संजय गिरी-
ऐसे नहीं जाना था Sanjay Shishodia भाई..आ जाओ न वापस…आपको इस दुनिया से जाते हुए देख कर भी पता नहीं क्यों लग रहा है कि आप यहीं, आसपास हो कहीं…पत्रकारिता की शुरुआत से लेकर वर्तमान तक एक अलग तरह का, अनोखा, विश्वास और साथ निभाने वाला रिश्ता रहा संजय भाई से। गुड़गांव में उनके कार्यकाल के दौरान ज्यादा मिलना और एक दूसरे को वक्त देना राह। गजब की जीवटता थी भाई में।

अक्सर गाज़ियाबाद से गुड़गांव साथ आना-जाना, हर बातें एक-दूसरे से साझा करना, चेहरे पर हर वक्त मुस्कुराहट, हट्टे कट्टे शरीर से पिछले दिनों दीवाली से पहले आप मेरे साथ अपने गुड़गांव ऑफ़िस गए तो मैं आपकी सेहत को देखकर अत्यधिक चिंतित था। आपकी जीवटता यहीं से मालूम पड़ती है कि इतनी भीषण बीमारी को झेलते, कष्ट को झेलते रहे पर किसी से इस लिए नहीं बताया कि कोई बेचारगी का अनुभव न कराए। जब भी बात होती तब कहते कि बस थोड़े दिनों में आपका भाई पहले की तरह फिट, चुस्त और तंदुरुस्त मिलेगा।
आँखें नम हैं। लिखने को बहुत कुछ है पर शब्द कम पड़ रहे हैं भाई। आपका यूं चले जाना, झकझोर सा दिया है।
एक बात और आपने अपने जीवन में वो कमाया जो कुछ लोग ही कमा पाते हैं। आपकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों/हजारों लोगों की भीड़ इस बात की गवाही दे रही थी।
आपका यूं चले जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है जिसे शब्दों में बयान कर पाना मुश्किल ही नहीं असंभव है मेरे लिए। ईश्वर आपको श्री चरणों में स्थान और पूरे परिवार (खासकर दोनों बेटियों को जो इस अंतिम यात्रा में हिंडन घाट पर निढाल थीं) को इस कष्ट को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
आपकी कमी…कमी ही रहेगी संजय भाई
संदीप सहगल-
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संजय सिसोदिया जी के निधन की खबर बेहद दुखद है। वे अमर उजाला, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में अपनी सेवाएं दे चुके थे। मात्र 49 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया है¹।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को इस दुख की घड़ी में शक्ति प्रदान करे।

सतेंद्र सिंह-
यह समाचार हृदय को चीर देने वाला है। पत्रकारिता जगत के प्रतिष्ठित और सम्मानित नाम संजय सिसोदिया जी का यूँ अचानक हम सबको छोड़कर चले जाना शब्दों से परे पीड़ा देता है।
उनका सहज, विनम्र, हंसमुख और सभी को जोड़ने वाला स्वभाव—ये सब यादें हमारे दिलों में सदैव अमिट रहेंगी। संजय जी न सिर्फ एक सच्चे पत्रकार थे, बल्कि एक बेहद सौम्य, संवेदनशील और हर किसी की मदद करने वाले इंसान थे।
आज उनका जाना ऐसा लगता है जैसे परिवार का एक महत्वपूर्ण स्तंभ ढह गया हो। उनकी कमी हमेशा महसूस होगी… हमेशा।
ईश्वर संजय जी की पावन आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिवार तथा हम सभी को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति… ऊँ शांति ओम
मूल खबर…
अमर उजाला के न्यूज़ एडिटर डॉ संजय सिसोदिया का पैंक्रियाज़ कैंसर से निधन



