जिंदा हैं रोहित सरदाना!

स्वर्गीय रोहित सरदाना को याद करते हुए उनकी पत्रकार पत्नी प्रमिला दीक्षित लगातार कुछ न कुछ फेसबुक पर पोस्ट करती रहती हैं. साथ ही वे ये पोस्ट रोहित सरदाना के लाखों फालोवर वाले एफबी पेज पर भी डालती हैं. इस तरह रोहित सरदाना देह से इस दुनिया में न होते हुए भी सोशल मीडिया पर जिंदा हैं. उनकी स्मृतियों को प्रमिला साझा करती रहती हैं.

एक तस्वीर तबकी है जब रोहित क्वारंटाइन थे. खिड़की से झांक रही बिटिया की तरफ प्यार से उंगली उठा रहे हैं. ये तस्वीर दिल को छू लेती है. एक वीडियो में रोहित म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाते हुए एक मशहूर फिल्मी धुन निकाल रहे हैं. इससे समझ में आता है कि रोहित सरदाना बहुमुखी प्रतिभा के धनी इंसान थे.

रोहित को याद करते हुए प्रमिला की कुछ पोस्ट देखें-

रोहित का ये video देखें जिसमें वो एक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजा रहे हैं-

Pramila Dixit-

गोवा की उमर में कहां गाय की रोटी में फंसा के चले गए यार…आज पंडित जी ने कहा ‘’बांया हाथ आगे करिए’’ अब उन्हें कैसे बताती, ये बांया-दांया तो लेफ़्ट-राइट करके तुम ही बताते थे…वो बोले ‘’हर शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ये करना है’’…तुम होते तो कहते ‘’ये क्या $%&*# है उत्ता ही करना जित्ता तुम्हारे बस की हो’’…ये तो आउट ऑफ सिलेबस है रोहित…गाय को कुछ खिलाते वक्त जब मैं डर के भागती थी तो तुम कहते थे ‘’ओ अंग्रेज़ तमीज़ से खिला’’…आज मैने अपने हाथों से गाय को रोटी भी खिला दी…

हे ईश्वर, ये इंसानों को फौलाद सिंह टाइप बनाने पे क्यूं तुला हुआ है…अब कोई ग़म बड़ा नहीं लगता या इतना बड़ा लगता है कि अपना वाला छोटा पड़ जाता है…बिन मां-बाप के पीछे छूट गए छोटे-छोटे बच्चे देखती हूं तो ईश्वर दयालु नहीं लगता है…और इतना निष्ठुर भी लगता है कि मेरी स्थिति को उलट क्यूं ना कर दिया…

ईश्वर ने जो किया वो ही जाने, लेकिन इस धरती पर जो बच रहे हैं, लगभग हर प्राणी मन-मन भर अपराधबोध लेकर घूम रहा है…किसी को अपने परिजन को अस्पताल ले जाने का अपराधबोध है, किसी को अस्पताल नहीं ले जाने का, किसी को देर से ले जाने का, तो किसी को कुछ और…

घरेलू नुस्ख़े ज़िंदा रहने पर ही काम आते हैं, इसलिए कम से कम किसी मृत के घरवाले को फोन करें तो अब घरेलू नुस्खों की तरह ये ना बताएं…हाय, ये कर लिया होता हाय, वो ही कर लिया होता, हमको फोन किया होता या उसको फोन किया होता…बात सिर्फ़ अपने संदर्भ में नहीं है, प्लीज़ बुरा मत मानिएगा, हम में से कोई भी चित्रगुप्त नहीं हैं लेकिन, ‘’ये कर लिया होता’’ के साथ एक टीस एक अपराधबोध और बढ़ता है…हिम्मत बढ़ाइए, आयोडेक्स मलिए काम पर चलिए जैसा तो नहीं लेकिन लगभग हर घर में ये चोट देकर ईश्वर ने ऐसा कर दिया है कि अब कोरोना के लिए हमारी इन्यूनिटी हुई हो या ना हो पर मौत की ख़बर के लिए ग़ज़ब इम्यून सिस्टम डेवलप हो गया है…

अच्छा वो भी चले गए..ओके नेक्स्ट…नो-नो, प्लीज़ भगवान, आप पर आस्था तो तब ही होगी जब इंसान इंसान होगा…जो किसी मौत पर विलाप ही ना कर, आगे बढ़ जाए वो कैसा इंसान…? अपना सिस्टम चेक करो, किसको बिठा दिया है ?
अक्कड़-बक्कड़ बंबे बो करके किसी को भी उठा ले जा रहा है…फॉरेंसिंक लैब या थाने में बैठे जैसे हर मौत में एक सीरियल किलर टाइप समानता ही खोजते रहते हैं…कोई तो पैटर्न होगा…!

हर रोज दिल डूबता उतराता और शरीर ठंडा पड़ता है…हर घर से आहूति लेकर कौन सा यज्ञ करा रहे हो…इसका पुण्य किसमें बांटोगे भगवान?

रोहित के फेसबुक पेज से उनसे संबंधित पोस्ट आते रहने से ये कहा जा सकता है कि रोहित सरदाना सोशल मीडिया पर जिंदा हैं… उनके फालोवर, उनके शुभचिंतक बड़ी संख्या में ये पोस्ट लाइक और शेयर करते हैं.

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं
  • भड़ास तक कोई भी खबर पहुंचाने के लिए इस मेल का इस्तेमाल करें- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *