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किस-किस को कत्ल करोगे केजरीवाल… हिम्मत हो तो अब मयंक गांधी को बाहर निकाल कर दिखाओ…

Yashwant Singh :  किस-किस को कत्ल करोगे केजरीवाल… हिम्मत हो तो अब मयंक गांधी को बाहर निकाल कर दिखाओ… मयंक गांधी ने सारी सच्चाई बयान कर दी है… (पढ़ने के लिए क्लिक करें: http://goo.gl/IY1Bx9 ) …मयंक गांधी ने आम आदमी पार्टी बनने और चलाए जाने के असली विजन को बेहद ईमानदारी से सबके सामने रख दिया है… इसलिए, हे केजरी, 67 सीटें जीत जाने से ये मत सोचो कि सिर्फ केजरीवाल के कारण ये सीटें मिल गई हैं और तुम्हीं सबके बाप हो… कांग्रेस और भाजपा की घटिया व परंपरागत राजनीति से उबे करोड़ों लोगों का तन मन धन लगा, दुआएं मिलीं, आशीर्वाद और प्यार मिला, अलग-अलग किस्म की क्रांतिकारी धाराएं एकजुट हुईं तब जाकर सब मिलाकर आम आदमी पार्टी नामक परिघटना तैयार होती है..

Yashwant Singh :  किस-किस को कत्ल करोगे केजरीवाल… हिम्मत हो तो अब मयंक गांधी को बाहर निकाल कर दिखाओ… मयंक गांधी ने सारी सच्चाई बयान कर दी है… (पढ़ने के लिए क्लिक करें: http://goo.gl/IY1Bx9 ) …मयंक गांधी ने आम आदमी पार्टी बनने और चलाए जाने के असली विजन को बेहद ईमानदारी से सबके सामने रख दिया है… इसलिए, हे केजरी, 67 सीटें जीत जाने से ये मत सोचो कि सिर्फ केजरीवाल के कारण ये सीटें मिल गई हैं और तुम्हीं सबके बाप हो… कांग्रेस और भाजपा की घटिया व परंपरागत राजनीति से उबे करोड़ों लोगों का तन मन धन लगा, दुआएं मिलीं, आशीर्वाद और प्यार मिला, अलग-अलग किस्म की क्रांतिकारी धाराएं एकजुट हुईं तब जाकर सब मिलाकर आम आदमी पार्टी नामक परिघटना तैयार होती है..

ये मत समझना केजरीवाल की तुम्हारी खांसी और तुम्हारे मफलर के कारण 67 सीटें मिलीं. ये सब कुछ एक बड़ी परिघटना का हिस्सा है जिसके तुम भी एक गतिमान पार्ट हो और जिसके योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण भी एक्टिव तत्व हैं. जिस दिन आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक बहसों का गला घोंटे जाने लगा और आलाकमान कल्चर डेवलप हो गया, तो समझ लेना आम आदमी पार्टी की आत्मा मर गई. आम आदमी पार्टी की खासियत ही इसकी इनटरनल डेमोक्रेसी है और विविध किस्म के मन-मस्तिष्क हैं. तभी तो संघी से लेकर कम्युनिस्ट तक ने आम आदमी पार्टी को अंदर खाने सपोर्ट किया और दिल्ली में बीजेपी की बैंड बजा दी. ये सब लोग ‘आप’ के उतने ही बड़े शेयरहोल्डर हैं जितना कोई केजरीवाल या कोई संजय सिंह या कोई आशुतोष.

ये आम लोगों के खून पसीने से बनी पार्टी है जिसमें वैचारिक विविधता हमेशा रहेगी… तुम अगर अपने चंपूओं आशुतोषों, संजय सिंहों, आशीष खेतानों के दम पर इसे दलालों मीडियाकरों अवसरवादियों जी हुजूरियों येस मैनों की पार्टी बना देना चाहते हो तो सुन लो.. तुमसे ये न हो सकेगा… योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को चेलों के जरिए बाहर कराकर तूने अपना हाल देख लिया… पूरा देश तुम पर थूक रहा है…. अब मयंक गांधी ने तेरे गाल पर तमाचा मारा है.. बन तू जारा आलाकमान… सब निकाल लेंगे अपने अपने तीर कमान और तुझे औकात दिखा देंगे… अब भी वक्त है.. अहंकार त्यागो.. मयंक गांधी ने जो कुछ लिखा कहा है, उसे पढ़ो गुनो सुनो… सदबुद्धि आए तो योगेंद्र और प्रशांत से क्षमा मांग लेना, अपनी साजिशों और चिरकुटइयों के लिए..

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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1 Comment

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  1. इंसान

    March 6, 2015 at 12:20 am

    एक प्रश्न मेरे मन में आता है कि यदि किसी का अपनी युवा बीवी से बोलचाल बंद हो जाए तो भला क्या वह अपने पड़ोसी युवक द्वारा बीवी को संदेश भेजेगा? पड़ोसी को पति पत्नी के बीच मन मुटाव से लाभान्वित होने में कोई कौन रोकेगा? वह पड़ोसी फेसबुक ट्वीटर और न जाने कौन कौन विदेशी माध्यम हैं और उन्हें राष्ट्रद्रोहियो ं से…?

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