो आप मुल्ला होते anil जी

Sonu Anil कौन सी ठकुरई जयचंद वाली vp singh वाली या दिग्विजय सिंह वाली

सुधाँशु मणि त्रिपाठी बहराइच में सब राजा सुहैलदेव राजभर ही जानते हैं।

Swati Gupta मैं भी यही जानती हूँ. राजा सुहैल देव पासी सुना था हमने.

सुधाँशु मणि त्रिपाठी उनके स्मारक या मंदिर कह लें, वहाँ के शिलापट्ट पे यही नाम लिखा है। जो चित्तौरा झील के किनारे पर है जहाँ उन्होंने सलार मसूद को मारा था।

Tarun Kumar आरे भाई, सुहेलदेव किसी जाति के थे, हिन्दू थे, दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, विजयी हुए, इसलिये वो हमारे गौरव गान के नायक हैं, ना की किसी जाति विशेष के होने के।

Singh Yogendra ये दुष्प्रचार सिर्फ कुछ दशक पुराना है भर और पासी लडको ने भी इस युद्ध में राजाओं का जमकर साथ दिया था न कि सुहेलदेव पासी या भर थे. ये सारा भृम एक अंग्रेज लेखक द्वारा किये साक्ष्य विहीन अनुमान से शुरू हुआ। अंग्रेज तो राम कृष्ण को काल्पनिक बताते हैं आर्यो को विदेशी तो सब पर यकीन कर लिया जाए?

Swati Gupta मैं बहराइच में रह चुकी हूँ, इसलिये बता रही हूँ कि वहाँ के लोकल सब उन्हें पासी बताते हैं

Singh Yogendra जी और पूर्वांचल के कुछ जिलो में इन्हें भर बताकर वोट की फसल काटने की तैयारी है जबकि राजा सुहेलदेव बैस राजपूत थे जिनकी पहले और बाद की पूरी वंशावली मौजूद है

Tarun Kumar इतिहास के लेखन परम्परा ना होने से निश्चय ही समस्या हैं, लेकिन सही क्या हैं, इसका निर्णय तो तथ्य के आधार पर ही कर सकते हैं। अब अशोक कौन थे, क्षत्रिय, शुद्र या कुछ और, यह विवादित हैं, हमेशा रहेगा। जिसे जो मानना हैं माने लेकिन जाति इतिहास में कोई मायने नहीं रखती।

Swati Gupta इनका पासी ही पता था, वैसे क्या फ़र्क़ पड़ता है, थे तो हिन्दू ही, पर अभी तक उपेक्षित थे। वहाँ हम तीन साल रहे पर क्षत्रिय तो किसी ने नहीं बोला

Jaipal Singh Sindarli मित्रों आजकल कुछ तथाकथित पढ़े लिखे और राजपूतो से इर्शाभाव रखने वाले लोग हमारे योगदान को नकारते हैं। जिन जातियो को राजपूतो से नफरत है वो जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर, हरयाणा आदि के साथ ही सैकड़ो शहरो के नाम बदल दें। ध्यान दे कि वर्तमान भारत के सीमावर्ती क्षेत्र और पूर्व रियासते जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, जम्मू, कच्छ में राजपूत शासन ना होता तो ये भी पाकिस्तान में होते और आज राजपूत विरोधी हिन्दू टोपी पहन कर कुरान पढ़ रहे होते। शायद इन राजपूतो ने गलती कर दी मुग़ल तुर्को से लड़ाई कर के अपनी संस्कृति को बनाये रखा——
बाप्पा रावल
नागभट प्रतिहार
मिहिरभोज प्रतिहार
राणा सांगा
राणा कुम्भा
वीर पृथ्वी राज चौहान
महाराणा प्रताप
रानी दुर्गावती
वीर जयमल
वीर छत्रशाल बुंदेला
दुर्गादास राठौर
मालदेव
छत्रपति शिवाजी
महाराणा राजसिंह
रानी कर्मावती
रानी पद्मनवती
विरमदेव सोनिगरा
राजा भोज
सुहेलदेव बैस
आनंदपाल तोमर
राजा हर्षवर्धन बैस
बन्दा सिंह बहादुर
ऐसे ही हजारो योद्धा जो हिंदुत्व के लिए कुर्बान हो गए।

वीर कुंवर सिंह, आऊवा ठाकुर कुशाल सिंह,राणा बेनीमाधव सिंह,चैनसिंह परमार,रामप्रसाद तोमर बिस्मिल,ठाकुर रोशन सिंह,महावीर सिंह राठौर जैसे महान क्रांतिकारी अंग्रेजो से लड़ते हुए शहीद हो गए। आजादी के बाद सबसे ज्यादा परमवीर चक्र राजपूतो ने जीते।शैतान सिंह भाटी,जदुनाथ सिंह राठौड़,पीरु सिंह शेखावत,गुरुबचन सिंह सलारिया,संजय कुमार डोगरा जैसे परमवीरो का बलिदान क्या भुला जा सकता है? आज भी राजपूत रेजिमेंट, राजपूताना रायफल्स, डोगरा रेजिमेंट, गढ़वाल रेजिमेंट, कुमायूं रेजिमेंट, जम्मू कश्मीर रायफल्स के जवान सीमा पर दुश्मन का फन कुचलने और गोली खाने के लिए सबसे आगे होते हैं। देश के एकीकरण के लिए हमने अपनी सैकडो रियासते कुर्बान कर दी,सारी जमीदारी कुर्बान कर दी,अपने खजाने खाली कर दिए! क्या इस त्याग को यूँ ही भुला दिया जाएगा?  राजपूत मतलब राजपुत्रः गीता से लेकर रामायण तक में वर्णित है यहाँ क्षत्रियो में भगवान राम, भगवान कृष्णा से लेकर महात्मा बुद्ध भगवान महावीर से लेकर सभी सभी तीर्थनकर साथ ही लोकदेवता कल्ला जी बाबा रामदेव गोगाजी कल्लाजी सहित सैकड़ो लोकदेवता, जाम्भा जी परमार(विश्नोई मत) हुएं। ये सब क्षत्रिय राजपूत थे,क्या इनको भी मानना छोड़ दोगे?

Pushpendra Rana ये ही भर, मेव, चेरो आदि इनके पूर्वजो को परेशान करते थे, इनको लूटते थे. हिन्दुओ को पूजा पाठ तक नही करने देते थे. इनको क्षत्रियो ने ही इनके आतंक से मुक्ति दिलाई. इस बारे में ग्रन्थ भरे पड़े है. आज वोट के लिए ये आतंकी ही इनके हीरो हो गए और क्षत्रिय दुश्मन. इन जैसो पे कभी भरोसा ही नही करना चाहिए.

