स्पेक्ट्रम घोटाले को मुद्दा बनाने वाले मोदी ने अपनी सरकार में स्पेक्ट्रम का जो सब किया है उसपर दिलचस्प किताब हो सकती है। अब एलन मस्क को भारत में कारोबार का मौका दिया पर खबर सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया और द टेलीग्राफ में। संक्षेप में समझिये मामला क्या है?

संजय कुमार सिंह
इंडियन एक्सप्रेस में आज पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की खबर है, नई दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी है। मंगलवार को जारी वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक मेघालय का बर्नीहाट दुनिया का सबसे प्रदूषित महानगरीय क्षेत्र है और दुनिया के बीस सबसे प्रदूषित शहरों में 13 भारत के हैं। ये शहर हैं, बर्नीहाट, दिल्ली, पंजाब का मुल्लांपुर, फ़रीदाबाद, लोनी, गुरुग्राम, गंगानगर, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, मुज़फ़्फ़रनगर, हनुमानगढ़ और नोएडा। कहने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली के अलावा फरीदाबाद, लोनी, गुरुग्राम एनसीआर में हैं और दूसरे कई शहर दिल्ली के पास ही हैं। ऐसे में यह खबर पहले पन्ने पर प्रमुखता से होनी चाहिये थी। आज जब पाकिस्तान में रेल अपहरण की खबर लीड है तो अपने देश में प्रदूषण की खबर उससे ज्यादा बड़ी और लोगों को प्रभावित करने वाली है। इसलिए लोगों को मालूम होनी चाहिये। इंडियन एक्सप्रेस में खबर पढ़ने के बाद आज मैंने अपने अखबारों के पहले पन्ने पर इस खबर को ढूंढ़ने की कोशिश की तो कहीं भी यह प्रमुखता से नहीं मिली। गूगल करने पर पता चला कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को दो घंटे पहले ही पोस्ट किया है और संभव है, अखबारों को यह खबर देर से मिली हो। जो भी हो, टाइम्स के शीर्षक से पता चला कि दिल्ली लगातार सातवीं बार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी घोषित हुई है।
आप जानते हैं कि संघ परिवार और भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने बनारस से चुनाव लड़ते हुए कहा था, मां गंगा ने मुझे बुलाया है। हाल में उत्तराखंड के एक दिन के दौरे पर उन्होंने, मुखबा गांव में मां गंगा की पूजा-अर्चना की और हर्षिल में लोगों को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने मां गंगा के प्रति गहरी आस्था जताते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से ही उन्हें दशकों तक उत्तराखंड की सेवा का मौका मिला और काशी तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा, “मां गंगा की कृपा से मैं आज उनके मायके मुखबा गांव आया हूं। यह उनका दुलार और स्नेह है कि मैं उनके इस बच्चे के रूप में यहां खड़ा हूं। पीएम ने यह भी दोहराया कि काशी में उन्होंने कहा था, “मुझे मां गंगा ने बुलाया है।” यह सब तब कहा जब गंगा को साफ करने का उनका वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। तथ्य यह है कि गंगा के प्रति इतनी आस्था होने (दिखाने) के बावजूद अगर वे उसकी सफाई (दरअसल उसमें प्रदूषण, सीवर मिलना आदि) सुनिश्चित नहीं कर पाये हैं तो दिल्ली की हवा में उनकी कितनी दिलचस्पी होगी। ऐसे में उनके शासन में रहते हुए दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी हो गई और उन्होंने कुछ नहीं किया (या कर पाये)। संघ परिवार ने भी मतलब नहीं रखा है। ऐसे में आज की यह खबर खासतौर से महत्वपूर्ण है और अगर इसे प्रमुखता से छापा जाता तो सरकार पर दबाव बनता कि वह इस दिशा में कुछ काम करे या कम से कम करती दिखे लेकिन अखबारों की स्थिति यह है कि कुम्भ खत्म होने के बाद छापा गया कि गंगा का पानी कुम्भ के दौरान नहाने लायक था जबकि उन दिनों प्रदूषित होने की खबर सरकारी एजेंसी की ही थी और मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि गंदगी सूअरों को ही दिखी और तब तक यह भी खूब प्रचार पा चुका था।
यह खबर इसलिये भी महत्वपूर्ण हैं कि जो लोग किसी मजबूरी में या स्वेच्छा से दिल्ली में रह रहे हैं उनके अलावा राजधानी होने के कारण यहां रहने आने वालों को इस प्रदूषण का प्रभाव झेलना पड़ता है और दीवाली के आस-पास जब प्रदूषण बहुत ज्यादा होता है तो बाहर से आने वाले बहुत परेशान होते हैं और फिर यहां नहीं आने का प्रण करके जाते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि इसका असर देश की साख और व्यवस्था पर पड़ेगा। प्रण के बावजूद अगर किसी को दिल्ली आना ही पड़े या बिना कारण दिल्ली में रहने वाले लोग दिल्ली नहीं छोड़ रहे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी परवाह नहीं की जाये। दिल्ली नहीं छोड़ने के अपने कारण हो सकते हैं और इनमें एक यह भी है कि दूसरे शहर भले कम प्रदूषित हैं पर प्रदूषित तो हैं ही। ऐसे में यह सरकार की चिन्ता का कारण होना चाहिये। हो सकता है हो भी और इसी लिए पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाये गये हैं, बिजली वाली गाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है पर उसके नुकसान और लाभ की कोई तुलना है? उदाहरण के लिए, मेट्रो सेवा ठीक-ठाक हो जाने के बाद इसका किराया इतना कम होना चाहिये था कि लोग इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करते, असक्त और कमजोर लोगों को मेट्रो स्टेशन पर कम चलना पड़े उसकी व्यवस्था होती, बसें वहीं चलतीं जहां मेट्रो नहीं हैं और इसके लिए एक कमेटी होती जो सोच समझ कर तय करती। लेकिन ऐसा कुछ है नहीं। दूसरी ओर, पुरानी गाड़ियां नहीं चलेंगी से लगता है कि नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए नियम बना है। उसी तरह इलेक्ट्रीक बसें खरीदने या गाड़ियां खरीदने का निर्णय कमीशन के लिए हो सकता है। प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी निजी गाड़ियां नहीं चल सकती हैं तो सरकारी क्यों चल रही हैं। उन्हें नहीं रोकना कौन सी नैतिकता है और प्रदूषण की चिन्ता हो तो यह छूट क्यों? अगर कारण वही नहीं भी हो तो लाभ क्या हुआ है? नुकसान तो हो ही रहा है। संभव है सरकार अपने फायदे के लिए राजनीति कर रही हो पर अखबार?
मोटरसाइकिल की कीमत निकालने वाले चार इलाहाबादी
जहां तक भाजपा के काम और तरीके का सवाल है, आप जानते हैं कि यमुना की सफाई (और शीश महल भी) चुनावी मुद्दा था। मीडिया ने गंगा की सफाई, वायु प्रदूषण को मु्द्दा नहीं बनाया पर ये दोनों मुद्दे बन गये। इलेक्टोरल बांड और उससे संबंधित खुलासों के बावजूद भाजपा का भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं है लेकिन बिना सबूत पीएमएलए के तहत आरोप और सुप्रीम कोर्ट की मेहरबानी से केजरीवाल भ्रष्ट मान लिये गये या चुनाव हार गये लेकिन यमुना की सफाई मुख्यमंत्री का चुनाव होने से पहले शुरू हो गई थी। (शुरू हुई हो या नहीं, खबर आ गई थी)। यह भाजपा की व्यवस्था है। उसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का घर शीश महल से कम नहीं है। खुलेआम है पर अखबार वाले बता नहीं रहे हैं और शायद इसलिए लोगों को समझ नहीं आ रहा है। वैसे संभावना यह भी है कि सब लोग भाजपा के समर्थक हो गये हों और वैसे ही सोचते हों जैसे योगी और मोदी सोचते हैं। इनमें सबसे दिलचस्प है, प्रयागराज के चार लाख छात्रों ने कुम्भ में अपनी मोटर साइकिल से कीमत निकाल ली। मुझे अभी तक ऐसा एक भी छात्र नहीं मिला है। मैंने तय किया है कि चार मिल जायेंगे तो मैं मुख्यमंत्री के चार लाख के दावे को मान लूंगा। कहने की जरूरत नहीं है कि इस व्यवस्था में अखबारों की भूमिका बड़ी और गंभीर है पर वे सब विज्ञापन के लिये लार टपकाते ईडी के डर से कांपते देशभक्ति कर रहे हैं।
मटन का मल्हार प्रमाणपत्र
