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सियासत

ये दोनों खबरें अच्छी नहीं हैं भारत के लिए!

भारत को लेकर चीन और रूस से जो खबरें निकलकर सामने आ रही हैं, वह देश के लिए सुखद नहीं हैं। ताज्जुब की बात तो ये है कि भारत के प्रधानमंत्री को इन सब बातों से कोई लेना देना ही नहीं है। वह तो बस अपने चुनाव का घोड़ा इस राज्य से उस राज्य तक दौड़ाए घूम रहे हैं। विश्वगुरू जो ठहरे।

पढ़ें नीचे ये दो खबरें…


प्रशांत टंडन-

लाल आंख में मोतियाबिंद हो गया? चीन ने 2022 से ब्रह्मपुत्र और 2020 सतलज का पानी के बहाव का डेटा भारत को देना बंद कर दिया.

बिना हाइड्रोलॉजिकल डेटा के बाढ़ का पूर्वानुमान नहीं हो पाता. दोनों नदियों का उद्गम चीन में है.

देश शोले के डायलॉग से नहीं समझदारी से चलता है.


ममता त्रिपाठी-

ये खबर अच्छी नहीं है देश के लिए…

भारत पाकिस्तान युद्ध के बीच जिस S-400 ने हमें ढाल बनकर बचाया, उनके निर्माता देश रूस के साथ पाकिस्तान की गलबहियां ख़तरनाक है।

एक अच्छे दोस्त को नाराज़ करना मंहगा पड़ सकता है।


कृष्ण कांत-

हमारे सदाबहार मित्र रूस को भी पाकिस्तान के पाले में धकेल दिया? पूर्वी पाकिस्तान में दखल देने के पहले इं​दिरा गांधी ने कई देशों का दौरा किया। अमेरिका और ब्रिटेन पाकिस्तान का साथ दे रहे थे लेकिन रूस ने भारत से संधि की कि किसी भी बाहरी आक्रमण के दौरान रूस भारत की रक्षा करेगा। 9 अगस्‍त 1971 को इस संधि पर हस्ताक्षर हो गए।

पाकिस्तान के हमले के बाद जब भारत ने कार्रवाई शुरू की तो अमेरिका ने अपना सातवां सैन्य बेड़ा भेजने की धमकी दी। जवाब में रूस ने अपना परमाणु हथियारों से लैस सैनिक बेड़ा रवाना कर दिया किया जिसमें परमाणु जहाज, मिसाइलें और पनडुब्बियां थीं।

अमेरिका और ब्रिटेन ताकते रह गये। अमेरिका का सातवां बेड़ा भारत की धरती तक कभी नहीं पहुंचा। भारतीय सेनाओं ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर घुसकर बमबारी की और दो हफ्ते से कम समय में बांग्लादेश बन गया।

भारतीय सेना में 1960 से ही ज्यादातर हथियार रूस से मिलते रहे हैं। 1960 के दशक में भारत के पास 33% से ज़्यादा हथियार रूसी थे। 1990 के दशक में यह हिस्सा 96.5% था जो 2020 के दशक में अभी भी 75% तक है।

आज डंकायुग में डंकापति ने ऐसी ​विदेश नीति चलाई है कि हमारा पुराना मित्र रूस भी पाकिस्तान से डील कर रहा है और नया कोई दोस्त हमारे साथ खड़ा नहीं है।

विदेश नीति और कूटनीति फोटो खिंचाने और रील बनवाने से लाखों गुना गहरा और गंभीर काम है। लिखकर ले लो, इनसे न हो पाएगा। ये भारत को हर मोर्चे पर कमजोर कर रहे हैं।

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