Dheer Singh Pundir इन संघियो का अस्तित्व राजपूतो के बलिदान पर टिका हुआ है पर इन अहसानफरमाइशो को सिर्फ नकारात्मक पक्ष ही दिखाई देता है. इतिहास की जानकारी करिये.  बाप्पा रावल और नागभट परिहार की वजह से ही अरब हमलावर सिंध से आगे भारत में पुरे 500 साल तक नही घुस पाए. वो अरब जो इस्लाम की स्थापना के कुछ ही दशको में पुरे मध्य पूर्व एशिया मिस्र ईरान इराक सीरिया जीतते हुए स्पेन तक जा पहुंचे थे. वो भारत में विफल हुए क्योंकि यहाँ बाप्पा रावल और नागभट परिहार ने राजस्थान के युद्ध में उन्हें करारी मार लगाई. जितनी सूझ बूझ और वीरता से राजपूतो ने अरबो तुर्को से देश की रक्षा की ऐसा उदाहरण विश्व में दूसरा नही है.

मूल खबर….

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गाजीपुर से दिल्ली के लिए नई ट्रेन ‘राजा सुहेल देव राजभर एक्सप्रेस’ 13 अप्रैल से, हफ्ते में तीन दिन चलेगी

गाजीपुर के सांसद और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की पहल पर पूर्वी यूपी के गाजीपुर जिले से दिल्ली के लिए ट्रेन शुरू हो रही है। ट्रेन को मनोज सिन्हा 13 अप्रैल की शाम पांच बजे गाजीपुर सिटी स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलेगी। बुधवार-शुक्रवार तथा रविवार की शाम साढ़े पांच बजे गाजीपुर सिटी स्टेशन से खुलेगी और सुबह साढ़े सात बजे दिल्ली के आनंद बिहार स्टेशन पहुंचेगी।

आनंद बिहार से यह ट्रेन मंगलवार, गुरुवार तथा शनिवार की शाम साढ़े सात बजे रवाना होगी और गाजीपुर सिटी स्टेशन पर सुबह साढ़े नौ बजे आएगी। इसका रूट गाजीपुर सिटी से औड़िहार, जौनपुर, जफराबाद, सुल्तानपुर, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद से आनंदबिहार तय हुआ है। ट्रेन का नाम ‘राजा सुहेल देव राजभर एक्सप्रेस’ रखा गया है। ट्रेन का अप में 22419 और डाउन का नंबर 22420 होगा। रेलवे के कंप्यूटर में इस ट्रेन के लिए आरक्षित टिकट बुकिंग का काम 11 अप्रैल से शुरू होगा।

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अपराधियों की पेशी पर कचहरी सील करना आम जन के मौलिक अधिकार का हनन

गाजीपुर (उत्‍तर प्रदेश) : गुरूवार को कचहरी परिसर पुलिस ने सील कर रखा था। लगभग सवा दस बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्‍य एवं समग्र विकास इण्डिया के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ब्रज भूषण दूबे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने से जिलाधिकारी कार्यालय की ओर जाना चाहे तो उन्‍हें भी रोक दिया गया। कारण् पूछने पर तैनात कतिपय इंस्‍पेक्‍टर व दरोगाओं द्वारा बताया गया कि आज फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में बृजेश व त्रिभुवन की पेशी है।

श्री दूबे ने मुख्‍यमार्ग से आगे जाने की बात किया तो पुलिस कर्मियों ने उन्‍हें किसी भी कीमत पर जाने से मना कर दिया तब तक कई वादकारी आये और अपने मुकदमें की पैरवाी करने के लिये जाने का आग्रह किये किन्‍तु उन्‍हें भी रोक दिया गया। श्री दूबे अपने मौलिक अधिकार के हनन की बात कहते हुये पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने चार्ट पेपर लगाकर सत्‍याग्रह पर बैठ गये।

चार्ट पेपर पर लिखा था कि वीडियो कान्‍फ्रेसिंग के जरिये पेशी कराओ, या जज साहब जेल में जाओ। उनका कहना था कि प्रदेश के आधा दर्जन जेलों में वीडियो कान्‍फ्रेंसिंग की सुविधा है तथा न्‍यायालय में भी, फिर इसका प्रयोग क्‍यों नहीं किया जाता। उन्‍होने यह भी कहा कि यदि पेशी कराना अपरिहार्य ही है तो कचहरी परिसर सील कर आम जन के मौलिक अधिकार का हनन न किया जाय। यह भी कहा कि यदि उचित समझें तो सम्‍बन्धित न्‍यायालय के न्‍यायाधीश अपराधी के निरूद्ध कारागार स्‍थल पर जाकर सुनवाई करें। एेसा करने से जहां पब्लिक मनी का अपव्‍यय रूकेगा वही दर्जनो थानो की पुलिस परेशान नहीं होगी।

श्री दूबे ने कहा कि उन्‍होने इसके लिये माननीय उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश, प्रदेश के श्री राज्‍यपाल, मुख्‍यमंत्री सहित जिले के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को मेल किया है। श्री दूबे ने जोर देकर कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्‍त आम जन के मौलिक अधिकार के हनन का अधिकार किसी काे नहीं है। यह भी कहा कि वीडियो कान्‍फ्रेंसिंग के जरिये पेशी कराये जाने के लिये उन्‍होने दशकों पूर्व से काफी प्रयास किया है। सत्‍याग्रह के समय अधिवक्‍ताओं, राहगीरों, वादकारियों व स्‍कूली छात्र/छात्राओं को रोकने वाली पुलिस मूक दर्शक बनी रही।

सत्‍याग्रह में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण तिवारी ने अफसोस जाहिर करते हुये कहा कि वीडियो कान्‍फ्रेंसिंग के जरिये पेशी कराने से समय, धन, भागदौड की बचत के साथ मुकदमें की सुनवाई में विलम्‍ब नहीं होगा तथा शीघ्र न्‍याय पाने की अवधारणा फलीभूत होगी। उक्‍त अवसर पर प्रवीण तिवारी, हसन अब्‍दुल्‍लाह, मनोज जैसवाल, पीयूष कान्‍त पाण्‍डेय एव अवनि कुमार सिंह ने सत्‍याग्रह किया।

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आओ गांधीगिरी करें : डाक्टर से गुंडागर्दी करने वाले गाजीपुर के सीओ सिटी को फोन करें

Yashwant Singh : हमारे गाजीपुर जिले के डाक्टर Avinash Singh Gautam बेहद उर्जावान और क्रांतिकारी डाक्टर हैं. फिजियोथिरेपिस्ट हैं. गर्दन से लेकर शरीर के किसी हिस्से के दर्द को छूमंतर कर देते हैं, अपने जादुई इलाज व मसाज के जरिए. इनका इलाज और मसाज गाजीपुर के एक पुलिस अफसर को ऐसा भाया कि इन्हें रात दिन कभी भी आदेश देकर बुलाने लगा. गर्दन के दर्द से पीड़ित इस रीढ़ विहीन पुलिस अफसर ने डाक्टर को अपना बंधुआ गुलाम सरीखा समझने लगा और आदेश देकर इलाज कराने लगा. डाक्टर अविनाश ने जब इनकार किया तो सबक सिखाने के लिए आधी रात को इनके घर धावा बोल दिया.