ऐसे में आज नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की एक खबर है, हिन्दू दुकानों को मिलेगा मटन का मल्हार प्रमाणपत्र। यह महाराष्ट्र की खबर है और मुंबई डेटलाइन से पहले पन्ने पर है। इसके अनुसार, हिन्दू समुदाय के सदस्यों द्वारा विशेष रूप से संचालित झटका मटन की दुकानों को प्रमाणित किये जाने के मकसद से मल्हार प्रमाणन शुरू करने की घोषणा की है। ये दुकानें 100 प्रतिशत हिन्दुओं द्वारा संचालित होंगी। मैं नहीं जानते ऐसी दुकानों या प्रमाणन की क्या जरूरत है और इससे किसे लाभ होगा। किसी भी भाजपाई से ज्यादा और ज्यादा समय से मांस खाने वाला होने के बावजूद मुझे इसकी कोई जरूरत कभी महसूस नहीं हुई और मैं ऐसी दुकानों को कोई प्राथमिकता नहीं देने वाला हूं और मांसाहार के लिए भी भी मेरा पंसदीदा रेस्त्रां जामा मस्जिद का करीम्स और उसकी शाखाएं हैं। बहुत पहले, छोटे शहरों में मांस की दुकानों में ही बकरा काटा जाता था और मैंने एक ही बार झटका मटन कटते देखा। बहुत बड़े होने तक झटका – हलाल का अंतर नहीं पता था और दिल्ली आया तो दुकानों पर लिखा देखा लेकिन यहां झटका सामने नहीं कटता है, कटकर आता है। मोटे तौर पर मांस की दुकानें हिन्दुओं की होती होंगी काटने वाले मुसलमान ही होते हैं और मैंने कभी कहीं झटका मांस न मिलने या उपलब्ध कराने की जरूरत नहीं सुनी। हां, गोवा में गोमांस की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन जरूर सुना है। ऐसे में सरकार के ऐसे काम प्रचार के लिए पहले पन्ने पर छप रहे हैं जिनका भाजपा की राजनीति के अलावा कोई मतलब नहीं है। और यह तो हुई महाराष्ट्र की बात। गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में तो मुर्गे भी दुकानों पर काटकर बेचने वाले गायब हो गये हैं। राह चलते लोग मुझसे कह चुके हैं कि मुसलमान से क्यों लिया? उससे लीजिये, देखिये मैं उत्ती दूर से लेकर आ रहा हूं। दूसरी ओर, बिरयानी बेचने वालों के बर्तन में मुंह घुसेड़कर, सूंघकर ‘गोमांस’ का पता लगाने वालों के कारण अब बिरयानी भी सड़कों पर या बाजार में आसानी से नहीं मिलती। बाकी कसर सराकरी नियमों ने निकाल दी है। इस कारण मांसाहार भले महंगा हुआ यह महत्वहीन हो गया है कि कौन क्या, बना या बेच रहा है और यह वैसे ही है जैसे गोमांस का निर्यात कौन कर रहा है उससे चंदा कौन ले रहा है।
अमर उजाला में चार कॉलम की एक खबर फरीदाबाद की है। शीर्षक है, बच्चे का अपहरण व हत्या कर सड़क पर फेंका शव, वाहनों ने कुचला। उपशीर्षक है, फिरौती के लिए दिल दहला देने वाली वारदात, फरीदाबाद के पार्क से गिया था अगवा, आरोपी गिरफ्तार। आप आप समझ सकते हैं कि डबल इंजन वाले फरीदाबाद में, राजधानी दिल्ली के बगल में अगर जीना इतना मुश्किल है तो देश दुनिया की क्या हालत होगी या सरकार आपकी कैसी सेवा कर रही है। चौकीदार चोर नहीं है तो क्या है और है भी तो अब आप कुछ नहीं कर सकते हैं। सरकारी प्रचार से बच नहीं सकते हैं और आज दि एशियन एज ने यह काम सबसे बढ़िया से किया है। लीड का शीर्षक है, मोदी ने दुनिया भर (मॉरीशस) में फैले भारतीयों से कहा: मॉरीशस सिर्फ पार्टनर नहीं है, यह परिवार है। मॉरीशस को भारत का परिवार मोदी जी कैसे बना सकते हैं, मैं नहीं समझा। 2014 से पहले वे कहते थे कि उनका परिवार ही नहीं है (बाकी कहानी बाद में मालूम हुई) और अब अदानी पर सवाल के जवाब में वसुधैव कुटुम्बकम के बाद यह क्यों कहना पड़ा मैं नहीं समझ पाया और कहा ही गया तो इतनी बड़ी बात क्यों है कि लीड बन गई मैं नहीं जानता। खबर में बताया गया है कि उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला है। यह हिन्दी के संपादकों-पत्रकारों के बीच पहले चलने वाले, ‘तुम मुझे छापों मैं तुम्हे छापूं’ जैसा मामला लगता है पर मैं उस स्तर पर नहीं जाउंगा। हालांकि, इस तरह की खबरें मैं पढ़ नहीं पाता हूं इसलिए इसपर लिखने के लिए कुछ है भी नहीं।
बने रहने के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट?
