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इजराइल विरोधी टिप्पणी पर मशहूर अमेरिकी एंकर जिम क्लान्सी को सीएनएन न्यूज चैनल से इस्तीफा देना पड़ा

अमेरिका के टीवी न्यूज चैनल ‘सीएनएन’ के प्रसिद्ध और अनुभवी एंकर जिम क्लान्सी ने 34 वर्षों तक इस टीवी चैनल में काम करने के बाद इस्तीफा दे दिया। त्यागपत्र का कारण ट्विटर पर कुछ इजरायली नागरिकों से उनकी बातचीत बताया गया है जिस पर पश्चिमी मीडिया में काफी हंगामा हुआ था। इस अमेरिकी पत्रकार ने शार्ली एब्दू पर हमले और उसके बाद की घटनाओं पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए ट्वीट किया था कि यह सब डरपोक लोगों का काम है और इजाराइली इस पूरी घटना को इस्लाम के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इजराइल की ओर से किये जा रहे प्रचार के कारण ही पेरिस में हमला हुआ था।

अमेरिका के टीवी न्यूज चैनल ‘सीएनएन’ के प्रसिद्ध और अनुभवी एंकर जिम क्लान्सी ने 34 वर्षों तक इस टीवी चैनल में काम करने के बाद इस्तीफा दे दिया। त्यागपत्र का कारण ट्विटर पर कुछ इजरायली नागरिकों से उनकी बातचीत बताया गया है जिस पर पश्चिमी मीडिया में काफी हंगामा हुआ था। इस अमेरिकी पत्रकार ने शार्ली एब्दू पर हमले और उसके बाद की घटनाओं पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए ट्वीट किया था कि यह सब डरपोक लोगों का काम है और इजाराइली इस पूरी घटना को इस्लाम के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इजराइल की ओर से किये जा रहे प्रचार के कारण ही पेरिस में हमला हुआ था।

जिम क्लान्सी के इस ट्वीट के एक सप्ताह बाद उन्होंने सीएनएन को भेजे अपने एक पत्र में लिखा कि 34 साल तक सीएनएन में काम के बाद अब इससे विदा लेने का समय आ गया है। मेरे लिए गर्व की बात है कि इतने वर्षों तक मैंने इस संस्था के साथ काम किया। जिन क्लान्सी ने अपने पत्र में त्यागपत्र के कारणों का उल्लेख नहीं किया है और सीएनएन टीवी चैनल ने भी इस संदर्भ में कोई बयान नहीं दिया है किंतु कहा यही जा रहा है कि इजराइल के विरुद्ध टिप्पणी के कारण उन्हें सीएनएन छोड़ना पड़ा। जिम क्लान्सी वर्ष 1981 में सीएनएन से जुड़े थे और उन्हें कई बार पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया।

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इससे पहले बीबीसी के पत्रकार को भी यहूदियों पर टिप्पणी के कारण अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। बीबीसी के पत्रकार टिम विल्कॉक्स रैली में मौजूद एक महिला से बात कर रहे थे जिसने आशंका जतायी कि 1930 में यूरोप के दिनों जैसे हालात हो रहे हैं जब यहूदियों का जातीय सफ़ाया किया गया था। जब इस महिला ने यह कहा तो बीबीसी के पत्रकार ने जवाब में कहा,  “बहुत से विश्लेषक यह कहेंगे कि इस्राईल की नीतियों से फ़िलिस्तीनियों ने भी बहुत पीड़ा झेली है।” हालांकि टिम विल्कॉक्स ने माफी मांग ली थी लेकिन उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। ये इस्तीफे तब हो रहे हैं जब  यही पश्चिम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस्लाम का अपमान करना सही समझता है।

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