पूरा माजरा आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं: http://goo.gl/lOSNLn

इसे पढ़ने के बाद आपको करना ये है कि सीओ सिटी गाजीपुर कमल किशोर को उनके परसनल मोबाइल नंबर 09919877888 पर फोन कर पूछना है कि ”आधी रात को डाक्टर अविनाश के घर छापा क्यों मारा और उन्हें अपराधियों की तरह लाद कर कोतवाली क्यों ले जाया गया?”

हम आप सब सिटीजन जर्नलिस्ट हैं और हम सभी को यह जानने का हक है कि पुलिस ने किसी संभ्रांत डाक्टर के घर आधी रात में छापा क्यों मारा और उन्हें उठाकर कोतवाली क्यों ले गई. सीओ साहब से इतने सारे लोग फोन कर पूछो कि उन्हें आगे से किसी शरीफ आदमी से गुंडई करने की न सूझे. गांधीगिरी न करेंगे तो कल को आप भी किसी बददिमाग पुलिस वाले की चपेट में आ सकते हैं. सो, सरकारी नौकरों को औकात में रखने के लिए उनसे हिसाब-किताब समय-समय पर लेते रहना चाहिए.

इसलिए फौरन फोन उठाइए और सिटी सिटी गाजीपुर कमल किशोर का नंबर मिलाइए.

मैंने तो फोन कर पूछा लिया सीओ सिटी से- ”दिल्ली से जर्नलिस्ट यशवंत बोल रहा हूं… का गुरु, काहे को आधी रात में डाक्टर के यहां छापा मारा?”

सीओ साहब सकपकाए से बोलते समझाते रहे- ”सर वो अपराधी होने की सूचना मिली थी, लेकिन सूचना गलत मिली. इसी भ्रम में हम लोग वहां चले गए थे.. ब्ला ब्ला ब्ला…”

अगर आप खुद में थोड़ा बहुत भी एक्टिविज्म का पार्ट देखते हैं तो सीओ सिटी कमल किशोर को फोन कर डाक्टर से गुंडागर्दी करने का कारण जरूर करिए. 

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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गाजीपुर में डाक्टर ने गर्दन का मसाज करने से इनकार किया तो सीओ सिटी ने दलबल के साथ आधी रात को घर में घुसकर की गुंडई

पुलिसिया गुंडई के शिकार गाजीपुर के सोशल एक्टिविस्ट और फिजियोथिरेपिस्ट डा. अविनाश सिंह गौतम


पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में डा. अविनाश सिंह गौतम बतौर फिजियोथिरेपिस्ट कार्यरत हैं. डाक्टर साहब सोशल एक्टिविस्ट भी हैं, इसलिए वह जनसरोकार के मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं. अन्याय और जुल्म के खिलाफ लड़ने वाले लोगों के मोर्चा में शामिल रहते हैं. पिछले दिनों शहर के सीओ कमल किशोर ने अपने गर्दन के दर्द और स्पेंडलाइटिस के इलाज के लिए डाक्टर अविनाश सिंह गौतम से संपर्क किया. डाक्टर साहब ने उनके गर्दन की मसाज के साथ-साथ उचित दवा और निर्देश दिया. सीओ साहब को गर्दन के मसाज से इस कदर राहत मिली कि वह डाक्टर अविनाश सिंह गौतम को गाहे बगाहे फिजियोथिरेपी और गर्दन के मसाज के लिए बुलाने लगे.

डाक्टर साहब ने शुरू में तो इसे मरीज को राहत मिलने का मामला मानकर उनकी इच्छा अनुसार फिजियोथिरेपी और गर्दन मसाज करते रहे. लेकिन जब सीओ साहब अपनी पुलिसिया अकड़ में डाक्टर के दिए गए टाइम पर क्लीनिक में आकर मसाज कराने की जगह अपनी सुविधानुसार रात-बिरात बुलाने लगे तो डाक्टर साहब ने मना कर दिया. सीओ से डाक्टर ने कहा कि वह क्लीनिक के टाइम पर आएं और इलाज कराएं. लेकिन सीओ साहब हड़काने लगे कि मेरी सुविधा के हिसाब से मेरे आवास पर आओ और इलाज करो. डाक्टर ने इस धमकी को अस्वीकार कर दिया. सीओ अपने गनर और सिपाहियों से फोन कराने लगा कि सीओ साहब बुला रहे हैं. डाक्टर ने फोन उठाना बंद कर दिया. इसके बाद सीओ कमल किशोर का पारा गरम हो गया.

सीओ साहब ने ऐलान कर दिया कि वह डाक्टर को सबक सिखाएंगे. बस, क्या था. एक रोज आधी रात दल बल के साथ डाक्टर अविनाश सिंह गौतम के घर छापा मार दिया. डाक्टर को खींचकर गाड़ी में लादकर कोतवाली ले जाया गया. पूरे घर में सीओ ने तांडव किया और महिलाओं को गंदी गंदी गालियां दी. बिना महिला पुलिस लिए सीओ ने आधी रात एक सम्मानित डाक्टर के घर में घुसकर जो तांडव किया, उससे पूरे मोहल्ले के लोग जग गए. मोहल्ले वालों ने पुलिस के इस बर्ताव और दबंगई का विरोध किया तो पुलिस वाले खिसकने लगे. कोतवाली ले जाए गए डाक्टर अविनाश सिंह गौतम से सीओ कमल किशोर ने मारपीट की. उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया गया. बाद में जब शहर के गणमान्य लोग कोतवाली पहुंचने लगे और सीओ के इस घटिया बर्ताव की निंदा करने लगे तो पुलिस बैकफुट पर आई. सीओ, एसओजी इंचार्ज समेत जितने भी पुलिस वाले थे सब दारू पिए हुए थे. दारू के नशे में सीओ सिटी कमल किशोर और अन्य पुलिस वालों ने गाजीपुर शहर के एक सम्मानित डाक्टर को सबक सिखाने के लिए जो नंगा नाच किया, उसकी जानकारी सुबह जब शहर के समाजसेवियों और गणमान्य लोगों को मिली तो हर तरफ पुलिस की थू थू होने लगी. 

