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मोदी सरकार ट्रंप को नरम करने के लिए सबकुछ करेगी, रूस से कच्चे तेल आयात में 45% कमी!

भारत की सरकारी तेल रिफाइनरियों ने जून से सितंबर 2025 के बीच रूसी कच्चे तेल के आयात में 45% की कमी की है। यह जानकारी Kpler के डेटा पर आधारित है। वहीं, निजी क्षेत्र की कंपनियाँ जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और रूसी कंपनी रोसनेफ्ट समर्थित नायारा एनर्जी ने इसी अवधि में अपने रूसी तेल आयात में वृद्धि की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाँ सरकारी तेल कंपनियाँ रूस से आयात घटा रही हैं, वहीं निजी कंपनियाँ इस अवसर का लाभ उठाकर रूसी कच्चे तेल की अधिक खरीद कर रही हैं।


इस मसले पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह जी ने लिखा है-

सोशल मीडिया पर बीजेपी के लठैत चाहे जितना ग़ुब्बारा फुला लें और नोएडा का टीवी मीडिया चाहे जितना कलाबाज़ी दिखा ले सच यही है कि मोदीजी के नेतृत्व में भारत की सरकार ट्रंप को नरम करने के लिए सब कुछ करने को तैयार है।

अब यह सूचना सार्वजनिक डोमेन में आ चुकी है कि ट्रंप के धमकाते ही हमारी सरकार ने रूस से तेल आयात की मात्रा जून महीने से ही घटानी शुरू कर दी है। जून से अब तक हमारी सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने रूस से लगभग 45% कच्चे तेल का आयात कम कर लिया है। सरकार ट्रंप प्रशासन को हर उस तरह का संकेत देने में लगी हुई है जिससे मामला नरम हो!

मजेदार यह है कि प्राइवेट कंपनियाँ- रिलायंस और नायारा इनर्जी ने इसी दौरान रूस से आयात और बढ़ा दिया है। नायारा में तो रूसी सरकारी कंपनी रोसनेफ्त का बड़ा हिस्सा है लेकिन रिलायंस को अतिरिक्त आयात करने देना यह बताता है कि मोदीजी की सरकार आम जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करती सरकारी कंपनियों की क़ुर्बानी देने को तैयार हैं लेकिन अंबानी अड़ानी के मुनाफ़े की हिफ़ाज़त करने में कोई कसर नहीं छोड़ते!

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