आज की खबर द हिन्दू की लीड है। चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करने की वार्ता के लिए चुनाव आयोग ने सभी दलों के प्रमुखों और वरिष्ठ नेताओं को बुलाया है। द हिन्दू ने लिखा है, एक नंबर के दो मतदाता पहचान पत्र को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मंगलवार को सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों और वरिष्ठ नेताओं को “चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाने” के लिए बातचीत के लिए आमंत्रित किया। कल मैंने बनारस की मतदाता सूची का जिक्र किया था और बताया था कि कैसे फर्जी नाम की आशंका वाली सूची के 48 नामों को ईटीवी भारत ने सही होने का सर्टिफिकेट जारी कर चुका है। इस लिहाज से चर्चा तो मीडिया वालों के साथ भी होनी चाहिये लेकिन यह निमंत्रण हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए अच्छा है। आज पाकिस्तान वाली खबर नहीं होती तो संभवतः यही लीड बनती। आप जानते हैं कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति जबरन की गई है और चुनाव करने वाले पैनल के संबंध में फैसला सुप्रीम कोर्ट में होना है। दिल्ली विश्वविद्यालय से लेकर सेबी तक के लिए वकालत करने वाले सोलीसीटर जनरल पिछली तारीख पर उपलब्ध नहीं हुए इसलिए सुनवाई टल गई है और होली के बाद संभवतः इसपर सुनवाई हो। ऐसे में यह बैठक और चुनाव आयोग के कुछ अच्छे काम आयोग को काम करता दिखाने के लिए भी हो सकते हैं पर वह बाद की बात है। जब ऐसा लगेगा तो बताउंगा।
क्रिश्चियन मिशेल के बहाने न्याय व्यवस्था का खुलासा
हिन्दुस्तान टाइम्स में आज एक खबर है, दिल्ली कोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल को जेल से पासपोर्ट के लिए आवेदन करने की अनुमति दी। क्रिश्चियन मिशेल अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे के कथित दलाल हैं और भारत सरकार ने उनका प्रत्यर्पण करवाया था। मामले का क्या हुआ राम जानें, हाल में खबर थी कि उन्हें जमानत मिल गई है। इसके बाद एक खबर से पता चला कि वे जमानत पर जेल से छूटना नहीं चाहते हैं क्योंकि बाहर उन्हें डर है और उन्होंने यह कहा बताते हैं कि वे पूरी सजा (अगर कोई हो) तो काटकर अपने देश जाना चाहेंगे। जाहिर है, किसी विदेशी नागरिक और अभियुक्त के लिए जेल से छूट कर दिल्ली में या कहीं भी रहना जेल में रहने के मुकाबले मुश्किल होगा और उन्होंने यह अपील की होगी। आज पता चला कि जेल में रहते हुए उनके पासपोर्ट की मियाद निकल गई और उसका नवीकरण नहीं हो पाया। ऐसे में किसी के लिए भी परदेश में बिना पासपोर्ट रहना और मुश्किल होगा और जेल में ही रहना पसंद किये जाने का कारण समझा जा सकता है। इसमें कोई दो रहा नहीं है कि भारतीय न्याय व्यवस्था चाहती तो उन्हें स्वदेश जाने की व्यवस्था करती पर आज की खबर से पता चलता है कि, पासपोर्ट जमा करना जमानत की उनकी शर्त है और इस लिहाज से वे जमानत पर छूट ही नहीं सकते हैं। बिना पासपोर्ट वाले किसी भारतीय के मामले में जमानत की यह शर्त दिन में तारे दिखा सकती है। मुझे यह दिलचस्प लग रहा है और भारतीय न्याय व्यवस्था के बारे में मेरा यह मानना सही साबित हो रहा है कि चक्कर में फंस जाना ही सजा है। और जो खुशकिस्मत होते हैं वो विदेश भाग जाते हैं भारत सरकार उनका प्रत्यर्पण नहीं कराती है या करा पा रही है।
एयरटेल और स्टारलिंक के बीच करार के मायने