डाक्टर Avinash Singh Gautam ने इस बारे में खुद फेसबुक पर लिखा है: ”जनपद के चंद पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों से मुझे व मेरे परिवार को जान का खतरा‬ है. इसके चलते मुझे व परिवार के लोगों को किसी भी फर्जी मुकदमे में फंसाया जा सकता है और हम लोगों के साथ कभी भी किसी भी वक्त कोई भी अप्रिय घटना घट सकती हैं. इसकी पूरी लिखित शिकायत मैंने कल रात्रि में अपर पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को दे दी है. हाल फिलहाल कोई भी घटना या दुर्घटना यदि हम लोगों के साथ होती हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी मेरे द्वारा दिये गये प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामजद पुलिस अधिकारियों की होगी. पुलिस वालों के अमानवीय व्यवहार के सम्बंध में विस्तृत लेख शाम को आप तक साक्ष्य के साथ संप्रेषित करूँगा.

गाजीपुर के समाजसेवी Umesh Srivastava इस घटना के बाद फेसबुक पर लिखते हैं: ”पुलिस वालों से सावधान, रात को किसी भी समय co city ghazipur किसी के घर छापा मार सकते हैं. अगर आप इनका सेवा / इलॉज नहीं करेंगे तो मुकदमों का धौंस देकर जबरन कराएंगे इलाज. इसलिए सभी लोग रहें सावधान.

डाक्टर अविनाश के साथ सीओ सिटी कमल किशोर के बेहूदा हरकत की जब चहुंओर निंदा होने लगी तो अब सीओ सिटी कमल किशोर यह सफाई देते फिर रहा है कि डाक्टर अविनाश के घर किसी अपराधी के रुकने की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस दल वहां पहुंचा. लेकिन सूचना गलत निकली. सीओ सिटी कमल के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि आधी रात को एक सम्मानित डाक्टर को जबरन गाड़ी में ठूंस कर कोतवाली ले जाने का मकसद क्या था और डाक्टर से मारपीट क्यों की गई. कहने वालों का कहना है कि यूपी में जंगलराज का जो आलम है उसमें पुलिस वाले बेलगाम है और वह खुद को खुदा से कम नहीं समझ रहे हैं. इन्हीं करतूत और हरकत के कारण आने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर होने की पूरी संभावना है. 

गाजीपुर से भड़ास के विशेष संवाददाता सुजीत कुमार सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क: 09451677071


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स्वाइन फ्लू से गाजीपुर के युवा पत्रकार निलेश राय का निधन

गाजीपुर : पत्रकार निलेश राय का आकस्मिक निधन होने पर पत्रकारो में शोक की लहर दौड़ गयी। पत्रकार निलेश राय वाराणसी से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र के रेवतीपुर से स्थानीय संम्वाददाता थे। वे बड़े ही मिलनसार प्रवृत्ति के थे। वे विगत एक सप्ताह से स्वाइन-प्लू की बीमारी से पीड़ित थे। उनका निधन आज सुबह लगभग सात बजे इलाज के लिए जिला अस्पताल लाते समय रास्ते में हो गया। वे अपने तीन भाईयों में सबसे छोटे थे। अपनी पीछे पत्नी और एक 12 वर्षीय पुत्र आयुष राय को छोड़ गये है।

निलेश राय की अन्तेष्टि रामपुर गंगाघाट पर उनके बड़े भाई राजेश राय ने मुख्याग्नि देकर की। गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन की आवश्यक बैठक कचहरी स्थित मीडिया हाउस पर 9 फरवरी को हुई। बैठक में पत्रकारो ने शहीद कर्नल मुनीन्द्रनाथ राय व पत्रकार निलेश राय के निधन पर दो मिनट का मौन रख परिवार को इस दुखद क्षण के असहनीय वेदना में लड़ने की शक्ति प्रदान करने की कामना ईश्वर करते हुए श्रंद्धाजलि दी। इस बैठक में अनिल उपाध्याय, चन्द्र कुमार तिवारी, आर सी खरवार, संजय यादव, रविकान्त पाण्डेय, शशिकान्त यादव, अनिल कुमार, आलोक त्रिपाठी, सूर्यवीर सिंह, गुलाब राय, अजय शंकर तिवारी, सोनू, कमलेश, पिन्टु आदि लोग उपस्थित थे।

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गाजीपुर में पत्रकारों के लिए ‘मीडिया हाउस’ नामक भवन का उदघाटन

गाजीपुर। जनपद में पत्रकारों के लिए ‘मीडिया हाउस’ नामक भवन का उदघाटन अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को दिन में लगभग 11:30 बजे फीता काट कर डा0 सीपी दिक्षित ने किया। तत्पश्चात मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवल व माल्यापर्ण कर किया गया। पं0 अजय शंकर तिवारी द्वारा आरती कर एवं नारियल फोड़ भव्य शुभारम्भ किया। इस अवसर पर गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन के महासचिव चन्द्र कुमार तिवारी द्वारा संस्था के वेबसाइट का उदघाटन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार धर्मदेव राय व डा0 दीक्षित ने गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश दूबे की धर्मपत्नी समीक्षा दूबे व उनके दो बच्चो साक्षर व साक्षी को 35000/-रूपये का सावधि जमा सर्टिफिकेट संस्था की ओर से भेंट किया।

कार्यक्रम में वक्ता के रूप में कृपा शंकर राय अधिवक्ता ने पत्रकारों के भवन की और सभी पत्रकारों के लिए आवास बनाने की मांग करते हुए पत्रकारों पर अपनी लेखनी मजबूत करने पर बल दिया। वहीं दयाशंकर दूबे सचिव मुहम्मदाबाद बार एसोसिएशन ने पत्रकारिता एक मिशन पर जोर दिया। आलोक कुमार राय सचिव सेन्ट्रल बार एसोसिएशन मुहम्मदाबाद ने पत्रकारों की निर्भीक व निडर होकर समाज में एक नई मिशाल पेश करने की जरूरत पर बल दिया। पत्रकार व समाजसेवी उमेश श्रीवास्तव ने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि यदि जनता से दूर हो गया है तो वो जनप्रतिनिधि कैसा, ऐसे जनप्रतिनिधियो का सामाजिक बहिष्कार कर देना चाहिए।

