श्रम विभाग से खूब सजग रहें पत्रकार, आरटीआई में खुला उत्तरांचल के सूचना विभाग का झूठ

आज सूचना क्रांति के दौर में  भी उत्तराखंड का सूचना विभाग कितना चुस्त-दुरुस्त है, इसका अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि श्रम विभाग की नजर में देहरादून से प्रकाशित तीन अखबार अमर उजाला , दैनिक जागरण और हिंदुस्तान ने मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया है। झूठ की भी एक हद होती है। 

यह जानकारी विभाग ने सूचना का अधिकार के तहत एक आरटीआई कार्यकर्ता को पत्रांक २७००/द०दून-सू०अधि अधि/२०१५ (होना चाहिए २००५) दिनांक १३ म ई २०१५ के तहत दी, वो भी तब, जब दुबारा जानकारी मांगी गई । पहली बार कई बिंदुओं पर जानकारी तकनीकी खामियां बताकर टाल दी गई । कुछ जानकारी अब भी श्रम विभाग ने नहीं दी है तो कुछ में पेच लगा दिया और कुछ गलत या अधूरी दी है।

बहरहाल इसपर लगना पड़ेगा और जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्त श्रम विभाग का विशेष अधिकारी आए तो उसे यह देना पड़ेगा। यह बात पत्रकार साथियों से इसलिए साझा की जा रही है कि सभी अपने जिले के श्रम विभाग से मजीठिया वेतन आयोग की जानकारी लें और जब उक्त विभाग से अधिकारी आएं तो अपनी बात लिखित दें और उसकी छायाप्रति पर उसकी रिसीवंग ले लें । यह तभी संभव है जब आप तैयारी किए रहेंगे । कोई एक व्यक्ति उक्त जानकारियां निकालकर अपने अन्य साथियों को उसकी फोटोकापी दे सकता है । 

हां, एक बात और प्रताड़ना या निजी कारणों से यकायक नौकरी न छोड़ें जैसा कि राष्ट्रीय सहारा लखनऊ में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार रेखा सिन्हा ने किया । उन्होंने २३ साल की नौकरी यूं ही छोड़ दी । मेरे विचार से उन्होंने गलत किया । वीआरयस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) तो लेनी ही चाहिए थी । बहरहाल मित्रों रास्ता कठिन है फिर भी लडाई जीती जा सकती है , इसके लिए एक होना पड़ेगा । अफसोस है कि अभी हम एकजुट नही हुए ।



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