आज मेरे अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया और द टेलीग्राफ ने एयरटेल और अमेरिकी एलन मस्क के स्टारलिंक के बीच करार की खबर को लीड बनाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का शीर्षक सूचना भर है जबकि टेलीग्राफ ने लिखा है कि ट्रम्प के साथ काम करके उनके करीबी दिख रहे मस्क ने एक कारोबारी करार कर लिया है। भारती एयरटेल ने मंगलवार को भारत में स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए अरबपति एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स के साथ साझेदारी की घोषणा की। इस गठबंधन से भारतीय ब्रॉडबैंड बाजार की रूपरेखा बदलने की संभावना है। इस समय इस पर मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस जियो का दबदबा है। इसके 14 मिलियन से अधिक ऐसे ग्राहक हैं जो तार वाली तकनीक से जुड़े हुए हैं। भारत-अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार सौदे पर चर्चा के साथ इस घोषणा का समय महत्वपूर्ण है। वाशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की मुलाकात के कुछ सप्ताह बाद ही यह खबर आई है। स्पेसएक्स इस उपमहाद्वीप में अपनी उपस्थिति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। स्टारलिंक की लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट इंटरनेट ने भूटान में सेवाएं शुरू कर दी हैं और जल्द ही बांग्लादेश में भी ऐसा होने की उम्मीद है। हालाँकि, भारत में स्पेसएक्स का आसन्न प्रवेश इसका सबसे महत्वपूर्ण कदम है और इससे रिलायंस जियो के साथ बाजार हिस्सेदारी की लड़ाई तेज होने की संभावना है। इसपर वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने लिखा है, मुकेश अंबानी के जिओ ने भी मस्क के साथ स्टारलिंक के ज़रिये इंटरनेट सर्विस की डील कर ली थी। एयरटेल की डील हो ही चुकी है। अब तीन व्यापारी मिलकर भारतीय उपभोक्ता को लूटेंगे, सरकार की देखरेख में। इसके लिए भारत सरकार ने एलन मस्क को स्टारलिंक के लिये बिना नीलामी के स्पेक्ट्रम दिया है। याद कीजिये, 2जी स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर यूपीए सरकार चली गई थी। कितने का घोटाला हो गया था। कैसे हुआ था, किसने बताया था और उसे क्या ईनाम मिला। अब सब नियम कानून ताक पर रख दिये गये हैं। पहले स्पेक्ट्रम की नीलामी में भ्रष्टाचार और राजस्व घाटा को मुद्दा बनाने वाले प्रधानमंत्री अब इसे बांट रहे हैं। इससे पहले प्रशांत टंडन ने लिखा था, मुकेश अंबानी की पार्टी तो अब शुरु हुई है। इसके तहत मोदी सरकार ने अंबानी की स्पेक्ट्रम नीलाम करने की मांग ठुकराकर ट्रंप के करीबी एलन मस्क के स्टार लिंक का रास्ता साफ़ कर दिया। एयरटेल और मस्क के स्पेस एक्स की डील हो चुकी है। मोदी सरकार ने ओएनजीसी की गैस चोरी के मामले में रिलायंस को 24000 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस भेज दिया है। रूस से 13 बिलयन डॉलर की क्रूड ऑयल डील अमेरिका ने फंसा दी है। जामनगर रिफाइनरी के लिये जनवरी से प्रतिदिन 5 लाख बैरल क्रूड आना था अमेरिका ने रूसी कंपनी के तेलवाहकों पर प्रतिबंध लगा दिया। मोदी इस प्रतिबंध को छुड़ा नहीं पा रहे हैं। मुकेश अंबानी ने 2012 में न्यूज़ 18 खरीदा और इसने मोदी के लिए एजेंडा सेट करना शुरु किया। अंबानी के चैनल समाज में सबसे ज़्यादा नफ़रत घोलने का काम करते हैं।