संजय तिवारी जिला पंचायत सदस्य ने पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न के मामलों पर प्रकाश डालते हुए सरकार द्वारा इन्हें संरक्षण दिये जाने पर बल दिया और बताया कि पहले मैं भी पत्रकार था.. पत्रकारिता की टीस हमने भी बहुत झेली है। पत्रकारों के मामलों में आये दिन सरकार बेरुखी दिखाती रही है जो प्रशासन व पत्रकारों के बीच दूरी बना देती है। इस दूरी को आज कम करने की आवश्यकता है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा0 सी0पी0 दीक्षित ने कहा कि पत्रकारिता एक मिशन है और मिशन में पत्रकारो को रमने की आवश्यकता है। अपने लेखनी के दम पर समाज में अग्रणी भूमिका अदा करते रहे हैं इससे ये समाज के सजग प्रहरी कहे जाते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार धर्मदेव राय ने आज की पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए पत्रकारों को अपने आचरण व व्यवहार पर लगाम लगाने की नसीहत दी और पत्रकार समाज की एक मजबूत कड़ी होता है इसे अपने आचरण व व्यवहार से समाज में प्रतिष्ठिापित करने पर जोर दिया। वक्ताओं में गाजीपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष संजीव सिंह बन्टी, अभय अग्रवाल, असीत सेठ, बच्चा तिवारी, कमलेश सिंह, सुशील उपाध्याय राष्ट्रीय महासचिव ब्राम्हण महासभा, सुशील उर्फ सोनू, अनिलाभ इस अवसर पर पत्रकार विनय कुमार सिंह बीनू, दानिश रिजवी, कमलेश यादव, रविकान्त पाण्डेय, आर सी खरवार, सत्येद्र शुक्ला, अशोक श्रीवास्तव, वेद प्रकाश श्रीवास्तव, सूर्यकुमार सिंह, राजेश खरवार, मनीष मिश्रा, सूर्यबीर सिंह, आलोक त्रिपाठी, आशुतोष त्रिपाठी, शेषनाथ त्रिपाठी, अनिल, सोनू, जेपी, अखिलेश यादव, डा0 अविनाश गौतम, प्रवीण तिवारी, अशोक तिवारी, सुधीर प्रधान आदि लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के अन्त में मुख्य अतिथि डा0 दीक्षित को गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल उपाध्याय व महासचिव चन्द्र कुमार तिवारी द्वारा संयुक्त रूप से स्मति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डा0 ब्यासमुनि राय व धर्मदेव राय को पत्रकार सूर्यवीर सिंह द्वारा सम्मानित किया गया। सभी आगन्तुकों का आभार अनिल उपाध्याय ने किया।

भवदीय,
चन्द्र कुमार तिवारी
महामंत्री
गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन
गाजीपुर
मो0- 09415861995

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यूपी में जंगल राज : भ्रष्टाचारी घर में घुसकर हत्या कराने की धमकी दे रहे, पुलिस प्रशासन मौन साधे है

To: pmindia@nic.in, pmosb@nic.in, cmup@nic.in, csup@nic.in, manojksinha.bjp@gmail.com, manojsinha.mp@sansad.nic.in

दिनांक: 27/12/2014

सेवा में,

माननीय प्रधानमंत्री,

भारत सरकार, नई दिल्ली

विषय: ग्राम प्रधान छावनी लाइन गाजीपुर उ० प्र०, इस ग्राम प्रधान के पति तथा परिजनों द्वारा किये गये विभिन्न भ्रष्टाचार की शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को जान से मारने की मिल रही धमकियों के सम्बन्ध में।

माननीय महोदय,

ग्राम प्रधान छावनी लाइन गाजीपुर उ० प्र०। इस ग्राम प्रधान के पति तथा परिजनों (महेंद्र कुशवाहा, रमेश कुशवाहा इत्यादि) (निवासी – ग्राम-रघुनाथपुर, पोस्ट-छावनी लाइन, जिला गाजीपुर, उ०प्र० ) ने मनरेगा, ग्राम पंचायत के विभिन्न कार्यों, विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति, परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था, वित्तीय अनियमितता इत्यादि में विभिन्न तरह के भ्रष्टाचार किए हैं| इसकी शिकायत सम्बंधित कर्यालयों में सम्बंधित अधिकारियों माननीयों से प्रार्थी ने की है| प्रार्थी के किये गए शिकायतों के कारण उपरोक्त सभी बौखलाए हुए और आक्रोशित हैं| उपरोक्त कारणों से प्रार्थी का पीछा संदिग्धों द्वारा कई बार किया गया, जिसकी शिकायत भी प्रार्थी ने पुलिस प्रशासन से की है|

शिकायतकर्ता द्वारा विगत लगभग एक वर्ष से उपरोक्त सभी के द्वारा किये गए भ्रष्टाचार के विरुद्ध आज तक कोई भी संतोषजनक कार्यवाही नहीं हुआ है| हालत इतने बिगड़ गए हैं कि अब प्रार्थी को जान से मारने की धमकियाँ भी मिलने लगी है और जबरदस्ती प्रार्थी के घर में घुस कर उपरोक्त द्वारा घर की औरतों को धमकाने तथा शिकायत वापस लेने को बार-बार दबाव बनाया जा रहा है|  इन सभी के द्वारा यह धमकी दी गई है कि यदि 30 दिसम्बर 2014 तक यदि शिकायतें वापस नहीं ली गई तो प्रार्थी को जान से मार देगें क्योंकि इनका कहना है कि इनके पास करोड़ों का अवैध धन है और प्रति वर्ष करोड़ से ज्यादा अवैध रुपया आता है और प्रार्थी को मरवाने में 40 से 50 लाख खर्च होगा जिसके लिए ये सब तैयार हैं और इनका कुछ भी नहीं होगा|

उपरोक्त शिकायतों के कारण विभिन्न मंत्रालयों के विभिन्न कार्यालयों से कई पत्र,  पत्र संख्या 23/3/2014-PM1/33799 दिनांक 28/04/2014, पत्र संख्या 23/3/2014-PM1/39359 दिनांक 20/05/2014, पत्र संख्या 23/3/2014-PM1/49680 दिनांक 18/06/2014, पत्र संख्या 22014/02/2014-LRD दिनांक 08/05/2014, पत्र संख्या 22014/02/2014-LRD दिनांक 15/05/2014, पत्र संख्या 22014/02/2014-LRD दिनांक 11/06/2014, DGET-18017/01/2014-TTC दिनांक 29/10/2014, ऍम-11011/17/2014-यू एस(जी ए) दिनांक 17/10/2014, 22014/02/2014-LRD (Vol-I) dated 03/11/2014, 145726 to 145733/CC-II/UP/VNS/SRO/Grivance dated 01/12/2014, Case No 18147/24/32/2014 dated 14/06/2014,  Case No 20211/24/32/2014 dated 11/07/2014, के-11020/1/2014-मनरेगा-VIII दिनांक 21मई2014 & dated 4th August2014, 23011/1/2014-PG dated 05August2014 & dated 28th July2014, DGE&T-Z-20025/03/2014-Coord dated 15th December 2014, L-12060/227/2014/RTI/MGNREGA dated 10/12/2014 जारी हुए हैं | परन्तु इन पत्रों पर कोई भी संतोषजनक कार्यवाही नहीं हुई है |

अतः आप से अनुरोध है कि उपरोक्त द्वारा किये गए भ्रष्टाचार की CBI / उच्चस्तरीय जाँच कराकर, दोषियों के विरुद्ध शख्त से शख्त कार्यवाही करने का आदेश देने की कृपा करें तथा साथ ही साथ प्रार्थी एवं प्रार्थी के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा हेतु भी आदेश देने की कृपा करें | 

धन्यवाद।

दिनांक: 27/12/2014

(रामधारी सिंह कुशवाहा)
मो० नं० – 9415306993
पुत्र – स्व० मुखराम
पतलोइयां, छावनीलाईन,
गाजीपुर, उत्तर प्रदेश- 233001

प्रतिलिपि :

(1) माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश |
(2) माननीय श्री मनोज सिन्हा, सांसद गाजीपुर, उत्तर प्रदेश |
(3) मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार |
(4) माननीय श्री विजय मिश्र, विधायक सदर गाजीपुर, उत्तर प्रदेश |
(5) माननीय मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार |
(6) माननीय पुलिस उप महानिदेशक उत्तर प्रदेश |

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सउदी अरब से आठ माह बाद भी नहीं आयी रामधीन की लाश

सउदी अरब के अलखाब्‍जी से आठ महीने में भी नहीं आयी श्रमिक की लाश। परिवार का रोते रोते हुये बुरा हाल। पत्‍नी ने कहा कि पति की हुयी है हत्‍या। पीडित परिवार जिलाधिकारी व सांसद/रेल राज्‍यमंत्री आद‍ि से लगा चुका है गुहार। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के दुल्‍लहपुर थाना क्षेत्र के मलेठी (पाही) का रामधीन राजभर (28) इसी वर्ष के अप्रैल माह में पासपोर्ट संख्‍या- के0 1550127 के आधार पर सउदी अरब के अलखाब्‍जी में फेमली ड्राइवर के रूप में काम करने गया। वहां संदिग्‍ध परिस्थितियों में उसकी मौत 01 मई को हो गयी। तबसे पीड़ित परिवार लगातार एम्‍बेसी, विदेश मंत्रालय, जिलाधिकारी एवं क्षेत्रीय सांसद/रेल राज्‍य मंत्री के कार्यालय तक गुहार लगा रहा है।

गुरुवार को जिला पंचायत सदस्‍य ब्रज भूषण दूबे पीडित परिवार के पास पहुंचे और जो जानकारी प्राप्‍त हुयी वह काफी चौंकाने वाली है। मृतक की पत्‍नी शीला देवी ने बताया कि उनके पति का फोन 30 अप्रैल को शाम सात बजे मोबाइल नम्‍बर 00966507818227 से घर की मोबाइल 09930098717 पर आया और रात लगभग 01 बजे तक बात होती रही। रामधीन ने बताया कि हम जिसके घर में काम करते हैं वह आज हमारी हत्‍या कर देगा। जब तक हम बात कर रहे हैं तभी तक समझो कि हम जिन्‍दा हैं। बारी बारी मुहल्‍ले व गांव के लोगों से भी बात किया। बड़े बेटे 12 वर्षीय पप्‍पू, अनिता 10 एवं विशाल 7 से कहा कि अब तुम्‍हारे पापा तुम लोगों से कभी बात नहीं कर पायेंगे। लगभग 01 बजे मोबाइल स्विच आफ हो गया।

एम्‍बेसी से आये पत्र व चिकितसकीय रिपोर्ट में रामधीन की मौत फांसी लगाने से बतायी गयी है। श्री दूबे ने कहा कि वे पूरा मामला महामहिम राष्‍ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री व अन्‍तर्राष्‍ट्रीय मानव अधिकार आयोग को सन्‍दर्भित करेंगे। मृतक परिवार के पास एक धूर जमीन नहीं है। राशन कार्ड भी किसी श्रेणी का नहीं है। जब हम पीडित के घर पहुंचे तो 12 वर्षीय पप्‍पू ईंट भटठे पर काम कर रहा था। घर में एक दाना नहीं है। यदि जिला प्रशासन तत्‍काल व्‍यवस्‍था नहीं कराता तो परिवार भूखों मरने को बाध्‍य होगा।

भवदीय
ब्रज भूषण दूबे
सदस्‍य जिला पंचायत
मु0-सिकन्‍दरपुर, पो0 पीरनगर।
गाजीपुर।
मोबाइल नं0 9452455444
dubeybrajbhushan@gmail.com

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गाजीपुर से तीन खबरें : बाजरा बनाम डाई, गो तस्कर बनाम भाजपा नेता, मंत्री बनाम ठाकुर साहब

Yashwant Singh : गाजीपुर से तीन खबरें सुना रहा हूं. पहली खेती किसानी की. बाजड़ा पिछले साल 1100 रुयये क्विंटल था, इस साल 900 रुपये हो गया है. वहीं, डाई खाद का दाम 600 रुपये बोरी से बढ़कर 1150 रुपये हो गया है. कितनी तेज देश तरक्की कर रहा है और कितना तेज गांवों किसानों का विकास हो रहा है, इसकी ये एक बानगी है. ये जानकारी मुझे पिताजी ने दी, चिंतिंत लहजे में ये कहते हुए कि ”अब खेती-किसानी में कुछ रक्खा नहीं है”.

दूसरी खबर गाजीपुर जिले के गहमर के आसपास की है. यहां एक युवा उत्साही भाजपाई कार्यकर्ता ने लगातार कई रात गाय लदे कई ट्रकों को रुकवा कर पकड़ा और पुलिस के हवाले करवा दिया. भाजपा ने इनके समर्पण को देखते हुए इन्हें गोरक्षा प्रकोष्ट का अध्यक्ष बना दिया और पुलिस ने इनके खलल करने की क्षमता को देखकर गो-तस्करों से कह दिया कि प्रति ट्रक सौ रुपया इस जोशीले नेताजी को देते रहो वरना ये मानेगा नहीं. इस तरह से इलाके में सब कुछ फिर रुटीन में आ गया है. ये जानकारी मुझे गहमर इलाके के एक सोशल एक्टिवस्ट मित्र ने दी जो कल भड़ास आश्रम पर मुझसे मिलने आए थे.

तीसरी खबर गाजीपुर शहर कोतवाली की है. एक ठाकुर साहब अपनी बाइक खोने की रिपोर्ट लिखाने गए तो कोतवाल ने कहा कि इस महीने क्राइम ज्यादा घटित हुआ है, सो क्राइम कम शो करने के लिए आपकी रिपोर्ट अगले महीने लिखूंगा. ठाकुर साहब अड़ गए और कोतवाल को समझाने लगे कि तुम्हारा क्राइम कम करने का ये तरीका सही नहीं है. तभी ठाकुर साहब ने देखा कि कोतवाली के बाहर दो गुट लड़भिड़ कर आए हुए हैं रिपोर्ट लिखाने पर रिपोर्ट लिखी नहीं जा रही. ठाकुर साहब ने इनकी रिपोर्ट लिखाने की जिम्मेदारी भी खुद ले ली. कोतवाल से बहस होती रही. तभी एडिशनल साहब आ गए. एडिशनल एसपी से ठाकुर साहब ने कोतवाल की शिकायत की और साहब के कहने पर कोतवाल को मजबूरन दोनों रिपोर्ट लिखनी पड़ी. बाद में पता चला कि दो लड़े भिड़े लोगों की रिपोर्ट इसलिए नहीं लिखी जा रही थी क्योंकि मंत्री जी ने कोतवाल को रिपोर्ट न लिखने का आदेश दे रखा था. मंत्री जी तक जब सूचना पहुंचाई गई कि फलां ठाकुर साहब के एडिशनल साब से शिकायत करने के कारण रिपोर्ट लिखनी पड़ी है मजबूरी में तो मंत्री साहब ने ठाकुर साहब को सबक सिखाने के वास्ते ठाकुर के खिलाफ ही इतनी धाराओं में फर्जी रिपोर्ट लिखने को कह दिया कि ठाकुर साहब को जेल जाना पड़े. कोतवाल ने बिलकुल देर नहीं की. बाहर जो दो पक्ष लड़े भिड़े थे, उसमें जो मंत्री जी समर्थित पक्ष था, उससे एक फर्जी कंप्लेन ठाकुर साहब के खिलाफ लिखवा ली गई और उसी आधार पर बलवा, महिला छेड़छाड़ समेत कई आरोपों में ठाकुर साहब के नाम एफआईआर हो गई. फिलहाल ठाकुर साहब गिरफ्तार तो नहीं हुए हैं लेकिन मामला सल्टाने में लगे हैं. मंत्री जी का नाम पंडित बिजय मिश्रा हैं जो वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के भतीजे हैं और ठाकुर साहब का नाम चंद्रशेखर सिंह हैं जो लखनऊ विवि से एलएलबी हैं, छात्र नेता भी रहे हैं और काफी समय से गाजीपुर में अपना बिजनेस व्यवसाय कर रहे हैं.

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गाजीपुर में हुए ग्रामीण पत्रकार प्रशिक्षण समारोह में जब मैं मीडिया के भ्रष्टाचारियों को गरियाकर मंच से नीचे उतरा तो एक मित्र ने कान में कहा- ऐतना गरिया दिए हैं, कउनो अखबार अपनी कवरेज में आपका नाम भाषण नहीं छापेगा. तब मैंने कहा- भइया, अपना नाम भाषण छापने छपवाने का एतना ही शउक रहता तो हम सांप के बिल में काहे को हथवा डालते. Bhadas4media.com की शुरुआत करते वक्त यह कतई नहीं पता था कि एक दिन इस काम के कारण मेरा नाम होगा. सो, वही फिदाइन आस्था, आत्महंता प्रेरणा अब भी कायम रखता हूं जो भड़ास शुरू करते वक्त था. ग्रामीण पत्रकार प्रशिक्षण समारोह की उपर वाली तस्वीर Kripa Krishna के सौजन्य से.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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गाजीपुर जिले के युवा पत्रकार राजेश दुबे का निधन

गाजीपुर जिले के प्रतिभाशाली युवा पत्रकार राजेश दुबे का बुधवार को निधन हो गया। राजेश लंबे अर्से से इलेक्ट्रानिक मीडिया में बतौर संवाददाता काम कर रहे थे। उन्होंने सहारा न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब पांच वर्षों तक सहारा न्यूज चैनल के लिए काम करने के साथ ही उन्होंने लाइव इंडिया, पी7 और एबीपी न्यूज के लिए भी पत्रकारिता की थी। कम समय में ही उन्होंने इलेक्ट्रानिक मीडिया के क्षेत्र खास मुकाम बनाया था। राजेश दो वर्षों तक गाजीपुर पत्रकार एसोसियेशन के अध्यक्ष भी रहे।

शहर के फुल्लनपुर मुहल्ले मे रहने वाले राजेश अपने नम्र स्वभाव और जिंदादिली के लिए दोस्तों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने अपने करियर के दौरान गाजीपुर मऊ बलिया और वाराणसी में काम करते हुये की महत्वपूर्ण खबरें की थी। राजनैतिक, क्राइम और सम सामयिक खबरों को लेकर राजेश दुबे की लेखनी और दृष्टिकोण के लोग कायल थे। जिले का ये युवा प्रतिभाशाली पत्रकार पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा था। गंभीर रूप से पीलिया और अन्य कई बीमारियों से ग्रसित राजेश पिछले दिनों कोमा मे चले गये थे जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बीएचयू में इलाज के दौरान बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। राजेश की मौत की खबर के साथ ही उनके दोस्तों शुभचिंतकों के साथ-साथ पत्रकारिता से जुड़े लोगों के बीच शोक का माहौल है। गाजीपुर श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा। वे अपने पीछे एक पुत्र और पुत्री छोड़ गये हैं।

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जिले का नाम गाजीपुर क्यों पड़ा, गाजीउद्दीन हैदर के नाम पर या किसी मुगल गाजी के नाम पर…

Shambhu Nath Shukla : गाजीपुर का खाद-पानी… आज पुरानी किताबें निकालने के चक्कर में मैं अपनी लायब्रेरी खंगाल रहा था तो पाया कि उत्तर प्रदेश का गाजीपुर जिला बड़ा उर्वर है। सारी मिथकीय, ऐतिहासिक, साहित्यिक, पत्रकारीय और पत्रकारिक (फेसबुकीय पत्रकार) विभूतियां यहीं पैदा हुईं। मसलन मिथकीय कैरेक्टर परशुराम से लेकन पत्रकार शिरोमणि भाई Yashwant Singh तक।

इनके बीच में हैं 19वीं सदी के मशहूर यायावर और ‘मेरी हिंदुस्तान यात्रा’ के रचयिता स्वर्गीय साधुचरण प्रसाद, कांग्रेस के 1927 में प्रेसीडेंट रहे डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी, राही मासूम रजा, परमवीर चक्र विजेता महान वीर अब्दुल हमीद आदि तमाम विभूतियां।

कई महान लोगों के नाम मैं इसलिए नहीं लिख रहा क्योंकि वे दिल्ली में इस कदर रच-बस गए हैं कि उन्हें अब गाजीपुरिया कहलाना पसंद नहीं। लेकिन इसका पता नहीं चला कि इस जिले का नाम गाजीपुर क्यों पड़ा, गाजीउद्दीन हैदर के नाम पर या किसी मुगल गाजी के नाम पर।

गाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की।
तख्ते लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की॥

(माफ कीजिएगा मैं अपने लैपटॉप पर रेमिंग्टन में ही देवनागरी टाइप कर पाता हूं और उसमें नुक्ता लगाने की व्यवस्था नहीं है। किसी को पता हो तो बताए।)

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Girish Mishra : It was in Ghazipur that Lord Cornwallis died and was buried. Beyond Ghazipur Permanent Settlement could not be extended. Second, the only government-owned opium factory is located there. Third, one of the pioneers of detective novels in Hindi, Gopal Ram Gahmari, was born there. In Ghazipur, there are families which observe both Hindu and Muslim rituals at the time of marriage. Long ago, some Americans came and did research on them.
Subhash Tripathi : Com sarjoo pandey etc
 
Shujaat Ullah Khan : bahadur shah zafar ka sher hai yeh
 
Shambhu Nath Shukla : Subhash Tripathi, अब मैने आदि भी लिख दिया है सो आप लोग स्वतंत्र हो गाजीपुर की विभूतियों की सूची आगे बढ़ाने को।
 
Shambhu Nath Shukla : Shujaat Ullah Khan साहब अब इस शेर पर मैं अपना होने का दावा तो नहीं ही कर रहा था। और ऊपर जब मैं मुगल गाजी कह रहा हूं तो साफ है कि मेरा इशारा किस तरफ है।

Kkl Srivastava : Shriman Mukhtar Ahmad Ansari wahi jinke naam par Dilli me Ansari Road hai ??
 
Aman Vashisth : one can type directly in kavitakosh.org online……..it provides option for urdu syllables …..e.g……..ग़ाज़ियों ,तलक़, तख़्ते, तेग़………….
 
Shambhu Nath Shukla : Kkl Srivastava: ab yah mujhe nahi pata

Harish Bhardwaj : उत्तर प्रदेश का गाजीपुर जिला बड़ा उर्वर है। सारी मिथकीय, ऐतिहासिक, साहित्यिक, पत्रकारीय और पत्रकारिक (फेसबुकीय पत्रकार) विभूतियां यहीं पैदा हुईं,,,,,,,
 
Rajeevranjan Rai : Swami Sahjanand Saraswati, Amar Shaheed Dr.Shivpoojan Rai, Dalshringar Dubey, Achyutanand Mishra, Rambahadur Rai, Nityanand Tiwari, Kubernath Rai, Baleshwar Rai, Dr. Mangla Rai
 
Ramprasad Rajbhar : har jile ka apna itihas hota hai aur vibhutiyan bhee.aapke bagalwala jila mera hai Azamgarh.aapke jile ki do vibhutiyo se mai prabhavit hun 1Kubernaath aur 2 Raza saaheb.See Translation
 
Abhishek Swaroop : Sir! here is a contradiction few days back you wrote hindi patti se koi vinhooti nahi nikli.
 
Sukhdev Bhardwaj : Ji mantri ji ke election main ghazipur jana hua shaer ke bat he nerali hai
 
Kumar Swasti Priye ‘Warsi’ : रेमिंगटन फोंट्स में नुक्ता (Shift ) के साथ (+) दबाने पर लिखे गए अक्षर के साथ जुड़ जाएगा.
 
Karmendu Shishir : ‘मेरी हिंदुस्तान यात्रा’ को तो आप अविलम्ब छपवा दे. कोई प्रकाशक छाप देगा.
 
ग़ुलाम मुनव्वर साबरी : gaazipur se jabalpur tak thag hua karte tthey jinhe kisi gupt samrat ne khatam kiya tha
 
राजू मिश्र आप श्रीमान विवेकी राय जी को भूल रहे हैं।
 
Anwarul Haque : Kkl srivastava ji, wahi Dr Mukhtar Ahmad Ansari, well knwn Physicion & founder member of Jamia Univercity. inhi ke naam per Delhi me Road hai. Ye Ghzipur ke hi thae.
 
Shravan Kumar Shukla : पहली लाइन में यशवंत जी। वाह…

Yashwant Singh : सर, आपने तो दिन बना दिया मेरा, पत्रकार शिरोमणि कहकर गाजीपुर को लेकर कई पोस्ट भड़ास पर शिवेंद्र पाठक जी की हैं… इन्हें पढ़िएगा…

http://old1.bhadas4media.com/state/up/ghazipur/14428-2013-09-11-08-49-57.html
चीन वाले जिला गाजीपुर को ‘चेन-चू’ शब्द से क्यों संबोधित करते हैं?

एक ये भी…

http://old1.bhadas4media.com/state/up/ghazipur/14699-2013-09-24-10-34-47.html
जनपद गाजीपुर के प्रथम कवि सूफी कवि उस्मान

ये परशुराम जी पर है…

http://old1.bhadas4media.com/state/up/ghazipur/15190-2013-10-15-12-21-12.html
गाजीपुर जनपद की अनुपम विभूति थे भगवान परशुराम

 

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